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♊︎ मिथुन और तुला ♎︎

राशि मिलान, उन चार कूटों पर जिनके लिए जन्म समय नहीं चाहिए, दोनों क्रम में।

4 कूटदोनों क्रम मेंजन्म समय नहीं चाहिए
8/15गुण
ठीक-ठाक मेल

मिथुन और तुला के 15 में से 8 राशि गुण मिलते हैं।

राशि वाले कूट बँटे हुए हैं। बात किस ओर जाएगी, यह जन्म समय वाले 21 गुणों पर टिका है।

वर्ण1/1
वश्य2/2
ग्रह मैत्री5/5
भकूट0/7

कूट अष्टकूट गुण मिलान की आठ जाँचों में से एक है, जैसे मुहूर्त चिंतामणि का विवाह प्रकरण इन्हें बताता है। इन चार कूटों के लिए दो राशियाँ काफ़ी हैं, 36 में से 15 गुण। बाक़ी 21 के लिए जन्म समय चाहिए।

सिर्फ़ राशि नहीं, पूरा मिलान जानना है?हमारे प्रेम ज्योतिषी एस्ट्रो माधवी से अपनी दोनों कुंडलियों के बारे में पूछें।
01

आप दोनों के लिए इसका मतलब

चारों कूट एक साथ

वर्ण (स्वभाव और सोच), वश्य (कौन किसकी बात मानता है) और ग्रह मैत्री (मन का मेल) में पूरे गुण। भकूट (प्यार, परिवार और तरक्की) के 7 में से एक भी गुण नहीं मिलता: दोनों चंद्रमा आपस में 5/9 पर हैं, यह भकूट दोष है, पर दोष ख़ुद कट जाता है (नीचे की गिनती में कारण है)। सबसे भारी दो कूट, भकूट और ग्रह मैत्री, अपने 12 में से 5 गुण देते हैं।

यह राशि का हिस्सा है। बाक़ी 21 गुण दोनों के नक्षत्र से आते हैं। इन दो राशियों में दोनों चंद्रमा 81 तरह से पड़ सकते हैं (हर राशि में नौ चरण, यानी नक्षत्र के चौथाई हिस्से)। मिथुन को पहले रखें तो पूरे गुण 36 में से 13 से 28 तक आते हैं। इनमें से 77 जोड़ियों में गुण 18 या ज़्यादा आते हैं, जिसे कुंडली मिलान ठीक मानता है, और 36 जोड़ियों में गुण 24 या ज़्यादा आते हैं, जिसे वह अच्छा मानता है। अगर दोनों के नक्षत्र पता हों, मिथुन को पहले रखकर: सबसे अच्छी जोड़ियाँ पुनर्वसु के साथ स्वाति (28), मृगशिरा के साथ स्वाति (27) और आर्द्रा के साथ स्वाति (26) हैं; सबसे कमज़ोर, मृगशिरा के साथ चित्रा (13), मृगशिरा के साथ विशाखा (19.5) और पुनर्वसु के साथ चित्रा (19.5)।

02

चार कूट

हर कूट में क्या मिला
1
वर्ण1 में से 1 गुण
स्वभाव और सोच
मिथुनशूद्र (सेवा)
तुलाशूद्र (सेवा)

मिथुन का वर्ण तुला के वर्ण के बराबर या उससे ऊपर है, यही इस कूट की शर्त है।

2
वश्य2 में से 2 गुण
कौन किसकी बात मानता है
मिथुनमानव (मनुष्य)
तुलामानव (मनुष्य)

वश्य एक है: आपसी तालमेल सबसे आसान।

5
ग्रह मैत्री5 में से 5 गुण
मन का मेल
स्वामीबुध · शुक्र
दोनों के बीचदोनों ओर से मित्र

पूरे गुण: दोनों की सोच आसानी से मिलती है।

0
भकूट7 में से 0 गुण
प्यार, परिवार और तरक्की
दूरीतुला, मिथुन से पाँचवीं राशि
दोषनव-पंचम (5/9: एक चंद्रमा दूसरे से पाँचवीं या नौवीं राशि में)

दोनों चंद्रमा आपस में 5/9 पर हैं। यह भकूट दोष है, और इसमें सातों गुण कट जाते हैं। दोनों चंद्र राशियों के स्वामी मित्र हैं, इससे दोष कट जाता है। इसलिए दोष नहीं माना जाता, पर गुण पूरे मिलान की तरह 7 में से 0 ही गिने जाते हैं।

कटे 7 गुण किससे जुड़े हैंप्यार, घर-परिवार और तरक्की से जोड़ा जाता है।

03

दोनों के बीच की गिनती

भकूट, 15 में से 7

मिथुन से गिनें तो तुला पाँचवीं राशि है

♊︎1मिथुन♋︎2कर्क♌︎3सिंह♍︎4कन्या♎︎5तुला♏︎6वृश्चिक♐︎7धनु♑︎8मकर♒︎9कुंभ♓︎10मीन♈︎11मेष♉︎12वृषभ

तुला से गिनें तो मिथुन नौवीं राशि है

♎︎1तुला♏︎2वृश्चिक♐︎3धनु♑︎4मकर♒︎5कुंभ♓︎6मीन♈︎7मेष♉︎8वृषभ♊︎9मिथुन♋︎10कर्क♌︎11सिंह♍︎12कन्या

दो राशियों के बीच सात तरह की दूरी हो सकती है; भकूट इनमें से तीन को दोष मानता है:

1/1एक ही राशि2/12दोष3/11शुभ4/10शुभ5/9दोष6/8दोष7/7शुभ

नव-पंचम (5/9: एक चंद्रमा दूसरे से पाँचवीं या नौवीं राशि में) — दोनों चंद्र राशियों के स्वामी मित्र हैं, इससे दोष कट जाता है।

04

दोनों क्रम में

गुण मिलान दोनों ओर एक जैसा नहीं

यह जोड़ी किसी भी क्रम में वही गुण पाती है। ज़्यादातर नहीं पातीं: 144 में से 108 जोड़ियों में क्रम बदलने पर गुण बदल जाते हैं।

कूटमिथुन पहलेतुला पहले
वर्ण1/11/1—
वश्य2/22/2—
ग्रह मैत्री5/55/5—
भकूट0/70/7—
कुल8/158/15वही
05

दो राशियाँ क्या नहीं बता सकतीं

36 में से 21 गुण
तारा3 गुणसाथ में भाग्य और सेहत
योनि4 गुणशारीरिक मेल
गण6 गुणमिज़ाज और आदतें
नाड़ी8 गुणसेहत और संतान

तारा, योनि, गण और नाड़ी, यानी 36 में से 21 गुण, नक्षत्र से देखे जाते हैं: जन्म के समय चंद्रमा की ठीक जगह, जो एक महीने से कम में सभी 27 नक्षत्र पार कर लेता है। दो राशियों से ये नहीं निकलते, और जो पेज सिर्फ़ दो राशियों से “36 गुण” बताता है, वह 21 गुण अपने मन से गढ़ रहा है।

आम सवाल

मिथुन और तुला: 15 में से 8 गुण, क्या यह अच्छा मेल है?

राशि वाले चार कूटों पर यह ठीक-ठाक है। शादी का फ़ैसला तो पूरे 36 गुणों पर होता है। कुंडली मिलान 18 या ज़्यादा को ठीक और 24 या ज़्यादा को अच्छा मानता है, और मिथुन को पहले रखें तो इन दो राशियों के पूरे गुण 13 से 28 तक आते हैं, दोनों के नक्षत्र पर निर्भर।

क्या राशि के कम गुण का मतलब है कि मिथुन और तुला की शादी नहीं होनी चाहिए?

सिर्फ़ इससे तय नहीं होता। राशि से 36 में से 15 गुण आते हैं, और बाक़ी 21 का वज़न इससे ज़्यादा है। इन राशियों में बनने वाली 81 नक्षत्र-जोड़ियों में से 77 जोड़ियों में गुण 18 या ज़्यादा आते हैं, और 36 जोड़ियों में गुण 24 या ज़्यादा आते हैं। गुणों के साथ परिवार दोष भी देखते हैं: यहाँ भकूट दोष बनता है, पर कट जाता है। नाड़ी दोष नक्षत्र से आता है: 81 में से 4 जोड़ियों में दोनों चंद्रमाओं की नाड़ी एक है, और 4 में इसे कुछ नहीं काटता। मंगल दोष हर व्यक्ति की अपनी कुंडली से देखा जाता है। तीनों के लिए दोनों की कुंडली चाहिए।

क्या मिथुन या तुला में कौन पहले है, इससे फ़र्क़ पड़ता है?

इस जोड़ी के लिए नहीं। क्रम से सिर्फ़ वर्ण बदलता है, और मिथुन और तुला का वर्ण एक है (शूद्र (सेवा)), इसलिए दोनों ओर 8 गुण। जिन जोड़ियों के वर्ण अलग हैं, उनमें 1 गुण का फ़र्क़ आता है।

बाक़ी 21 गुण किससे तय होते हैं?

चार कूट नक्षत्र से देखे जाते हैं, यानी जन्म के समय चंद्रमा की ठीक जगह से: तारा (3 गुण, साथ में भाग्य और सेहत), योनि (4, शारीरिक मेल), गण (6, मिज़ाज और आदतें) और नाड़ी (8, सेहत और संतान)। मिथुन और तुला के लिए ये 21 में से 5 से 20 गुण तक आते हैं, दोनों के नक्षत्र पर निर्भर। कुंडली मिलान इन्हें दोनों की कुंडली से पढ़ता है; जन्म समय न हो तो नाम से गुण मिलान हर नाम के पहले अक्षर से इन्हें निकालता है।

सिर्फ़ राशि से 36 में से 15 गुण ही पता चलते हैं।

पूरे 36 गुण और मंगल दोष के लिए दोनों का जन्म समय डालें। कुंडली मिलान मुफ़्त है।

दो कुंडलियाँ मिलाएँ, मुफ़्त

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वैदिक ज्योतिष में प्रशिक्षित 24 AI ज्योतिषी। किसी भी भारतीय भाषा में चैट करें; कॉल हिंदी और अंग्रेज़ी में।एस्ट्रो माधवीरिश्तों कीएस्ट्रो प्रेमप्रेम और रिश्तेएस्ट्रो राधाप्यार और रिश्तों पर सलाहचैट, सेकॉल, सेशुल्क हर मिनट के हिसाब से लगता है, और सिर्फ़ तब तक जब तक चैट या कॉल चालू रहे। जब चाहें बंद करें।

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