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साढ़े साती कैलकुलेटर
क्या आप पर चल रही है, और कब तक

साढ़े साती शनि के साढ़े सात साल हैं: आपकी चंद्र राशि से पहली राशि, आपकी चंद्र राशि और उसके बाद वाली राशि में। जन्म विवरण भरें: यह आपकी चंद्र राशि निकालता है, बताता है कि साढ़े साती चल रही है या नहीं और कब तक, और आपके जीवन की हर साढ़े साती उम्र के साथ बताता है।

क्या मिलेगा
  • आपकी चंद्र राशि, और उस पर अभी साढ़े साती चल रही है या नहीं
  • कौन-सा चरण चल रहा है, और वह और पूरी साढ़े साती ठीक कब ख़त्म होगी
  • आपके जीवन की हर साढ़े साती, हर बार आपकी उम्र के साथ
  • हर चरण क्या लाता है, और शनिवार के उपाय
चंद्र राशि सेहर चरण की तारीख़हर बार आपकी उम्रमुफ़्त उपाय
जन्म तिथि
सोमंबुगुशुशर
जन्म का समयआधे घंटे में भी लग्न बदल सकता है।
:
हम दोपहर 12 बजे का समय मानेंगे। चंद्र राशि लगभग पक्की रहेगी, और अक्सर नक्षत्र भी। लग्न, भाव और उन पर टिकी बातें पक्की नहीं रहेंगी, क्योंकि लग्न लगभग हर दो घंटे में राशि बदलता है, और दशा की तारीख़ें भी खिसक सकती हैं।
सूची में से चुनें — इससे टाइमज़ोन और अक्षांश-देशांतर भी सही लगते हैं।

उदाहरण22 नवंबर 1988, सुबह 10:30 · मुंबई, भारतअपना जन्म विवरण भरें

साढ़े साती चल रही है · पहला चरण

मेष राशि की साढ़े साती
29 मार्च 2025 से 31 मई 2032 तक

शनि अभी मीन में हैं, आपकी चंद्र राशि से ठीक पहले: यह पहला चरण है। इसके बाद शनि आपकी चंद्र राशि के ऊपर आएँगे।

5 साल 7 महीने बाक़ी · 31 मई 2032 को ख़त्म

मेष राशि का साढ़े साती चक्र: शनि मीन में, चंद्र राशि से ठीक पहले, साढ़े साती की तीनों राशियाँ चिह्नितमेष राशि का साढ़े साती चक्र: शनि मीन में, चंद्र राशि से ठीक पहले, साढ़े साती की तीनों राशियाँ चिह्नित

मेष राशि के लिए हर चरण क्या लाता है

मेष के स्वामी मंगल हैं, जिन्हें शनि शत्रु मानते हैं, इसलिए परंपरा मेष के लिए साढ़े साती को ज़्यादातर राशियों से भारी मानती है। भारी का मतलब निराश होना नहीं: यही वह राशि है जिसके लिए नीचे दी गई दिनचर्या और उपाय सबसे ज़्यादा काम के हैं। शनि मेष में नीच के भी होते हैं, इसलिए बीच के चरण के लिए ख़ास तैयारी रखें।

मेष राशि के लिए हर चरण किन बातों को छूता है

मेष से गिनें तो शनि आपके दसवें भाव (काम-काज, पद और बड़ों से व्यवहार) और ग्यारहवें भाव (आमदनी, लाभ और बड़े भाई-बहन) के स्वामी हैं। साढ़े साती के हर चरण में शनि ये बातें साथ लाते हैं।

पहला चरण · शनि मीन में, चंद्र से बारहवें भाव में

  • काम और पैसादसवें भाव और ग्यारहवें भाव के स्वामी होकर शनि इन भावों की बातें आपके बारहवें भाव में ले आते हैं। शनि की दृष्टि (नज़र) छठे भाव (दबाव वाला काम, विरोधी, क़र्ज़ और बीमारी) पर पड़ती है।
  • घर-परिवारशनि की दृष्टि दूसरे भाव (परिवार, जमा-पूँजी और बोलचाल) पर पड़ती है।
  • विवाह और साझेदारीपहले चरण में शनि सातवें भाव में नहीं हैं, उसे देखते नहीं और उसके स्वामी भी नहीं हैं।
  • सेहतऊपर आया छठा भाव रोग का भी है।

शनि की दृष्टि नौवें भाव (पिता, भाग्य, धर्म और लंबी यात्राएँ) पर भी पड़ती है।

दूसरा चरण · शनि मेष में, चंद्र राशि के ऊपर

  • काम और पैसादसवें भाव और ग्यारहवें भाव के स्वामी होकर शनि इन भावों की बातें आपकी चंद्र राशि पर ही ले आते हैं। शनि की दृष्टि दसवें भाव पर पड़ती है।
  • घर-परिवारदूसरे चरण में शनि दूसरे, चौथे और पाँचवें भाव में नहीं हैं, उन्हें देखते नहीं और उनके स्वामी भी नहीं हैं।
  • विवाह और साझेदारीशनि की दृष्टि सातवें भाव (विवाह, साझेदार और कारोबारी लेन-देन) पर पड़ती है।
  • सेहतशनि ख़ुद आपकी चंद्र राशि पर हैं: यह अपनी सेहत, आत्मविश्वास और दूसरों की नज़र में आपकी छवि का भाव है।

शनि की दृष्टि तीसरे भाव (साहस, छोटे भाई-बहन और छोटी यात्राएँ) पर भी पड़ती है।

तीसरा चरण · शनि वृषभ में, चंद्र से दूसरे भाव में

  • काम और पैसादसवें भाव और ग्यारहवें भाव के स्वामी होकर शनि इन भावों की बातें आपके दूसरे भाव में ले आते हैं। शनि की दृष्टि ग्यारहवें भाव पर पड़ती है।
  • घर-परिवारशनि ख़ुद आपके दूसरे भाव में हैं: यह परिवार, जमा-पूँजी और बोलचाल का भाव है। शनि की दृष्टि चौथे भाव (घर, माँ, वाहन, ज़मीन-जायदाद और मन की शांति) पर पड़ती है।
  • विवाह और साझेदारीतीसरे चरण में शनि सातवें भाव में नहीं हैं, उसे देखते नहीं और उसके स्वामी भी नहीं हैं।
  • सेहतशनि की दृष्टि आठवें भाव (सेहत, अचानक की घटनाएँ, छिपी बातें और ससुराल) पर पड़ती है।

तीनों चरण एक नज़र में

1

पहला चरणअभी

29 मार्च 2025 – 23 फ़रवरी 2028

ख़र्च और दूरियाँ

चंद्र से बारहवाँ भाव · शनि मीन में

पैसा तेज़ी से ख़र्च होता है, नींद हल्की होती है, और काम घर से दूर ले जा सकता है।

  • ख़र्च
  • नींद
  • यात्रा
  • त्याग

क्या करेंपुराने कर्ज़ चुकाएँ; बड़ा नया कर्ज़ न लें।

शनि सम राशि में

2

दूसरा चरण

3 जून 2027 – 17 अप्रैल 2030

मन और शरीर

चंद्र के ऊपर · शनि मेष में

ज़िम्मेदारी ज़्यादा, मदद कम, और मन भारी लग सकता है; पर इसी समय टिकाऊ आदतें बनती हैं।

  • मन
  • सेहत
  • ज़िम्मेदारी
  • धैर्य

क्या करेंनींद और दिनचर्या सँभालें; उदास मन से बड़े फ़ैसले न लें।

शनि नीच के: सबसे भारी हिस्सा

3

तीसरा चरण

8 अगस्त 2029 – 31 मई 2032

परिवार और बचत

चंद्र से दूसरा भाव · शनि वृषभ में

दबाव घर पर आता है: पैसे सँभालने पड़ते हैं, और घर में कही बातें दूर तक जाती हैं।

  • परिवार
  • बचत
  • वाणी
  • खान-पान

क्या करेंनियम से बचत करें, और घर में सोचकर बोलें।

शनि मित्र राशि में: सहज

दो चरणों की तारीख़ें एक-दूसरे में क्यों आती हैं: शनि 3 जून 2027 को पहली बार मेष में जाते हैं, कुछ महीनों के लिए मीन में लौटते हैं, और 23 फ़रवरी 2028 को मीन को हमेशा के लिए छोड़ते हैं।

शनि देर करते हैं, इनकार नहीं। तारीख़ें शनि की स्थिति हैं; हर चरण क्या लाता है यह परंपरा की पढ़ाई है, और इसमें से कितना आपका है यह आपकी अपनी कुंडली तय करती है।

साढ़े साती आपके लिए क्या लाएगी?ये तारीख़ें आपकी चंद्र राशि वाले हर व्यक्ति के लिए एक-सी हैं। आचार्य पराशर इन्हें आपकी अपनी कुंडली से पढ़ते हैं: आपका लग्न, आपकी दशा, शनि कहाँ बैठे हैं।

एक ही राशि के दो लोगों की साढ़े साती अलग क्यों होती है

आपकी अपनी कुंडली की चार बातें तय करती हैं कि यह कैसी जाएगी।

आपका लग्नशनि हर कुंडली में दो भावों के स्वामी हैं; वृषभ और तुला लग्न (जन्म के समय पूर्व में उदय होती राशि) के लिए शनि सबसे शुभ ग्रह हैं।
आपकी दशाअच्छी महादशा (चल रही मुख्य दशा) में साढ़े साती हल्की निकलती है; कठिन दशा में आई साढ़े साती भारी पड़ती है और बरसों याद रहती है।
शनि के अंकजिन राशियों से गोचर हो, वहाँ अष्टकवर्ग के पाँच या ज़्यादा बिंदु हों तो आसान; चार हों तो मिला-जुला, कम हों तो भारी।
जन्म के समय शनिजन्म के समय मज़बूत और अच्छी जगह हों तो साढ़े साती में सहारा देते हैं; कमज़ोर हों, या मंगल, राहु, केतु जैसे कठोर ग्रहों से घिरे हों, तो साढ़े साती भारी लगती है।

अपनी कुंडली के लिए पढ़ें

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एक उदाहरण: एक असली कुंडली

उदाहरण के लिए साइट की नमूना कुंडली लें: जन्म 15 जुलाई 1990, दोपहर 2:30 बजे, मुंबई। चंद्र मीन में हैं, इसलिए साढ़े साती 29 अप्रैल 2022 से 17 अप्रैल 2030 तक है, यानी वही तारीख़ें जो हर मीन राशि वाले की हैं। फ़र्क़ इन चार बातों से आता है।

  • लग्नतुला। इससे गिनें तो शनि चौथे और पाँचवें भाव के स्वामी हैं। इनमें एक केंद्र (कुंडली का स्तंभ भाव) है और दूसरा त्रिकोण (भाग्य का भाव), इसलिए जन्म कुंडली रिपोर्ट शनि को इस कुंडली का योगकारक, यानी सबसे शुभ ग्रह, मानती है। इसी चंद्र के साथ कर्क लग्न होता, तो शनि सातवें और आठवें भाव के स्वामी होते।
  • दशाइस साढ़े साती के बाक़ी समय में: चंद्र की महादशा, 15 मई 2026 से 14 मई 2036 तक, जिसे रिपोर्ट सावधानी माँगने वाली दशा मानती है। इस कुंडली में चंद्र छठे भाव में हैं।
  • जन्म के समय शनिधनु में, लग्न से तीसरे भाव में, वक्री (पृथ्वी से देखने पर उल्टी चाल में)। धनु शनि के लिए सम (न मित्र, न शत्रु) राशि है। शनि वर्गोत्तम हैं, यानी नवांश (नौवें हिस्से वाली कुंडली) में भी उसी राशि में, पर षड्बल (छह तरह का बल) में उससे कम हैं जितना रिपोर्ट माँगती है।
  • शनि के बिंदुशनि के अपने अष्टकवर्ग बिंदु: कुंभ में 3 (भारी), मीन में 4 (मिला-जुला) और मेष में 5 (आसान)।

किसी दूसरे मीन राशि वाले की तारीख़ें यही होंगी, पर बाक़ी बातें शायद ही मिलें। इसीलिए तारीख़ें राशि के हर व्यक्ति के लिए एक-सी हैं, पर वे क्या लाती हैं, यह एक-सा नहीं।

साढ़े साती में शनिवार के उपाय

साढ़े साती के वे उपाय जो घरों में पीढ़ियों से किए जाते हैं। मुफ़्त, और हर एक की वजह के साथ।

शनि मंत्र · शनिवार को 108 बार

ॐ शं शनैश्चराय नमः

शनि का छोटा मंत्र, उनके बीज अक्षर “शं” पर बना। हर हफ़्ते बिना नागा इसका जाप करना अपने-आप में वही अनुशासन है जो शनि माँगते हैं।

  • हनुमान चालीसा, मंगलवार और शनिवारकथा है कि शनिदेव ने हनुमान जी को उनके भक्तों को न सताने का वचन दिया था।
  • शनिवार को काले तिल, उड़द या सरसों का तेल दान करेंया किसी मेहनतकश या बुज़ुर्ग की मदद करें: शनि मेहनत और बुढ़ापे के ग्रह हैं।
  • शनिवार शाम पीपल के नीचे दीयापरंपरा में पीपल की पूजा से शनिदेव प्रसन्न माने जाते हैं।
  • वादा निभाएँ, दिनचर्या बनाए रखेंशनि कर्म के कारक हैं: धैर्य और ईमानदारी वाली मेहनत को परंपरा सबसे बड़ा उपाय मानती है।

नीलम साढ़े साती का आम उपाय नहीं है। यह कुछ कुंडलियों के लिए शुभ है और कुछ के लिए हानिकारक, इसलिए अपनी कुंडली दिखाकर ही पहनें।

मीन राशि के लिए ख़ास: आपकी राशि के स्वामी गुरु हैं और वे शनि के प्रति सम हैं, इसलिए गुरु को बल देना साढ़े साती में आपका विवेक स्थिर रखता है: गुरुवार को, जो परंपरा में गुरु का दिन है, बृहस्पति कवच (गुरु की रक्षा-स्तुति) का पाठ करें, या 'ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं सः गुरवे नमः' का 108 बार जप (माला पर मंत्र का दोहराव) करें। उसी दिन किसी शिक्षक को या मंदिर में चने की दाल और हल्दी का दान (श्रद्धा से दी गई भेंट) करें; परंपरा में गुरु के लिए यही दान बताया गया है।

मेष राशि की साढ़े साती के बारे में और

कंटक और अष्टम शनि: जो साढ़े साती नहीं हैं

चंद्र से चौथे भाव में शनि कंटक शनि (दक्षिण में अर्धाष्टम शनि) है, और आठवें में अष्टम शनि: ढैय्या या छोटी पनौती, हर एक लगभग ढाई साल। “शनि चढ़ा है” तीनों के लिए कहा जाता है, और कौन-सा है इससे तारीख़ें पूरी तरह बदल जाती हैं। मेष राशि पर आज इनमें से कोई नहीं चल रहा।

गोचरशनिराशिअभीयह या अगला समय
कंटक शनिचंद्र से चौथाकर्कनहीं13 जुलाई 2034 – 27 अगस्त 2036
अष्टम शनिचंद्र से आठवाँवृश्चिकनहीं11 दिसंबर 2043 – 8 दिसंबर 2046

मेष राशि की ढैय्या: सारी तारीख़ें और हर एक क्या छूती है →

मेष राशि की हर साढ़े साती
  • 1995–2003बीती · 7.8 साल2 जून 1995 – 7 अप्रैल 2003आपकी उम्र 6 से 14 साल
  • 2025–2032अभी · 7.2 साल29 मार्च 2025 – 31 मई 2032आपकी उम्र 36 से 43 साल
  • 2054–2062आगे · 7.8 साल14 मई 2054 – 7 मार्च 2062आपकी उम्र 65 से 73 साल होगी
  • 2084–2091आगे · 7.2 साल20 मार्च 2084 – 21 मई 2091आपकी उम्र 95 से 102 साल होगी

शनि को एक चक्कर में लगभग साढ़े उनतीस साल लगते हैं, इसलिए साढ़े साती लगभग इतने अंतर पर लौटती है: लंबी उम्र में दो या तीन बार।

दूसरी साइट अलग तारीख़ क्यों दिखाती है

ग़लत राशि। साढ़े साती चंद्र राशि से गिनी जाती है, उस सूर्य राशि से नहीं जो ज़्यादातर लोग जानते हैं; बारह में से लगभग एक की दोनों एक होती हैं। अपनी चंद्र राशि जानें।

निरयन, सायन नहीं। वैदिक तारीख़ें निरयन राशिचक्र और लाहिड़ी अयनांश से निकलती हैं, जो भारत सरकार का मानक है। सायन गणना हर तारीख़ को लगभग दो साल खिसका देती है।

ख़त्म होने की दो तारीख़ें। शनि वक्री होकर छोड़ी हुई राशि में लौट आते हैं। यहाँ पहले प्रवेश से आख़िरी निकास तक की पूरी अवधि दी गई है।

हर राशि की साढ़े साती

एक समय में तीन राशियों पर होती है: जिसमें शनि हैं, उससे पिछली और उससे अगली। दो और राशियों पर ढैय्या (कंटक या अष्टम शनि) चलती है, जो साढ़े साती नहीं है; उनके खाने में अगली साढ़े साती के साथ यह भी लिखा है।

इस हिस्से में और: दोष क्या है · मंगल दोष · काल सर्प दोष · मेष राशि पर शनि गोचर 2027

उसी कुंडली से

एक जन्म समय से ये सब

ये सब एक ही कुंडली पढ़ते हैं। यहाँ एक बार जन्म विवरण भर दिया, तो बाक़ी वही सवाल अलग ढंग से पूछे गए हैं।

आम सवाल

6 सवाल
जन्म तिथि से साढ़े साती कैसे निकालते हैं?

जन्म तिथि, समय और जगह से आपकी चंद्र राशि निकलती है। साढ़े साती तब चलती है जब शनि उससे पहली राशि, उसी राशि और उसके बाद वाली राशि से गुज़रते हैं, लगभग साढ़े सात साल, और यहाँ वही तारीख़ें हैं।

साढ़े साती सूर्य राशि से गिनते हैं या चंद्र राशि से?

चंद्र राशि से। ज़्यादातर लोग अपनी सूर्य राशि जानते हैं, और बारह में से लगभग एक व्यक्ति की दोनों एक होती हैं, इसलिए यह पेज पहले आपकी चंद्र राशि निकालता है।

जीवन में साढ़े साती कितनी बार आती है?

शनि को एक चक्कर में लगभग साढ़े उनतीस साल लगते हैं, इसलिए लंबी उम्र में दो या तीन बार। ऊपर "हर साढ़े साती" में आपकी सभी साढ़े सातियाँ आपकी उम्र के साथ हैं।

चरणों की तारीख़ें एक-दूसरे में क्यों आती हैं?

शनि वक्री होकर अभी छोड़ी राशि में लौट आते हैं। तारीख़ें पहले प्रवेश से आख़िरी निकास तक हैं, इसलिए जहाँ शनि लौटते हैं, वहाँ दो चरण कुछ महीने साझा करते हैं।

साढ़े साती का उपाय क्या है?

परंपरा के मुख्य उपाय मुफ़्त हैं: शनिवार को शनि मंत्र, मंगलवार और शनिवार को हनुमान चालीसा, मेहनतकशों और बुज़ुर्गों की सेवा, और पीपल के नीचे सरसों के तेल का दीया। नीलम आम उपाय नहीं है; अपनी कुंडली दिखाकर ही पहनें।

कंटक या अष्टम शनि क्या है?

चंद्र राशि से चौथी या आठवीं राशि में शनि: ढाई साल का दौर, जिसे लोग अक्सर साढ़े साती समझ लेते हैं। जब यह चल रहा हो, तो ऊपर का जवाब बता देता है।

एक जवाब, या पूरी कुंडली।

यह पेज आपकी कुंडली से एक बात निकालता है। कुंडली भी मुफ़्त है, और उसमें बाक़ी सब है।

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आपकी कुंडली से रिपोर्ट

9 विस्तृत रिपोर्ट, जिनमें जन्म कुंडली, कुंडली मिलान और वार्षिक भविष्यवाणी हैं।हिंदी, अंग्रेज़ी और हिंग्लिशरिपोर्ट देखें