आपकी अगली साढ़े साती, चरण दर चरण
तुला के स्वामी शुक्र हैं, जो शनि के मित्र हैं, इसलिए परंपरा तुला को उन राशियों में गिनती है जिनके लिए साढ़े साती हल्की रहती है: धीमी, मेहनत माँगने वाली, पर शायद ही कभी तोड़ने वाली। शनि तुला में उच्च के भी होते हैं, इसलिए बीच का चरण तीनों में सबसे न्यायपूर्ण माना जाता है।
तुला राशि के लिए हर चरण किन बातों को छूता है
तुला से गिनें तो शनि आपके चौथे भाव (घर, माँ, वाहन, ज़मीन-जायदाद और मन की शांति) और पाँचवें भाव (संतान, पढ़ाई और समझ-बूझ) के स्वामी हैं। साढ़े साती के हर चरण में शनि ये बातें साथ लाते हैं। केंद्र और त्रिकोण दोनों के स्वामी होने से तुला से गिनें तो शनि योगकारक हैं, यानी सबसे शुभ फल देने वाले ग्रह।
पहला चरण · शनि कन्या में, चंद्र से बारहवें भाव में
- काम और पैसाशनि की दृष्टि (नज़र) छठे भाव (दबाव वाला काम, विरोधी, क़र्ज़ और बीमारी) पर पड़ती है।
- घर-परिवारचौथे भाव और पाँचवें भाव के स्वामी होकर शनि इन भावों की बातें आपके बारहवें भाव में ले आते हैं। शनि की दृष्टि दूसरे भाव (परिवार, जमा-पूँजी और बोलचाल) पर पड़ती है।
- विवाह और साझेदारीपहले चरण में शनि सातवें भाव में नहीं हैं, उसे देखते नहीं और उसके स्वामी भी नहीं हैं।
- सेहतऊपर आया छठा भाव रोग का भी है।
शनि की दृष्टि नौवें भाव (पिता, भाग्य, धर्म और लंबी यात्राएँ) पर भी पड़ती है।
दूसरा चरण · शनि तुला में, चंद्र राशि के ऊपर
- काम और पैसाशनि की दृष्टि दसवें भाव (काम-काज, पद और बड़ों से व्यवहार) पर पड़ती है।
- घर-परिवारचौथे भाव और पाँचवें भाव के स्वामी होकर शनि इन भावों की बातें आपकी चंद्र राशि पर ही ले आते हैं।
- विवाह और साझेदारीशनि की दृष्टि सातवें भाव (विवाह, साझेदार और कारोबारी लेन-देन) पर पड़ती है।
- सेहतशनि ख़ुद आपकी चंद्र राशि पर हैं: यह अपनी सेहत, आत्मविश्वास और दूसरों की नज़र में आपकी छवि का भाव है।
शनि की दृष्टि तीसरे भाव (साहस, छोटे भाई-बहन और छोटी यात्राएँ) पर भी पड़ती है।
तीसरा चरण · शनि वृश्चिक में, चंद्र से दूसरे भाव में
- काम और पैसाशनि की दृष्टि ग्यारहवें भाव (आमदनी, लाभ और बड़े भाई-बहन) पर पड़ती है।
- घर-परिवारशनि ख़ुद आपके दूसरे भाव में हैं: यह परिवार, जमा-पूँजी और बोलचाल का भाव है। चौथे भाव और पाँचवें भाव के स्वामी होकर शनि इन भावों की बातें आपके दूसरे भाव में ले आते हैं। शनि की दृष्टि चौथे भाव पर पड़ती है।
- विवाह और साझेदारीतीसरे चरण में शनि सातवें भाव में नहीं हैं, उसे देखते नहीं और उसके स्वामी भी नहीं हैं।
- सेहतशनि की दृष्टि आठवें भाव (सेहत, अचानक की घटनाएँ, छिपी बातें और ससुराल) पर पड़ती है।
तीनों चरण एक नज़र में
1पहला चरण
22 अक्टूबर 2038 – 26 सितंबर 2041
ख़र्च और दूरियाँ
चंद्र से बारहवाँ भाव · शनि कन्या में
पैसा तेज़ी से ख़र्च होता है, नींद हल्की होती है, और काम घर से दूर ले जा सकता है।
2दूसरा चरण
28 जनवरी 2041 – 30 अगस्त 2044
मन और शरीर
चंद्र के ऊपर · शनि तुला में
ज़िम्मेदारी ज़्यादा, मदद कम, और मन भारी लग सकता है; पर इसी समय टिकाऊ आदतें बनती हैं।
3तीसरा चरण
11 दिसंबर 2043 – 8 दिसंबर 2046
परिवार और बचत
चंद्र से दूसरा भाव · शनि वृश्चिक में
दबाव घर पर आता है: पैसे सँभालने पड़ते हैं, और घर में कही बातें दूर तक जाती हैं।
दो चरणों की तारीख़ें एक-दूसरे में क्यों आती हैं: शनि 28 जनवरी 2041 को पहली बार तुला में जाते हैं, कुछ महीनों के लिए कन्या में लौटते हैं, और 26 सितंबर 2041 को कन्या को हमेशा के लिए छोड़ते हैं।
शनि देर करते हैं, इनकार नहीं। तारीख़ें शनि की स्थिति हैं; हर चरण क्या लाता है यह परंपरा की पढ़ाई है, और इसमें से कितना आपका है यह आपकी अपनी कुंडली तय करती है।