
राजयोग रिपोर्ट
Rajyog Reportआपकी कुंडली में सभी 47 योग जाँचे गए — कौन-से आपके पास हैं, और कब फल देंगे।
25 पन्नेहिंदी · अंग्रेज़ी · हिंग्लिश
कुंडली में योग
लक्ष्मी-नारायण योग जन्म कुंडली का एक धन योग है। 1960 से 1999 की 8,349 असली जन्म कुंडलियों में से 35.2% में यह बना, यानी लगभग 3 में से एक कुंडली में।
लक्ष्मी-नारायण योग वाली एक असली कुंडली
धन योग
शुक्र बृहस्पति से केंद्र भाव (वही राशि, या चौथी, सातवीं या दसवीं) में हो। शुक्र और बृहस्पति एक ही राशि में हों तो यह सबसे असरदार माना जाता है।
यह बृहत् पाराशर होरा शास्त्र में नहीं है: यह बाद की परंपरा से आया है, इसीलिए ज्योतिषी इसे अलग-अलग वज़न देते हैं।
जैसा कुंडली रिपोर्ट पढ़ती है; योग पूरी कुंडली के साथ तौला जाता है, अकेले कभी नहीं
शुक्र और गुरु एक ही राशि में या एक-दूसरे से केंद्र में — यानी लक्ष्मी और नारायण का मेल, इसीलिए शास्त्र इसे साधन और धर्म के एक साथ आने की तरह पढ़ते हैं, एक दूसरे की क़ीमत पर नहीं। इसे ऐसी संपन्नता से जोड़ा जाता है जिसका हिसाब दिया जा सके।
शर्त पूरी हो जाए तो इंजन इसे नहीं काटता; फिर भी इसका बल इसे बनाने वाले ग्रहों की स्थिति पर निर्भर है।
योग अपना फल ज़्यादातर उन ग्रहों की दशा में देता है जो इसे बनाते हैं। विंशोत्तरी दशा
इंजन को असली जन्म कुंडलियों पर चलाकर गिना गया: 1960 से 1999 तक, हर हफ़्ते चार, चार शहरों में
17 जनवरी 1986, 05:00, जयपुर: वृश्चिक लग्न
यहाँ कैसे बनता है: शुक्र गुरु के साथ एक ही राशि में — इस रिपोर्ट में लक्ष्मी यानी शुक्र और नारायण यानी गुरु; कुछ परंपराओं में नारायण से बुध लिया जाता है
| ग्रह | राशि | भाव |
|---|---|---|
| सूर्य | मकर | तीसरे |
| चंद्र | मीन | पाँचवें |
| मंगल | तुला | बारहवें |
| बुध | धनु | दूसरे |
| गुरु | मकर | तीसरे |
| शुक्र | मकर | तीसरे |
| शनि | वृश्चिक | पहले |
| राहु | मेष | छठे |
| केतु | तुला | बारहवें |
1 जून 1985, 11:00, लखनऊ, सिंह लग्न: शुक्र गुरु से चतुर्थ भाव में — इस रिपोर्ट में लक्ष्मी यानी शुक्र और नारायण यानी गुरु; कुछ परंपराओं में नारायण से बुध लिया जाता है। यहाँ यह मध्यम बनता है, जबकि ऊपर की कुंडली में बलवान।
| ग्रह | राशि | भाव |
|---|---|---|
| सूर्य | वृषभ | दसवें |
| चंद्र | तुला | तीसरे |
| मंगल | मिथुन | ग्यारहवें |
| बुध | वृषभ | दसवें |
| गुरु | मकर | छठे |
| शुक्र | मेष | नौवें |
| शनि | तुला | तीसरे |
| राहु | मेष | नौवें |
| केतु | तुला | तीसरे |
अपनी कुंडली के लिए पढ़ें

आपकी कुंडली में सभी 47 योग जाँचे गए — कौन-से आपके पास हैं, और कब फल देंगे।
25 पन्नेहिंदी · अंग्रेज़ी · हिंग्लिश

आपकी पूरी कुंडली का फल: हर ग्रह, हर भाव और हर योग, दशाएँ तारीख़ों के साथ, और आपके लिए उपाय।
46 पन्नेहिंदी · अंग्रेज़ी · हिंग्लिश
धन योग, जो तब बनता है जब शुक्र बृहस्पति से केंद्र भाव (वही राशि, या चौथी, सातवीं या दसवीं) में हो; पूरा नियम ऊपर है।
1960 से 1999 की 8,349 असली जन्म कुंडलियों में से 35.2% में यह बना।
यह बृहत् पाराशर होरा शास्त्र में नहीं है; यह बाद की परंपरा से है।
कुंडली रिपोर्ट के अनुसार, शुक्र और गुरु एक ही राशि में या एक-दूसरे से केंद्र में — यानी लक्ष्मी और नारायण का मेल, इसीलिए शास्त्र इसे साधन और धर्म के एक साथ आने की तरह पढ़ते हैं, एक दूसरे की क़ीमत पर नहीं; पूरा फल ऊपर है।
मुफ़्त कुंडली इस पेज के हर योग को आपकी जन्म कुंडली पर जाँचती है और बताती है कौन-से बनते हैं और कितने बलवान।
मुफ़्त कुंडली बनाएँ

