नवरात्रि का नौवाँ दिन: सिद्धिदात्री, हवन और कन्या पूजन; अक्सर दुर्गा अष्टमी वाले दिन ही।
महानवमी की तिथि: आश्विन शुक्ल नवमी, यानी आश्विन के शुक्ल पक्ष की नवमी। इसलिए इसकी तारीख़ वह दिन है जिस दिन अपराह्न में यह तिथि चल रही हो। तिथि आधी रात नहीं, किसी भी मिनट पर शुरू और ख़त्म होती है, इसीलिए यही समय दिन तय करता है, और इसीलिए कोई त्योहार दूसरे देश में अलग तारीख़ को पड़ सकता है।
नई दिल्ली के लिए, भारतीय समय में।
महानवमी आश्विन शुक्ल नवमी है, शारदीय नवरात्रि का नौवाँ और आख़िरी दिन, जो माँ के नौवें रूप सिद्धिदात्री को समर्पित है। जो परिवार नवमी को नवरात्रि पूरी करते हैं, वे आज हवन और कन्या पूजन करते हैं, और नौ दिन का पाठ और व्रत पूर्णाहुति के साथ पूरा होता है। इसके अगले दिन विजयादशमी है।
उत्तर भारत के पंचांग महानवमी उस दिन मानते हैं जिस दिन दोपहर तक नवमी चल रही हो। जब अष्टमी दिन में जल्दी ख़त्म हो जाती है, तो अष्टमी और नवमी एक ही तारीख़ को पड़ती हैं, इसलिए उत्तर में दुर्गा अष्टमी और महानवमी अक्सर एक ही दिन मनाई जाती हैं। दक्षिण भारत में यह आयुध पूजा का दिन है, जब औज़ार, वाहन और यंत्र साफ़ करके पूजे जाते हैं, क्योंकि इन्हीं से घर की रोज़ी चलती है।
स्नान के बाद कलश के पास सिद्धिदात्री की रोली, अक्षत, फूल, चुनरी और भोग से पूजा करें।
अगर नौ दिन से दुर्गा सप्तशती पढ़ रहे हैं तो आज उसे पूरा करें, फिर आरती करें।
अग्नि में हवन सामग्री और घी की आहुतियाँ दें, और सूखे नारियल की पूर्णाहुति से हवन पूरा करें।
अगर आपके घर में नवमी को नवरात्रि पूरी होती है, तो कन्याओं को बुलाएँ, पैर धोएँ, तिलक लगाएँ, हलवा, पूरी, काले चने खिलाएँ और हर एक को छोटा उपहार दें।
हवन और कन्या पूजन के बाद व्रत खोलें; कुछ परिवार पारण दशमी को करते हैं।
जहाँ आयुध पूजा होती है, वहाँ घर के औज़ार, वाहन और यंत्र साफ़ करके उन पर हल्दी-कुमकुम लगाएँ और फूल चढ़ाएँ।
स्रोत: देवी माहात्म्य (मार्कण्डेय पुराण), शुंभ-निशुंभ वध की कथा
असुर भाई शुंभ और निशुंभ ने देवताओं से तीनों लोक छीन लिए थे। देवताओं ने हिमालय पर जाकर देवी की स्तुति की, और देवी प्रकट हुईं। शुंभ के सेवकों ने उन्हें देखा तो शुंभ ने उनसे विवाह का प्रस्ताव भेजा। देवी ने उत्तर दिया कि उन्होंने प्रण लिया है, वे उसी से विवाह करेंगी जो उन्हें युद्ध में हरा दे।
एक-एक करके उसके सेनापति मारे गए: धूम्रलोचन, फिर चंड और मुंड, फिर रक्तबीज, जिसके ख़ून की हर बूँद से नया असुर पैदा होता था, जब तक काली ने उसका ख़ून ज़मीन पर गिरने से पहले ही पी नहीं लिया। फिर निशुंभ का वध हुआ।
शुंभ ने ताना मारा कि तुम दूसरों के बल पर लड़ती हो। देवी ने कहा कि इस संसार में केवल वही हैं, और उनके साथ लड़ने वाली सारी देवियाँ उन्हीं में समा गईं। फिर देवी ने अकेले शुंभ से युद्ध करके उसका वध किया, और देवताओं ने नारायणी स्तुति से उनका गुणगान किया; लोकों में फिर से शांति लौट आई।
क्या करें
क्या न करें
कर्नाटक, तमिलनाडु, केरल और आंध्र प्रदेश में नवमी आयुध पूजा का दिन है, और किताबों व वाद्यों के साथ सरस्वती की पूजा होती है; केरल में किताबें पूजा में रखी जाती हैं और विजयादशमी को उठाई जाती हैं, जिस दिन छोटे बच्चों को पहली बार अक्षर लिखना सिखाया जाता है। मैसूर में यह दशहरे की महानवमी है। बंगाल में महानवमी दुर्गा पूजा का आख़िरी पूरा दिन है, जिसमें नवमी का होम होता है।
शुक्ल पक्ष होने से अमांत और पूर्णिमांत दोनों पंचांग इसे आश्विन ही कहते हैं। तारीख़ इसलिए बदलती है कि नवमी हर जगह दोपहर के हिसाब से देखी जाती है: उत्तर के पंचांग इसे अक्सर दुर्गा अष्टमी वाले दिन ही रखते हैं, जबकि बंगाल की पंजिकाएँ अपने नियमों से महानवमी अगले दिन भी रख सकती हैं।
2027 में महानवमी नई दिल्ली में शुक्रवार, 8 अक्टूबर 2027 को है। अपनी तारीख़ और समय के लिए ऊपर अपना शहर चुनें।
भारतीय समय में नवमी 8 अक्टूबर, सुबह 6:28 को शुरू होकर 9 अक्टूबर, सुबह 9:02 को ख़त्म होगी। महानवमी का दिन वह है जिस दिन दोपहर बाद (अपराह्न) में नवमी हो। इसीलिए यह 8 अक्टूबर को है।
नई दिल्ली में सोमवार, 19 अक्टूबर 2026।
नई दिल्ली में मंगलवार, 26 सितंबर 2028।
महानवमी का दिन वह है जिस दिन अपराह्न में उसकी तिथि, नवमी, चल रही हो। तिथि पूरी दुनिया में एक ही क्षण शुरू और ख़त्म होती है, पर अपराह्न हर जगह अपने समय पर होता है, इसलिए अमेरिका या ब्रिटेन में वह दिन भारत से एक दिन पहले पड़ सकता है। ऊपर के बॉक्स में अपना शहर चुनें, इस पेज की हर तारीख़ और समय उसके लिए निकाला जाएगा।
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