पूर्णिमा श्राद्ध से सर्व पितृ अमावस्या तक, पितरों के श्राद्ध का पखवाड़ा।
पितृ पक्ष उत्तर भारत में आश्विन का कृष्ण पक्ष है (अमांत कैलेंडर में भाद्रपद), उससे पहले की पूर्णिमा के साथ: यह पूर्णिमा श्राद्ध से शुरू होकर सर्व पितृ अमावस्या पर ख़त्म होता है। हर दिन का श्राद्ध वह तिथि है जो अपराह्न में हो, क्योंकि श्राद्ध उसी समय होता है; इसलिए कोई तिथि दो दिन ले सकती है या किसी दिन नहीं, और पखवाड़ा हमेशा पंद्रह दिन का नहीं होता। कुछ कैलेंडर इसकी शुरुआत अगले दिन, प्रतिपदा से गिनते हैं।
नई दिल्ली के लिए, भारतीय समय में।
पितृ पक्ष एक दिन का त्योहार नहीं, बल्कि पितरों के लिए रखा गया पूरा पखवाड़ा है। यह भाद्रपद पूर्णिमा के पूर्णिमा श्राद्ध से शुरू होकर आश्विन कृष्ण पक्ष से होते हुए सर्व पितृ अमावस्या, जिसे महालया अमावस्या भी कहते हैं, पर पूरा होता है। हर परिवार अपने माता-पिता या पूर्वजों का श्राद्ध उनकी मृत्यु की तिथि पर करता है, जो दोपहर के हिसाब से देखी जाती है, और जिनकी तिथि पता न हो उनका श्राद्ध अमावस्या को होता है।
श्राद्ध शब्द श्रद्धा से बना है: जो श्रद्धा से अर्पित किया जाए, वह पितरों तक पहुँचता है, ऐसा माना जाता है। परंपरा मानती है कि इस पखवाड़े में पितर अपने वंशजों के पास आते हैं, और परिवार तर्पण (तिल मिला जल), पिंडदान और ब्राह्मण भोजन से उन्हें याद करते हैं। गरुड़ पुराण उन ग्रंथों में है जिनमें श्राद्ध का वर्णन है, और फल्गु नदी के किनारे बसा नगर गया पिंडदान का सबसे बड़ा स्थान माना जाता है।
जिस तिथि को माता-पिता या पूर्वज का देहांत हुआ, वह तिथि जानें; इस पखवाड़े में उसी तिथि को उनका श्राद्ध होता है। तिथि पता न हो तो सर्व पितृ अमावस्या को करें।
स्नान करके साफ़ कपड़े पहनें और घर पर श्राद्ध का भोजन बनाएँ। श्राद्ध अपराह्न में होता है, और दोपहर का कुतुप मुहूर्त सबसे अच्छा माना जाता है।
दक्षिण की ओर मुँह करके, जनेऊ पहनते हों तो उसे दाएँ कंधे पर करके, कुश के साथ काले तिल मिला जल अंगूठे और तर्जनी के बीच से अर्पित करें, और हर पूर्वज का नाम लें।
पके चावल या जौ के आटे में तिल और घी मिलाकर पिंड बनाएँ और कुश पर रखकर अर्पित करें।
किसी के खाने से पहले भोजन में से गाय, कुत्ते, कौए, चींटियों और देवताओं का हिस्सा निकालें।
एक या अधिक ब्राह्मणों को आदर से भोजन कराएँ, और दक्षिणा व हो सके तो वस्त्र दें।
इसके बाद परिवार श्राद्ध के प्रसाद के रूप में भोजन करता है।
स्रोत: महाभारत से जुड़ी लोक परंपरा; महाकाव्य के मूल पाठ में यह इस रूप में नहीं मिलती
सूर्य और कुंती के पुत्र कर्ण, जिन्हें सारथी अधिरथ ने पाला था, जीवन भर बड़े दानी के रूप में जाने गए, जिन्होंने माँगने वाले को कभी ख़ाली नहीं लौटाया। कुरुक्षेत्र के युद्ध में मृत्यु के बाद जब वे परलोक पहुँचे, तो उन्हें भोजन की जगह खाने को सोना और रत्न दिए गए।
हैरान होकर उन्होंने इंद्र से इसका कारण पूछा। इंद्र ने बताया कि तुमने जीवन भर सोना दान किया, पर अपने पितरों को कभी अन्न-जल अर्पित नहीं किया, इसलिए तुम्हें सोना ही मिल रहा है। कर्ण ने कहा कि उन्हें पता ही नहीं था कि उनके पूर्वज कौन हैं, क्योंकि जीवन के आख़िर में ही उन्हें मालूम हुआ कि वे कुंती के पुत्र हैं।
तब इंद्र ने उन्हें एक पखवाड़े के लिए धरती पर लौटने की अनुमति दी। कर्ण लौटे, तर्पण और श्राद्ध करके पितरों को अन्न-जल अर्पित किया, और फिर वापस गए। कथा कहती है कि वही पखवाड़ा तब से पितृ पक्ष के रूप में मनाया जाता है।
क्या करें
क्या न करें
बंगाल में पखवाड़े के अंत की अमावस्या, महालया, देवी पक्ष की शुरुआत भी है, जब दुर्गा पूजा के लिए देवी का आवाहन होता है। महाराष्ट्र और दक्षिण में इस पखवाड़े को अक्सर महालय पक्ष कहते हैं। गुजरात, महाराष्ट्र और दक्षिण के अमांत पंचांग में यही पखवाड़ा भाद्रपद कृष्ण पक्ष है, क्योंकि वहाँ महीना अमावस्या पर ख़त्म होता है; उत्तर के पूर्णिमांत पंचांग में यह आश्विन कृष्ण पक्ष है। दिन वही हैं, केवल महीने का नाम अलग है।
हर श्राद्ध उस दिन होता है जिस दिन अपराह्न में उसकी तिथि हो, और यह हर जगह के हिसाब से देखा जाता है। कोई तिथि क्षय हो सकती है या दो अपराह्न तक रह सकती है, इसलिए कभी दो श्राद्ध एक ही तारीख़ को पड़ते हैं, और पखवाड़ा पंद्रह से सत्रह दिन का हो सकता है। इसी कारण किसी परिवार के श्राद्ध की तारीख़ शहर-शहर, या भारत और विदेश में, एक दिन आगे-पीछे हो सकती है।
नई दिल्ली में 2027 का पितृ पक्ष बुधवार, 15 सितंबर (पूर्णिमा श्राद्ध) से बुधवार, 29 सितंबर (सर्व पितृ अमावस्या) तक है।
बुधवार, 29 सितंबर 2027: पितृ पक्ष का आख़िरी दिन, जब सभी पितरों का श्राद्ध होता है, उनका भी जिनकी तिथि मालूम न हो।
नई दिल्ली में शनिवार, 26 सितंबर 2026 से शनिवार, 10 अक्टूबर तक।
नई दिल्ली में रविवार, 3 सितंबर 2028 से सोमवार, 18 सितंबर तक।
हर दिन का श्राद्ध वह तिथि है जो अपराह्न में हो। तिथि पूरी दुनिया में एक ही क्षण शुरू और ख़त्म होती है, पर अपराह्न हर जगह अपने समय पर होता है, इसलिए अमेरिका या ब्रिटेन में वह दिन भारत से एक दिन पहले पड़ सकता है। ऊपर के बॉक्स में अपना शहर चुनें, इस पेज की हर तारीख़ और समय उसके लिए निकाला जाएगा।
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