गोचर
केतु पूरे 2027 कर्क राशि में रहते हैं: 5 दिसंबर 2026 को आए और 24 जून 2028, रात 1:30 पर आगे बढ़ते हैं। केतु सबसे लंबे समय तक शुभ भाव में रहते हैं वृषभ, कन्या, तुला और कुंभ राशि वालों के लिए (2027 के 365 दिन)।
निरयण (लाहिरी) राशियाँ; समय भारत का (IST)
| राशि | प्रवेश | निकलते हैं | वहाँ बल |
|---|---|---|---|
| कर्क | 5 दिसंबर 2026, रात 10:32 | 24 जून 2028, रात 1:30 | — |
केतु हमेशा राशियों में उल्टी चाल से चलते हैं (सदा वक्री), इसलिए उनका कोई अलग वक्री काल नहीं होता।
हर चंद्र राशि से यह किस भाव में है, और वह दौर कैसा है
| चंद्र राशि | 2027 में चंद्र से भाव |
|---|---|
| मेष | चौथा |
| वृषभ | तीसरा |
| मिथुन | दूसरा |
| कर्क | पहला |
| सिंह | बारहवाँ |
| कन्या | ग्यारहवाँ |
| तुला | दसवाँ |
| वृश्चिक | नौवाँ |
| धनु | आठवाँ |
| मकर | सातवाँ |
| कुंभ | छठा |
| मीन | पाँचवाँ |
हरा शुभ दौर है, पीला मिला-जुला, लाल कठिन। तारीख़ें, वेध और उपाय के लिए अपनी राशि खोलें।
फलदीपिका, अध्याय 26, केतु के गोचर पर
फलदीपिका केतु के गोचर का भाव-दर-भाव श्लोक नहीं देती। वह राहु और केतु को सूर्य के समान बताती है (26.2), जिससे चंद्र से तीसरे, छठे, दसवें और ग्यारहवें भाव केतु के शुभ भाव हैं; बाक़ी आठ भावों में सावधानी चाहिए।
फलदीपिका कहती है कि अशुभ भाव से गुज़रता ग्रह उस समय अपनी उच्च या स्वराशि में हो तो हानि नहीं करता, और शुभ भाव में भी हो तो पूरा शुभ फल देता है। वही ग्रह शुभ भाव से गुज़रते समय नीच, शत्रु राशि में या ग्रस्त हो तो कुछ फल नहीं देता; और यदि भाव भी अशुभ हो तो अपना अशुभ फल और तीव्रता से देता है। (26.31, 26.32)
केतु के कठिन दौर के लिए, अपनी श्रद्धा के अनुसार
ॐ केतवे नमः
मंगलवार को 108 बार, और कंबल और तिल का दान। केतु मोह छुड़ाते हैं और कभी-कभी अस्थिर करते हैं; जाप शांति और एकाग्रता के लिए किया जाता है।
केतु पूरे साल कर्क में रहते हैं।
शुभ भाव में दिनों वाली हर राशि: वृषभ (365 दिन), कन्या (365 दिन), तुला (365 दिन), कुंभ (365 दिन)।
सामान्य अर्थ में नहीं: केतु हमेशा उल्टी चाल चलते हैं, इसलिए उनका अलग वक्री काल नहीं होता।
आज हर ग्रह आपके चंद्र और लग्न से कहाँ है, वेध और अष्टकवर्ग के साथ।
गोचर कुंडली

