2028 के अंत तक मंगल कब-कब वक्री और मार्गी होंगे, किस राशि में, और उस समय के लिए परंपरा के उपाय।
मंगल 10 जनवरी 2027 को सिंह में वक्री होंगे, और 1 अप्रैल 2027 को फिर मार्गी होंगे, यानी सीधी चाल चलने लगेंगे। 2026 से 2028 के अंत तक मंगल बस इसी एक बार वक्री होंगे।
| वक्री | मार्गी | राशि | अवधि |
|---|---|---|---|
| 10 जनवरी 2027 | 1 अप्रैल 2027 | सिंह से वापस कर्क | 81 दिन |
तारीख़ें भारतीय समय में, पंचांग की गणना से हैं: ये वे दिन हैं जब ग्रह रुककर उल्टा या फिर सीधा चलने लगते हैं। हर तारीख़ के आगे-पीछे कुछ दिन ग्रह धीमे चलते हैं।
10 जनवरी 2027 से सिंह में मंगल के वक्री रहते: फलदीपिका इनके गोचर को मिथुन, तुला और मीन चंद्र राशि के लिए शुभ मानती है, और मेष, वृषभ, कर्क, सिंह, कन्या, वृश्चिक, धनु, मकर और कुंभ चंद्र राशि के लिए सावधानी माँगती है।
दशा में पराशर ग्रह के फल का समय उनके द्रेष्काण (राशि का तीसरा भाग) से बताते हैं: पहले द्रेष्काण का फल दशा के आरंभ में, दूसरे का मध्य में और तीसरे का अंत में। ग्रह वक्री हों तो यह क्रम उलट जाता है। राहु और केतु सदा वक्री रहते हैं, इसलिए उनका फल सदा उलटे क्रम में मिलता है। बृहत् पाराशर होरा शास्त्र 47.3–4
ग्रह उन भावों के ज़रिए फल देते हैं जिनके वे स्वामी हैं और जिस भाव में बैठे हैं, और वक्री ग्रह बलवान माने जाते हैं। इसलिए वक्री मंगल उन बातों को सामने लाते हैं जो आपके लग्न के लिए इनके अपने भावों की हैं, और उस भाव की जिसमें ये वक्री होकर लौटते हैं। तालिका दोनों बताती है, उस राशि के लिए जिसमें ये वक्री होंगे।
| लग्न | किन भावों के स्वामी | इस लग्न के लिए | सिंह में वक्री, 10 जनवरी 2027 से |
|---|---|---|---|
| मेष | पहले और आठवें भाव | शुभ | आपका पाँचवाँ भाव (संतान) |
| वृषभ | सातवें और बारहवें भाव | मारक | आपका चौथा भाव (माता) |
| मिथुन | छठे और ग्यारहवें भाव | अशुभ | आपका तीसरा भाव (छोटे भाई-बहन) |
| कर्क | पाँचवें और दसवें भाव | योगकारक | आपका दूसरा भाव (जमा धन) |
| सिंह | चौथे और नौवें भाव | योगकारक | आपका पहला भाव (आप ख़ुद) |
| कन्या | तीसरे और आठवें भाव | अशुभ | आपका बारहवाँ भाव (ख़र्च) |
| तुला | दूसरे और सातवें भाव | अशुभ · मारक | आपका ग्यारहवाँ भाव (आमदनी) |
| वृश्चिक | पहले और छठे भाव | तटस्थ | आपका दसवाँ भाव (करियर) |
| धनु | पाँचवें और बारहवें भाव | शुभ | आपका नौवाँ भाव (भाग्य) |
| मकर | चौथे और ग्यारहवें भाव | अशुभ · मारक | आपका आठवाँ भाव (आयु) |
| कुंभ | तीसरे और दसवें भाव | अशुभ · मारक | आपका सातवाँ भाव (शादी) |
| मीन | दूसरे और नौवें भाव | शुभ | आपका छठा भाव (रोग) |
तालिका के नाम, बृहत् पाराशर होरा शास्त्र, अध्याय 34 से:
आज कई ज्योतिषी वक्री मंगल को ऐसे पढ़ते हैं; यह आधुनिक पढ़त है, शास्त्रों की नहीं। मंत्र, दान और लाल किताब के उपाय परंपरा के हैं। आपकी कुंडली में मंगल कहाँ हैं, इससे तय होता है कि यह समय आप पर कितना असर डालेगा।
10 जनवरी 2027 से 1 अप्रैल 2027 तक, सिंह से वापस कर्क में।
वक्री ग्रह पृथ्वी से देखने पर उल्टी दिशा में चलता दिखता है। शास्त्र वक्री मंगल को कमज़ोर नहीं, बलवान मानते हैं: उन्हें चेष्टा बल, यानी गति का बल, मिलता है (फलदीपिका 4.4, बृहत् पाराशर होरा शास्त्र 27.21–23)।
आपकी कुंडली में हर ग्रह कहाँ बैठे हैं, आपके लग्न के लिए किन भावों के स्वामी हैं और कौन-सी दशा चल रही है, इसी से तय होता है कि वे आपके लिए क्या करेंगे। सभी नौ ग्रह देखने के लिए अपनी मुफ़्त कुंडली बनाएँ।
मुफ़्त कुंडली बनाएँ

