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शुक्र

शुक्र वक्री 2026–28
वक्री और मार्गी होने की तारीख़ें

2028 के अंत तक शुक्र कब-कब वक्री और मार्गी होंगे, किस राशि में, और उस समय के लिए परंपरा के उपाय।

2 बार

शुक्र 3 अक्टूबर 2026 से तुला में वक्री हैं और 14 नवंबर 2026 को मार्गी होंगे, यानी सीधी चाल चलने लगेंगे।

वक्रीमार्गीराशिअवधि
3 अक्टूबर 202614 नवंबर 2026तुला से वापस कन्या42 दिन
11 मई 202823 जून 2028वृषभ43 दिन

तारीख़ें भारतीय समय में, पंचांग की गणना से हैं: ये वे दिन हैं जब ग्रह रुककर उल्टा या फिर सीधा चलने लगते हैं। हर तारीख़ के आगे-पीछे कुछ दिन ग्रह धीमे चलते हैं।

इस बीच आपकी चंद्र राशि से

हर अवधि में चंद्र से शुक्र का गोचर

3 अक्टूबर 2026 से तुला में शुक्र के वक्री रहते: फलदीपिका इनके गोचर को मिथुन, कर्क, सिंह, कन्या, तुला, वृश्चिक, धनु, कुंभ और मीन चंद्र राशि के लिए शुभ मानती है, और मेष, वृषभ और मकर चंद्र राशि के लिए सावधानी माँगती है।

11 मई 2028 से वृषभ में शुक्र के वक्री रहते: फलदीपिका इनके गोचर को मेष, वृषभ, मिथुन, कर्क, कन्या, तुला, मकर, कुंभ और मीन चंद्र राशि के लिए शुभ मानती है, और सिंह, वृश्चिक और धनु चंद्र राशि के लिए सावधानी माँगती है।

गोचर में शुक्र, चंद्र से हर भाव में

वक्री ग्रह की दशा

पाँचों के बारे में पराशर एक साथ क्या कहते हैं

दशा में पराशर ग्रह के फल का समय उनके द्रेष्काण (राशि का तीसरा भाग) से बताते हैं: पहले द्रेष्काण का फल दशा के आरंभ में, दूसरे का मध्य में और तीसरे का अंत में। ग्रह वक्री हों तो यह क्रम उलट जाता है। राहु और केतु सदा वक्री रहते हैं, इसलिए उनका फल सदा उलटे क्रम में मिलता है। बृहत् पाराशर होरा शास्त्र 47.3–4

वक्री शुक्र आपकी कुंडली में कहाँ पड़ते हैं

आपके लग्न से: ये किन भावों के स्वामी हैं, और किस भाव में वक्री होते हैं

ग्रह उन भावों के ज़रिए फल देते हैं जिनके वे स्वामी हैं और जिस भाव में बैठे हैं, और वक्री ग्रह बलवान माने जाते हैं। इसलिए वक्री शुक्र उन बातों को सामने लाते हैं जो आपके लग्न के लिए इनके अपने भावों की हैं, और उस भाव की जिसमें ये वक्री होकर लौटते हैं। तालिका दोनों बताती है, आगे की उन 2 राशियों के लिए जिनमें ये वक्री होंगे।

लग्नकिन भावों के स्वामीइस लग्न के लिएतुला में वक्री, 3 अक्टूबर 2026 सेवृषभ में वक्री, 11 मई 2028 से
मेषदूसरे और सातवें भावअशुभ · मारकआपका सातवाँ भाव (शादी)आपका दूसरा भाव (जमा धन)
वृषभपहले और छठे भावअशुभ · मारकआपका छठा भाव (रोग)आपका पहला भाव (आप ख़ुद)
मिथुनपाँचवें और बारहवें भावशुभआपका पाँचवाँ भाव (संतान)आपका बारहवाँ भाव (ख़र्च)
कर्कचौथे और ग्यारहवें भावअशुभआपका चौथा भाव (माता)आपका ग्यारहवाँ भाव (आमदनी)
सिंहतीसरे और दसवें भावअशुभआपका तीसरा भाव (छोटे भाई-बहन)आपका दसवाँ भाव (करियर)
कन्यादूसरे और नौवें भावशुभ · मारकआपका दूसरा भाव (जमा धन)आपका नौवाँ भाव (भाग्य)
तुलापहले और आठवें भावतटस्थआपका पहला भाव (आप ख़ुद)आपका आठवाँ भाव (आयु)
वृश्चिकसातवें और बारहवें भावअशुभ · मारकआपका बारहवाँ भाव (ख़र्च)आपका सातवाँ भाव (शादी)
धनुछठे और ग्यारहवें भावअशुभ · मारकआपका ग्यारहवाँ भाव (आमदनी)आपका छठा भाव (रोग)
मकरपाँचवें और दसवें भावयोगकारकआपका दसवाँ भाव (करियर)आपका पाँचवाँ भाव (संतान)
कुंभचौथे और नौवें भावयोगकारकआपका नौवाँ भाव (भाग्य)आपका चौथा भाव (माता)
मीनतीसरे और आठवें भावअशुभआपका आठवाँ भाव (आयु)आपका तीसरा भाव (छोटे भाई-बहन)

तालिका के नाम, बृहत् पाराशर होरा शास्त्र, अध्याय 34 से:

  • योगकारक: लग्न के सबसे शुभ ग्रह: जिन्हें पराशर योग देने वाले बताते हैं, या जो एक साथ केंद्र (पहले, चौथे, सातवें, दसवें) और त्रिकोण (पहले, पाँचवें, नौवें) भाव के स्वामी हों (34.13)
  • शुभ, अशुभ, तटस्थ: लग्न के पक्ष में; कठिन बातें लाने वाले; दोनों में से कोई नहीं
  • लग्नेश: लग्न के अपने स्वामी, जहाँ श्लोक इन्हें शुभ या अशुभ नहीं कहता
  • मारक: जिन्हें पराशर उस लग्न के लिए आयु और सेहत पर भारी बताते हैं; अकेले, या किसी और नाम के बाद लिखे जाते हैं। ये हमेशा दूसरे या सातवें भाव के स्वामी नहीं होते: जहाँ अलग हों, नीचे की पंक्ति श्लोक बताती है
  • · योग: उन दो ग्रहों में से एक जो इस लग्न के लिए साथ मिलकर योग देते हैं

आज के ज्योतिषी वक्री शुक्र को कैसे पढ़ते हैं

आधुनिक पढ़त, ऊपर के शास्त्रीय मत के साथ
आजकल इसे इन बातों से जोड़ा जाता हैपुराने रिश्तों का लौट आना और प्रेम में उलझन
मंत्रॐ शुक्राय नमः
दानस्त्रियों को सफ़ेद चीज़ों का दान करें
क्या करेंपुराने झगड़े सुलझाएँ, और प्रेम में नए वादे कुछ समय टालें
लाल किताबचाँदी की चीज़ें पास रखें, चावल दान करें

आज कई ज्योतिषी वक्री शुक्र को ऐसे पढ़ते हैं; यह आधुनिक पढ़त है, शास्त्रों की नहीं। मंत्र, दान और लाल किताब के उपाय परंपरा के हैं। आपकी कुंडली में शुक्र कहाँ हैं, इससे तय होता है कि यह समय आप पर कितना असर डालेगा।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

3 सवाल
2026 में शुक्र कब वक्री होंगे?

3 अक्टूबर 2026 से 14 नवंबर 2026 तक, तुला से वापस कन्या में।

2028 में शुक्र कब वक्री होंगे?

11 मई 2028 से 23 जून 2028 तक, वृषभ में।

वक्री शुक्र का क्या मतलब है?

वक्री ग्रह पृथ्वी से देखने पर उल्टी दिशा में चलता दिखता है। शास्त्र वक्री शुक्र को कमज़ोर नहीं, बलवान मानते हैं: उन्हें चेष्टा बल, यानी गति का बल, मिलता है (फलदीपिका 4.4, बृहत् पाराशर होरा शास्त्र 27.21–23)।

ग्रह का अर्थ सबके लिए एक है, पर आपकी कुंडली सिर्फ़ आपकी है।

आपकी कुंडली में हर ग्रह कहाँ बैठे हैं, आपके लग्न के लिए किन भावों के स्वामी हैं और कौन-सी दशा चल रही है, इसी से तय होता है कि वे आपके लिए क्या करेंगे। सभी नौ ग्रह देखने के लिए अपनी मुफ़्त कुंडली बनाएँ।

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