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नई दिल्ली · 2026, 2027, 2028

चित्रगुप्त पूजा 2026
11 नवंबर 2026

यम द्वितीया पर कलम-दवात की पूजा, कर्मों का लेखा रखने वाले चित्रगुप्त जी के लिए।

बुधवार
चित्रगुप्त पूजा 2026 · नई दिल्लीबुधवार, 11 नवंबर
कैसे तय होता है
उसी दिन, भाई दूज
चित्रगुप्त पूजा 2027 · नई दिल्लीरविवार, 31 अक्टूबर
कैसे तय होता है
उसी दिन, भाई दूज
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2026, 2027, 2028 में चित्रगुप्त पूजा

तिथि के समय के साथ
202611 नवंबरबुधवार
202731 अक्टूबररविवार
202819 अक्टूबरगुरुवार

चित्रगुप्त पूजा भाई दूज वाले दिन ही होता है, वही तिथि दूसरे नाम से।

नई दिल्ली के लिए, भारतीय समय में।

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चित्रगुप्त पूजा क्यों मनाते हैं

इसका महत्व

चित्रगुप्त पूजा कार्तिक शुक्ल द्वितीया को, भाई दूज के दिन ही होती है। चित्रगुप्त यमराज के दरबार में हर व्यक्ति के कर्मों का लेखा रखने वाले देवता हैं; गरुड़ पुराण में उनका वर्णन यमराज के पास बैठे, हर जीव के कर्मों का हिसाब रखने वाले के रूप में मिलता है। उत्तर प्रदेश, बिहार और मध्य प्रदेश के कायस्थ परिवार उन्हें अपना पूर्वज मानते हैं और इस दिन उनकी पूजा करते हैं।

चित्रगुप्त देवताओं के लेखाकार हैं, इसलिए इस पूजा के केंद्र में लिखने का सामान होता है: कलम-दवात, बही-खाते और काग़ज़। कई कायस्थ परिवार दिवाली के बाद कलम रख देते हैं और इस पूजा के बाद ही फिर उठाते हैं। चित्रगुप्त जी के नाम एक पत्र लिखा जाता है, जिसमें परिवार का नाम, साल भर की आमदनी और ख़र्च, और एक प्रार्थना होती है, और उसे साल के हिसाब की तरह पूजा में चढ़ाया जाता है।

पूजा विधि

क्रम से
  1. 1
    चौकी सजाएँ

    साफ़ कपड़े से ढकी चौकी पर चित्रगुप्त जी का चित्र रखें, पास में गणेश जी और जल से भरा कलश रखें।

  2. 2
    कलम-दवात रखें

    उनके सामने नई या साफ़ की हुई कलम, दवात, बही-खाते और कोरा काग़ज़ रखें, और बही पर रोली से स्वस्तिक बनाएँ।

  3. 3
    रोली, अक्षत और फूल चढ़ाएँ

    चित्रगुप्त जी को और कलम-बही को रोली-अक्षत लगाएँ, और फूल, धूप, दीया और मिठाई चढ़ाएँ।

  4. 4
    चित्रगुप्त जी को पत्र

    काग़ज़ पर अपना नाम-पता, साल भर की आमदनी और ख़र्च, और एक छोटी प्रार्थना लिखकर उनके सामने रखें।

  5. 5
    कथा

    परिवार के साथ चित्रगुप्त जी की कथा पढ़ें या सुनें।

  6. 6
    आरती और प्रसाद

    आरती करें, प्रसाद बाँटें, और साल के काम के लिए फिर से कलम उठाएँ।

पूजा सामग्री

एक दिन पहले तैयार रखें
  • चित्रगुप्त जी का चित्र
  • चौकी और साफ़ कपड़ा
  • कलम और दवात
  • बही-खाते और कोरा काग़ज़
  • रोली, अक्षत और हल्दी
  • फूल
  • दीया और धूप
  • जल से भरा कलश
  • प्रसाद के लिए मिठाई और फल

चित्रगुप्त पूजा की कथा

स्रोत: कायस्थ परिवारों की परंपरा, पूजा के समय सुनाई जाने वाली कथा

जब ब्रह्मा जी ने संसार और सारे जीव रच दिए, तो यमराज के लिए हर प्राणी के कर्मों का हिसाब रखना कठिन हो गया, और वे ब्रह्मा जी के पास मदद माँगने गए। ब्रह्मा जी लंबे समय तक ध्यान में बैठे रहे, और उनके शरीर से हाथ में कलम और दवात लिए एक पुरुष प्रकट हुए।

क्योंकि वे ब्रह्मा जी के चित्त में गुप्त रूप से थे, इसलिए उनका नाम चित्रगुप्त पड़ा; और क्योंकि वे ब्रह्मा जी की काया से प्रकट हुए, इसलिए उनके वंशज कायस्थ कहलाए। ब्रह्मा जी ने उन्हें यमराज के पास हर जीव के अच्छे-बुरे कर्मों का लेखा रखने का काम सौंपा।

परंपरा के अनुसार तब से चित्रगुप्त जी हर व्यक्ति के कर्म लिखते हैं और यमराज उन्हीं के लेखे के आधार पर न्याय करते हैं। उन्हें हाथ में कलम लिए, सामने बही रखे बैठे दिखाया जाता है। इसीलिए कलम से रोज़ी कमाने वाले परिवार इस दिन अपनी कलम और बही से उनकी पूजा करते हैं, और उन्हें अपने साल का हिसाब देते हैं।

क्या करें, क्या न करें

क्या करें

  • पूजा से पहले कलम, दवात और बही साफ़ कर लें, क्योंकि इन्हें चित्रगुप्त जी के अपने औज़ार मानकर पूजा जाता है।
  • चित्रगुप्त जी को पत्र ईमानदारी से लिखें, साल की सही आमदनी और ख़र्च के साथ; यह रीत लेखा रखने वाले देवता को हिसाब देने की है।
  • कथा परिवार के साथ ज़ोर से पढ़ें, ताकि बच्चे भी जानें कि यह दिन क्यों मनाया जाता है।

क्या न करें

  • कई कायस्थ परिवार दिवाली से इस पूजा तक कलम से लिखने से बचते हैं, और पूजा के बाद ही उसे फिर उठाते हैं।
  • बही-खाते या कलम ज़मीन पर न रखें; इस दिन इनकी पूजा होती है।

क्षेत्रीय नाम, और तारीख़ें क्यों अलग होती हैं

यह पूजा कार्तिक के शुक्ल पक्ष में होती है, इसलिए पूर्णिमांत और अमांत दोनों पंचांगों में महीने का नाम एक ही है। इसे मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और मध्य प्रदेश के कायस्थ परिवार मनाते हैं, और वे जहाँ भी बसे हों वहाँ भी। इसे कलम-दवात पूजा या दवात पूजा भी कहते हैं।

यह भाई दूज वाले दिन ही होती है, जिस दिन हर जगह के अपने सूर्योदय पर द्वितीया हो, इसलिए दूर के शहरों में एक दिन का फ़र्क़ आ सकता है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

4 सवाल
2026 में चित्रगुप्त पूजा कब है?

2026 में चित्रगुप्त पूजा नई दिल्ली में बुधवार, 11 नवंबर 2026 को है। अपनी तारीख़ और समय के लिए ऊपर अपना शहर चुनें।

2027 में चित्रगुप्त पूजा कब है?

नई दिल्ली में रविवार, 31 अक्टूबर 2027।

2028 में चित्रगुप्त पूजा कब है?

नई दिल्ली में गुरुवार, 19 अक्टूबर 2028।

अमेरिका या ब्रिटेन में चित्रगुप्त पूजा की तारीख़ अलग क्यों होती है?

चित्रगुप्त पूजा का दिन वही है जो भाई दूज का, इसलिए वह उसी के साथ बदलता है। भाई दूज का दिन वह है जिस दिन सूर्योदय पर उसकी तिथि, द्वितीया, चल रही हो। तिथि पूरी दुनिया में एक ही क्षण शुरू और ख़त्म होती है, पर सूर्योदय हर जगह अपने समय पर होता है, इसलिए अमेरिका या ब्रिटेन में वह दिन भारत से एक दिन पहले पड़ सकता है। ऊपर के बॉक्स में अपना शहर चुनें, इस पेज की हर तारीख़ और समय उसके लिए निकाला जाएगा।

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