यम द्वितीया पर कलम-दवात की पूजा, कर्मों का लेखा रखने वाले चित्रगुप्त जी के लिए।
चित्रगुप्त पूजा भाई दूज वाले दिन ही होता है, वही तिथि दूसरे नाम से।
नई दिल्ली के लिए, भारतीय समय में।
चित्रगुप्त पूजा कार्तिक शुक्ल द्वितीया को, भाई दूज के दिन ही होती है। चित्रगुप्त यमराज के दरबार में हर व्यक्ति के कर्मों का लेखा रखने वाले देवता हैं; गरुड़ पुराण में उनका वर्णन यमराज के पास बैठे, हर जीव के कर्मों का हिसाब रखने वाले के रूप में मिलता है। उत्तर प्रदेश, बिहार और मध्य प्रदेश के कायस्थ परिवार उन्हें अपना पूर्वज मानते हैं और इस दिन उनकी पूजा करते हैं।
चित्रगुप्त देवताओं के लेखाकार हैं, इसलिए इस पूजा के केंद्र में लिखने का सामान होता है: कलम-दवात, बही-खाते और काग़ज़। कई कायस्थ परिवार दिवाली के बाद कलम रख देते हैं और इस पूजा के बाद ही फिर उठाते हैं। चित्रगुप्त जी के नाम एक पत्र लिखा जाता है, जिसमें परिवार का नाम, साल भर की आमदनी और ख़र्च, और एक प्रार्थना होती है, और उसे साल के हिसाब की तरह पूजा में चढ़ाया जाता है।
साफ़ कपड़े से ढकी चौकी पर चित्रगुप्त जी का चित्र रखें, पास में गणेश जी और जल से भरा कलश रखें।
उनके सामने नई या साफ़ की हुई कलम, दवात, बही-खाते और कोरा काग़ज़ रखें, और बही पर रोली से स्वस्तिक बनाएँ।
चित्रगुप्त जी को और कलम-बही को रोली-अक्षत लगाएँ, और फूल, धूप, दीया और मिठाई चढ़ाएँ।
काग़ज़ पर अपना नाम-पता, साल भर की आमदनी और ख़र्च, और एक छोटी प्रार्थना लिखकर उनके सामने रखें।
परिवार के साथ चित्रगुप्त जी की कथा पढ़ें या सुनें।
आरती करें, प्रसाद बाँटें, और साल के काम के लिए फिर से कलम उठाएँ।
स्रोत: कायस्थ परिवारों की परंपरा, पूजा के समय सुनाई जाने वाली कथा
जब ब्रह्मा जी ने संसार और सारे जीव रच दिए, तो यमराज के लिए हर प्राणी के कर्मों का हिसाब रखना कठिन हो गया, और वे ब्रह्मा जी के पास मदद माँगने गए। ब्रह्मा जी लंबे समय तक ध्यान में बैठे रहे, और उनके शरीर से हाथ में कलम और दवात लिए एक पुरुष प्रकट हुए।
क्योंकि वे ब्रह्मा जी के चित्त में गुप्त रूप से थे, इसलिए उनका नाम चित्रगुप्त पड़ा; और क्योंकि वे ब्रह्मा जी की काया से प्रकट हुए, इसलिए उनके वंशज कायस्थ कहलाए। ब्रह्मा जी ने उन्हें यमराज के पास हर जीव के अच्छे-बुरे कर्मों का लेखा रखने का काम सौंपा।
परंपरा के अनुसार तब से चित्रगुप्त जी हर व्यक्ति के कर्म लिखते हैं और यमराज उन्हीं के लेखे के आधार पर न्याय करते हैं। उन्हें हाथ में कलम लिए, सामने बही रखे बैठे दिखाया जाता है। इसीलिए कलम से रोज़ी कमाने वाले परिवार इस दिन अपनी कलम और बही से उनकी पूजा करते हैं, और उन्हें अपने साल का हिसाब देते हैं।
क्या करें
क्या न करें
यह पूजा कार्तिक के शुक्ल पक्ष में होती है, इसलिए पूर्णिमांत और अमांत दोनों पंचांगों में महीने का नाम एक ही है। इसे मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और मध्य प्रदेश के कायस्थ परिवार मनाते हैं, और वे जहाँ भी बसे हों वहाँ भी। इसे कलम-दवात पूजा या दवात पूजा भी कहते हैं।
यह भाई दूज वाले दिन ही होती है, जिस दिन हर जगह के अपने सूर्योदय पर द्वितीया हो, इसलिए दूर के शहरों में एक दिन का फ़र्क़ आ सकता है।
2026 में चित्रगुप्त पूजा नई दिल्ली में बुधवार, 11 नवंबर 2026 को है। अपनी तारीख़ और समय के लिए ऊपर अपना शहर चुनें।
नई दिल्ली में रविवार, 31 अक्टूबर 2027।
नई दिल्ली में गुरुवार, 19 अक्टूबर 2028।
चित्रगुप्त पूजा का दिन वही है जो भाई दूज का, इसलिए वह उसी के साथ बदलता है। भाई दूज का दिन वह है जिस दिन सूर्योदय पर उसकी तिथि, द्वितीया, चल रही हो। तिथि पूरी दुनिया में एक ही क्षण शुरू और ख़त्म होती है, पर सूर्योदय हर जगह अपने समय पर होता है, इसलिए अमेरिका या ब्रिटेन में वह दिन भारत से एक दिन पहले पड़ सकता है। ऊपर के बॉक्स में अपना शहर चुनें, इस पेज की हर तारीख़ और समय उसके लिए निकाला जाएगा।
अपनी मुफ़्त कुंडली बनाएँ, या 24 ज्योतिषियों में से किसी से पूछें कि यह साल आपके लिए क्या लाया है। पैसे मिनट के हिसाब से।


