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नई दिल्ली · 2026, 2027, 2028

गोपाष्टमी 2026
17 नवंबर 2026

जिस दिन श्री कृष्ण पहली बार गाएँ चराने गए: गाय और बछड़े की पूजा।

मंगलवारकार्तिक शुक्ल अष्टमीसूर्योदय पर
गोपाष्टमी 2026 · नई दिल्लीमंगलवार, 17 नवंबरकार्तिक शुक्ल अष्टमी
अष्टमी शुरू
17 नवंबर, सुबह 4:20
अष्टमी समाप्त
18 नवंबर, सुबह 6:05
कैसे तय होता है
सूर्योदय पर
गोपाष्टमी 2027 · नई दिल्लीशनिवार, 6 नवंबरकार्तिक शुक्ल अष्टमी
अष्टमी शुरू
5–6 नवंबर की रात 12:09
अष्टमी समाप्त
6–7 नवंबर की रात 2:50
कैसे तय होता है
सूर्योदय पर
हर सुबह का पंचांग, WhatsApp परत्योहारों की तारीख़ और मुहूर्त भी, CosmiqeAI चैनल पर। मुफ़्त।

2026, 2027, 2028 में गोपाष्टमी

तिथि के समय के साथ
202617 नवंबरमंगलवार17 नवंबर, सुबह 4:20 – 18 नवंबर, सुबह 6:05
20276 नवंबरशनिवार5–6 नवंबर की रात 12:09 – 6–7 नवंबर की रात 2:50
202825 अक्टूबरबुधवार24 अक्टूबर, रात 9:41 – 25 अक्टूबर, रात 11:14

गोपाष्टमी की तिथि: कार्तिक शुक्ल अष्टमी, यानी कार्तिक के शुक्ल पक्ष की अष्टमी। इसलिए इसकी तारीख़ वह दिन है जिस दिन सूर्योदय पर यह तिथि चल रही हो। तिथि आधी रात नहीं, किसी भी मिनट पर शुरू और ख़त्म होती है, इसीलिए यही समय दिन तय करता है, और इसीलिए कोई त्योहार दूसरे देश में अलग तारीख़ को पड़ सकता है।

नई दिल्ली के लिए, भारतीय समय में।

गोपाष्टमी की पूजा की तैयारी?हमारे मुहूर्त ज्योतिषी एस्ट्रो मुहूर्त से अपने परिवार और शहर के लिए सही मुहूर्त पूछें।

गोपाष्टमी क्यों मनाते हैं

इसका महत्व

गोपाष्टमी कार्तिक शुक्ल अष्टमी को मनाई जाती है। ब्रज की परंपरा में यह वह दिन है जब श्रीकृष्ण अपने बड़े भाई बलराम के साथ पहली बार गायें चराने वन गए। उससे पहले दोनों भाई घर के पास केवल बछड़े चराते थे, इस दिन से वे ग्वाले यानी गोपाल कहलाए। नाम में ही बात है: गो यानी गाय, और शुक्ल पक्ष की अष्टमी।

यह दिन गाय और बछड़े को घर का सदस्य मानकर उनके सम्मान का दिन है। लोग अपनी गायों को नहलाकर सजाते हैं, तिलक लगाते हैं, हरा चारा और गुड़ खिलाते हैं और हाथ जोड़कर उनकी परिक्रमा करते हैं। मथुरा, वृंदावन और पूरे ब्रज की गौशालाओं में इस दिन पूजा और मेला होता है, और बहुत से लोग वहाँ की गायों की सेवा के लिए दान देते हैं।

पूजा विधि

क्रम से
  1. 1
    गाय को नहलाएँ और सजाएँ

    सुबह गाय और बछड़े को नहलाएँ, फिर माला, कपड़ा या घंटी से सजाएँ, और जैसा घर में चलन हो, सींगों पर मेहंदी या रंग लगाएँ।

  2. 2
    तिलक और पूजन

    गाय के माथे पर रोली और अक्षत लगाएँ, फूल चढ़ाएँ और उसके सामने दीया और धूप जलाएँ।

  3. 3
    पहले गाय को खिलाएँ

    घर के लोग खाना खाएँ, उससे पहले गाय को हरा चारा, गुड़ और उसके लिए बनी रोटी खिलाएँ।

  4. 4
    परिक्रमा

    हाथ जोड़कर गाय और बछड़े की परिक्रमा करें, आम तौर पर सात बार, और गाय के पैर छुएँ।

  5. 5
    गोपाल का स्मरण

    घर या मंदिर में श्रीकृष्ण की गोपाल रूप में पूजा करें और माखन-मिश्री का भोग लगाएँ।

  6. 6
    शाम को गायों के लौटने पर

    शाम को गायें लौटती हैं तो बहुत से घरों में फिर उनका स्वागत किया जाता है, और ब्रज के चलन के अनुसार कुछ लोग उनके खुरों की धूल माथे से लगाते हैं।

पूजा सामग्री

एक दिन पहले तैयार रखें
  • गाय-बछड़े को नहलाने के लिए पानी
  • सजाने के लिए माला, कपड़ा या घंटी
  • सींगों के लिए मेहंदी या रंग
  • रोली और अक्षत
  • फूल
  • दीया और धूप
  • हरा चारा
  • गुड़
  • गाय के लिए बनी रोटियाँ
  • गोपाल के भोग के लिए माखन-मिश्री

गोपाष्टमी की कथा

स्रोत: ब्रज की परंपरा; कृष्ण-बलराम के ग्वाले बनने का प्रसंग भागवत पुराण के दशम स्कंध में है

गोकुल और वृंदावन में छोटे कृष्ण और बलराम को पहले केवल बछड़े सौंपे जाते थे, जिन्हें वे गाँव के दूसरे बालकों के साथ घर के पास ही चराते थे। भागवत पुराण में आता है कि जब वे कुछ बड़े हुए तो व्रज के बड़ों ने उन्हें गायें चराने की अनुमति दे दी, और दोनों भाई गायों को लेकर वृंदावन के वन में जाने लगे।

ब्रज की परंपरा मानती है कि गायों के साथ यह पहला दिन कार्तिक शुक्ल अष्टमी थी। उसी दिन से कृष्ण गोपाल कहलाए, यानी गायों के रक्षक। भागवत में वर्णन है कि दोनों भाई गायों और सखाओं के साथ वन जाते, कृष्ण वन में बाँसुरी बजाते और शाम को गायों को घर लौटाते, जब व्रज की स्त्रियाँ गाँव के किनारे उनके लौटने की राह देखती थीं।

इसीलिए इस दिन पूजा का केंद्र स्वयं गाय होती है, और जिस ब्रज में यह सब हुआ, वहाँ यह पर्व सबसे धूमधाम से मनाया जाता है।

क्या करें, क्या न करें

क्या करें

  • घर में भोजन से पहले गाय को खिलाएँ, क्योंकि यह दिन उसी के सम्मान का है।
  • घर में गाय न हो तो किसी गौशाला जाकर वहाँ गायों को चारा खिलाएँ, या उनके चारे और देखभाल के लिए दान दें।
  • गाय के साथ बछड़े को भी नहलाएँ-सजाएँ, क्योंकि यह दिन कृष्ण के बछड़े चराने वाले दिनों की भी याद है।
  • शाम को गायें लौटें तब घर पर रहें, ताकि ब्रज के चलन की तरह उनका स्वागत कर सकें।

क्या न करें

  • इस दिन, और किसी भी दिन, गाय को मारने या बेरहमी से हाँकने से बचें; यह दिन उन्हीं के सम्मान का है।
  • बासी या ख़राब खाना, या प्लास्टिक में लिपटी चीज़ें न खिलाएँ; ताज़ा चारा, गुड़ और रोटी दें।
  • जो घर इसे पूजा के दिन की तरह मनाते हैं, वे उस दिन घर में मांस-मदिरा से परहेज़ करते हैं।

क्षेत्रीय नाम, और तारीख़ें क्यों अलग होती हैं

गोपाष्टमी सबसे ज़्यादा ब्रज, मथुरा और वृंदावन में, और उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश तथा हरियाणा में मनाई जाती है, जहाँ गौशालाओं में पूजा और मेले होते हैं। यह शुक्ल पक्ष में आती है, इसलिए दोनों पंचांगों में महीने का नाम एक ही रहता है: उत्तर के पूर्णिमांत पंचांग में भी और गुजरात, महाराष्ट्र तथा दक्षिण के अमांत पंचांग में भी यह कार्तिक शुक्ल अष्टमी है।

पंचांग आम तौर पर वह दिन लेते हैं जिस दिन सूर्योदय के समय अष्टमी हो। हर शहर में सूर्योदय अलग समय पर होता है, इसलिए अगर तिथि सूर्योदय के आसपास शुरू या ख़त्म हो, तो दो जगहों पर गोपाष्टमी एक दिन आगे-पीछे पड़ सकती है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

5 सवाल
2026 में गोपाष्टमी कब है?

2026 में गोपाष्टमी नई दिल्ली में मंगलवार, 17 नवंबर 2026 को है। अपनी तारीख़ और समय के लिए ऊपर अपना शहर चुनें।

2026 में गोपाष्टमी के लिए अष्टमी कब शुरू और ख़त्म होगी?

भारतीय समय में अष्टमी 17 नवंबर, सुबह 4:20 को शुरू होकर 18 नवंबर, सुबह 6:05 को ख़त्म होगी। गोपाष्टमी का दिन वह है जिस दिन सूर्योदय पर अष्टमी हो। इसीलिए यह 17 नवंबर को है।

2027 में गोपाष्टमी कब है?

नई दिल्ली में शनिवार, 6 नवंबर 2027।

2028 में गोपाष्टमी कब है?

नई दिल्ली में बुधवार, 25 अक्टूबर 2028।

अमेरिका या ब्रिटेन में गोपाष्टमी की तारीख़ अलग क्यों होती है?

गोपाष्टमी का दिन वह है जिस दिन सूर्योदय पर उसकी तिथि, अष्टमी, चल रही हो। तिथि पूरी दुनिया में एक ही क्षण शुरू और ख़त्म होती है, पर सूर्योदय हर जगह अपने समय पर होता है, इसलिए अमेरिका या ब्रिटेन में वह दिन भारत से एक दिन पहले पड़ सकता है। ऊपर के बॉक्स में अपना शहर चुनें, इस पेज की हर तारीख़ और समय उसके लिए निकाला जाएगा।

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