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नई दिल्ली · 2026, 2027, 2028

अक्षय नवमी 2026
18 नवंबर 2026

आँवला नवमी: आँवले के पेड़ की पूजा, और इस दिन का दान अक्षय माना जाता है।

बुधवारकार्तिक शुक्ल नवमीसूर्योदय पर
अक्षय नवमी 2026 · नई दिल्लीबुधवार, 18 नवंबरकार्तिक शुक्ल नवमी
नवमी शुरू
18 नवंबर, सुबह 6:05
नवमी समाप्त
19 नवंबर, सुबह 7:06
कैसे तय होता है
सूर्योदय पर
अक्षय नवमी 2027 · नई दिल्लीरविवार, 7 नवंबरकार्तिक शुक्ल नवमी
नवमी शुरू
6–7 नवंबर की रात 2:50
नवमी समाप्त
8 नवंबर, सुबह 5:24
कैसे तय होता है
सूर्योदय पर
हर सुबह का पंचांग, WhatsApp परत्योहारों की तारीख़ और मुहूर्त भी, CosmiqeAI चैनल पर। मुफ़्त।

2026, 2027, 2028 में अक्षय नवमी

तिथि के समय के साथ
202618 नवंबरबुधवार18 नवंबर, सुबह 6:05 – 19 नवंबर, सुबह 7:06
20277 नवंबररविवार6–7 नवंबर की रात 2:50 – 8 नवंबर, सुबह 5:24
202826 अक्टूबरगुरुवार25 अक्टूबर, रात 11:14 – 26–27 अक्टूबर की रात 1:20

अक्षय नवमी की तिथि: कार्तिक शुक्ल नवमी, यानी कार्तिक के शुक्ल पक्ष की नवमी। इसलिए इसकी तारीख़ वह दिन है जिस दिन सूर्योदय पर यह तिथि चल रही हो। तिथि आधी रात नहीं, किसी भी मिनट पर शुरू और ख़त्म होती है, इसीलिए यही समय दिन तय करता है, और इसीलिए कोई त्योहार दूसरे देश में अलग तारीख़ को पड़ सकता है।

नई दिल्ली के लिए, भारतीय समय में।

अक्षय नवमी की पूजा की तैयारी?हमारे मुहूर्त ज्योतिषी एस्ट्रो मुहूर्त से अपने परिवार और शहर के लिए सही मुहूर्त पूछें।

अक्षय नवमी क्यों मनाते हैं

इसका महत्व

अक्षय नवमी कार्तिक शुक्ल नवमी को, गोपाष्टमी के अगले दिन पड़ती है और इसे आंवला नवमी भी कहते हैं। अक्षय का अर्थ है जिसका क्षय न हो, और परंपरा है कि इस दिन की गई पूजा, दान और अच्छे काम का पुण्य कभी कम नहीं होता। यह भी माना जाता है कि सतयुग का आरंभ इसी नवमी को हुआ था, इसीलिए इसे कार्तिक के सबसे शुभ दिनों में गिना जाता है।

इस दिन की पूजा का केंद्र आंवले का पेड़ है। महिलाएँ उसकी पूजा करती हैं, परिक्रमा करते हुए तने पर कच्चा सूत लपेटती हैं, और परिवार उसी पेड़ के नीचे बैठकर भोजन बनाता या साथ खाता है। माना जाता है कि आंवला विष्णु और शिव दोनों को प्रिय है, और यह दिन परिवार और संतान की कुशलता के लिए रखा जाता है।

पूजा विधि

क्रम से
  1. 1
    स्नान और संकल्प

    सुबह स्नान करके पूजा का संकल्प लें; घर में व्रत का चलन हो तो व्रत का भी।

  2. 2
    आंवले के पेड़ के पास जाएँ

    आंवले के पेड़ की जड़ के पास पूर्व की ओर मुँह करके बैठें, जड़ में जल या दूध चढ़ाएँ और जगह साफ़ कर लें।

  3. 3
    पेड़ की पूजा

    रोली, अक्षत, हल्दी, फूल और धूप चढ़ाएँ, दीया जलाएँ और आंवले का फल अर्पित करें।

  4. 4
    सूत लपेटते हुए परिक्रमा

    पेड़ की परिक्रमा करते हुए तने पर कच्चा सूत लपेटें; घर के चलन के अनुसार सात या एक सौ आठ परिक्रमा की जाती है।

  5. 5
    कथा सुनें

    सब साथ बैठकर आंवला नवमी की कथा सुनें।

  6. 6
    पेड़ के नीचे भोजन

    भोजन पेड़ के पास बनाएँ या ले जाएँ, पहले भोग लगाएँ, फिर वहीं परिवार के साथ खाएँ, थोड़ा आंवला भी।

  7. 7
    दान

    किसी ब्राह्मण या ज़रूरतमंद को अन्न, कपड़े या आंवले का दान करें।

पूजा सामग्री

एक दिन पहले तैयार रखें
  • जड़ में चढ़ाने के लिए जल और थोड़ा दूध
  • रोली और अक्षत
  • हल्दी
  • कच्चा सूत
  • फूल
  • दीया, घी और धूप
  • आंवले के फल
  • पेड़ के नीचे भोजन के लिए खाना
  • बैठने के लिए आसन या दरी
  • दान के लिए अनाज, कपड़े या आंवला

अक्षय नवमी की कथा

स्रोत: लोक परंपरा, उत्तर भारत में आंवला नवमी की पूजा में सुनाई जाने वाली कथा

एक बार माता लक्ष्मी पृथ्वी पर भ्रमण कर रही थीं और उनके मन में विष्णु और शिव की एक साथ पूजा करने की इच्छा हुई। उन्होंने सोचा कि दोनों को क्या प्रिय है: विष्णु को तुलसी प्रिय है और शिव को बेल। फिर उन्हें ध्यान आया कि आंवले के पेड़ में दोनों के गुण हैं, और उन्होंने उसी को दोनों का रूप मानकर पूजा करने का निश्चय किया।

उन्होंने श्रद्धा से आंवले के पेड़ की पूजा की। प्रसन्न होकर विष्णु और शिव उनके सामने प्रकट हुए। लक्ष्मी जी ने उसी पेड़ के नीचे भोजन बनाया, पहले दोनों को परोसा और उसके बाद स्वयं भोजन किया।

वह दिन कार्तिक शुक्ल नवमी का था। परंपरा है कि तभी से इस नवमी पर आंवले की पूजा होती है और परिवार लक्ष्मी जी की तरह उसकी छाया में बैठकर भोजन करते हैं। इसीलिए इस दिन आंवला चढ़ाया और खाया जाता है, और पेड़ के नीचे का भोजन, जो पहले भोग लगाकर फिर खाया जाता है, इस पूजा का मुख्य अंग है।

क्या करें, क्या न करें

क्या करें

  • आंवले के पेड़ के नीचे थोड़ा-सा भोजन ज़रूर करें, क्योंकि वहीं साथ बैठकर खाना इस दिन की मुख्य परंपरा है।
  • पास में आंवले का पेड़ न हो तो घर पर गमले के आंवले या फल लगी टहनी की पूजा कर लें, ताकि पूजा छूटे नहीं।
  • थोड़ा ही सही, कुछ दान ज़रूर करें, क्योंकि परंपरा है कि अक्षय नवमी का दान कभी क्षय नहीं होता।
  • बच्चों को भी पेड़ के पास साथ ले जाएँ, क्योंकि बहुत से परिवार यह दिन उन्हीं की कुशलता के लिए रखते हैं।

क्या न करें

  • पूजा के लिए पेड़ की डालें न तोड़ें, न उसे नोचें; आसानी से मिलने वाले फल ही लें, क्योंकि पूजा उसी पेड़ की हो रही है।
  • पूजा करने वाले घर उस दिन के भोजन में मांस, मदिरा, प्याज़ और लहसुन से परहेज़ करते हैं, क्योंकि खाना पहले भोग के रूप में चढ़ता है।

क्षेत्रीय नाम, और तारीख़ें क्यों अलग होती हैं

उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान और मध्य प्रदेश में यह दिन आंवला नवमी के नाम से ज़्यादा जाना जाता है; अक्षय नवमी नाम ओडिशा और बंगाल समेत कई जगह चलता है। मथुरा और वृंदावन में परंपरा है कि इस दिन श्रद्धालु दोनों नगरों की परिक्रमा करते हैं। बंगाल में इसी नवमी को जगद्धात्री पूजा का मुख्य दिन होता है, जो अलग पर्व है, बस तिथि एक है।

शुक्ल पक्ष में होने के कारण पूर्णिमांत और अमांत, दोनों पंचांगों में यह कार्तिक शुक्ल नवमी ही है। तारीख़ वह दिन होता है जिस दिन सूर्योदय पर और सुबह पूजा के समय नवमी हो। हर जगह का सूर्योदय अलग है, इसलिए भोर के आसपास शुरू होने वाली नवमी से अलग-अलग शहरों में यह दिन एक दिन आगे-पीछे हो सकता है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

5 सवाल
2026 में अक्षय नवमी कब है?

2026 में अक्षय नवमी नई दिल्ली में बुधवार, 18 नवंबर 2026 को है। अपनी तारीख़ और समय के लिए ऊपर अपना शहर चुनें।

2026 में अक्षय नवमी के लिए नवमी कब शुरू और ख़त्म होगी?

भारतीय समय में नवमी 18 नवंबर, सुबह 6:05 को शुरू होकर 19 नवंबर, सुबह 7:06 को ख़त्म होगी। अक्षय नवमी का दिन वह है जिस दिन सूर्योदय पर नवमी हो। इसीलिए यह 18 नवंबर को है।

2027 में अक्षय नवमी कब है?

नई दिल्ली में रविवार, 7 नवंबर 2027।

2028 में अक्षय नवमी कब है?

नई दिल्ली में गुरुवार, 26 अक्टूबर 2028।

अमेरिका या ब्रिटेन में अक्षय नवमी की तारीख़ अलग क्यों होती है?

अक्षय नवमी का दिन वह है जिस दिन सूर्योदय पर उसकी तिथि, नवमी, चल रही हो। तिथि पूरी दुनिया में एक ही क्षण शुरू और ख़त्म होती है, पर सूर्योदय हर जगह अपने समय पर होता है, इसलिए अमेरिका या ब्रिटेन में वह दिन भारत से एक दिन पहले पड़ सकता है। ऊपर के बॉक्स में अपना शहर चुनें, इस पेज की हर तारीख़ और समय उसके लिए निकाला जाएगा।

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