2028 के अंत तक गुरु कब-कब वक्री और मार्गी होंगे, किस राशि में, और उस समय के लिए परंपरा के उपाय।
गुरु 13 दिसंबर 2026 को सिंह में वक्री होंगे, और 13 अप्रैल 2027 को फिर मार्गी होंगे, यानी सीधी चाल चलने लगेंगे।
| वक्री | मार्गी | राशि | अवधि |
|---|---|---|---|
| 13 दिसंबर 2026 | 13 अप्रैल 2027 | सिंह से वापस कर्क | 121 दिन |
| 12 जनवरी 2028 | 14 मई 2028 | कन्या से वापस सिंह | 123 दिन |
तारीख़ें भारतीय समय में, पंचांग की गणना से हैं: ये वे दिन हैं जब ग्रह रुककर उल्टा या फिर सीधा चलने लगते हैं। हर तारीख़ के आगे-पीछे कुछ दिन ग्रह धीमे चलते हैं।
13 दिसंबर 2026 से सिंह में गुरु के वक्री रहते: फलदीपिका इनके गोचर को मेष, कर्क, तुला, धनु और कुंभ चंद्र राशि के लिए शुभ मानती है, और वृषभ, मिथुन, सिंह, कन्या, वृश्चिक, मकर और मीन चंद्र राशि के लिए सावधानी माँगती है।
12 जनवरी 2028 से कन्या में गुरु के वक्री रहते: फलदीपिका इनके गोचर को वृषभ, सिंह, वृश्चिक, मकर और मीन चंद्र राशि के लिए शुभ मानती है, और मेष, मिथुन, कर्क, कन्या, तुला, धनु और कुंभ चंद्र राशि के लिए सावधानी माँगती है।
दशा में पराशर ग्रह के फल का समय उनके द्रेष्काण (राशि का तीसरा भाग) से बताते हैं: पहले द्रेष्काण का फल दशा के आरंभ में, दूसरे का मध्य में और तीसरे का अंत में। ग्रह वक्री हों तो यह क्रम उलट जाता है। राहु और केतु सदा वक्री रहते हैं, इसलिए उनका फल सदा उलटे क्रम में मिलता है। बृहत् पाराशर होरा शास्त्र 47.3–4
ग्रह उन भावों के ज़रिए फल देते हैं जिनके वे स्वामी हैं और जिस भाव में बैठे हैं, और वक्री ग्रह बलवान माने जाते हैं। इसलिए वक्री गुरु उन बातों को सामने लाते हैं जो आपके लग्न के लिए इनके अपने भावों की हैं, और उस भाव की जिसमें ये वक्री होकर लौटते हैं। तालिका दोनों बताती है, आगे की उन 2 राशियों के लिए जिनमें ये वक्री होंगे।
| लग्न | किन भावों के स्वामी | इस लग्न के लिए | सिंह में वक्री, 13 दिसंबर 2026 से | कन्या में वक्री, 12 जनवरी 2028 से |
|---|---|---|---|---|
| मेष | नौवें और बारहवें भाव | शुभ | आपका पाँचवाँ भाव (संतान) | आपका छठा भाव (रोग) |
| वृषभ | आठवें और ग्यारहवें भाव | अशुभ · मारक | आपका चौथा भाव (माता) | आपका पाँचवाँ भाव (संतान) |
| मिथुन | सातवें और दसवें भाव | अशुभ | आपका तीसरा भाव (छोटे भाई-बहन) | आपका चौथा भाव (माता) |
| कर्क | छठे और नौवें भाव | शुभ | आपका दूसरा भाव (जमा धन) | आपका तीसरा भाव (छोटे भाई-बहन) |
| सिंह | पाँचवें और आठवें भाव | शुभ | आपका पहला भाव (आप ख़ुद) | आपका दूसरा भाव (जमा धन) |
| कन्या | चौथे और सातवें भाव | अशुभ | आपका बारहवाँ भाव (ख़र्च) | आपका पहला भाव (आप ख़ुद) |
| तुला | तीसरे और छठे भाव | अशुभ · मारक | आपका ग्यारहवाँ भाव (आमदनी) | आपका बारहवाँ भाव (ख़र्च) |
| वृश्चिक | दूसरे और पाँचवें भाव | शुभ | आपका दसवाँ भाव (करियर) | आपका ग्यारहवाँ भाव (आमदनी) |
| धनु | पहले और चौथे भाव | तटस्थ | आपका नौवाँ भाव (भाग्य) | आपका दसवाँ भाव (करियर) |
| मकर | तीसरे और बारहवें भाव | अशुभ | आपका आठवाँ भाव (आयु) | आपका नौवाँ भाव (भाग्य) |
| कुंभ | दूसरे और ग्यारहवें भाव | अशुभ · मारक | आपका सातवाँ भाव (शादी) | आपका आठवाँ भाव (आयु) |
| मीन | पहले और दसवें भाव | शुभ | आपका छठा भाव (रोग) | आपका सातवाँ भाव (शादी) |
तालिका के नाम, बृहत् पाराशर होरा शास्त्र, अध्याय 34 से:
आज कई ज्योतिषी वक्री गुरु को ऐसे पढ़ते हैं; यह आधुनिक पढ़त है, शास्त्रों की नहीं। मंत्र, दान और लाल किताब के उपाय परंपरा के हैं। आपकी कुंडली में गुरु कहाँ हैं, इससे तय होता है कि यह समय आप पर कितना असर डालेगा।
आगे: 13 दिसंबर 2026 से 13 अप्रैल 2027 तक, सिंह से वापस कर्क में।
13 दिसंबर 2026 से 13 अप्रैल 2027 तक, सिंह से वापस कर्क में।
12 जनवरी 2028 से 14 मई 2028 तक, कन्या से वापस सिंह में।
वक्री ग्रह पृथ्वी से देखने पर उल्टी दिशा में चलता दिखता है। शास्त्र वक्री गुरु को कमज़ोर नहीं, बलवान मानते हैं: उन्हें चेष्टा बल, यानी गति का बल, मिलता है (फलदीपिका 4.4, बृहत् पाराशर होरा शास्त्र 27.21–23)।
आपकी कुंडली में हर ग्रह कहाँ बैठे हैं, आपके लग्न के लिए किन भावों के स्वामी हैं और कौन-सी दशा चल रही है, इसी से तय होता है कि वे आपके लिए क्या करेंगे। सभी नौ ग्रह देखने के लिए अपनी मुफ़्त कुंडली बनाएँ।
मुफ़्त कुंडली बनाएँ

