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गुरु

गुरु के उपाय
मंत्र, दान, व्रत, रत्न और लाल किताब

गुरु के लिए मंत्र, दान, व्रत, रत्न, रुद्राक्ष और हर भाव के लिए लाल किताब के उपाय, हर एक के कारण के साथ।

गुरुवारलाल किताब के 12 उपाय

ये सुझाव हैं, नुस्ख़े नहीं। परंपरा में ये उपाय तब किए जाते हैं जब कुंडली में गुरु कमज़ोर या पीड़ित हों, या उनकी दशा या कोई कठिन गोचर चल रहा हो। कौन-सा आप पर लागू है, यह आपकी कुंडली बताएगी।

बीज मंत्र

बीज मंत्र ग्रह की मूल ध्वनि है। इसे गिनकर नियम से जपना गुरु के शुभ फल (ज्ञान, संतान, धर्म और भाग्य) बढ़ाने का सबसे पुराना तरीक़ा है। जप गुरुवार से शुरू करें, और पूरा जप होने तक रोज़ उसी समय उतनी ही गिनती रखें।

ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं सः गुरवे नमः

पूरा जप19,000
रोज़ कम से कम108
इस गति सेलगभग 176 दिन
दिनगुरुवार
समयब्रह्म मुहूर्त या सूर्योदय
मालातुलसी या पीली माला

नाम मंत्र

गुरु के अपने नाम का छोटा मंत्र, उनके लिए जो गिनती के बजाय सीधे प्रार्थना करना चाहें। गुरु की पूजा बृहस्पति देव के रूप में ही की जाती है।

ॐ गुरवे नमः

108 बार

दान

गुरु से जुड़ी चीज़ें गुरुवार को किसी ज़रूरतमंद को दान करें। लाल किताब और पाराशरी परंपरा, दोनों इसे सबसे सहज उपाय मानती हैं।

क्या करेंचने की दाल और हल्दी का दान
दिनगुरुवार

व्रत

गुरुवार को बृहस्पति या विष्णु के लिए रखा गया व्रत मन को स्थिर करता है और गुरु के कष्ट कम करता है।

दिनगुरुवार
किसके लिएबृहस्पति या विष्णु
क्या न खाएँकेला
व्रत कब खोलेंसूर्यास्त के बाद

रत्न

रत्न गुरु को बल देता है, इसलिए यह तभी फ़ायदा करता है जब गुरु आपके लग्न के लिए शुभ हों, यानी लग्न के लिए अच्छे भावों के स्वामी हों। कुंडली दिखाकर ही पहनें: कुछ लग्नों के लिए यही रत्न नुक़सान करता है।

रत्नपुखराज
उपरत्न (हल्का विकल्प)सुनैला
वज़न3–5 कैरेट
धातुसोना
उँगलीतर्जनी
दिनगुरुवार
पहली बार कब पहनेंशुक्ल पक्ष में सुबह
इनके साथ न पहनेंशुक्र का हीरा

अपनी कुंडली का रत्न देखें

रुद्राक्ष

रुद्राक्ष में रत्न जैसा जोखिम नहीं होता; इसे गुरु को शांत और स्थिर रखने के लिए पहना जाता है। दाने के देवता उसकी मुखी (धारियों की गिनती) से तय होते हैं, इसलिए वे ऊपर बताए गए गुरु के पूज्य देवता से अलग हो सकते हैं।

मुखी (दाने पर धारियाँ)5 मुखी
देवताकालाग्नि रुद्र
किसलिएविवेक, समृद्धि, ज्ञान, सेहत

स्तोत्र और पाठ

  • गुरु स्तोत्र · गुरुवार · ज्ञान, समृद्धि, भाग्य
  • बृहस्पति कवच · गुरुवार · बृहस्पति को बल
  • दक्षिणामूर्ति स्तोत्र · गुरुवार · ज्ञान, आध्यात्मिक उन्नति

पूजा

  • बृहस्पति शांति पूजा · गुरु की दशा में, या जब गुरु कमज़ोर हों · ज्ञान, धन, संतान
  • गुरु पूजा · गुरुवार · गुरु को बल, आध्यात्मिक उन्नति

लाल किताब के उपाय, भाव के हिसाब से

हर उस भाव के लिए जिसमें गुरु बैठ सकते हैं, और उपाय किसलिए है

लाल किताब हर भाव के लिए अलग उपाय देती है, क्योंकि गुरु हर भाव से अलग फल देते हैं। आपकी कुंडली में ये जिस भाव में बैठे हों, उसी का उपाय करें। पक्का घर वह भाव है जिसे लाल किताब ग्रह का स्थायी घर मानती है।

भावउपायकिसलिए
पहला भावमाथे पर केसर का तिलक लगाएँ; भगवान विष्णु की पूजा करें।यहाँ के शुभ फल को और पक्का करने के लिए: पहले भाव में गुरु ऊँचा चरित्र, अच्छी सेहत, लंबी उम्र और आध्यात्मिक स्वभाव देते हैं।
दूसरा भावमंदिर में केसर चढ़ाएँ; जेब में हल्दी की गाँठ रखें।यहाँ के शुभ फल को और पक्का करने के लिए: दूसरे भाव (पक्का घर) में गुरु भरपूर पारिवारिक धन, मीठी वाणी और उदार स्वभाव देते हैं।
तीसरा भावकेसर का तिलक लगाएँ; गुरुवार को केले दान करें।कठिन पक्ष हल्का करने के लिए: तीसरे भाव में गुरु व्यक्ति को भाई-बहनों के प्रति ज़रूरत से ज़्यादा उदार बनाते हैं, और दूसरों के कारण पैसों का नुक़सान उठाना पड़ सकता है।
चौथा भावकेसर या हल्दी का तिलक लगाएँ; मंदिर में केले चढ़ाएँ।यहाँ के शुभ फल को और पक्का करने के लिए: चौथे भाव में गुरु संपत्ति, वाहन, घर का सुख और माँ का सुख देते हैं।
पाँचवाँ भावगुरुवार को हल्दी और केसर दान करें।यहाँ के शुभ फल को और पक्का करने के लिए: पाँचवें भाव में गुरु समझदार संतान, अच्छा भाग्य और आध्यात्मिक झुकाव देते हैं।
छठा भावमंदिर में हल्दी और केसर चढ़ाएँ; गुरुवार को ज़रूरतमंदों को केले खिलाएँ।कठिन पक्ष हल्का करने के लिए: छठे भाव में गुरु शत्रुओं से परेशानी, लीवर और पाचन की समस्या और क़र्ज़ देते हैं।
सातवाँ भावहल्दी का तिलक लगाएँ; जीवनसाथी का आदर करें।यहाँ के शुभ फल को और पक्का करने के लिए: सातवें भाव में गुरु समझदार और साथ निभाने वाला जीवनसाथी देते हैं।
आठवाँ भावमंदिर में हल्दी चढ़ाएँ; गुरुवार को पीली चीज़ें दान करें।कठिन पक्ष हल्का करने के लिए: आठवें भाव में गुरु भाग्य में रुकावटें, फल मिलने में देरी और ससुराल से परेशानी देते हैं।
नौवाँ भावघर में पूजा का स्थान साफ़ रखें; रोज़ केसर का तिलक लगाएँ।यहाँ के शुभ फल को और पक्का करने के लिए: नौवें भाव में गुरु भाग्य, आध्यात्मिकता, तीर्थयात्रा और उच्च शिक्षा के लिए बहुत अच्छे हैं।
दसवाँ भावकोई भी काम शुरू करने से पहले नाक साफ़ करें; 43 दिन तक बहते पानी में ताँबे के सिक्के प्रवाहित करें; माथे पर केसर का तिलक लगाएँ; किसी धर्मस्थान पर बादाम चढ़ाएँ; घर में मूर्तियों वाला मंदिर न बनाएँ।कठिन पक्ष हल्का करने के लिए: लाल किताब में दसवाँ भाव गुरु का नीच घर है, और यहाँ गुरु का फल शनि पर टिका है।
ग्यारहवाँ भावगुरुवार को मंदिर में केले और हल्दी चढ़ाएँ।यहाँ के शुभ फल को और पक्का करने के लिए: ग्यारहवें भाव में गुरु समझदार मित्रों और बड़े भाई-बहनों से लाभ और सभी इच्छाओं की पूर्ति देते हैं।
बारहवाँ भावहल्दी का तिलक लगाएँ; गुरुवार को पीली दाल दान करें।कठिन पक्ष हल्का करने के लिए: बारहवें भाव में गुरु दान-पुण्य और विदेश यात्रा पर ख़र्च बढ़ाते हैं।
आपके गुरु के लिए कौन-सा उपाय ठीक है?एस्ट्रो भक्ति आपकी कुंडली देखकर सही उपाय चुनते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

3 सवाल
गुरु का बीज मंत्र क्या है?

ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं सः गुरवे नमः, कुल 19,000 बार, रोज़ कम से कम 108 बार, गुरुवार को।

गुरु के लिए क्या दान करें?

गुरुवार को किसी ज़रूरतमंद को चने की दाल और हल्दी का दान करें।

गुरु का रत्न कौन-सा है, और क्या कोई भी इसे पहन सकता है?

पुखराज। हर किसी को नहीं: तभी, जब गुरु लग्न के लिए शुभ हों। पहले कुंडली दिखाएँ।

ग्रह का अर्थ सबके लिए एक है, पर आपकी कुंडली सिर्फ़ आपकी है।

आपकी कुंडली में हर ग्रह कहाँ बैठे हैं, आपके लग्न के लिए किन भावों के स्वामी हैं और कौन-सी दशा चल रही है, इसी से तय होता है कि वे आपके लिए क्या करेंगे। सभी नौ ग्रह देखने के लिए अपनी मुफ़्त कुंडली बनाएँ।

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