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मंगल

ग्यारहवें भाव में मंगल
लाभ भाव में मंगल, फलदीपिका और लाल किताब से

यहाँ पढ़ें कि ग्यारहवें भाव में मंगल लाल किताब और फलदीपिका के अनुसार क्या फल देते हैं, इसका उपाय क्या है, यहाँ से वे किन भावों को देखते हैं और हर लग्न के लिए इसका क्या मतलब है।

आमदनीलाल किताब
147102356891112मं
ग्यारहवें भाव में मंगल; सबसे ऊपर का खाना पहला भाव, यानी लग्न है

ग्यारहवें भाव में मंगल संपत्ति, बड़े भाई-बहनों और मित्रों से लाभ देते हैं। आमदनी स्थिर रहती है।

लाल किताब: शुभ स्थिति

लाल किताब ग्यारहवें भाव में मंगल को भाव से पढ़ती है, आपके लग्न से नहीं; आपके अपने लग्न के लिए पराशर का मत आगे है, और फलदीपिका व बृहज्जातक का फल अलग हो सकता है। लाल किताब और पराशर में फ़र्क · लाल किताब: पक्का घर, ऋण और उपाय

लाल किताब उपाय

कुत्ता पालें या नियमित रूप से गली के कुत्तों को खाना खिलाएँ।

यह ग्यारहवें भाव में मंगल के लिए लाल किताब का एक उपाय है, यहाँ के शुभ फल को और पक्का करने के लिए; यह एक सुझाव है, और आपकी पूरी कुंडली कोई और उपाय भी माँग सकती है। मंगल के सभी उपाय

फलदीपिका क्या कहती है

मंत्रेश्वर, अध्याय 8, श्लोक 10

फलदीपिका 8.10 के अनुसार ग्यारहवें भाव (लाभ के भाव) में मंगल हों तो धन, सुख और साहस मिलते हैं। ग्रंथ अच्छा चरित्र और शोक से मुक्त जीवन भी बताता है।

इसमें से कितना फलेगा, यह बाक़ी कुंडली पर निर्भर है: मंगल किस राशि में हैं, ग्यारहवें भाव के स्वामी कहाँ हैं, और कौन-से ग्रह साथ हैं या इसे देखते हैं। पुराने ग्रंथ पुरुष जातक की बात करते हैं; उनके फल हर किसी पर लागू होते हैं।

बृहज्जातक क्या कहता है

वराहमिहिर, श्लोक 20.6 और 20.3

बृहज्जातक 20.6: ग्यारहवें भाव में मंगल वही फल देते हैं जो यहाँ सूर्य देते हैं (20.3): धन।

ग्यारहवें भाव के मंगल कब फल देते हैं, और कहाँ देखते हैं

इसका फल मंगल की अपनी महादशा (7 साल) में और दूसरी महादशाओं के भीतर इनकी अंतर्दशा में सबसे ज़्यादा दिखता है। ग्यारहवें भाव की बातें उस भाव के स्वामी की दशा में भी सामने आती हैं, जो आपके लग्न पर निर्भर है।

ग्यारहवें भाव से इनकी दृष्टि (ग्रह की नज़र: ग्रह जिन भावों को देखते हैं, उन पर उनका असर पड़ता है), उन नियमों से जिनसे हमारी कुंडली भावों को तौलती है:

  • आपके दूसरे भाव (जमा धन) पर: भारी पड़ती है, जब तक मंगल उस भाव के स्वामी न हों
  • आपके पाँचवें भाव (संतान) पर: भारी पड़ती है, जब तक मंगल उस भाव के स्वामी न हों
  • आपके छठे भाव (रोग) पर: उपचय भाव (तीसरा, छठा, दसवाँ और ग्यारहवाँ भाव, जो समय और मेहनत से बढ़ते हैं) होने से वहाँ इसके ख़िलाफ़ नहीं गिनी जाती

ग्यारहवाँ भाव, लाभ भाव: आमदनी, लाभ, बड़े भाई-बहन और दोस्त; यह उपचय भाव है; इसके कारक (वह ग्रह जो, लग्न कोई भी हो, भाव की बातों के स्वाभाविक सूचक होते हैं) गुरु हैं। ग्यारहवाँ भाव, और उसमें हर ग्रह

हर लग्न के लिए ग्यारहवें भाव में मंगल

जिस राशि में बैठे, और जिन भावों के स्वामी
लग्नमंगल की राशिवहाँ स्थितिकिन भावों के स्वामीइस लग्न के लिए
मेषकुंभसमपहले और आठवें भावशुभ
वृषभमीनमित्र राशिसातवें और बारहवें भावमारक
मिथुनमेषस्वराशिछठे और ग्यारहवें भावअशुभ
कर्कवृषभसमपाँचवें और दसवें भावयोगकारक
सिंहमिथुनशत्रु राशिचौथे और नौवें भावयोगकारक
कन्याकर्कनीचतीसरे और आठवें भावअशुभ
तुलासिंहमित्र राशिदूसरे और सातवें भावअशुभ · मारक
वृश्चिककन्याशत्रु राशिपहले और छठे भावतटस्थ
धनुतुलासमपाँचवें और बारहवें भावशुभ
मकरवृश्चिकस्वराशिचौथे और ग्यारहवें भावअशुभ · मारक— चौथे और ग्यारहवें भाव के स्वामी, दूसरे या सातवें के नहीं; फिर भी श्लोक 34.39–40 इन्हें मारक कहता है
कुंभधनुमित्र राशितीसरे और दसवें भावअशुभ · मारक— तीसरे और दसवें भाव के स्वामी, दूसरे या सातवें के नहीं; फिर भी श्लोक 34.41–42 इन्हें मारक कहता है
मीनमकरउच्चदूसरे और नौवें भावशुभ · योग— गुरु के साथ योग देते हैं (34.44)— साथ ही मारक भी कहे गए, पर अपने आप मारक नहीं (34.44)

हर राशि में मंगल की स्थिति, और हर लग्न के लिए ये किन भावों के स्वामी हैं, जैसा हमारी मुफ़्त कुंडली पढ़ती है (अध्याय 34); हर भाव पर क्लिक करके पढ़ें कि उसके स्वामी ग्यारहवें भाव में बैठें तो पराशर क्या कहते हैं। “वहाँ स्थिति” बताती है कि वह राशि मंगल के लिए कैसी है: उच्च, अपनी, मित्र, सम, शत्रु या नीच। “इस लग्न के लिए” पराशर का फ़ैसला है, उन भावों के हिसाब से जिनके ये स्वामी हैं। ये दो अलग सवालों के जवाब हैं, इसलिए सम (मित्रता में) और तटस्थ (लग्न के लिए) दो अलग शब्द हैं।

तालिका के नाम, बृहत् पाराशर होरा शास्त्र, अध्याय 34 से:

  • योगकारक: लग्न के सबसे शुभ ग्रह: जिन्हें पराशर योग देने वाले बताते हैं, या जो एक साथ केंद्र (पहले, चौथे, सातवें, दसवें) और त्रिकोण (पहले, पाँचवें, नौवें) भाव के स्वामी हों (34.13)
  • शुभ, अशुभ, तटस्थ: लग्न के पक्ष में; कठिन बातें लाने वाले; दोनों में से कोई नहीं
  • लग्नेश: लग्न के अपने स्वामी, जहाँ श्लोक इन्हें शुभ या अशुभ नहीं कहता
  • मारक: जिन्हें पराशर उस लग्न के लिए आयु और सेहत पर भारी बताते हैं; अकेले, या किसी और नाम के बाद लिखे जाते हैं। ये हमेशा दूसरे या सातवें भाव के स्वामी नहीं होते: जहाँ अलग हों, नीचे की पंक्ति श्लोक बताती है
  • · योग: उन दो ग्रहों में से एक जो इस लग्न के लिए साथ मिलकर योग देते हैं

एक लग्न, पूरा पढ़कर

सिंह लग्न लें। यहाँ मंगल मिथुन राशि में (शत्रु राशि) बैठते हैं और आपके चौथे और नौवें भाव के स्वामी हैं, इसलिए सिंह लग्न के लिए ये योगकारक हैं (अध्याय 34)। दोनों अलग दिशा में हैं: नाम बताता है कि ये इस लग्न के लिए क्या करते हैं, राशि बताती है कि इनमें कितना बल है, इसलिए ये अपने नाम जितना शुभ फल नहीं दे पाते। ऊपर का लाल किताब फल हर लग्न के लिए एक है; यह पंक्ति वह हिस्सा है जो आपके लग्न के साथ बदलता है।

बृहज्जातक 20.11 बताता है कि ग्रह राशि के हिसाब से अपना कितना शुभ फल देते हैं। मंगल जैसे पाप ग्रह के लिए अनुवादक यह क्रम उलट देते हैं और टीकाकार एकमत नहीं हैं, इसलिए ग्यारहवें भाव के मंगल को ऊपर की पराशर वाली तालिका से पढ़ें। श्लोक 20.10–11

ग्यारहवें भाव में मंगल: कहाँ सबसे अच्छा, कहाँ सबसे कठिन

ऊपर की तालिका से
अपनी राशि में बलवानमिथुन, मकर और मीन लग्न, जहाँ ये उच्च के या अपनी राशि में बैठते हैं
लग्न के लिए शुभमेष, कर्क, सिंह, धनु और मीन लग्न, जिनके लिए पराशर इन्हें शुभ या योगकारक मानते हैं
राशि में कमज़ोरकन्या लग्न, जहाँ ये नीच के हैं
सबसे कठिन मेलकन्या लग्न: लग्न के लिए कठिन ग्रह, और शत्रु की या नीच राशि में

जब मंगल आपकी चंद्र राशि से ग्यारहवें भाव में गोचर करें

मंगल का गोचर, जन्म कुंडली नहीं

यह ऊपर की जन्म-स्थिति नहीं: यहाँ मंगल आपकी चंद्र राशि से गिनकर ग्यारहवें भाव से गुज़र रहे हैं। फलदीपिका ग्यारहवें भाव को मंगल के गोचर के शुभ भावों में गिनती है (बारहों भाव, मंगल के पेज पर)। हमारी मासिक भविष्यवाणी इसे बहुत शुभ पढ़ती है: लाभ, सफलता, ज़मीन-जायदाद का फ़ायदा, लक्ष्य पूरे।

दूसरे भावों में मंगल

ग्यारहवें भाव में दूसरे ग्रह

क्या आपकी कुंडली में मंगल ग्यारहवें भाव में हैं?एस्ट्रो व्यास इसे आपके लग्न, राशि और दशा के साथ पढ़ते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

3 सवाल
क्या ग्यारहवें भाव में मंगल शुभ हैं?

लाल किताब इसे शुभ स्थिति मानती है; मंगल जिन 6 भावों में अच्छा फल देते हैं, यह उनमें से एक है (बाक़ी पहले, तीसरे, पाँचवें, छठे और दसवें भाव)। मिथुन, मकर और मीन लग्न के लिए ये राशि से सबसे बलवान हैं; कन्या लग्न के लिए नीच के।

ग्यारहवें भाव में मंगल का लाल किताब उपाय क्या है?

लाल किताब इसके लिए यह उपाय देती है: कुत्ता पालें या नियमित रूप से गली के कुत्तों को खाना खिलाएँ।

ग्यारहवें भाव से मंगल किन भावों को देखते हैं?

दूसरे (जमा धन), पाँचवें (संतान) और छठे (रोग) भाव को।

ग्रह का अर्थ सबके लिए एक है, पर आपकी कुंडली सिर्फ़ आपकी है।

आपकी कुंडली में हर ग्रह कहाँ बैठे हैं, आपके लग्न के लिए किन भावों के स्वामी हैं और कौन-सी दशा चल रही है, इसी से तय होता है कि वे आपके लिए क्या करेंगे। सभी नौ ग्रह देखने के लिए अपनी मुफ़्त कुंडली बनाएँ।

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