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मंगल

दसवें भाव में मंगल
कर्म भाव में मंगल, फलदीपिका और लाल किताब से

यहाँ पढ़ें कि दसवें भाव में मंगल लाल किताब और फलदीपिका के अनुसार क्या फल देते हैं, इसका उपाय क्या है, यहाँ से वे किन भावों को देखते हैं और हर लग्न के लिए इसका क्या मतलब है।

करियरलाल किताब
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दसवें भाव में मंगल; सबसे ऊपर का खाना पहला भाव, यानी लग्न है

दसवें भाव में मंगल सेना, पुलिस या सर्जरी में सफल करियर देते हैं। अधिकार के लिए यह मज़बूत स्थिति है।

लाल किताब: शुभ स्थिति

मंगल केंद्र (कुंडली के चार कोने, यानी पहला, चौथा, सातवाँ और दसवाँ भाव, जहाँ ग्रह सबसे ज़ोर से फल देते हैं) में मेष, वृश्चिक या मकर राशि में हों तो रुचक योग, यानी बृहत् पाराशर होरा शास्त्र के पाँच महापुरुष योगों में से एक, बनाते हैं। नीचे की तालिका में वे लग्न दिखाए गए हैं जिनमें ऐसा होता है।

लाल किताब दसवें भाव में मंगल को भाव से पढ़ती है, आपके लग्न से नहीं; आपके अपने लग्न के लिए पराशर का मत आगे है, और फलदीपिका व बृहज्जातक का फल अलग हो सकता है। लाल किताब और पराशर में फ़र्क · लाल किताब: पक्का घर, ऋण और उपाय

लाल किताब उपाय

काम की जगह पर कोई सफ़ेद चीज़ रखें।

यह दसवें भाव में मंगल के लिए लाल किताब का एक उपाय है, यहाँ के शुभ फल को और पक्का करने के लिए; यह एक सुझाव है, और आपकी पूरी कुंडली कोई और उपाय भी माँग सकती है। मंगल के सभी उपाय

फलदीपिका क्या कहती है

मंत्रेश्वर, अध्याय 8, श्लोक 10

फलदीपिका 8.10 के अनुसार दसवें भाव (कर्म और प्रतिष्ठा के भाव) में मंगल हों तो अधिकार या ऊँचा पद मिलता है और प्रतिष्ठित लोग प्रशंसा करते हैं। ग्रंथ उदारता के साथ स्वभाव में कठोरता भी बताता है।

इसमें से कितना फलेगा, यह बाक़ी कुंडली पर निर्भर है: मंगल किस राशि में हैं, दसवें भाव के स्वामी कहाँ हैं, और कौन-से ग्रह साथ हैं या इसे देखते हैं। पुराने ग्रंथ पुरुष जातक की बात करते हैं; उनके फल हर किसी पर लागू होते हैं।

बृहज्जातक क्या कहता है

वराहमिहिर, श्लोक 20.6 और 20.3

बृहज्जातक 20.6: दसवें भाव में मंगल वही फल देते हैं जो यहाँ सूर्य देते हैं (20.3): सुख और प्रभाव।

दसवें भाव के मंगल कब फल देते हैं, और कहाँ देखते हैं

इसका फल मंगल की अपनी महादशा (7 साल) में और दूसरी महादशाओं के भीतर इनकी अंतर्दशा में सबसे ज़्यादा दिखता है। दसवें भाव की बातें उस भाव के स्वामी की दशा में भी सामने आती हैं, जो आपके लग्न पर निर्भर है।

दसवें भाव से इनकी दृष्टि (ग्रह की नज़र: ग्रह जिन भावों को देखते हैं, उन पर उनका असर पड़ता है), उन नियमों से जिनसे हमारी कुंडली भावों को तौलती है:

  • आपके पहले भाव (आप ख़ुद) पर: भारी पड़ती है, जब तक मंगल उस भाव के स्वामी न हों
  • आपके चौथे भाव (माता) पर: भारी पड़ती है, जब तक मंगल उस भाव के स्वामी न हों
  • आपके पाँचवें भाव (संतान) पर: भारी पड़ती है, जब तक मंगल उस भाव के स्वामी न हों

दसवाँ भाव, कर्म भाव: करियर, पद, नाम और अधिकार; यह केंद्र और उपचय भाव (तीसरा, छठा, दसवाँ और ग्यारहवाँ भाव, जो समय और मेहनत से बढ़ते हैं) है; इसके कारक (वह ग्रह जो, लग्न कोई भी हो, भाव की बातों के स्वाभाविक सूचक होते हैं) बुध, सूर्य, गुरु, शनि हैं। दसवाँ भाव, और उसमें हर ग्रह

हर लग्न के लिए दसवें भाव में मंगल

जिस राशि में बैठे, और जिन भावों के स्वामी
लग्नमंगल की राशिवहाँ स्थितिकिन भावों के स्वामीइस लग्न के लिए
मेषमकरउच्च · रुचक योगपहले और आठवें भावशुभ
वृषभकुंभसमसातवें और बारहवें भावमारक
मिथुनमीनमित्र राशिछठे और ग्यारहवें भावअशुभ
कर्कमेषस्वराशि · रुचक योगपाँचवें और दसवें भावयोगकारक
सिंहवृषभसमचौथे और नौवें भावयोगकारक
कन्यामिथुनशत्रु राशितीसरे और आठवें भावअशुभ
तुलाकर्कनीचदूसरे और सातवें भावअशुभ · मारक
वृश्चिकसिंहमित्र राशिपहले और छठे भावतटस्थ
धनुकन्याशत्रु राशिपाँचवें और बारहवें भावशुभ
मकरतुलासमचौथे और ग्यारहवें भावअशुभ · मारक— चौथे और ग्यारहवें भाव के स्वामी, दूसरे या सातवें के नहीं; फिर भी श्लोक 34.39–40 इन्हें मारक कहता है
कुंभवृश्चिकस्वराशि · रुचक योगतीसरे और दसवें भावअशुभ · मारक— तीसरे और दसवें भाव के स्वामी, दूसरे या सातवें के नहीं; फिर भी श्लोक 34.41–42 इन्हें मारक कहता है
मीनधनुमित्र राशिदूसरे और नौवें भावशुभ · योग— गुरु के साथ योग देते हैं (34.44)— साथ ही मारक भी कहे गए, पर अपने आप मारक नहीं (34.44)

हर राशि में मंगल की स्थिति, और हर लग्न के लिए ये किन भावों के स्वामी हैं, जैसा हमारी मुफ़्त कुंडली पढ़ती है (अध्याय 34); हर भाव पर क्लिक करके पढ़ें कि उसके स्वामी दसवें भाव में बैठें तो पराशर क्या कहते हैं। “वहाँ स्थिति” बताती है कि वह राशि मंगल के लिए कैसी है: उच्च, अपनी, मित्र, सम, शत्रु या नीच। “इस लग्न के लिए” पराशर का फ़ैसला है, उन भावों के हिसाब से जिनके ये स्वामी हैं। ये दो अलग सवालों के जवाब हैं, इसलिए सम (मित्रता में) और तटस्थ (लग्न के लिए) दो अलग शब्द हैं।

तालिका के नाम, बृहत् पाराशर होरा शास्त्र, अध्याय 34 से:

  • योगकारक: लग्न के सबसे शुभ ग्रह: जिन्हें पराशर योग देने वाले बताते हैं, या जो एक साथ केंद्र (पहले, चौथे, सातवें, दसवें) और त्रिकोण (पहले, पाँचवें, नौवें) भाव के स्वामी हों (34.13)
  • शुभ, अशुभ, तटस्थ: लग्न के पक्ष में; कठिन बातें लाने वाले; दोनों में से कोई नहीं
  • लग्नेश: लग्न के अपने स्वामी, जहाँ श्लोक इन्हें शुभ या अशुभ नहीं कहता
  • मारक: जिन्हें पराशर उस लग्न के लिए आयु और सेहत पर भारी बताते हैं; अकेले, या किसी और नाम के बाद लिखे जाते हैं। ये हमेशा दूसरे या सातवें भाव के स्वामी नहीं होते: जहाँ अलग हों, नीचे की पंक्ति श्लोक बताती है
  • · योग: उन दो ग्रहों में से एक जो इस लग्न के लिए साथ मिलकर योग देते हैं

एक लग्न, पूरा पढ़कर

धनु लग्न लें। यहाँ मंगल कन्या राशि में (शत्रु राशि) बैठते हैं और आपके पाँचवें और बारहवें भाव के स्वामी हैं, इसलिए धनु लग्न के लिए ये शुभ हैं (अध्याय 34)। दोनों अलग दिशा में हैं: नाम बताता है कि ये इस लग्न के लिए क्या करते हैं, राशि बताती है कि इनमें कितना बल है, इसलिए ये अपने नाम जितना शुभ फल नहीं दे पाते। इनकी दृष्टि पाँचवें भाव पर पड़ती है, जिसके ये इस लग्न के लिए स्वामी हैं, इसलिए वहाँ यह दृष्टि इनके ख़िलाफ़ नहीं गिनी जाती। ऊपर का लाल किताब फल हर लग्न के लिए एक है; यह पंक्ति वह हिस्सा है जो आपके लग्न के साथ बदलता है।

बृहज्जातक 20.11 बताता है कि ग्रह राशि के हिसाब से अपना कितना शुभ फल देते हैं। मंगल जैसे पाप ग्रह के लिए अनुवादक यह क्रम उलट देते हैं और टीकाकार एकमत नहीं हैं, इसलिए दसवें भाव के मंगल को ऊपर की पराशर वाली तालिका से पढ़ें। श्लोक 20.10–11

दसवें भाव में मंगल: कहाँ सबसे अच्छा, कहाँ सबसे कठिन

ऊपर की तालिका से
अपनी राशि में बलवानमेष, कर्क और कुंभ लग्न, जहाँ ये उच्च के या अपनी राशि में बैठते हैं
लग्न के लिए शुभमेष, कर्क, सिंह, धनु और मीन लग्न, जिनके लिए पराशर इन्हें शुभ या योगकारक मानते हैं
राशि में कमज़ोरतुला लग्न, जहाँ ये नीच के हैं
सबसे कठिन मेलकन्या और तुला लग्न: लग्न के लिए कठिन ग्रह, और शत्रु की या नीच राशि में

जब मंगल आपकी चंद्र राशि से दसवें भाव में गोचर करें

मंगल का गोचर, जन्म कुंडली नहीं

यह ऊपर की जन्म-स्थिति नहीं: यहाँ मंगल आपकी चंद्र राशि से गिनकर दसवें भाव से गुज़र रहे हैं। फलदीपिका दसवें भाव को मंगल के गोचर के शुभ भावों में नहीं गिनती (बारहों भाव, मंगल के पेज पर)। हमारी मासिक भविष्यवाणी इसे मिला-जुला पढ़ती है: काम में जोश और महत्वाकांक्षा; मेहनत का फल, बड़ों से टकराव से बचें।

दूसरे भावों में मंगल

क्या आपकी कुंडली में मंगल दसवें भाव में हैं?एस्ट्रो व्यास इसे आपके लग्न, राशि और दशा के साथ पढ़ते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

3 सवाल
क्या दसवें भाव में मंगल शुभ हैं?

लाल किताब इसे शुभ स्थिति मानती है; मंगल जिन 6 भावों में अच्छा फल देते हैं, यह उनमें से एक है (बाक़ी पहले, तीसरे, पाँचवें, छठे और ग्यारहवें भाव)। मेष, कर्क और कुंभ लग्न के लिए ये राशि से सबसे बलवान हैं; तुला लग्न के लिए नीच के।

दसवें भाव में मंगल का लाल किताब उपाय क्या है?

लाल किताब इसके लिए यह उपाय देती है: काम की जगह पर कोई सफ़ेद चीज़ रखें।

दसवें भाव से मंगल किन भावों को देखते हैं?

पहले (आप ख़ुद), चौथे (माता) और पाँचवें (संतान) भाव को।

ग्रह का अर्थ सबके लिए एक है, पर आपकी कुंडली सिर्फ़ आपकी है।

आपकी कुंडली में हर ग्रह कहाँ बैठे हैं, आपके लग्न के लिए किन भावों के स्वामी हैं और कौन-सी दशा चल रही है, इसी से तय होता है कि वे आपके लिए क्या करेंगे। सभी नौ ग्रह देखने के लिए अपनी मुफ़्त कुंडली बनाएँ।

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