2028 के अंत तक बुध कब-कब वक्री और मार्गी होंगे, किस राशि में, और उस समय के लिए परंपरा के उपाय।
बुध 24 अक्टूबर 2026 से तुला में वक्री हैं और 13 नवंबर 2026 को मार्गी होंगे, यानी सीधी चाल चलने लगेंगे।
| वक्री | मार्गी | राशि | अवधि |
|---|---|---|---|
| 24 अक्टूबर 2026 | 13 नवंबर 2026 | तुला | 20 दिन |
| 9 फ़रवरी 2027 | 3 मार्च 2027 | कुंभ से वापस मकर | 22 दिन |
| 10 जून 2027 | 5 जुलाई 2027 | मिथुन | 25 दिन |
| 7 अक्टूबर 2027 | 28 अक्टूबर 2027 | तुला से वापस कन्या | 21 दिन |
| 24 जनवरी 2028 | 14 फ़रवरी 2028 | मकर | 21 दिन |
| 21 मई 2028 | 14 जून 2028 | वृषभ | 24 दिन |
| 19 सितंबर 2028 | 11 अक्टूबर 2028 | कन्या | 22 दिन |
तारीख़ें भारतीय समय में, पंचांग की गणना से हैं: ये वे दिन हैं जब ग्रह रुककर उल्टा या फिर सीधा चलने लगते हैं। हर तारीख़ के आगे-पीछे कुछ दिन ग्रह धीमे चलते हैं।
24 अक्टूबर 2026 से तुला में बुध के वक्री रहते: फलदीपिका इनके गोचर को वृषभ, कर्क, कन्या, धनु, मकर और मीन चंद्र राशि के लिए शुभ मानती है, और मेष, मिथुन, सिंह, तुला, वृश्चिक और कुंभ चंद्र राशि के लिए सावधानी माँगती है।
9 फ़रवरी 2027 से कुंभ में बुध के वक्री रहते: फलदीपिका इनके गोचर को मेष, वृषभ, कर्क, कन्या, वृश्चिक और मकर चंद्र राशि के लिए शुभ मानती है, और मिथुन, सिंह, तुला, धनु, कुंभ और मीन चंद्र राशि के लिए सावधानी माँगती है।
10 जून 2027 से मिथुन में बुध के वक्री रहते: फलदीपिका इनके गोचर को वृषभ, सिंह, कन्या, वृश्चिक, मकर और मीन चंद्र राशि के लिए शुभ मानती है, और मेष, मिथुन, कर्क, तुला, धनु और कुंभ चंद्र राशि के लिए सावधानी माँगती है।
दशा में पराशर ग्रह के फल का समय उनके द्रेष्काण (राशि का तीसरा भाग) से बताते हैं: पहले द्रेष्काण का फल दशा के आरंभ में, दूसरे का मध्य में और तीसरे का अंत में। ग्रह वक्री हों तो यह क्रम उलट जाता है। राहु और केतु सदा वक्री रहते हैं, इसलिए उनका फल सदा उलटे क्रम में मिलता है। बृहत् पाराशर होरा शास्त्र 47.3–4
ग्रह उन भावों के ज़रिए फल देते हैं जिनके वे स्वामी हैं और जिस भाव में बैठे हैं, और वक्री ग्रह बलवान माने जाते हैं। इसलिए वक्री बुध उन बातों को सामने लाते हैं जो आपके लग्न के लिए इनके अपने भावों की हैं, और उस भाव की जिसमें ये वक्री होकर लौटते हैं। तालिका दोनों बताती है, आगे की उन 3 राशियों के लिए जिनमें ये वक्री होंगे। बाद की अवधियाँ भी इसी तरह पढ़ी जाती हैं।
| लग्न | किन भावों के स्वामी | इस लग्न के लिए | तुला में वक्री, 24 अक्टूबर 2026 से | कुंभ में वक्री, 9 फ़रवरी 2027 से | मिथुन में वक्री, 10 जून 2027 से |
|---|---|---|---|---|---|
| मेष | तीसरे और छठे भाव | अशुभ | आपका सातवाँ भाव (शादी) | आपका ग्यारहवाँ भाव (आमदनी) | आपका तीसरा भाव (छोटे भाई-बहन) |
| वृषभ | दूसरे और पाँचवें भाव | कुछ अशुभ | आपका छठा भाव (रोग) | आपका दसवाँ भाव (करियर) | आपका दूसरा भाव (जमा धन) |
| मिथुन | पहले और चौथे भाव | लग्नेश | आपका पाँचवाँ भाव (संतान) | आपका नौवाँ भाव (भाग्य) | आपका पहला भाव (आप ख़ुद) |
| कर्क | तीसरे और बारहवें भाव | अशुभ | आपका चौथा भाव (माता) | आपका आठवाँ भाव (आयु) | आपका बारहवाँ भाव (ख़र्च) |
| सिंह | दूसरे और ग्यारहवें भाव | अशुभ | आपका तीसरा भाव (छोटे भाई-बहन) | आपका सातवाँ भाव (शादी) | आपका ग्यारहवाँ भाव (आमदनी) |
| कन्या | पहले और दसवें भाव | शुभ | आपका दूसरा भाव (जमा धन) | आपका छठा भाव (रोग) | आपका दसवाँ भाव (करियर) |
| तुला | नौवें और बारहवें भाव | शुभ | आपका पहला भाव (आप ख़ुद) | आपका पाँचवाँ भाव (संतान) | आपका नौवाँ भाव (भाग्य) |
| वृश्चिक | आठवें और ग्यारहवें भाव | अशुभ | आपका बारहवाँ भाव (ख़र्च) | आपका चौथा भाव (माता) | आपका आठवाँ भाव (आयु) |
| धनु | सातवें और दसवें भाव | शुभ | आपका ग्यारहवाँ भाव (आमदनी) | आपका तीसरा भाव (छोटे भाई-बहन) | आपका सातवाँ भाव (शादी) |
| मकर | छठे और नौवें भाव | शुभ | आपका दसवाँ भाव (करियर) | आपका दूसरा भाव (जमा धन) | आपका छठा भाव (रोग) |
| कुंभ | पाँचवें और आठवें भाव | तटस्थ | आपका नौवाँ भाव (भाग्य) | आपका पहला भाव (आप ख़ुद) | आपका पाँचवाँ भाव (संतान) |
| मीन | चौथे और सातवें भाव | अशुभ · मारक | आपका आठवाँ भाव (आयु) | आपका बारहवाँ भाव (ख़र्च) | आपका चौथा भाव (माता) |
तालिका के नाम, बृहत् पाराशर होरा शास्त्र, अध्याय 34 से:
आज कई ज्योतिषी वक्री बुध को ऐसे पढ़ते हैं; यह आधुनिक पढ़त है, शास्त्रों की नहीं। मंत्र, दान और लाल किताब के उपाय परंपरा के हैं। आपकी कुंडली में बुध कहाँ हैं, इससे तय होता है कि यह समय आप पर कितना असर डालेगा।
आगे: 24 अक्टूबर 2026 से 13 नवंबर 2026 तक, तुला में।
9 फ़रवरी 2027 से 3 मार्च 2027 तक, कुंभ से वापस मकर में; 10 जून 2027 से 5 जुलाई 2027 तक, मिथुन में; 7 अक्टूबर 2027 से 28 अक्टूबर 2027 तक, तुला से वापस कन्या में।
24 जनवरी 2028 से 14 फ़रवरी 2028 तक, मकर में; 21 मई 2028 से 14 जून 2028 तक, वृषभ में; 19 सितंबर 2028 से 11 अक्टूबर 2028 तक, कन्या में।
वक्री ग्रह पृथ्वी से देखने पर उल्टी दिशा में चलता दिखता है। शास्त्र वक्री बुध को कमज़ोर नहीं, बलवान मानते हैं: उन्हें चेष्टा बल, यानी गति का बल, मिलता है (फलदीपिका 4.4, बृहत् पाराशर होरा शास्त्र 27.21–23)।
आपकी कुंडली में हर ग्रह कहाँ बैठे हैं, आपके लग्न के लिए किन भावों के स्वामी हैं और कौन-सी दशा चल रही है, इसी से तय होता है कि वे आपके लिए क्या करेंगे। सभी नौ ग्रह देखने के लिए अपनी मुफ़्त कुंडली बनाएँ।
मुफ़्त कुंडली बनाएँ

