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नई दिल्ली · व्रत

अमावस्या 2026
अगली: सोमवती अमावस्या, सोमवार, 9 नवंबर

अमावस्या नया चाँद है, कृष्ण पक्ष की आख़िरी तिथि।

पितरआगे की 16 तारीख़ेंपूर्णिमांत
अगली अमावस्या · नई दिल्लीसोमवार, 9 नवंबरसोमवती अमावस्या · कार्तिक अमावस्या
अमावस्या शुरू
8 नवंबर, सुबह 11:28
अमावस्या समाप्त
9 नवंबर, दोपहर 12:32
उसके बाद · नई दिल्लीमंगलवार, 8 दिसंबरअगहन अमावस्या · अगहन अमावस्या
अमावस्या शुरू
8 दिसंबर, सुबह 4:13
अमावस्या समाप्त
9 दिसंबर, सुबह 6:21

नई दिल्ली के लिए, भारतीय समय में। तिथि हर जगह एक ही क्षण शुरू और ख़त्म होती है; व्रत का दिन और उसके समय नई दिल्ली के हैं, और विदेश में एक दिन आगे-पीछे हो सकते हैं।

अमावस्या की तारीख़ें

जनवरी 2028 तक, तिथि के समय के साथ
नवंबर 2026
9सोमसोमवती अमावस्या दिवाली, 8 नवंबरअमावस्या 8 नवंबर, सुबह 11:28 से 9 नवंबर, दोपहर 12:32 तक
दिसंबर 2026
8मंगलअगहन अमावस्याअमावस्या 8 दिसंबर, सुबह 4:13 से 9 दिसंबर, सुबह 6:21 तक
जनवरी 2027
7गुरुपौष अमावस्याअमावस्या 6 जनवरी, रात 11:14 से 7–8 जनवरी की रात 1:54 तक
फ़रवरी 2027
6शनिशनि अमावस्या मौनी अमावस्याअमावस्या 5 फ़रवरी, शाम 7:05 से 6 फ़रवरी, रात 9:26 तक
मार्च 2027
8सोमसोमवती अमावस्याअमावस्या 7 मार्च, दोपहर 1:46 से 8 मार्च, दोपहर 2:59 तक
अप्रैल 2027
6मंगलचैत्र अमावस्याअमावस्या 6 अप्रैल, सुबह 5:40 से 7 अप्रैल, सुबह 5:21 तक
मई 2027
6गुरुवैशाख अमावस्याअमावस्या 5 मई, शाम 6:17 से 6 मई, शाम 4:28 तक
जून 2027
4शुक्रज्येष्ठ अमावस्या वट सावित्री व्रत शनि जयंतीअमावस्या 4 जून, सुबह 4:05 से 4–5 जून की रात 1:10 तक
जुलाई 2027
4रविआषाढ़ अमावस्याअमावस्या 3 जुलाई, दोपहर 12:06 से 4 जुलाई, सुबह 8:32 तक
अगस्त 2027
2सोमहरियाली अमावस्याअमावस्या 1 अगस्त, शाम 7:20 से 2 अगस्त, दोपहर 3:35 तक
31मंगलभादों अमावस्याअमावस्या 30–31 अगस्त की रात 2:41 से 31 अगस्त, रात 11:11 तक
सितंबर 2027
29बुधसर्व पितृ अमावस्याअमावस्या 29 सितंबर, सुबह 10:55 से 30 सितंबर, सुबह 8:06 तक
अक्टूबर 2027
29शुक्रकार्तिक अमावस्या दिवालीअमावस्या 28 अक्टूबर, रात 8:48 से 29 अक्टूबर, शाम 7:06 तक
नवंबर 2027
28रविअगहन अमावस्याअमावस्या 27 नवंबर, सुबह 9:07 से 28 नवंबर, सुबह 8:54 तक
दिसंबर 2027
27सोमसोमवती अमावस्याअमावस्या 26–27 दिसंबर की रात 12:23 से 27–28 दिसंबर की रात 1:42 तक
जनवरी 2028
26बुधमाघ अमावस्या मौनी अमावस्याअमावस्या 25 जनवरी, शाम 6:17 से 26 जनवरी, रात 8:42 तक
अमावस्या रख रहे हैं?हमारे मुहूर्त ज्योतिषी एस्ट्रो मुहूर्त से व्रत, उसकी पूजा और अपने शहर के समय के बारे में पूछें।

अमावस्या क्या है

यह पितरों का दिन है: तर्पण, श्राद्ध और दान का। नई शुरुआत के लिए इसे नहीं चुना जाता। सोमवार की अमावस्या सोमवती अमावस्या है, शनिवार की शनि अमावस्या, और कुछ के अपने नाम हैं: माघ में मौनी अमावस्या, सावन में हरियाली अमावस्या, पितृ पक्ष के अंत में सर्व पितृ अमावस्या, और कार्तिक में दिवाली।

तारीख़ कैसे तय होती है

तारीख़ वह दिन है जिस दिन सूर्योदय पर अमावस्या हो, हर पंचांग में महीने की अमावस्या, और सुबह के स्नान-दान का दिन; किसी सूर्योदय पर न हो तो जिस दिन शुरू हो। सर्व पितृ अमावस्या श्राद्ध है और अपराह्न की अमावस्या से मानी जाती है, जो एक दिन पहले हो सकती है। दिवाली की लक्ष्मी पूजा शाम की अमावस्या में होती है, इसलिए वह यहाँ दी अमावस्या से एक दिन पहले पड़ सकती है।

व्रत विधि

  • जल्दी स्नान करें, हो सके तो नदी में, नहीं तो पानी में गंगाजल डालकर।
  • पितरों को तर्पण दें: काले तिल और कुशा के साथ जल, दक्षिण की ओर मुँह करके।
  • अन्न, कपड़े या काले तिल का दान करें, और परंपरा के अनुसार गाय, कौवे, कुत्ते और चींटियों को भोजन दें।
  • शाम को पीपल के पेड़ पर जल चढ़ाएँ और वहाँ दीपक जलाएँ; शनि अमावस्या को सरसों के तेल का दीपक।

क्या खाएँ

  • सादा सात्विक भोजन, या तर्पण होने तक व्रत

किन चीज़ों से बचें

  • मांस, अंडा, शराब और तंबाकू
  • परंपरा के अनुसार नया काम, ख़रीदारी या यात्रा शुरू करना

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

5 सवाल
अगली अमावस्या कब है?

सोमवती अमावस्या, सोमवार, 9 नवंबर 2026 को, नई दिल्ली में। अमावस्या 8 नवंबर, सुबह 11:28 से 9 नवंबर, दोपहर 12:32 तक रहेगी।

नवंबर 2026 में अमावस्या कब है?

नई दिल्ली में सोमवती अमावस्या सोमवार, 9 नवंबर को।

दिसंबर 2026 में अमावस्या कब है?

नई दिल्ली में अगहन अमावस्या मंगलवार, 8 दिसंबर को।

क्या अमावस्या अशुभ होती है?

यह दुर्भाग्य का दिन नहीं है। यह पितरों का दिन है, तर्पण, दान और शांत पूजा के लिए, इसलिए परंपरा इसे शादी, गृह प्रवेश या नए काम जैसी शुरुआत के लिए नहीं चुनती।

सोमवती अमावस्या क्या है?

सोमवार को पड़ने वाली अमावस्या। सुहागिनें पीपल की पूजा और परिक्रमा करती हैं, और नदी में स्नान का विशेष पुण्य माना जाता है। शनिवार की अमावस्या शनि अमावस्या है, जिसमें सरसों के तेल का दीपक और शनि के लिए दान होता है।

व्रत का दिन सबके लिए एक होता है, पर हर किसी की कुंडली अलग होती है।

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