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नई दिल्ली · व्रत

एकादशी 2026
अगली: रमा एकादशी, गुरुवार, 5 नवंबर

एकादशी हर पक्ष की ग्यारहवीं तिथि है, महीने में दो बार: एक शुक्ल पक्ष में, जब चंद्रमा बढ़ता है, और एक कृष्ण पक्ष में, जब घटता है।

विष्णुआगे की 31 तारीख़ेंपूर्णिमांत
अगली एकादशी · नई दिल्लीगुरुवार, 5 नवंबररमा एकादशी · कार्तिक कृष्ण एकादशी
एकादशी शुरू
4 नवंबर, सुबह 11:03
एकादशी समाप्त
5 नवंबर, सुबह 10:36
पारण (व्रत खोलने का समय)
6 नवंबर, सुबह 6:37 से 8:47 तक
उसके बाद · नई दिल्लीशुक्रवार, 20 नवंबरदेवउठनी एकादशी · कार्तिक शुक्ल एकादशी
एकादशी शुरू
20 नवंबर, सुबह 7:16
एकादशी समाप्त
21 नवंबर, सुबह 6:31
पारण (व्रत खोलने का समय)
21 नवंबर, दोपहर 1:11 से 3:18 तक
हरि वासर (द्वादशी का पहला चौथाई भाग) समाप्त
21 नवंबर, दोपहर 12:09

नई दिल्ली के लिए, भारतीय समय में। तिथि हर जगह एक ही क्षण शुरू और ख़त्म होती है; व्रत का दिन और उसके समय नई दिल्ली के हैं, और विदेश में एक दिन आगे-पीछे हो सकते हैं।

एकादशी की तारीख़ें

जनवरी 2028 तक, तिथि के समय के साथ
एकादशी रख रहे हैं?हमारे मुहूर्त ज्योतिषी एस्ट्रो मुहूर्त से व्रत, उसकी पूजा और अपने शहर के समय के बारे में पूछें।

26 एकादशियाँ

हर एक की तारीख़, पारण और कथा
5नवंबररमा एकादशीकार्तिक कृष्ण एकादशीगुरुवार, 5 नवंबर 202620नवंबरदेवउठनी एकादशीकार्तिक शुक्ल एकादशीशुक्रवार, 20 नवंबर 20264दिसंबरउत्पन्ना एकादशीअगहन कृष्ण एकादशीशुक्रवार, 4 दिसंबर 202620दिसंबरमोक्षदा एकादशीअगहन शुक्ल एकादशीरविवार, 20 दिसंबर 20263जनवरीसफला एकादशीपौष कृष्ण एकादशीरविवार, 3 जनवरी 202718जनवरीपौष पुत्रदा एकादशीपौष शुक्ल एकादशीसोमवार, 18 जनवरी 20272फ़रवरीषटतिला एकादशीमाघ कृष्ण एकादशीमंगलवार, 2 फ़रवरी 202717फ़रवरीजया एकादशीमाघ शुक्ल एकादशीबुधवार, 17 फ़रवरी 20274मार्चविजया एकादशीफाल्गुन कृष्ण एकादशीगुरुवार, 4 मार्च 202718मार्चआमलकी एकादशीफाल्गुन शुक्ल एकादशीगुरुवार, 18 मार्च 20272अप्रैलपापमोचनी एकादशीचैत्र कृष्ण एकादशीशुक्रवार, 2 अप्रैल 202717अप्रैलकामदा एकादशीचैत्र शुक्ल एकादशीशनिवार, 17 अप्रैल 20272मईवरूथिनी एकादशीवैशाख कृष्ण एकादशीरविवार, 2 मई 202716मईमोहिनी एकादशीवैशाख शुक्ल एकादशीरविवार, 16 मई 20271जूनअपरा एकादशीज्येष्ठ कृष्ण एकादशीमंगलवार, 1 जून 202714जूननिर्जला एकादशीज्येष्ठ शुक्ल एकादशीसोमवार, 14 जून 202730जूनयोगिनी एकादशीआषाढ़ कृष्ण एकादशीबुधवार, 30 जून 202714जुलाईदेवशयनी एकादशीआषाढ़ शुक्ल एकादशीबुधवार, 14 जुलाई 202729जुलाईकामिका एकादशीसावन कृष्ण एकादशीगुरुवार, 29 जुलाई 202712अगस्तश्रावण पुत्रदा एकादशीसावन शुक्ल एकादशीगुरुवार, 12 अगस्त 202728अगस्तअजा एकादशीभादों कृष्ण एकादशीशनिवार, 28 अगस्त 202711सितंबरपरिवर्तिनी एकादशीभादों शुक्ल एकादशीशनिवार, 11 सितंबर 202726सितंबरइंदिरा एकादशीआश्विन कृष्ण एकादशीरविवार, 26 सितंबर 202711अक्टूबरपापांकुशा एकादशीआश्विन शुक्ल एकादशीसोमवार, 11 अक्टूबर 202726मार्चपद्मिनी एकादशीअधिक चैत्र शुक्ल एकादशीसोमवार, 26 मार्च 20299अप्रैलपरमा एकादशीअधिक चैत्र कृष्ण एकादशीसोमवार, 9 अप्रैल 2029

एकादशी क्या है

चौबीसों का अपना नाम और अपनी कथा है, और अधिक मास वाले साल में दो और आती हैं, पद्मिनी और परमा। यह विष्णु का व्रत है, और उत्तर भारत के घरों में सबसे ज़्यादा रखा जाने वाला व्रत।

व्रत एकादशी के सूर्योदय से अगले दिन, द्वादशी के पारण तक चलता है। इसे सही समय पर खोलना उतना ही ज़रूरी है जितना रखना, इसीलिए यहाँ हर तारीख़ के साथ पारण का समय दिया है।

तारीख़ कैसे तय होती है

व्रत उस दिन रखा जाता है जिस दिन सूर्योदय पर एकादशी हो। दो सूर्योदय पर हो तो दूसरे दिन; किसी पर न हो (क्षय तिथि) तो जिस दिन शुरू हो; और उसके बाद की द्वादशी क्षय हो तो एक दिन पहले, ताकि पारण द्वादशी में हो सके। यह स्मार्त दिन है, जो परिवार रखते हैं। कुछ पंचांग कुछ महीनों में संन्यासियों और वैष्णवों के लिए एक दूसरा, वैष्णव दिन भी देता है; वह यहाँ नहीं दिया है।

पारण द्वादशी को, सूर्योदय के बाद, और द्वादशी ख़त्म होने से पहले होता है। हरि वासर में नहीं, जो द्वादशी का पहला चौथाई भाग है। सबसे अच्छा समय प्रातःकाल है, दिन का पहला पाँचवाँ हिस्सा; हरि वासर उससे आगे चले तो पारण मध्याह्न, यानी बीच के पाँचवें हिस्से, के बाद होता है, क्योंकि दोपहर में व्रत खोलना टाला जाता है। समय मिनट तक अंदर की ओर गोल किए गए हैं, ताकि पारण न हरि वासर में शुरू हो, न द्वादशी के बाद ख़त्म।

व्रत विधि

  • दशमी को, यानी एक दिन पहले, सूर्यास्त से पहले एक बार सादा सात्विक भोजन करें, चावल के बिना, ताकि व्रत हल्के पेट से शुरू हो।
  • एकादशी को जल्दी स्नान करके संकल्प लें: विष्णु के सामने कहें कि आप व्रत रख रहे हैं, और कैसे (निर्जला, जल के साथ, या फलाहार)। यह शुरू करने से पहले तय कर लें।
  • तुलसी दल, पीले फूल, पंचामृत, फल और घी के दीपक से विष्णु या श्री कृष्ण की पूजा करें। तुलसी एक दिन पहले तोड़ लें: एकादशी को तुलसी नहीं तोड़ी जाती।
  • उस दिन की कथा पढ़ें या सुनें, और “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” या विष्णु सहस्रनाम का जाप करें। रात को भजन में जागना (जागरण) व्रत का सबसे पूरा रूप है।
  • द्वादशी को सुबह की पूजा के बाद किसी ब्राह्मण या ज़रूरतमंद को भोजन या दान दें, और पारण के समय में, भगवान को चढ़ाए प्रसाद में से थोड़ा लेकर व्रत खोलें।

क्या खाएँ

  • फल, दूध, दही, पनीर और मखाना
  • साबूदाना, कुट्टू, सिंघाड़े और राजगिरा का आटा
  • सामक (समा) के चावल, आलू, शकरकंद और अरबी
  • मूंगफली, सूखे मेवे, और सादे नमक की जगह सेंधा नमक

किन चीज़ों से बचें

  • सबसे पहले चावल, और हर अनाज: गेहूँ, मक्का, बाजरा
  • दाल और दूसरी दलहन
  • प्याज़, लहसुन, और सादा नमक
  • मांस, अंडा, शराब और तंबाकू

परंपरा एकादशी की थाली से अनाज, सबसे पहले चावल, को बाहर रखती है। बीमार, गर्भवती, बुज़ुर्ग या दवा लेने वालों के लिए फलाहार या एक बार भोजन वाला व्रत पुराने समय से मान्य है: भूख से ज़्यादा संकल्प मायने रखता है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

8 सवाल
अगली एकादशी कब है?

रमा एकादशी, गुरुवार, 5 नवंबर 2026 को, नई दिल्ली में। एकादशी 4 नवंबर, सुबह 11:03 से 5 नवंबर, सुबह 10:36 तक रहेगी। पारण (व्रत खोलने का समय): 6 नवंबर, सुबह 6:37 से 8:47 तक।

नवंबर 2026 में एकादशी कब है?

नई दिल्ली में रमा एकादशी गुरुवार, 5 नवंबर को और देवउठनी एकादशी शुक्रवार, 20 नवंबर को।

दिसंबर 2026 में एकादशी कब है?

नई दिल्ली में उत्पन्ना एकादशी शुक्रवार, 4 दिसंबर को और मोक्षदा एकादशी रविवार, 20 दिसंबर को।

क्या एकादशी पर पानी पी सकते हैं?

हाँ, अगर आपने निर्जला का संकल्प नहीं लिया है। ज़्यादातर परिवार एकादशी जल और फलाहार के साथ रखते हैं; परंपरा में सिर्फ़ ज्येष्ठ की निर्जला एकादशी बिना पानी के रखी जाती है। कौन-सा व्रत रख रहे हैं, यह संकल्प के समय तय करें।

एकादशी पर चावल क्यों नहीं खाते?

परंपरा एकादशी के व्रत से हर अनाज को, और सबसे पहले चावल को, दूर रखती है; पुराण कहते हैं कि इस दिन पाप अन्न में आश्रय लेता है। जो व्रत नहीं रखते, वे भी आमतौर पर उस दिन चावल नहीं खाते।

पारण क्या है, और समय छूट जाए तो?

पारण का मतलब है द्वादशी को, हर तारीख़ के साथ दिए समय में, व्रत खोलना। समय निकल जाए तो द्वादशी रहते जितनी जल्दी हो सके, जल और थोड़े प्रसाद से व्रत खोलें। परंपरा में दोष द्वादशी ख़त्म होने के बाद व्रत खोलना माना जाता है।

कुछ कैलेंडरों में एकादशी दो दिन क्यों दिखती है?

जब एकादशी दो सूर्योदय छूती है, या उसकी द्वादशी बहुत छोटी होती है, तो कैलेंडर परिवारों के लिए स्मार्त दिन और संन्यासियों व वैष्णवों के लिए एक दूसरा, वैष्णव दिन देते हैं (इस्कॉन अपनी सूची मानता है)। इस पेज की तारीख़ें स्मार्त दिन की हैं।

साल में कितनी एकादशी होती हैं?

चौबीस, हर चंद्र मास में दो, और अधिक मास वाले साल में छब्बीस, जिनमें दो अधिक मास की पद्मिनी और परमा होती हैं।

व्रत का दिन सबके लिए एक होता है, पर हर किसी की कुंडली अलग होती है।

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