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केतु · शुक्र

केतु महादशा में शुक्र अंतर्दशा

केतु महादशा में शुक्र की अंतर्दशा 1 वर्ष 2 माह चलती है। यह नौ में से दूसरी अंतर्दशा है, और महादशा शुरू होने के 4 माह 27 दिन बाद आती है।

केतु महादशा, 120 वर्ष के विंशोत्तरी दशा चक्र में बाक़ी आठ के साथकेतु महादशा, 120 वर्ष के विंशोत्तरी दशा चक्र में बाक़ी आठ के साथ

यह कितने समय चलती है

केतु के 7 वर्ष × शुक्र के 20 वर्ष ÷ 120

1 वर्ष 2 माह · 426 दिन

इससे पहले केतु की अंतर्दशा चलती है, और इसके बाद सूर्य की।

  1. केतु–केतु4 माह 27 दिन · 149 दिन
  2. केतु–शुक्र1 वर्ष 2 माह · 426 दिन
  3. केतु–सूर्य4 माह 6 दिन · 128 दिन
  4. केतु–चंद्र7 माह · 213 दिन
  5. केतु–मंगल4 माह 27 दिन · 149 दिन
  6. केतु–राहु1 वर्ष 18 दिन · 384 दिन
  7. केतु–गुरु11 माह 6 दिन · 341 दिन
  8. केतु–शनि1 वर्ष 1 माह 9 दिन · 405 दिन
  9. केतु–बुध11 माह 27 दिन · 362 दिन

दोनों ग्रहों का आपसी रिश्ता

केतु और शुक्र एक-दूसरे को न मित्र मानते हैं, न शत्रु; ज्योतिष में इसे सम कहते हैं। केतु–शुक्र की दशा पढ़ते समय शुरुआत इसी नैसर्गिक संबंध से होती है; यह दशा क्या लाएगी, यह इस पर निर्भर है कि आपकी कुंडली में केतु और शुक्र कहाँ बैठे हैं। राहु और केतु की मित्रता पर ग्रंथ एकमत नहीं हैं; यहाँ की कुंडली यही तालिका मानती है।

केतु महादशा के विषय

छोड़ना, अंतर्मुखता और अचानक घटनाएँ

शुक्र की अंतर्दशा इनमें जोड़ती है

विवाह, सुख-सुविधा और कला

जीवन में इसका असर

केतु–शुक्र का असर, एक-एक क्षेत्र में, सीधे शब्दों में; नीचे दिए पराशर के श्लोकों से

क्षेत्रश्लोक क्या कहते हैं
काम और प्रतिष्ठाशुभ हो तो: सत्ता की कृपा और खोया हुआ पद-अधिकार लौटता है; कठिन हो तो: बदनामी होती है।
धन और संपत्तिशुभ हो तो: वस्त्र, वाहन, भूमि, संपत्ति और अच्छा भोजन मिलता है; कठिन हो तो: धन की हानि और पशुधन को कष्ट होता है।
परिवारशुभ हो तो: परिवार में सुख रहता है; कठिन हो तो: बिना कारण झगड़े, संबंधियों से झगड़े और जीवनसाथी को कष्ट होता है।
सेहतशुभ हो तो: स्वास्थ्य अच्छा रहता है; कठिन हो तो: सिरदर्द, नेत्र रोग, हृदय रोग और मानसिक पीड़ा होती है।
धर्म और यात्राशुभ हो तो: तीर्थयात्रा और भाग्योदय होता है।

पराशर क्या कहते हैं

बृहत् पाराशर होरा शास्त्र, अध्याय 59, श्लोक 7–15

पराशर केतु महादशा में शुक्र की अंतर्दशा का फल शुक्र की स्थिति से बताते हैं: लग्न से और केतु से गिनकर, और शुक्र किन भावों के स्वामी हैं, इससे; आप पर कौन-सी बात लागू होती है, यह आपकी कुंडली बताती है, और ग्रंथ भले ही पुरुष जातक की बात करता हो, इसके फल हर किसी पर लागू होते हैं।

जब यह शुभ फल देती है

  • शुक्र उच्च राशि या स्वराशि में हों, या दसवें भाव के स्वामी के साथ केंद्र (पहले, चौथे, सातवें या दसवें भाव) या त्रिकोण (पहले, पाँचवें या नौवें भाव) में हों, तो पराशर के अनुसार इस अंतर्दशा में सत्ता में बैठे लोगों की कृपा और सौभाग्य मिलता है, वस्त्र मिलते हैं, खोया हुआ पद या अधिकार लौटता है, वाहन का सुख मिलता है, तीर्थयात्रा होती है, और सत्ता की कृपा से भूमि या संपत्ति मिलती है।श्लोक 59.7–9½
  • ऊपर की तरह केंद्र (पहले, चौथे, सातवें या दसवें भाव) या त्रिकोण (पहले, पाँचवें या नौवें भाव) में दसवें भाव के स्वामी के साथ बैठे शुक्र नौवें भाव के स्वामी के साथ भी हों, तो पराशर के अनुसार इस अंतर्दशा में भाग्योदय होता है।श्लोक 59.7–9½
  • महादशा के स्वामी केतु से गिनने पर शुक्र केंद्र (पहले, चौथे, सातवें या दसवें स्थान), त्रिकोण (पहले, पाँचवें या नौवें स्थान), या तीसरे अथवा ग्यारहवें स्थान में हों, तो पराशर के अनुसार इस अंतर्दशा में स्वास्थ्य अच्छा रहता है, परिवार में सुख रहता है, और अच्छा भोजन व वाहन मिलते हैं।श्लोक 59.10–11

जब यह कठिन होती है

  • महादशा के स्वामी केतु से गिनने पर शुक्र छठे, आठवें या बारहवें स्थान में हों, तो पराशर बिना कारण के झगड़े, धन हानि और पशुधन को कष्ट की चेतावनी देते हैं।श्लोक 59.12
  • शुक्र नीच राशि (जहाँ ग्रह सबसे निर्बल होते हैं) में हों, किसी नीच ग्रह के साथ हों, या छठे अथवा आठवें भाव में हों, तो पराशर संबंधियों से झगड़े, सिरदर्द, नेत्र रोग, हृदय रोग, बदनामी, धन हानि, और पशुधन तथा जीवनसाथी को कष्ट की चेतावनी देते हैं।श्लोक 59.13–14

पराशर का उपाय

राहत के लिए बृहत् पाराशर होरा शास्त्र दुर्गा पाठ और कपिला गाय या भैंस का दान बताता है।

श्लोक 59.15

एक सावधानी: जब शुक्र आपकी कुंडली में दूसरे या सातवें भाव के स्वामी हों (ये मारक भाव हैं, जिन्हें शास्त्र प्राणों के संकट से जोड़ते हैं), तब बृहत् पाराशर होरा शास्त्र शारीरिक कष्ट और मानसिक पीड़ा की चेतावनी देता है और स्वास्थ्य का ध्यान रखने को कहता है। श्लोक 59.15

आपके लग्न के लिए केतु–शुक्र

हर लग्न के लिए शुक्र क्या हैं, जैसा पराशर ने बताया है; केतु अपनी राशि के स्वामी के अनुसार फल देते हैं

तालिका के नाम, बृहत् पाराशर होरा शास्त्र, अध्याय 34 से:

  • योगकारक: लग्न के सबसे शुभ ग्रह: जिन्हें पराशर योग देने वाले बताते हैं, या जो एक साथ केंद्र (पहले, चौथे, सातवें, दसवें) और त्रिकोण (पहले, पाँचवें, नौवें) भाव के स्वामी हों (34.13)
  • शुभ, अशुभ, तटस्थ: लग्न के पक्ष में; कठिन बातें लाने वाले; दोनों में से कोई नहीं
  • लग्नेश: लग्न के अपने स्वामी, जहाँ श्लोक इन्हें शुभ या अशुभ नहीं कहता
  • मारक: जिन्हें पराशर उस लग्न के लिए आयु और सेहत पर भारी बताते हैं; अकेले, या किसी और नाम के बाद लिखे जाते हैं। ये हमेशा दूसरे या सातवें भाव के स्वामी नहीं होते: जहाँ अलग हों, नीचे की पंक्ति श्लोक बताती है
  • · योग: उन दो ग्रहों में से एक जो इस लग्न के लिए साथ मिलकर योग देते हैं
लग्नशुक्र (किन भावों के स्वामी)
मेषअशुभ · मारक
दूसरे और सातवें भाव
वृषभअशुभ · मारक— लग्नेश, पर छठे भाव के स्वामी भी: अशुभ और मारक (34.23–24)
पहले और छठे भाव
मिथुनशुभ
पाँचवें और बारहवें भाव
कर्कअशुभ
चौथे और ग्यारहवें भाव
सिंहअशुभ
तीसरे और दसवें भाव
कन्याशुभ · मारक · योग— बुध के साथ योग देते हैं (34.32)
दूसरे और नौवें भाव
तुलातटस्थ— लग्नेश, जिन्हें श्लोक 34.34 तटस्थ कहता है
पहले और आठवें भाव
वृश्चिकअशुभ · मारक
सातवें और बारहवें भाव
धनुअशुभ · मारक— छठे और ग्यारहवें भाव के स्वामी, दूसरे या सातवें के नहीं; फिर भी श्लोक 34.37–38 इन्हें मारक कहता है
छठे और ग्यारहवें भाव
मकरयोगकारक
पाँचवें और दसवें भाव
कुंभयोगकारक
चौथे और नौवें भाव
मीनअशुभ
तीसरे और आठवें भाव

केतु किसी भाव के स्वामी नहीं, इसलिए कोई लग्न इन्हें अपने आप शुभ या अशुभ नहीं बनाता: ये जिस भाव में बैठें, उसका और उस राशि के स्वामी का फल देते हैं। कैसे, यह हर भाव में केतु वाले पेज पर देखें।

एक असली कुंडली पर

एक कुंडली जिसमें केतु–शुक्र 67 वर्ष की उम्र में आती है, उसी तरह पढ़ी हुई जैसे रिपोर्ट आपकी पढ़ती है

912361011124578केलशुगुबुसूचंमंशरा
25 जनवरी 1984, सुबह 6:15, दिल्ली · धनु लग्न · केतु और शुक्र के भाव रंगे हुए

जन्म कुंडली रिपोर्ट से

केतु महादशा मिला-जुला

केतु आपके बारहवें भाव में बैठे हैं: यह काल उसके विषयों को आगे लाता है — ख़र्च, नींद, परदेस और दान। छाया ग्रह (राहु और केतु) अपनी राशि के स्वामी का फल देते हैं: यहाँ मंगल, जो आपके पाँचवें और बारहवें भाव के स्वामी हैं और ग्यारहवें भाव में बैठे हैं। मिला-जुला — राशि के स्वामी अच्छी स्थिति में; दूसरी तरफ़: कठिन भाव।

शुक्र की अंतर्दशा मिला-जुला

इस कुंडली में यह 17 जनवरी 2052 – 19 मार्च 2053 चलती है, 67 से 69 वर्ष की उम्र तक। यहाँ इसकी अवधि ऊपर बताई अवधि से एक दिन कम-ज़्यादा हो सकती है, क्योंकि हर कुंडली की तारीख़ें दिन तक पूरी की जाती हैं।

शुक्र: छठे और ग्यारहवें भाव के स्वामी, पहले भाव में। यह लाती है: रोग, कर्ज़, विवाद और बिना श्रेय की मेहनत; आमदनी, लाभ, बड़े भाई-बहन और मददगार मित्र। मिला-जुला — केंद्र या त्रिकोण और नवांश में बलवान; दूसरी तरफ़: षड्बल कम।

षड्बल: ग्रह के बल का छह तरह से किया गया माप, जो रिपोर्ट निकालती है; “षड्बल कम” का अर्थ है कि ग्रह का बल ग्रंथों की माँग से कम है। नवांश: कुंडली का नौवाँ भाग-चार्ट, जिससे ग्रह का भीतरी बल देखा जाता है।

इसकी नौ प्रत्यंतर दशाएँ

केतु–शुक्र नौ प्रत्यंतर दशाओं में बँटती है, शुक्र की अपनी से शुरू होकर। हर अवधि उसके साथ लिखी तारीख़ों के बीच गिनी गई है, और किसी भी कुंडली में एक-आध दिन के अंतर से यही रहती है; तारीख़ें और फल इसी कुंडली के हैं।

प्रत्यंतरअवधिइस कुंडली मेंरिपोर्ट का फल
शुक्र2 माह 11 दिन17 जनवरी 2052 – 28 मार्च 2052मिला-जुला
सूर्य22 दिन28 मार्च 2052 – 19 अप्रैल 2052मिला-जुला
चंद्र1 माह 5 दिन19 अप्रैल 2052 – 24 मई 2052मिला-जुला
मंगल25 दिन24 मई 2052 – 18 जून 2052खुलती है
राहु2 माह 3 दिन18 जून 2052 – 21 अगस्त 2052सावधानी
गुरु1 माह 26 दिन21 अगस्त 2052 – 17 अक्टूबर 2052मिला-जुला
शनि2 माह 6 दिन17 अक्टूबर 2052 – 23 दिसंबर 2052मिला-जुला
बुध1 माह 30 दिन23 दिसंबर 2052 – 22 फ़रवरी 2053मिला-जुला
केतु25 दिन22 फ़रवरी 2053 – 19 मार्च 2053सावधानी

आपकी अपनी केतु–शुक्र की तारीख़ें दशा कैलकुलेटर मुफ़्त बताता है, और जन्म कुंडली रिपोर्ट आपकी अंतर्दशाएँ इसी तरह पढ़ती है, साथ में चल रही अंतर्दशा की प्रत्यंतर दशाएँ भी।

केतु–शुक्र में उपाय

शुक्र के महीनों के लिए सुझाव; आपको इनकी कितनी ज़रूरत है, यह आपकी कुंडली बताएगी

इस जोड़ी के लिए

पराशर केतु–शुक्र का अपना उपाय बताते हैं (श्लोक 59.15), जो ऊपर “पराशर का उपाय” में दिया है; पहले वही।

शुक्र का बीज मंत्र और दान

ॐ द्रां द्रीं द्रौं सः शुक्राय नमः

शुक्रवार को सफ़ेद वस्त्र और चावल का दान

शुक्र के सभी उपाय

शुक्र की किसी भी दशा में क्या करें और किससे बचें: शुक्र महादशा। इनके व्रत, रत्न, स्तोत्र और पूजा: शुक्र के उपाय।

मेरी चल रही दशा का मेरे लिए क्या मतलब है?आचार्य पराशर आपकी पूरी कुंडली देखकर आपकी महादशा और अंतर्दशा का फल बताते हैं।

आम सवाल

केतु महादशा में शुक्र की अंतर्दशा कितने समय चलती है?

1 वर्ष 2 माह (426 दिन): केतु के 7 वर्ष × शुक्र के 20 वर्ष ÷ 120। केतु महादशा शुरू होने के 4 माह 27 दिन बाद यह आती है।

केतु महादशा में शुक्र की अंतर्दशा अच्छी है या बुरी?

पहले से नहीं कहा जा सकता: यह आपके लग्न पर और इस पर निर्भर है कि आपकी कुंडली में केतु और शुक्र कहाँ बैठे हैं। केतु किसी लग्न के लिए अपने आप शुभ या अशुभ नहीं होते; ये जिस राशि में बैठें, उसके स्वामी का फल देते हैं। शुक्र मिथुन, कन्या, मकर, कुंभ लग्न के लिए शुभ हैं। मेष, वृषभ, कर्क, सिंह, वृश्चिक, धनु, मीन लग्न के लिए शुक्र कठिन हैं। स्वभाव से दोनों न मित्र, न शत्रु हैं। ऊपर की धनु लग्न वाली कुंडली पर जन्म कुंडली रिपोर्ट इसे “मिला-जुला” पढ़ती है, जैसा ऊपर उसके चिह्न में लिखा है।

केतु महादशा में शुक्र की अंतर्दशा की प्रत्यंतर दशाएँ कौन-सी हैं?

नौ, इस क्रम में: शुक्र, सूर्य, चंद्र, मंगल, राहु, गुरु, शनि, बुध, केतु। हर एक की अवधि = केतु–शुक्र की अवधि × प्रत्यंतर के ग्रह के वर्ष ÷ 120, इसलिए सबसे लंबी शुक्र की है, लगभग 2 माह 11 दिन, और सबसे छोटी सूर्य की, लगभग 22 दिन।

शुक्र की अंतर्दशा में कौन-सा उपाय मदद करता है?

पराशर इस अंतर्दशा का अपना उपाय भी बताते हैं (श्लोक 59.15), जो ऊपर “पराशर का उपाय” में दिया है। शुक्र का बीज मंत्र ॐ द्रां द्रीं द्रौं सः शुक्राय नमः और शुक्रवार को सफ़ेद वस्त्र और चावल का दान केतु–शुक्र के रोज़ के उपाय हैं, जहाँ आपकी कुंडली इनकी ज़रूरत दिखाए।

आपकी कौन-सी दशा चल रही है, यह आपकी कुंडली का तथ्य है।

यह जन्म के समय चंद्रमा के नक्षत्र से निकलती है। जन्म विवरण भरें, और पूरी 120 वर्ष की समय-रेखा आ जाएगी, हर दशा का फल आपकी कुंडली के हिसाब से।

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AI वैदिक ज्योतिषी। किसी भी भारतीय भाषा में चैट करें; कॉल हिंदी और अंग्रेज़ी में।ऐसे पूछें“मेरी कुंडली का पूरा और विस्तार से विश्लेषण कीजिए”“मेरी जन्म कुंडली में कौन-से दुर्लभ योग हैं?”“इस महीने की मेरी सूक्ष्म दशा का विश्लेषण कीजिए”चैट कॉल शुल्क हर मिनट के हिसाब से लगता है, और सिर्फ़ तब तक जब तक चैट या कॉल चालू रहे। जब चाहें बंद करें।

आपकी कुंडली से रिपोर्ट

9 विस्तृत रिपोर्ट, जिनमें जन्म कुंडली, कुंडली मिलान और वार्षिक भविष्यवाणी हैं।हिंदी, अंग्रेज़ी और हिंग्लिशरिपोर्ट देखें
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