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चक्र का 5.8%

केतु महादशा
7 वर्ष

केतु महादशा 7 वर्ष चलती है, और इससे इन बातों का विचार किया जाता है: छोड़ना, अंतर्मुखता और अचानक घटनाएँ। आपके लिए इसका फल इस पर निर्भर करता है कि आपकी कुंडली में केतु कहाँ बैठे हैं।

केतु महादशा, 120 वर्ष के विंशोत्तरी दशा चक्र में बाक़ी आठ के साथकेतु महादशा, 120 वर्ष के विंशोत्तरी दशा चक्र में बाक़ी आठ के साथ

चक्र में केतु महादशा

120 में से 7 वर्ष। यह बुध (17 वर्ष) के बाद और शुक्र (20 वर्ष) से पहले आती है। जन्म के समय चंद्रमा अश्विनी, मघा या मूल नक्षत्र में थे, तो आप इसी महादशा में जन्मे; ये तीनों नक्षत्र केतु के हैं।

केतु7 वर्ष
शुक्र20 वर्ष
सूर्य6 वर्ष
चंद्र10 वर्ष
मंगल7 वर्ष
राहु18 वर्ष
गुरु16 वर्ष
शनि19 वर्ष
बुध17 वर्ष

नौ अंतर्दशाएँ

हर अंतर्दशा की अवधि = 7 × उस ग्रह के वर्ष ÷ 120। सबसे लंबी केतु–शुक्र, सबसे छोटी केतु–सूर्य; सब मिलकर 7 वर्ष।

  1. केतु–केतु4 माह 27 दिन · 149 दिन
  2. केतु–शुक्र1 वर्ष 2 माह · 426 दिन
  3. केतु–सूर्य4 माह 6 दिन · 128 दिन
  4. केतु–चंद्र7 माह · 213 दिन
  5. केतु–मंगल4 माह 27 दिन · 149 दिन
  6. केतु–राहु1 वर्ष 18 दिन · 384 दिन
  7. केतु–गुरु11 माह 6 दिन · 341 दिन
  8. केतु–शनि1 वर्ष 1 माह 9 दिन · 405 दिन
  9. केतु–बुध11 माह 27 दिन · 362 दिन

यहाँ दशा का एक वर्ष 365.25 दिन का माना गया है, जो आजकल सबसे प्रचलित है। जो पंचांग 360 दिन का वर्ष लेते हैं, उनमें तारीख़ें थोड़ी अलग आएँगी। हर अवधि को निकटतम दिन तक पूरा किया गया है।

पराशर के अनुसार (बृहत् पाराशर होरा शास्त्र, अध्याय 59)

हर पंक्ति ग्रंथ का फल है: अंतर्दशा के स्वामी अच्छी स्थिति में हों तो क्या, और न हों तो क्या। आप पर कौन-सा लागू होता है, यह आपकी कुंडली तय करती है।

केतु की अंतर्दशा

शुभ हो तो: पराशर के अनुसार इस अंतर्दशा में जीवनसाथी और संतान से सुख, सत्ता में बैठे लोगों से सम्मान, और भूमि या संपत्ति का लाभ मिलता है, पर साथ में कुछ मानसिक पीड़ा भी रहती है।

कठिन हो तो: पराशर हृदय रोग, बदनामी, धन और पशुधन की हानि, जीवनसाथी और संतान को कष्ट, और मन की अस्थिरता की चेतावनी देते हैं।

सावधानी: जब केतु आपकी कुंडली में दूसरे या सातवें भाव के स्वामी से संबंध रखें, या दूसरे अथवा सातवें भाव में बैठे हों, तब बृहत् पाराशर होरा शास्त्र इसे मारक (जिसे शास्त्र प्राणों के संकट से जोड़ते हैं) की चेतावनी मानता है।

उपाय: राहत के लिए बृहत् पाराशर होरा शास्त्र दुर्गा सप्तशती का पाठ और महामृत्युंजय जप (आरोग्य और दीर्घायु के लिए शिव का मंत्र) बताता है।

श्लोक 59.1–6

शुक्र की अंतर्दशा

शुभ हो तो: पराशर के अनुसार इस अंतर्दशा में सत्ता में बैठे लोगों की कृपा और सौभाग्य मिलता है, वस्त्र मिलते हैं, खोया हुआ पद या अधिकार लौटता है, वाहन का सुख मिलता है, तीर्थयात्रा होती है, और सत्ता की कृपा से भूमि या संपत्ति मिलती है।

कठिन हो तो: पराशर बिना कारण के झगड़े, धन हानि और पशुधन को कष्ट की चेतावनी देते हैं।

सावधानी: जब शुक्र आपकी कुंडली में दूसरे या सातवें भाव के स्वामी हों (ये मारक भाव हैं, जिन्हें शास्त्र प्राणों के संकट से जोड़ते हैं), तब बृहत् पाराशर होरा शास्त्र शारीरिक कष्ट और मानसिक पीड़ा की चेतावनी देता है और स्वास्थ्य का ध्यान रखने को कहता है।

उपाय: राहत के लिए बृहत् पाराशर होरा शास्त्र दुर्गा पाठ और कपिला गाय या भैंस का दान बताता है।

श्लोक 59.7–15

सूर्य की अंतर्दशा

शुभ हो तो: पराशर के अनुसार इस अंतर्दशा में धन-लाभ होता है, सत्ता में बैठे लोगों की कृपा मिलती है, पुण्य कर्म होते हैं और सब इच्छाएँ पूरी होती हैं।

कठिन हो तो: पराशर सत्ता से संकट, माता-पिता से बिछोह, परदेस की यात्राएँ, चोरों से कष्ट, साँप और विष से भय, सरकारी दंड, मित्रों से विरोध, शोक और ज्वर के भय की चेतावनी देते हैं।

सावधानी: जब सूर्य आपकी कुंडली में दूसरे या सातवें भाव के स्वामी हों, तब बृहत् पाराशर होरा शास्त्र इस अवधि को मारक (जिसे शास्त्र प्राणों के संकट से जोड़ते हैं) मानता है।

उपाय: राहत के लिए और सूर्य की कृपा से फिर सुख पाने के लिए बृहत् पाराशर होरा शास्त्र गाय और सोने का दान बताता है।

श्लोक 59.16–24

चंद्र की अंतर्दशा

शुभ हो तो: पराशर के अनुसार इस अंतर्दशा में सत्ता में बैठे लोगों से सम्मान मिलता है, उत्साह, सुख और आनंद रहता है, घर और भूमि मिलती है, भोजन, वस्त्र, वाहन और पशुधन का असाधारण लाभ होता है, व्यापार में सफलता मिलती है, जलाशय जैसे लोकहित के काम बनवाए जाते हैं, और जीवनसाथी व संतान को सुख मिलता है।

कठिन हो तो: पराशर दुःख और मानसिक पीड़ा, कामों में बाधा, माता-पिता से बिछोह, व्यापार में हानि और पशुधन की हानि की चेतावनी देते हैं।

सावधानी: जब चंद्र आपकी कुंडली में दूसरे, सातवें या आठवें भाव के स्वामी हों, तब बृहत् पाराशर होरा शास्त्र इसे मारक (जिसे शास्त्र प्राणों के संकट से जोड़ते हैं) की चेतावनी मानता है।

उपाय: राहत के लिए बृहत् पाराशर होरा शास्त्र चंद्र के मंत्रों का जप और चंद्र से जुड़ी वस्तुओं का दान बताता है।

श्लोक 59.25–36

मंगल की अंतर्दशा

शुभ हो तो: पराशर के अनुसार इस अंतर्दशा में भूमि या संपत्ति मिलती है, धन और पशुधन बढ़ता है, नया बाग लगता है, और सत्ता की कृपा से धन-लाभ होता है।

कठिन हो तो: पराशर परदेस की यात्रा में प्राणों के संकट या दुर्घटना, मधुमेह, बेवजह की परेशानियों, चोरों और सत्ता से भय, और झगड़ों की चेतावनी देते हैं। वे यह भी कहते हैं कि इन कष्टों के बीच कुछ शुभ फल भी मिलते हैं।

सावधानी: जब मंगल आपकी कुंडली में दूसरे या सातवें भाव के स्वामी हों, तब बृहत् पाराशर होरा शास्त्र इसे मारक (जिसे शास्त्र प्राणों के संकट से जोड़ते हैं) की चेतावनी मानता है।

उपाय: राहत के लिए बृहत् पाराशर होरा शास्त्र बैल का दान बताता है। शास्त्र कहता है कि तब मंगल की कृपा से सुख और संपत्ति का लाभ मिलता है।

श्लोक 59.37–44

राहु की अंतर्दशा

शुभ हो तो: पराशर के अनुसार इस अंतर्दशा में किसी विदेशी शासक या सत्ता से धन, अन्न, पशुधन, भूमि और संपत्ति मिलती है और बढ़ती है। आरंभ में कुछ कष्ट रहता है, पर बाद में सब ठीक हो जाता है।

कठिन हो तो: पराशर बार-बार पेशाब, शरीर की कमज़ोरी, ठंड लगकर ज्वर, चोरों से भय, बार-बार लौटने वाला ज्वर, अपयश, झगड़े, मधुमेह और पेट दर्द की चेतावनी देते हैं।

सावधानी: जब राहु आपकी कुंडली में दूसरे या सातवें भाव में बैठे हों (ये मारक भाव हैं, जिन्हें शास्त्र प्राणों के संकट से जोड़ते हैं), तब बृहत् पाराशर होरा शास्त्र कष्ट और संकट की चेतावनी देता है और सावधानी बरतने को कहता है।

उपाय: राहत के लिए बृहत् पाराशर होरा शास्त्र दुर्गा सप्तशती का पाठ बताता है।

श्लोक 59.45–50

गुरु की अंतर्दशा

शुभ हो तो: पराशर के अनुसार इस अंतर्दशा में धन और अन्न बढ़ता है, सत्ता में बैठे लोगों की कृपा मिलती है, उत्साह रहता है, वाहन मिलते हैं, घर में पुत्र जन्म जैसे उत्सव होते हैं, पुण्य कर्म और यज्ञ होते हैं, शत्रुओं पर विजय मिलती है और सुख रहता है।

कठिन हो तो: पराशर चोर, साँप और घाव से भय, धन हानि, जीवनसाथी और संतान से बिछोह, और शारीरिक कष्ट की चेतावनी देते हैं। आरंभ में कुछ शुभ फल मिल सकते हैं, पर वे कहते हैं कि बाद में केवल कष्टदायक फल ही मिलते हैं।

सावधानी: जब गुरु आपकी कुंडली में दूसरे या सातवें भाव के स्वामी हों, तब बृहत् पाराशर होरा शास्त्र इस अवधि को मारक (जिसे शास्त्र प्राणों के संकट से जोड़ते हैं) मानता है।

उपाय: राहत के लिए बृहत् पाराशर होरा शास्त्र महामृत्युंजय जप (आरोग्य और दीर्घायु के लिए शिव का मंत्र) और शिव सहस्रनाम का पाठ बताता है।

श्लोक 59.51–60

शनि की अंतर्दशा

शुभ हो तो: पराशर के अनुसार इस अंतर्दशा में सब कामों में सफलता मिलती है, अपने स्वामी या नियोक्ता से सुख मिलता है, यात्राएँ आराम से होती हैं, अपने गाँव-नगर में सुख और संपत्ति बढ़ती है, और सत्ता में बैठे लोगों से भेंट होती है।

कठिन हो तो: पराशर अपने और संबंधियों के लिए कष्ट, पीड़ा, सरकारी जुर्माने से धन हानि, वर्तमान पद छोड़ना, परदेस की यात्राएँ और यात्रा में चोरी के भय की चेतावनी देते हैं। इसके साथ वे पशुधन में वृद्धि भी गिनाते हैं।

सावधानी: जब शनि आपकी कुंडली में दूसरे या सातवें भाव के स्वामी हों, तब बृहत् पाराशर होरा शास्त्र इस अवधि को मारक (जिसे शास्त्र प्राणों के संकट से जोड़ते हैं) मानता है।

उपाय: राहत के लिए बृहत् पाराशर होरा शास्त्र तिल से हवन और काली गाय या भैंस का दान बताता है।

श्लोक 59.61–68

बुध की अंतर्दशा

शुभ हो तो: पराशर के अनुसार इस अंतर्दशा में अधिकार या ऊँचा पद मिलता है, सुख रहता है, दान होता है, धन और भूमि मिलती है, पुत्र का जन्म होता है, धार्मिक आयोजन और अचानक विवाह जैसे मंगल कार्य होते हैं, परिवार में सुख रहता है, और वस्त्र व आभूषण मिलते हैं।

कठिन हो तो: पराशर सरकारी अधिकारियों से विरोध, दूसरों के घर में रहने, और धन, वस्त्र, वाहन तथा पशुधन की हानि की चेतावनी देते हैं। वे आरंभ में कुछ शुभ फल, मध्य में उससे भी अच्छे फल और अंत में अशुभ फल बताते हैं।

सावधानी: जब बुध आपकी कुंडली में दूसरे या सातवें भाव के स्वामी हों, तब बृहत् पाराशर होरा शास्त्र इस अवधि को मारक (जिसे शास्त्र प्राणों के संकट से जोड़ते हैं) मानता है।

उपाय: राहत के लिए बृहत् पाराशर होरा शास्त्र विष्णु सहस्रनाम का पाठ बताता है।

श्लोक 59.69–79

केतु महादशा से किन बातों का विचार होता है

शास्त्र क्या कहते हैं, और आपकी कुंडली में इसका फल किससे तय होता है।

किन बातों का विचार

छोड़ना, अंतर्मुखता और अचानक घटनाएँ

आपकी कुंडली तय करती है

केतु किसी भाव के स्वामी नहीं होते। इनकी दशा का फल इस पर निर्भर करता है कि ये किस भाव में बैठे हैं, वहाँ कौन-सी राशि है, उस राशि के स्वामी कैसे हैं और इनके साथ कौन-से ग्रह हैं; परंपरा कहती है कि केतु मंगल की तरह फल देते हैं (“कुजवत् केतु”)। देखें: हर भाव में केतु और इनके उपाय।

आपकी कुंडली के हिसाब से

दशा कैलकुलेटर बताता है कि केतु महादशा आपके जीवन में कब आएगी, और आपकी कुंडली के हिसाब से इसका और इसकी हर अंतर्दशा का फल बताता है। मेरी दशा देखें।

पराशर इस महादशा के बारे में क्या कहते हैं (श्लोक 47.71–77)

पराशर के बताए फल शर्तों के साथ हैं: आपकी कुंडली में दशा के स्वामी कहाँ बैठे हैं, और किनके साथ हैं। पुराना ग्रंथ पुरुष जातक की बात करता है, पर इसके फल हर किसी पर लागू होते हैं।

जब यह शुभ फल देती है

  • केतु केंद्र (पहले, चौथे, सातवें या दसवें भाव), त्रिकोण (पहले, पाँचवें या नौवें भाव) या ग्यारहवें भाव में हों, शुभ राशि में हों, अथवा अपनी उच्च राशि या स्वराशि में हों (पराशर दोनों के लिए वृश्चिक बताते हैं, और धनु को केतु का मूलत्रिकोण, यानी विशेष बल वाली मूल राशि; कुछ ऋषि मीन को केतु की स्वराशि मानते हैं), तो पराशर शासन से अच्छे संबंध, किसी क्षेत्र या गाँव पर अधिकार का पद, वाहन का सुख, संतान से सुख, विदेश से लाभ, जीवनसाथी से सुख और पशुधन की प्राप्ति बताते हैं।श्लोक 47.34–39½, 47.72–77
  • केतु तीसरे, छठे या ग्यारहवें भाव में हों, तो पराशर अधिकार की प्राप्ति, मित्रों से मेल, और वाहन व बड़ी संपत्ति पाने के अवसर बताते हैं।श्लोक 47.72–77
  • केतु की दशा का आरंभ हो, तो पराशर राजयोग (उन्नति और अधिकार देने वाला योग) का फल बताते हैं।श्लोक 47.72–77

जब यह कठिन होती है

  • केतु की दशा का मध्य और अंतिम भाग चल रहा हो, तो पराशर मध्य में भय के समय, और अंतिम भाग में रोग व दूर की यात्राओं की चेतावनी देते हैं।श्लोक 47.72–77
  • केतु दूसरे, आठवें या बारहवें भाव में हों, अथवा उन पर पाप दृष्टि (ग्रह की नज़र: ग्रह जिन भावों को देखते हैं, उन पर उनका असर पड़ता है) हो, तो पराशर कारावास, परिवार वालों पर संकट, निवास को क्षति, चिंताओं, नीच संगति और रोग की चेतावनी देते हैं, और इन सबमें सावधानी रखने को कहते हैं।श्लोक 47.72–77

केतु महादशा में उपाय

केतु की दशा में परंपरा के सुझाव; आपको इनकी कितनी ज़रूरत है, यह आपकी कुंडली बताएगी।

क्या करें

  • नियमित रूप से भगवान गणेश की पूजा करें
  • ध्यान और आध्यात्मिक साधना करें
  • गली के कुत्तों को खाना खिलाएँ
  • आध्यात्मिक संस्थाओं को दान करें
  • फल की चिंता छोड़कर काम करने का अभ्यास करें

किन बातों से बचें

  • सेहत की छोटी-मोटी शिकायतों को भी अनदेखा न करें
  • ख़ुद को सब लोगों से पूरी तरह अलग न करें
  • सांसारिक ज़िम्मेदारियों से पूरी तरह मुँह न मोड़ें

बीज मंत्र और दान

बीज मंत्र केतु की मूल ध्वनि है, जिसे गिनकर जपा जाता है।

ॐ स्रां स्रीं स्रौं सः केतवे नमः

मंगलवार को कंबल और तिल का दान करें

केतु के सभी उपाय

हर लग्न के लिए केतु महादशा

केतु के लिए स्वामित्व की जगह उस राशि के स्वामी देखे जाते हैं जिसमें ये बैठे हों।

केतु किसी भाव के स्वामी नहीं, इसलिए कोई लग्न इन्हें अपने आप शुभ या अशुभ नहीं बनाता: ये जिस भाव में बैठें, उसका और उस राशि के स्वामी का फल देते हैं। कैसे, यह हर भाव में केतु वाले पेज पर देखें।

मेरी चल रही दशा का मेरे लिए क्या मतलब है?आचार्य पराशर आपकी पूरी कुंडली देखकर आपकी महादशा और अंतर्दशा का फल बताते हैं।

आम सवाल

केतु महादशा कितने समय चलती है?

7 वर्ष, यानी 120 वर्ष के चक्र का 5.8%, और यह नौ अंतर्दशाओं में बँटी होती है।

केतु महादशा कब शुरू होती है?

अगर जन्म के समय चंद्रमा अश्विनी, मघा या मूल नक्षत्र में थे, तो जन्म से ही; नहीं तो बुध महादशा ख़त्म होने पर। यह आपके जीवन में आएगी या नहीं, यह इस पर निर्भर है कि जन्म के समय कौन-सी महादशा चल रही थी।

केतु महादशा अच्छी है या बुरी?

आम तौर पर दोनों में से कोई नहीं। केतु किसी भाव के स्वामी नहीं, इसलिए यह इस बात से तय होता है कि ये किस भाव में बैठे हैं, उस राशि के स्वामी कैसे हैं और साथ में कौन-से ग्रह हैं; कैलकुलेटर इसे आपकी कुंडली के हिसाब से पढ़ता है।

आपकी कौन-सी दशा चल रही है, यह आपकी कुंडली का तथ्य है।

यह जन्म के समय चंद्रमा के नक्षत्र से निकलती है। जन्म विवरण भरें, और पूरी 120 वर्ष की समय-रेखा आ जाएगी, हर दशा का फल आपकी कुंडली के हिसाब से।

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AI वैदिक ज्योतिषी। किसी भी भारतीय भाषा में चैट करें; कॉल हिंदी और अंग्रेज़ी में।ऐसे पूछें“मेरी कुंडली का पूरा और विस्तार से विश्लेषण कीजिए”“मेरी जन्म कुंडली में कौन-से दुर्लभ योग हैं?”“इस महीने की मेरी सूक्ष्म दशा का विश्लेषण कीजिए”चैट कॉल शुल्क हर मिनट के हिसाब से लगता है, और सिर्फ़ तब तक जब तक चैट या कॉल चालू रहे। जब चाहें बंद करें।

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9 विस्तृत रिपोर्ट, जिनमें जन्म कुंडली, कुंडली मिलान और वार्षिक भविष्यवाणी हैं।हिंदी, अंग्रेज़ी और हिंग्लिशरिपोर्ट देखें
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