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नई दिल्ली · 2026, 2027, 2028

कार्तिक पूर्णिमा 2026
24 नवंबर 2026

कार्तिक की पूर्णिमा: पवित्र स्नान, दीपदान और कार्तिक स्नान का समापन।

मंगलवारकार्तिक शुक्ल पूर्णिमासूर्योदय पर
कार्तिक पूर्णिमा 2026 · नई दिल्लीमंगलवार, 24 नवंबरकार्तिक शुक्ल पूर्णिमा
पूर्णिमा शुरू
23 नवंबर, रात 11:42
पूर्णिमा समाप्त
24 नवंबर, रात 8:23
कैसे तय होता है
सूर्योदय पर
कार्तिक पूर्णिमा 2027 · नई दिल्लीरविवार, 14 नवंबरकार्तिक शुक्ल पूर्णिमा
पूर्णिमा शुरू
13 नवंबर, सुबह 9:55
पूर्णिमा समाप्त
14 नवंबर, सुबह 8:55
कैसे तय होता है
सूर्योदय पर
हर सुबह का पंचांग, WhatsApp परत्योहारों की तारीख़ और मुहूर्त भी, CosmiqeAI चैनल पर। मुफ़्त।

2026, 2027, 2028 में कार्तिक पूर्णिमा

तिथि के समय के साथ
202624 नवंबरमंगलवार23 नवंबर, रात 11:42 – 24 नवंबर, रात 8:23
202714 नवंबररविवार13 नवंबर, सुबह 9:55 – 14 नवंबर, सुबह 8:55
20282 नवंबरगुरुवार1 नवंबर, दोपहर 1:08 – 2 नवंबर, दोपहर 2:47

कार्तिक पूर्णिमा की तिथि: कार्तिक शुक्ल पूर्णिमा, यानी कार्तिक के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा। इसलिए इसकी तारीख़ वह दिन है जिस दिन सूर्योदय पर यह तिथि चल रही हो। तिथि आधी रात नहीं, किसी भी मिनट पर शुरू और ख़त्म होती है, इसीलिए यही समय दिन तय करता है, और इसीलिए कोई त्योहार दूसरे देश में अलग तारीख़ को पड़ सकता है।

नई दिल्ली के लिए, भारतीय समय में।

कार्तिक पूर्णिमा की पूजा की तैयारी?हमारे मुहूर्त ज्योतिषी एस्ट्रो मुहूर्त से अपने परिवार और शहर के लिए सही मुहूर्त पूछें।

कार्तिक पूर्णिमा क्यों मनाते हैं

इसका महत्व

कार्तिक पूर्णिमा वह पूर्णिमा है जिस पर कार्तिक मास पूरा होता है, जिसे साल का सबसे पवित्र महीना माना जाता है। बहुत से लोग पूरे महीने रोज़ भोर में जो कार्तिक स्नान करते हैं, वह इसी दिन गंगा या किसी पवित्र नदी-सरोवर में डुबकी के साथ पूरा होता है, और उसके बाद दीपदान और दान होता है। परंपरा है कि इस पूर्णिमा के स्नान-दान का बड़ा पुण्य होता है।

इस दिन कई परंपराएँ एक साथ मिलती हैं। यह त्रिपुरारी पूर्णिमा है, जो त्रिपुरासुर पर शिव की विजय की याद है। मान्यता है कि विष्णु का मत्स्य अवतार इसी दिन हुआ था। स्नान के लिए श्रद्धालु पुष्कर में जुटते हैं, जहाँ पुष्कर मेला लगता है, और गढ़मुक्तेश्वर, हरिद्वार, प्रयागराज और वाराणसी में भी। गुरु नानक देव जी का प्रकाश पर्व भी इसी पूर्णिमा को मनाया जाता है, जिसका अलग पेज है।

पूजा विधि

क्रम से
  1. 1
    भोर में स्नान

    सूर्योदय से पहले किसी पवित्र नदी या सरोवर में स्नान करें, या घर पर पानी में थोड़ा गंगाजल डालकर नहाएँ।

  2. 2
    सूर्य को अर्घ्य

    उगते सूर्य को लोटे से जल देकर अर्घ्य दें।

  3. 3
    विष्णु पूजा

    तुलसी, फूल, धूप और घी के दीये से विष्णु की पूजा करें; बहुत से घरों में इस पूर्णिमा पर सत्यनारायण कथा होती है।

  4. 4
    दान

    किसी ब्राह्मण या ज़रूरतमंद को अनाज, कपड़े, तिल, गुड़ या दीये दान करें।

  5. 5
    शाम को दीपदान

    सूर्यास्त के बाद तुलसी, दरवाज़े और मंदिर में दीये जलाएँ, और पास में नदी हो तो एक दीया प्रवाहित करें।

  6. 6
    चंद्रमा को अर्घ्य

    पूरा चाँद निकलने पर जल और थोड़े दूध से चंद्रमा को अर्घ्य दें।

पूजा सामग्री

एक दिन पहले तैयार रखें
  • गंगाजल
  • अर्घ्य के लिए लोटा
  • तुलसी दल (एक दिन पहले तोड़े हुए)
  • फूल
  • रोली और अक्षत
  • दीये, घी या तेल और बत्तियाँ
  • धूप
  • सत्यनारायण भोग के लिए पंचामृत और फल
  • चंद्र अर्घ्य के लिए दूध
  • दान के लिए अनाज, कपड़े, तिल, गुड़

कार्तिक पूर्णिमा की कथा

स्रोत: भागवत पुराण, अष्टम स्कंध; मत्स्य अवतार का कार्तिक पूर्णिमा से संबंध परंपरा पर आधारित है

राजा सत्यव्रत कृतमाला नदी में जल अर्पित कर रहे थे, तभी एक छोटी-सी मछली उनकी अंजलि में आ गई और विनती करने लगी कि बड़ी मछलियों के डर से उसे वापस न छोड़ें। राजा ने उसे अपने कमंडल में रख लिया। रात भर में वह कमंडल से बड़ी हो गई; राजा ने उसे बड़े पात्र में, फिर तालाब में, फिर सरोवर में रखा, और हर बार वह पूरी जगह भर देती। अंत में उन्होंने उसे समुद्र में छोड़ा और समझ गए कि यह कोई साधारण मछली नहीं है।

तब विष्णु मत्स्य रूप में प्रकट हुए। उन्होंने राजा को बताया कि सात दिन में प्रलय का जल सब लोकों को डुबो देगा और एक नाव आएगी; सत्यव्रत को सप्तऋषियों के साथ, हर तरह के बीज और औषधियाँ लेकर उसमें बैठना है। जल बढ़ा तो नाव आई, और राजा ने वासुकि नाग से उसे विशाल मत्स्य के सींग से बाँध दिया, जो उसे प्रलय के जल में सुरक्षित ले गया।

परंपरा है कि विष्णु ने मत्स्य रूप कार्तिक पूर्णिमा को धारण किया था, इसलिए भी इस दिन विष्णु पूजा की जाती है।

क्या करें, क्या न करें

क्या करें

  • स्नान सूर्योदय से पहले करें, क्योंकि कार्तिक स्नान भोर का स्नान है और यह दिन सूर्योदय की पूर्णिमा से तय होता है।
  • स्नान के बाद थोड़ा ही सही, कुछ दान ज़रूर करें, क्योंकि इस पूर्णिमा पर स्नान और दान साथ-साथ चलते हैं।
  • शाम को तुलसी के पास दीया जलाएँ, क्योंकि दीपों का कार्तिक मास इसी दीपदान से पूरा होता है।
  • भीड़ वाले घाटों और मेलों में अपने साथ वालों को एक साथ रखें और स्नान के लिए तय जगह पर ही नहाएँ।

क्या न करें

  • इस दिन मांस, मदिरा, प्याज़ और लहसुन से परहेज़ करें, क्योंकि कार्तिक मास सात्विक रखा जाता है और इसी पूर्णिमा पर पूरा होता है।
  • पूर्णिमा की शाम तुलसी न तोड़ें; पूजा के पत्ते एक दिन पहले तोड़ लें।
  • स्नान के बाद नदी पर प्लास्टिक या कचरा न छोड़ें; सम्मान तो नदी का ही हो रहा है।

क्षेत्रीय नाम, और तारीख़ें क्यों अलग होती हैं

इस दिन के कई नाम हैं: त्रिपुरारी पूर्णिमा, काशी में देव दीपावली (जो उस शाम मनती है जब प्रदोष में पूर्णिमा हो), और हर जगह कार्तिक पूर्णिमा। राजस्थान का पुष्कर मेला और गढ़मुक्तेश्वर का गंगा मेला इसी पर केंद्रित हैं, और बिहार का सोनपुर मेला इसी के आसपास शुरू होता है। ओडिशा में यह बोइत बंदाण है, जब भोर में छोटी नावें बहाकर उन साधव व्यापारियों को याद किया जाता है जो बाली और जावा तक जाते थे। तमिलनाडु का कार्तिगई दीपम अलग पर्व है, जो सौर मास कार्तिगई में कृत्तिका नक्षत्र से तय होता है, हालाँकि अक्सर इसी पूर्णिमा के आसपास पड़ता है।

पूर्णिमांत और अमांत, दोनों पंचांगों में यह कार्तिक की ही पूर्णिमा है, क्योंकि दोनों में महीना पूर्णिमा पर पूरा होता है। स्नान-दान उस दिन होता है जिस दिन सूर्योदय पर पूर्णिमा हो। हर जगह का सूर्योदय अलग होने से यह दिन शहरों के बीच अलग हो सकता है, और जब पूर्णिमा किसी दोपहर शुरू हो, तो उस शाम की देव दीपावली स्नान से एक दिन पहले पड़ती है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

5 सवाल
2026 में कार्तिक पूर्णिमा कब है?

2026 में कार्तिक पूर्णिमा नई दिल्ली में मंगलवार, 24 नवंबर 2026 को है। अपनी तारीख़ और समय के लिए ऊपर अपना शहर चुनें।

2026 में कार्तिक पूर्णिमा के लिए पूर्णिमा कब शुरू और ख़त्म होगी?

भारतीय समय में पूर्णिमा 23 नवंबर, रात 11:42 को शुरू होकर 24 नवंबर, रात 8:23 को ख़त्म होगी। कार्तिक पूर्णिमा का दिन वह है जिस दिन सूर्योदय पर पूर्णिमा हो। इसीलिए यह 24 नवंबर को है।

2027 में कार्तिक पूर्णिमा कब है?

नई दिल्ली में रविवार, 14 नवंबर 2027।

2028 में कार्तिक पूर्णिमा कब है?

नई दिल्ली में गुरुवार, 2 नवंबर 2028।

अमेरिका या ब्रिटेन में कार्तिक पूर्णिमा की तारीख़ अलग क्यों होती है?

कार्तिक पूर्णिमा का दिन वह है जिस दिन सूर्योदय पर उसकी तिथि, पूर्णिमा, चल रही हो। तिथि पूरी दुनिया में एक ही क्षण शुरू और ख़त्म होती है, पर सूर्योदय हर जगह अपने समय पर होता है, इसलिए अमेरिका या ब्रिटेन में वह दिन भारत से एक दिन पहले पड़ सकता है। ऊपर के बॉक्स में अपना शहर चुनें, इस पेज की हर तारीख़ और समय उसके लिए निकाला जाएगा।

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