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नई दिल्ली · 2026, 2027, 2028

वैकुंठ चतुर्दशी 2026
23 नवंबर 2026

वह एक रात जब विष्णु और शिव की पूजा साथ होती है, ख़ासकर काशी में।

सोमवारकार्तिक शुक्ल चतुर्दशीसूर्यास्त के बाद (प्रदोष)
वैकुंठ चतुर्दशी 2026 · नई दिल्लीसोमवार, 23 नवंबरकार्तिक शुक्ल चतुर्दशी
चतुर्दशी शुरू
22–23 नवंबर की रात 2:37
चतुर्दशी समाप्त
23 नवंबर, रात 11:42
कैसे तय होता है
सूर्यास्त के बाद (प्रदोष)
वैकुंठ चतुर्दशी 2027 · नई दिल्लीशुक्रवार, 12 नवंबरकार्तिक शुक्ल चतुर्दशी
चतुर्दशी शुरू
12 नवंबर, सुबह 10:21
चतुर्दशी समाप्त
13 नवंबर, सुबह 9:55
कैसे तय होता है
सूर्यास्त के बाद (प्रदोष)
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2026, 2027, 2028 में वैकुंठ चतुर्दशी

तिथि के समय के साथ
202623 नवंबरसोमवार22–23 नवंबर की रात 2:37 – 23 नवंबर, रात 11:42
202712 नवंबरशुक्रवार12 नवंबर, सुबह 10:21 – 13 नवंबर, सुबह 9:55
202831 अक्टूबरमंगलवार31 अक्टूबर, सुबह 11:09 – 1 नवंबर, दोपहर 1:08

वैकुंठ चतुर्दशी की तिथि: कार्तिक शुक्ल चतुर्दशी, यानी कार्तिक के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी। इसलिए इसकी तारीख़ वह दिन है जिस दिन सूर्यास्त के बाद प्रदोष काल में यह तिथि चल रही हो। तिथि आधी रात नहीं, किसी भी मिनट पर शुरू और ख़त्म होती है, इसीलिए यही समय दिन तय करता है, और इसीलिए कोई त्योहार दूसरे देश में अलग तारीख़ को पड़ सकता है।

नई दिल्ली के लिए, भारतीय समय में।

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वैकुंठ चतुर्दशी क्यों मनाते हैं

इसका महत्व

वैकुंठ चतुर्दशी कार्तिक शुक्ल चतुर्दशी को, कार्तिक पूर्णिमा से एक दिन पहले पड़ती है। साल में यही एक दिन है जब विष्णु और शिव की साथ-साथ पूजा होती है, और दोनों एक-दूसरे का सम्मान करते हैं। परंपरा है कि इसी दिन विष्णु ने काशी में शिव की पूजा की और बदले में शिव ने उन्हें आशीर्वाद दिया, इसलिए यह दिन हरि और हर की एकता का प्रतीक है।

पूजा रात भर में बँटी होती है। विष्णु की पूजा निशीथ काल यानी आधी रात के आसपास होती है, और शिव की अरुणोदय में, यानी सूर्योदय से पहले की बेला में, जब काशी में श्रद्धालु मणिकर्णिका घाट पर स्नान करते हैं। केवल इसी दिन शिव को तुलसी और विष्णु को बेलपत्र चढ़ाया जाता है, जो दोनों की एकता का संकेत है। काशी विश्वनाथ में इस दिन विशेष पूजा होती है।

पूजा विधि

क्रम से
  1. 1
    दिन में संकल्प

    स्नान करके पूजा का संकल्प लें, और घर में चलन हो तो दिन भर व्रत रखें।

  2. 2
    निशीथ काल में विष्णु पूजा

    आधी रात के आसपास विष्णु की पूजा फूलों से करें, मिल सकें तो कमल से, साथ में चंदन, धूप और घी का दीया, और इसी एक दिन उन्हें बेलपत्र चढ़ाएँ।

  3. 3
    नाम स्मरण

    रात की पूजा में विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें या सुनें।

  4. 4
    अरुणोदय में स्नान

    भोर से पहले स्नान करें; काशी में यही मणिकर्णिका स्नान है, दूसरी जगह पानी में थोड़ा गंगाजल डालकर नहाएँ।

  5. 5
    अरुणोदय में शिव पूजा

    शिवलिंग पर जल और दूध चढ़ाएँ, और इसी एक दिन तुलसी दल भी, साथ में बेलपत्र, फूल और धूप।

  6. 6
    आरती और दान

    दोनों की आरती करें, प्रसाद बाँटें और दान दें।

पूजा सामग्री

एक दिन पहले तैयार रखें
  • कमल के फूल, या दूसरे ताज़े फूल
  • तुलसी दल (एक दिन पहले तोड़े हुए)
  • बेलपत्र
  • गंगाजल
  • शिवलिंग के लिए दूध
  • चंदन, रोली और अक्षत
  • दीया और घी
  • धूप
  • भोग के लिए फल और मिठाई
  • विष्णु सहस्रनाम की पुस्तक

वैकुंठ चतुर्दशी की कथा

स्रोत: काशी की लोक परंपरा; हज़ार कमलों से शिव पूजा करने पर विष्णु को सुदर्शन चक्र मिलने का प्रसंग शिव पुराण में है

एक बार विष्णु ने संकल्प लिया कि वे हज़ार कमलों से शिव की पूजा करेंगे, शिव के हज़ार नामों में से हर नाम के साथ एक कमल। परंपरा यह पूजा काशी में, कार्तिक शुक्ल चतुर्दशी को हुई मानती है। उनकी भक्ति की परीक्षा लेने के लिए शिव ने एक कमल छिपा दिया।

जब विष्णु अंतिम नाम पर पहुँचे तो एक कमल कम निकला। विष्णु को कमलनयन कहा जाता है, यानी कमल जैसे नेत्रों वाले, इसलिए उन्होंने उस कमल की जगह अपना एक नेत्र अर्पित करने का निश्चय किया, ताकि पूजा अधूरी न रहे।

जैसे ही वे ऐसा करने लगे, उनकी भक्ति से द्रवित होकर शिव प्रकट हुए और उन्हें रोक लिया। प्रसन्न होकर शिव ने विष्णु को सुदर्शन चक्र प्रदान किया। इस दिन विष्णु ने शिव की पूजा की और शिव ने विष्णु का मान रखा, इसीलिए वैकुंठ चतुर्दशी पर दोनों की साथ पूजा होती है और हर एक को दूसरे की प्रिय वस्तु चढ़ाई जाती है। विष्णु के हाथ का सुदर्शन चक्र शिव की देन के रूप में याद किया जाता है, और कमलनयन नाम उस नेत्र की याद दिलाता है जिसे वे अर्पित करने को तैयार थे।

क्या करें, क्या न करें

क्या करें

  • विष्णु पूजा आधी रात के निशीथ काल में करें, क्योंकि इस रात परंपरा यही समय बताती है।
  • विष्णु को बेलपत्र और शिव को तुलसी चढ़ाएँ, क्योंकि यह अदला-बदली साल में इसी दिन होती है।
  • तुलसी दल एक दिन पहले तोड़ लें, क्योंकि परंपरा में सूर्यास्त के बाद तुलसी नहीं तोड़ी जाती।
  • अगर आप काशी में हों, तो वहाँ के चलन के अनुसार सूर्योदय से पहले अरुणोदय में मणिकर्णिका स्नान करें।

क्या न करें

  • दोनों को एक-दूसरे का प्रतिद्वंद्वी न मानें, न एक की पूजा करते हुए दूसरे की उपेक्षा करें; यह दिन दोनों के साथ-साथ सम्मान का है।
  • व्रत रखने वाले घर उस दिन मांस, मदिरा, प्याज़ और लहसुन से परहेज़ करते हैं, क्योंकि भोजन पूजा के बाद ही होता है।

क्षेत्रीय नाम, और तारीख़ें क्यों अलग होती हैं

यह दिन सबसे ज़्यादा वाराणसी में, काशी विश्वनाथ और मणिकर्णिका घाट पर मनाया जाता है। उज्जैन में यह हरि-हर मिलन के लिए जाना जाता है: रात में महाकाल की सवारी गोपाल मंदिर जाती है और दोनों देवताओं के बीच बेल और तुलसी की मालाओं का आदान-प्रदान होता है। इसे वैकुंठ एकादशी से न मिलाएँ, जो दक्षिण में मार्गशीर्ष (धनु) मास में मनाई जाती है और अलग पर्व है।

पूर्णिमांत और अमांत, दोनों पंचांगों में यह कार्तिक शुक्ल चतुर्दशी है। दिन वह माना जाता है जिस दिन शाम को, सूर्यास्त के बाद प्रदोष काल में चतुर्दशी हो, जो सूर्योदय वाली तिथि के दिन से अलग भी हो सकता है; उसी रात निशीथ में विष्णु पूजा और अगली भोर से पहले अरुणोदय में शिव पूजा होती है। सूर्यास्त हर जगह अलग समय पर होता है, इसलिए शहरों के बीच तारीख़ एक दिन खिसक सकती है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

5 सवाल
2026 में वैकुंठ चतुर्दशी कब है?

2026 में वैकुंठ चतुर्दशी नई दिल्ली में सोमवार, 23 नवंबर 2026 को है। अपनी तारीख़ और समय के लिए ऊपर अपना शहर चुनें।

2026 में वैकुंठ चतुर्दशी के लिए चतुर्दशी कब शुरू और ख़त्म होगी?

भारतीय समय में चतुर्दशी 22–23 नवंबर की रात 2:37 को शुरू होकर 23 नवंबर, रात 11:42 को ख़त्म होगी। वैकुंठ चतुर्दशी का दिन वह है जिस दिन सूर्यास्त के बाद प्रदोष काल में चतुर्दशी हो। इसीलिए यह 23 नवंबर को है।

2027 में वैकुंठ चतुर्दशी कब है?

नई दिल्ली में शुक्रवार, 12 नवंबर 2027।

2028 में वैकुंठ चतुर्दशी कब है?

नई दिल्ली में मंगलवार, 31 अक्टूबर 2028।

अमेरिका या ब्रिटेन में वैकुंठ चतुर्दशी की तारीख़ अलग क्यों होती है?

वैकुंठ चतुर्दशी का दिन वह है जिस दिन सूर्यास्त के बाद प्रदोष काल में उसकी तिथि, चतुर्दशी, चल रही हो। तिथि पूरी दुनिया में एक ही क्षण शुरू और ख़त्म होती है, पर सूर्यास्त हर जगह अपने समय पर होता है, इसलिए अमेरिका या ब्रिटेन में वह दिन भारत से एक दिन पहले पड़ सकता है। ऊपर के बॉक्स में अपना शहर चुनें, इस पेज की हर तारीख़ और समय उसके लिए निकाला जाएगा।

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