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नई दिल्ली · 2026, 2027, 2028

विवाह पंचमी 2026
14 दिसंबर 2026

श्री राम और सीता जी का विवाह, अयोध्या और जनकपुर में धूमधाम से।

सोमवारअगहन शुक्ल पंचमीसूर्योदय पर
विवाह पंचमी 2026 · नई दिल्लीसोमवार, 14 दिसंबरअगहन शुक्ल पंचमी
पंचमी शुरू
13 दिसंबर, शाम 4:48
पंचमी समाप्त
14 दिसंबर, शाम 7:16
कैसे तय होता है
सूर्योदय पर
विवाह पंचमी 2027 · नई दिल्लीशुक्रवार, 3 दिसंबरअगहन शुक्ल पंचमी
पंचमी शुरू
2 दिसंबर, दोपहर 1:44
पंचमी समाप्त
3 दिसंबर, शाम 4:13
कैसे तय होता है
सूर्योदय पर
हर सुबह का पंचांग, WhatsApp परत्योहारों की तारीख़ और मुहूर्त भी, CosmiqeAI चैनल पर। मुफ़्त।

2026, 2027, 2028 में विवाह पंचमी

तिथि के समय के साथ
202614 दिसंबरसोमवार13 दिसंबर, शाम 4:48 – 14 दिसंबर, शाम 7:16
20273 दिसंबरशुक्रवार2 दिसंबर, दोपहर 1:44 – 3 दिसंबर, शाम 4:13
202821 नवंबरमंगलवार20 नवंबर, दोपहर 1:07 – 21 नवंबर, दोपहर 1:34

विवाह पंचमी की तिथि: अगहन शुक्ल पंचमी, यानी अगहन के शुक्ल पक्ष की पंचमी। इसलिए इसकी तारीख़ वह दिन है जिस दिन सूर्योदय पर यह तिथि चल रही हो। तिथि आधी रात नहीं, किसी भी मिनट पर शुरू और ख़त्म होती है, इसीलिए यही समय दिन तय करता है, और इसीलिए कोई त्योहार दूसरे देश में अलग तारीख़ को पड़ सकता है।

नई दिल्ली के लिए, भारतीय समय में।

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विवाह पंचमी क्यों मनाते हैं

इसका महत्व

विवाह पंचमी मार्गशीर्ष शुक्ल पंचमी को श्रीराम और सीता जी के विवाह के दिन के रूप में मनाई जाती है। वाल्मीकि रामायण बताती है कि यह विवाह मिथिला में राजा जनक के दरबार में हुआ था; यह तिथि परंपरा से मानी जाती है। राम-सीता के मंदिरों में इस दिन सचमुच का विवाह होता है: प्रतिमाओं को दूल्हा-दुल्हन की तरह सजाया जाता है, बारात निकलती है और वैसे ही विवाह गीत गाए जाते हैं जैसे घर की शादी में।

यह दिन सबसे ज़्यादा वहाँ मनाया जाता है जहाँ यह कथा बसी है: नेपाल का जनकपुर, जो सीता जी का मायका है, और अयोध्या, जो श्रीराम की नगरी है। भक्त रामचरितमानस के बालकांड से विवाह का प्रसंग पढ़ते हैं, और बहुत से परिवार राम-सीता के सामने अपने दांपत्य में सुख-शांति की, या बेटे-बेटी के अच्छे रिश्ते की प्रार्थना करते हैं। राम भक्ति परंपरा में यह आनंद का दिन है, जिसे कड़े नियमों से ज़्यादा भजन और कथा के साथ मनाया जाता है।

पूजा विधि

क्रम से
  1. 1
    पूजा स्थान तैयार करें

    स्नान करके पूजा स्थान साफ़ करें, पीला या लाल कपड़ा बिछाएँ और राम-सीता की प्रतिमा या चित्र साथ-साथ रखें।

  2. 2
    राम-सीता का पूजन

    श्रीराम को रोली, अक्षत, फूल और तुलसी चढ़ाएँ, और सीता जी को लाल चुनरी के साथ चूड़ी, बिंदी, सिंदूर जैसी सुहाग की चीज़ें अर्पित करें।

  3. 3
    जयमाला

    दोनों प्रतिमाओं को माला पहनाएँ; कुछ घरों में विवाह की जयमाला की भावना से दोनों की मालाएँ आपस में बदली जाती हैं।

  4. 4
    विवाह प्रसंग का पाठ

    रामचरितमानस के बालकांड से राम-सीता विवाह का प्रसंग पढ़ें, या मंदिर में बैठकर सुनें।

  5. 5
    भोग और आरती

    फल और मिठाई का भोग लगाएँ, आरती करें और परिवार में प्रसाद बाँटें।

  6. 6
    उत्सव में शामिल हों

    शाम को मंदिर के विवाह उत्सव में या जहाँ बारात निकलती हो, उसमें शामिल हों।

पूजा सामग्री

एक दिन पहले तैयार रखें
  • राम-सीता की प्रतिमा या चित्र
  • आसन के लिए पीला या लाल कपड़ा
  • फूलों की दो मालाएँ
  • सीता जी के लिए लाल चुनरी और सुहाग की चीज़ें (चूड़ी, बिंदी, सिंदूर)
  • रोली, हल्दी और अक्षत
  • तुलसी के पत्ते
  • फूल
  • भोग के लिए फल और मिठाई
  • घी का दीया और धूप
  • रामचरितमानस

विवाह पंचमी की कथा

स्रोत: वाल्मीकि रामायण, बालकांड; यह तिथि परंपरा से मानी जाती है

राम और लक्ष्मण ने जब ऋषि विश्वामित्र के यज्ञ की रक्षा कर ली, तो विश्वामित्र उन्हें मिथिला ले गए, जहाँ राजा जनक एक बड़ा यज्ञ कर रहे थे। जनक के पास शिव का विशाल धनुष रखा था। सीता जी उन्हें खेत में हल चलाते समय धरती से मिली थीं, और जनक का प्रण था कि सीता का विवाह उसी से होगा जो उस धनुष पर प्रत्यंचा चढ़ा सके। बहुत से राजा कोशिश करके हार चुके थे।

विश्वामित्र के कहने पर वह धनुष उसकी विशाल पेटी में लाया गया। राम ने उसे सहज ही उठा लिया और प्रत्यंचा खींची, तो धनुष बीच से टूट गया और बिजली की कड़क जैसी आवाज़ हुई। जनक ने कहा कि उनका प्रण पूरा हुआ, और राजा दशरथ को बुलाने के लिए अयोध्या दूत भेजे।

दशरथ अपने परिवार और पुरोहितों के साथ आए, जिनमें वसिष्ठ भी थे। पवित्र अग्नि के सामने जनक ने सीता का हाथ राम के हाथ में दिया, और उसी समारोह में उर्मिला का विवाह लक्ष्मण से, तथा जनक के भाई कुशध्वज की बेटियों मांडवी और श्रुतकीर्ति का विवाह भरत और शत्रुघ्न से हुआ।

क्या करें, क्या न करें

क्या करें

  • विवाह प्रसंग आराम से पढ़ें या सुनें, ताकि दिन उसी कथा के साथ बीते जिसका यह उत्सव है।
  • सीता जी को दुल्हन का श्रृंगार अर्पित करें, क्योंकि यह दिन उनके विवाह का है।
  • अपने घर में प्रेम और सामंजस्य की प्रार्थना करें, जैसे बहुत से दंपती इस दिन राम-सीता के सामने करते हैं।
  • हो सके तो मंदिर के उत्सव या बारात में शामिल हों, क्योंकि यह पर्व मिल-जुलकर मनाने का है।

क्या न करें

  • मिथिला और ब्रज के कुछ हिस्सों में बहुत से परिवार विवाह पंचमी के दिन शादी तय नहीं करते। मान्यता है कि सीता जी के वैवाहिक जीवन में बहुत कष्ट आए, और माता-पिता अपनी बेटियों के लिए ऐसा नहीं चाहते। हर परिवार यह नहीं मानता, इसलिए अपने घर की रीति का पालन करें।
  • इस दिन घर में कलह से बचें, क्योंकि यह एक विवाह की स्मृति का दिन है।

क्षेत्रीय नाम, और तारीख़ें क्यों अलग होती हैं

शुक्ल पक्ष में पड़ने के कारण विवाह पंचमी का महीना दोनों कैलेंडरों में एक ही है: मार्गशीर्ष शुक्ल पंचमी, जिसे हिंदी भाषी इलाक़ों में अगहन कहते हैं। उत्तर भारत और नेपाल, दोनों जगह इसे विवाह पंचमी ही कहते हैं। जनकपुर इसे अपने सबसे बड़े उत्सवों में मानता है, जहाँ जानकी मंदिर में कई दिनों तक विवाह का आयोजन होता है, और अयोध्या में बारात और मंदिरों में विवाह उत्सव के साथ यह मनाई जाती है।

यह दिन पंचमी तिथि से तय होता है, आम तौर पर उस दिन से जिस दिन सूर्योदय के समय पंचमी हो। सूर्योदय अलग-अलग जगह अलग समय पर होता है, इसलिए जब पंचमी सूर्योदय के आसपास शुरू या ख़त्म हो, तो शहरों के बीच, या भारत और नेपाल के बीच, तारीख़ में एक दिन का अंतर आ सकता है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

5 सवाल
2026 में विवाह पंचमी कब है?

2026 में विवाह पंचमी नई दिल्ली में सोमवार, 14 दिसंबर 2026 को है। अपनी तारीख़ और समय के लिए ऊपर अपना शहर चुनें।

2026 में विवाह पंचमी के लिए पंचमी कब शुरू और ख़त्म होगी?

भारतीय समय में पंचमी 13 दिसंबर, शाम 4:48 को शुरू होकर 14 दिसंबर, शाम 7:16 को ख़त्म होगी। विवाह पंचमी का दिन वह है जिस दिन सूर्योदय पर पंचमी हो। इसीलिए यह 14 दिसंबर को है।

2027 में विवाह पंचमी कब है?

नई दिल्ली में शुक्रवार, 3 दिसंबर 2027।

2028 में विवाह पंचमी कब है?

नई दिल्ली में मंगलवार, 21 नवंबर 2028।

अमेरिका या ब्रिटेन में विवाह पंचमी की तारीख़ अलग क्यों होती है?

विवाह पंचमी का दिन वह है जिस दिन सूर्योदय पर उसकी तिथि, पंचमी, चल रही हो। तिथि पूरी दुनिया में एक ही क्षण शुरू और ख़त्म होती है, पर सूर्योदय हर जगह अपने समय पर होता है, इसलिए अमेरिका या ब्रिटेन में वह दिन भारत से एक दिन पहले पड़ सकता है। ऊपर के बॉक्स में अपना शहर चुनें, इस पेज की हर तारीख़ और समय उसके लिए निकाला जाएगा।

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