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बुध

पहले भाव में बुध
तनु भाव में बुध, फलदीपिका और लाल किताब से

यहाँ पढ़ें कि पहले भाव में बुध लाल किताब और फलदीपिका के अनुसार क्या फल देते हैं, इसका उपाय क्या है, यहाँ से वे किन भावों को देखते हैं और हर लग्न के लिए इसका क्या मतलब है।

आप ख़ुदलाल किताब
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पहले भाव में बुध; सबसे ऊपर का खाना पहला भाव, यानी लग्न है

पहले भाव में बुध बुद्धि, हाज़िरजवाबी और बातचीत का हुनर देते हैं, पर व्यक्ति का मन चंचल हो सकता है।

लाल किताब: शुभ स्थिति

बुध केंद्र (कुंडली के चार कोने, यानी पहला, चौथा, सातवाँ और दसवाँ भाव, जहाँ ग्रह सबसे ज़ोर से फल देते हैं) में मिथुन या कन्या राशि में हों तो भद्र योग, यानी बृहत् पाराशर होरा शास्त्र के पाँच महापुरुष योगों में से एक, बनाते हैं। नीचे की तालिका में वे लग्न दिखाए गए हैं जिनमें ऐसा होता है।

लाल किताब पहले भाव में बुध को भाव से पढ़ती है, आपके लग्न से नहीं; आपके अपने लग्न के लिए पराशर का मत आगे है, और फलदीपिका व बृहज्जातक का फल अलग हो सकता है। लाल किताब और पराशर में फ़र्क · लाल किताब: पक्का घर, ऋण और उपाय

लाल किताब उपाय

गले में छेद वाला ताँबे का सिक्का पहनें।

यह पहले भाव में बुध के लिए लाल किताब का एक उपाय है, यहाँ के शुभ फल को और पक्का करने के लिए; यह एक सुझाव है, और आपकी पूरी कुंडली कोई और उपाय भी माँग सकती है। बुध के सभी उपाय

फलदीपिका क्या कहती है

मंत्रेश्वर, अध्याय 8, श्लोक 11

फलदीपिका 8.11 के अनुसार लग्न (पहले भाव) में बुध हों तो जातक दीर्घायु होता है और मधुर तथा चतुर वाणी बोलता है। ग्रंथ तीक्ष्ण बुद्धि और सभी शास्त्रों का ज्ञान भी बताता है।

इसमें से कितना फलेगा, यह बाक़ी कुंडली पर निर्भर है: बुध किस राशि में हैं, पहले भाव के स्वामी कहाँ हैं, और कौन-से ग्रह साथ हैं या इसे देखते हैं। पुराने ग्रंथ पुरुष जातक की बात करते हैं; उनके फल हर किसी पर लागू होते हैं।

बृहज्जातक क्या कहता है

वराहमिहिर, श्लोक 20.6

बृहज्जातक 20.6: पहले भाव में बुध विद्वान बनाते हैं।

पहले भाव के बुध कब फल देते हैं, और कहाँ देखते हैं

इसका फल बुध की अपनी महादशा (17 साल) में और दूसरी महादशाओं के भीतर इनकी अंतर्दशा में सबसे ज़्यादा दिखता है। पहले भाव की बातें उस भाव के स्वामी की दशा में भी सामने आती हैं, जो आपके लग्न पर निर्भर है।

पहले भाव से इनकी दृष्टि (ग्रह की नज़र: ग्रह जिन भावों को देखते हैं, उन पर उनका असर पड़ता है), उन नियमों से जिनसे हमारी कुंडली भावों को तौलती है:

  • आपके सातवें भाव (शादी) पर: हमारी गणना में किसी ओर नहीं गिनी जाती

पहला भाव, तनु भाव: आप ख़ुद, शरीर, सेहत और आपकी छवि; यह केंद्र और त्रिकोण भाव (पहला, पाँचवाँ और नौवाँ भाव, भाग्य के भाव) है; इसके कारक (वह ग्रह जो, लग्न कोई भी हो, भाव की बातों के स्वाभाविक सूचक होते हैं) सूर्य हैं। पहला भाव, और उसमें हर ग्रह

हर लग्न के लिए पहले भाव में बुध

जिस राशि में बैठे, और जिन भावों के स्वामी
लग्नबुध की राशिवहाँ स्थितिकिन भावों के स्वामीइस लग्न के लिए
मेषमेषसमतीसरे और छठे भावअशुभ
वृषभवृषभमित्र राशिदूसरे और पाँचवें भावकुछ अशुभ— दूसरे और पाँचवें भाव के स्वामी, जिन्हें श्लोक 34.23 'कुछ अशुभ' कहता है, और मारकों में नहीं गिनता
मिथुनमिथुनस्वराशि · भद्र योगपहले और चौथे भावलग्नेश— लग्नेश, जिन्हें श्लोक शुभ या अशुभ नहीं कहता: 34.25 मिथुन के लिए केवल शुक्र को शुभ बताता है
कर्ककर्कशत्रु राशितीसरे और बारहवें भावअशुभ
सिंहसिंहमित्र राशिदूसरे और ग्यारहवें भावअशुभ— दूसरे भाव के स्वामी, पर श्लोक 34.29–30 इस लग्न के लिए शनि और चंद्र को मारक कहता है
कन्याकन्याउच्च · भद्र योगपहले और दसवें भावशुभ · योग— शुक्र के साथ योग देते हैं (34.32)
तुलातुलामित्र राशिनौवें और बारहवें भावशुभ · योग— चंद्र के साथ योग देते हैं (34.34)
वृश्चिकवृश्चिकसमआठवें और ग्यारहवें भावअशुभ
धनुधनुसमसातवें और दसवें भावशुभ · योग— सूर्य के साथ योग देते हैं (34.38)— सातवें भाव के स्वामी, पर श्लोक 34.37–38 इस लग्न के लिए शनि और शुक्र को मारक कहता है
मकरमकरसमछठे और नौवें भावशुभ
कुंभकुंभसमपाँचवें और आठवें भावतटस्थ— मिला-जुला फल देते हैं (34.42)
मीनमीननीचचौथे और सातवें भावअशुभ · मारक

हर राशि में बुध की स्थिति, और हर लग्न के लिए ये किन भावों के स्वामी हैं, जैसा हमारी मुफ़्त कुंडली पढ़ती है (अध्याय 34); हर भाव पर क्लिक करके पढ़ें कि उसके स्वामी पहले भाव में बैठें तो पराशर क्या कहते हैं। “वहाँ स्थिति” बताती है कि वह राशि बुध के लिए कैसी है: उच्च, अपनी, मित्र, सम, शत्रु या नीच। “इस लग्न के लिए” पराशर का फ़ैसला है, उन भावों के हिसाब से जिनके ये स्वामी हैं। ये दो अलग सवालों के जवाब हैं, इसलिए सम (मित्रता में) और तटस्थ (लग्न के लिए) दो अलग शब्द हैं।

तालिका के नाम, बृहत् पाराशर होरा शास्त्र, अध्याय 34 से:

  • योगकारक: लग्न के सबसे शुभ ग्रह: जिन्हें पराशर योग देने वाले बताते हैं, या जो एक साथ केंद्र (पहले, चौथे, सातवें, दसवें) और त्रिकोण (पहले, पाँचवें, नौवें) भाव के स्वामी हों (34.13)
  • शुभ, अशुभ, तटस्थ: लग्न के पक्ष में; कठिन बातें लाने वाले; दोनों में से कोई नहीं
  • लग्नेश: लग्न के अपने स्वामी, जहाँ श्लोक इन्हें शुभ या अशुभ नहीं कहता
  • मारक: जिन्हें पराशर उस लग्न के लिए आयु और सेहत पर भारी बताते हैं; अकेले, या किसी और नाम के बाद लिखे जाते हैं। ये हमेशा दूसरे या सातवें भाव के स्वामी नहीं होते: जहाँ अलग हों, नीचे की पंक्ति श्लोक बताती है
  • · योग: उन दो ग्रहों में से एक जो इस लग्न के लिए साथ मिलकर योग देते हैं

एक लग्न, पूरा पढ़कर

कन्या लग्न लें। यहाँ बुध कन्या राशि में (उच्च) बैठते हैं और आपके पहले और दसवें भाव के स्वामी हैं, इसलिए कन्या लग्न के लिए ये शुभ हैं (अध्याय 34)। दोनों एक ही ओर हैं, लग्न के लिए शुभ और अपनी राशि में बलवान: इस तालिका की सबसे अच्छी स्थिति। ऊपर का लाल किताब फल हर लग्न के लिए एक है; यह पंक्ति वह हिस्सा है जो आपके लग्न के साथ बदलता है।

बृहज्जातक 20.11 के अनुसार पहले भाव में बुध अपना शुभ फल कन्या लग्न के लिए पूरा, मिथुन लग्न के लिए आधा, वृषभ, सिंह और तुला लग्न के लिए चौथाई, कर्क लग्न के लिए थोड़ा और मीन लग्न के लिए कुछ नहीं देते हैं, उस राशि के हिसाब से जिसमें वे बैठें। सम राशि का अंश यह श्लोक नहीं बताता, और मेष, वृश्चिक, धनु, मकर और कुंभ लग्न के लिए ये सम राशि में ही बैठते हैं। श्लोक 20.10–11

पहले भाव में बुध: कहाँ सबसे अच्छा, कहाँ सबसे कठिन

ऊपर की तालिका से
अपनी राशि में बलवानमिथुन और कन्या लग्न, जहाँ ये उच्च के या अपनी राशि में बैठते हैं
लग्न के लिए शुभकन्या, तुला, धनु और मकर लग्न, जिनके लिए पराशर इन्हें शुभ या योगकारक मानते हैं
राशि में कमज़ोरमीन लग्न, जहाँ ये नीच के हैं
सबसे कठिन मेलकर्क और मीन लग्न: लग्न के लिए कठिन ग्रह, और शत्रु की या नीच राशि में

जब बुध आपकी चंद्र राशि से पहले भाव में गोचर करें

बुध का गोचर, जन्म कुंडली नहीं

यह ऊपर की जन्म-स्थिति नहीं: यहाँ बुध आपकी चंद्र राशि से गिनकर पहले भाव से गुज़र रहे हैं। फलदीपिका पहले भाव को बुध के गोचर के शुभ भावों में नहीं गिनती (बारहों भाव, बुध के पेज पर)। हमारी मासिक भविष्यवाणी इसे मिला-जुला पढ़ती है: दिमाग़ तेज़ चलता है, बातचीत ज़्यादा, थोड़ी बेचैनी।

दूसरे भावों में बुध

क्या आपकी कुंडली में बुध पहले भाव में हैं?एस्ट्रो व्यास इसे आपके लग्न, राशि और दशा के साथ पढ़ते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

3 सवाल
क्या पहले भाव में बुध शुभ हैं?

लाल किताब इसे शुभ स्थिति मानती है; बुध जिन 10 भावों में अच्छा फल देते हैं, यह उनमें से एक है (बाक़ी दूसरे, तीसरे, चौथे, पाँचवें, छठे, सातवें, नौवें, दसवें और ग्यारहवें भाव)। मिथुन और कन्या लग्न के लिए ये राशि से सबसे बलवान हैं; मीन लग्न के लिए नीच के।

पहले भाव में बुध का लाल किताब उपाय क्या है?

लाल किताब इसके लिए यह उपाय देती है: गले में छेद वाला ताँबे का सिक्का पहनें।

पहले भाव से बुध किन भावों को देखते हैं?

सातवें (शादी) भाव को।

ग्रह का अर्थ सबके लिए एक है, पर आपकी कुंडली सिर्फ़ आपकी है।

आपकी कुंडली में हर ग्रह कहाँ बैठे हैं, आपके लग्न के लिए किन भावों के स्वामी हैं और कौन-सी दशा चल रही है, इसी से तय होता है कि वे आपके लिए क्या करेंगे। सभी नौ ग्रह देखने के लिए अपनी मुफ़्त कुंडली बनाएँ।

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