शनि के लिए मंत्र, दान, व्रत, रत्न, रुद्राक्ष और हर भाव के लिए लाल किताब के उपाय, हर एक के कारण के साथ।
ये सुझाव हैं, नुस्ख़े नहीं। परंपरा में ये उपाय तब किए जाते हैं जब कुंडली में शनि कमज़ोर या पीड़ित हों, या उनकी दशा या कोई कठिन गोचर चल रहा हो। कौन-सा आप पर लागू है, यह आपकी कुंडली बताएगी।
बीज मंत्र ग्रह की मूल ध्वनि है। इसे गिनकर नियम से जपना शनि के शुभ फल (मेहनत, धैर्य और पिछले कर्मों का फल) बढ़ाने का सबसे पुराना तरीक़ा है। जप शनिवार से शुरू करें, और पूरा जप होने तक रोज़ उसी समय उतनी ही गिनती रखें।
ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः
शनि के अपने नाम का छोटा मंत्र, उनके लिए जो गिनती के बजाय सीधे प्रार्थना करना चाहें। शनि की पूजा शनि देव के रूप में ही की जाती है।
ॐ शं शनैश्चराय नमः
108 बार
शनि से जुड़ी चीज़ें शनिवार को किसी ज़रूरतमंद को दान करें। लाल किताब और पाराशरी परंपरा, दोनों इसे सबसे सहज उपाय मानती हैं।
शनिवार को शनि देव या हनुमान के लिए रखा गया व्रत मन को स्थिर करता है और शनि के कष्ट कम करता है।
रत्न शनि को बल देता है, इसलिए यह तभी फ़ायदा करता है जब शनि आपके लग्न के लिए शुभ हों, यानी लग्न के लिए अच्छे भावों के स्वामी हों। कुंडली दिखाकर ही पहनें: कुछ लग्नों के लिए यही रत्न नुक़सान करता है।
रुद्राक्ष में रत्न जैसा जोखिम नहीं होता; इसे शनि को शांत और स्थिर रखने के लिए पहना जाता है। दाने के देवता उसकी मुखी (धारियों की गिनती) से तय होते हैं, इसलिए वे ऊपर बताए गए शनि के पूज्य देवता से अलग हो सकते हैं।
लाल किताब हर भाव के लिए अलग उपाय देती है, क्योंकि शनि हर भाव से अलग फल देते हैं। आपकी कुंडली में ये जिस भाव में बैठे हों, उसी का उपाय करें। पक्का घर वह भाव है जिसे लाल किताब ग्रह का स्थायी घर मानती है।
| भाव | उपाय | किसलिए |
|---|---|---|
| पहला भाव | शनिवार को कौओं को खाना खिलाएँ और शनि मंदिर में सरसों का तेल चढ़ाएँ। | कठिन पक्ष हल्का करने के लिए: पहले भाव में शनि अनुशासित पर कठिन जीवन देते हैं। |
| दूसरा भाव | घर में सरसों के तेल से भरा गहरे रंग का बर्तन रखें; कौओं को खाना खिलाएँ। | कठिन पक्ष हल्का करने के लिए: दूसरे भाव में शनि परिवार में झगड़े, धन में देरी और कड़वी या धीमी वाणी देते हैं। |
| तीसरा भाव | शनिवार को लोहा या काली चीज़ें दान करें। | यहाँ के शुभ फल को और पक्का करने के लिए: तीसरे भाव में शनि मेहनत से सफलता, बोलचाल में संयम और 30 वर्ष की उम्र के बाद वफ़ादार भाई-बहन देते हैं। |
| चौथा भाव | शिव मंदिर में दूध चढ़ाएँ; शनिवार को सरसों का तेल दान करें। | कठिन पक्ष हल्का करने के लिए: चौथे भाव में शनि घर में दुख, संपत्ति ख़रीदने में देरी और माँ की सेहत की परेशानी देते हैं। |
| पाँचवाँ भाव | मंदिर में बादाम चढ़ाएँ; शनिवार को काली चीज़ें दान करें। | कठिन पक्ष हल्का करने के लिए: पाँचवें भाव में शनि संतान में देरी करते हैं, निराशावादी सोच देते हैं और पेट की समस्या दे सकते हैं। |
| छठा भाव | काले कुत्तों को खाना खिलाएँ; शनिवार को लोहे की चीज़ें दान करें। | यहाँ के शुभ फल को और पक्का करने के लिए: छठे भाव में शनि शत्रुओं पर जीत और अनुशासन से अच्छी सेहत देते हैं। |
| सातवाँ भाव | किसी सुनसान जगह पर चीनी से भरी बाँसुरी दबाएँ; काली गाय की सेवा करें; घर में शहद का एक बर्तन रखें; शराब और विवाह के बाहर के संबंधों से दूर रहें। | यहाँ के शुभ फल को और पक्का करने के लिए: लाल किताब में सातवें भाव में शनि उच्च के होते हैं और शुक्र के बल से काम करते हैं। |
| आठवाँ भाव | शनिवार को लोहा या काले तिल दान करें; तकिए के नीचे लोहे का टुकड़ा रखें। | यहाँ के शुभ फल को और पक्का करने के लिए: आठवें भाव (पक्का घर) में शनि लंबी उम्र और गूढ़ विद्याओं का गहरा ज्ञान देते हैं, पर पुरानी बीमारियाँ और छिपे शत्रु भी देते हैं। |
| नौवाँ भाव | शनिवार को सरसों का तेल चढ़ाएँ; बड़ों का आदर करें और गरीबों की सेवा करें। | कठिन पक्ष हल्का करने के लिए: नौवें भाव में शनि भाग्य में देरी करते हैं और आध्यात्मिक कामों व उच्च शिक्षा में रुकावटें डालते हैं। |
| दसवाँ भाव | रोज़ कौओं को खाना खिलाएँ; शनिवार को सरसों का तेल दान करें। | यहाँ के शुभ फल को और पक्का करने के लिए: दसवें भाव में शनि मेहनत से करियर में स्थिर सफलता देते हैं। |
| ग्यारहवाँ भाव | शनिवार को लोहे के औज़ार दान करें; रोज़ कौओं को खाना खिलाएँ। | यहाँ के शुभ फल को और पक्का करने के लिए: ग्यारहवें भाव में शनि देर से पर स्थिर आमदनी, वफ़ादार मित्र और 36 वर्ष की उम्र के बाद इच्छाओं की पूर्ति देते हैं। |
| बारहवाँ भाव | शनिवार को काले कंबल या जूते दान करें; मंदिर में सरसों का तेल चढ़ाएँ। | कठिन पक्ष हल्का करने के लिए: बारहवें भाव में शनि पुरानी बीमारियाँ, जन्मस्थान से दूर रहना और आध्यात्मिक वैराग्य देते हैं। |
ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः, कुल 23,000 बार, रोज़ कम से कम 108 बार, शनिवार को।
शनिवार को किसी ज़रूरतमंद को काले तिल और लोहे का दान करें।
नीलम। हर किसी को नहीं: तभी, जब शनि लग्न के लिए शुभ हों। पहले कुंडली दिखाएँ।
आपकी कुंडली में हर ग्रह कहाँ बैठे हैं, आपके लग्न के लिए किन भावों के स्वामी हैं और कौन-सी दशा चल रही है, इसी से तय होता है कि वे आपके लिए क्या करेंगे। सभी नौ ग्रह देखने के लिए अपनी मुफ़्त कुंडली बनाएँ।
मुफ़्त कुंडली बनाएँ

