सूर्य के लिए मंत्र, दान, व्रत, रत्न, रुद्राक्ष और हर भाव के लिए लाल किताब के उपाय, हर एक के कारण के साथ।
ये सुझाव हैं, नुस्ख़े नहीं। परंपरा में ये उपाय तब किए जाते हैं जब कुंडली में सूर्य कमज़ोर या पीड़ित हों, या उनकी दशा या कोई कठिन गोचर चल रहा हो। कौन-सा आप पर लागू है, यह आपकी कुंडली बताएगी।
बीज मंत्र ग्रह की मूल ध्वनि है। इसे गिनकर नियम से जपना सूर्य के शुभ फल (आत्मसम्मान, अधिकार और पिता) बढ़ाने का सबसे पुराना तरीक़ा है। जप रविवार से शुरू करें, और पूरा जप होने तक रोज़ उसी समय उतनी ही गिनती रखें।
ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः
सूर्य के अपने नाम का छोटा मंत्र, उनके लिए जो गिनती के बजाय सीधे प्रार्थना करना चाहें। सूर्य की पूजा सूर्य देव के रूप में ही की जाती है।
ॐ सूर्याय नमः
108 बार
सूर्य से जुड़ी चीज़ें रविवार को किसी ज़रूरतमंद को दान करें। लाल किताब और पाराशरी परंपरा, दोनों इसे सबसे सहज उपाय मानती हैं।
रविवार को सूर्य या शिव के लिए रखा गया व्रत मन को स्थिर करता है और सूर्य के कष्ट कम करता है।
रत्न सूर्य को बल देता है, इसलिए यह तभी फ़ायदा करता है जब सूर्य आपके लग्न के लिए शुभ हों, यानी लग्न के लिए अच्छे भावों के स्वामी हों। कुंडली दिखाकर ही पहनें: कुछ लग्नों के लिए यही रत्न नुक़सान करता है।
रुद्राक्ष में रत्न जैसा जोखिम नहीं होता; इसे सूर्य को शांत और स्थिर रखने के लिए पहना जाता है। दाने के देवता उसकी मुखी (धारियों की गिनती) से तय होते हैं, इसलिए वे ऊपर बताए गए सूर्य के पूज्य देवता से अलग हो सकते हैं।
लाल किताब हर भाव के लिए अलग उपाय देती है, क्योंकि सूर्य हर भाव से अलग फल देते हैं। आपकी कुंडली में ये जिस भाव में बैठे हों, उसी का उपाय करें। पक्का घर वह भाव है जिसे लाल किताब ग्रह का स्थायी घर मानती है।
| भाव | उपाय | किसलिए |
|---|---|---|
| पहला भाव | रोज़ सूर्योदय के समय सूर्य को जल चढ़ाएँ। | यहाँ के शुभ फल को और पक्का करने के लिए: पहले भाव में सूर्य नेतृत्व, सरकार की कृपा और राजा जैसा रौब देते हैं। |
| दूसरा भाव | रविवार को गेहूँ और गुड़ दान करें; मुफ़्त की चीज़ें न लें। | कठिन पक्ष हल्का करने के लिए: दूसरे भाव में सूर्य पारिवारिक धन को नुक़सान पहुँचा सकते हैं और पिता से झगड़े करा सकते हैं। |
| तीसरा भाव | चाँदी का ठोस टुकड़ा अपने पास रखें। | यहाँ के शुभ फल को और पक्का करने के लिए: तीसरे भाव में सूर्य साहस, भाई-बहनों से अच्छे संबंध और अपनी मेहनत से सफलता देते हैं। |
| चौथा भाव | सूर्य को जल चढ़ाएँ और बंदरों को गुड़ खिलाएँ। | कठिन पक्ष हल्का करने के लिए: चौथे भाव में सूर्य सरकारी संपत्ति और वाहन देते हैं, पर घर में अशांति और माँ की सेहत की परेशानी दे सकते हैं। |
| पाँचवाँ भाव | रोज़ माथे पर केसर का तिलक लगाएँ। | यहाँ के शुभ फल को और पक्का करने के लिए: पाँचवें भाव में सूर्य बुद्धिमान संतान, अच्छा भाग्य और ऊँचा चरित्र देते हैं। |
| छठा भाव | सिरहाने बादाम या अखरोट रखें। | यहाँ के शुभ फल को और पक्का करने के लिए: छठे भाव में सूर्य शत्रुओं पर जीत और अच्छी सेहत देते हैं, पर मामा की ओर से परेशानी आ सकती है। |
| सातवाँ भाव | रविवार को मंदिर में गेहूँ और गुड़ चढ़ाएँ; दान न लें। | कठिन पक्ष हल्का करने के लिए: सातवें भाव में सूर्य शादी में देरी या जीवनसाथी से मतभेद करा सकते हैं। |
| आठवाँ भाव | रविवार को बहते पानी में गुड़ या ताँबे के सिक्के बहाएँ। | कठिन पक्ष हल्का करने के लिए: आठवें भाव में सूर्य पिता से मिलने वाला सुख कम करते हैं, और छिपे नुक़सान और सरकारी जुर्माने करा सकते हैं। |
| नौवाँ भाव | रसोई साफ़ रखें और खाना कभी बर्बाद न करें। | यहाँ के शुभ फल को और पक्का करने के लिए: नौवें भाव में सूर्य भाग्य, आध्यात्मिक उन्नति और दान-पुण्य वाला स्वभाव देते हैं। |
| दसवाँ भाव | रविवार को सूर्य को जल चढ़ाएँ और गुड़ दान करें। | यहाँ के शुभ फल को और पक्का करने के लिए: दसवें भाव में सूर्य करियर में ऊँचा पद, अधिकार और सरकार से जुड़ाव देते हैं। |
| ग्यारहवाँ भाव | घर में एक अँधेरा कमरा या कोठरी रखें; रविवार को मांसाहार न करें। | यहाँ के शुभ फल को और पक्का करने के लिए: ग्यारहवें भाव में सूर्य स्थिर आमदनी और धनी मित्र देते हैं, पर यह सोया हुआ भाव हो सकता है, जिसमें फल देर से मिलते हैं। |
| बारहवाँ भाव | बहते पानी में गुड़ बहाएँ; मंदिर में गेहूँ चढ़ाएँ। | कठिन पक्ष हल्का करने के लिए: बारहवें भाव में सूर्य ख़र्च, आँखों की तकलीफ़ और सरकारी मामलों में नुक़सान कराते हैं। |
ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः, कुल 7,000 बार, रोज़ कम से कम 108 बार, रविवार को।
रविवार को किसी ज़रूरतमंद को गेहूँ और गुड़ का दान करें।
माणिक्य। हर किसी को नहीं: तभी, जब सूर्य लग्न के लिए शुभ हों। पहले कुंडली दिखाएँ।
आपकी कुंडली में हर ग्रह कहाँ बैठे हैं, आपके लग्न के लिए किन भावों के स्वामी हैं और कौन-सी दशा चल रही है, इसी से तय होता है कि वे आपके लिए क्या करेंगे। सभी नौ ग्रह देखने के लिए अपनी मुफ़्त कुंडली बनाएँ।
मुफ़्त कुंडली बनाएँ

