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शुक्र

नौवें भाव में शुक्र
धर्म भाव में शुक्र, फलदीपिका और लाल किताब से

यहाँ पढ़ें कि नौवें भाव में शुक्र लाल किताब और फलदीपिका के अनुसार क्या फल देते हैं, इसका उपाय क्या है, यहाँ से वे किन भावों को देखते हैं और हर लग्न के लिए इसका क्या मतलब है।

भाग्यलाल किताब
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नौवें भाव में शुक्र; सबसे ऊपर का खाना पहला भाव, यानी लग्न है

नौवें भाव में शुक्र कला से प्रेम, विदेश यात्रा और भक्ति के रास्ते आध्यात्मिक झुकाव देते हैं।

लाल किताब: शुभ स्थिति

लाल किताब नौवें भाव में शुक्र को भाव से पढ़ती है, आपके लग्न से नहीं; आपके अपने लग्न के लिए पराशर का मत आगे है, और फलदीपिका व बृहज्जातक का फल अलग हो सकता है। लाल किताब और पराशर में फ़र्क · लाल किताब: पक्का घर, ऋण और उपाय

लाल किताब उपाय

सफ़ेद चीज़ें दान करें। मंदिर में चावल चढ़ाएँ।

यह नौवें भाव में शुक्र के लिए लाल किताब का एक उपाय है, यहाँ के शुभ फल को और पक्का करने के लिए; यह एक सुझाव है, और आपकी पूरी कुंडली कोई और उपाय भी माँग सकती है। शुक्र के सभी उपाय

फलदीपिका क्या कहती है

मंत्रेश्वर, अध्याय 8, श्लोक 19

फलदीपिका 8.19 के अनुसार नौवें भाव (भाग्य और धर्म के भाव) में शुक्र हों तो जातक को जीवनसाथी, मित्र और संतान का सुख मिलता है। ग्रंथ कहता है कि शासन, बड़ों या सत्ता में बैठे लोगों की कृपा से उसकी समृद्धि बढ़ती है।

इसमें से कितना फलेगा, यह बाक़ी कुंडली पर निर्भर है: शुक्र किस राशि में हैं, नौवें भाव के स्वामी कहाँ हैं, और कौन-से ग्रह साथ हैं या इसे देखते हैं। पुराने ग्रंथ पुरुष जातक की बात करते हैं; उनके फल हर किसी पर लागू होते हैं।

बृहज्जातक क्या कहता है

वराहमिहिर, श्लोक 20.8 और 20.7

बृहज्जातक 20.8: नौवें भाव में शुक्र वही फल देते हैं जो यहाँ गुरु देते हैं (20.7): धार्मिक और दार्शनिक बुद्धि।

नौवें भाव के शुक्र कब फल देते हैं, और कहाँ देखते हैं

इसका फल शुक्र की अपनी महादशा (20 साल) में और दूसरी महादशाओं के भीतर इनकी अंतर्दशा में सबसे ज़्यादा दिखता है। नौवें भाव की बातें उस भाव के स्वामी की दशा में भी सामने आती हैं, जो आपके लग्न पर निर्भर है।

नौवें भाव से इनकी दृष्टि (ग्रह की नज़र: ग्रह जिन भावों को देखते हैं, उन पर उनका असर पड़ता है), उन नियमों से जिनसे हमारी कुंडली भावों को तौलती है:

  • आपके तीसरे भाव (छोटे भाई-बहन) पर: सहारा देती है

नौवाँ भाव, धर्म भाव: भाग्य, पिता, धर्म, गुरु और लंबी यात्राएँ; यह त्रिकोण भाव (पहला, पाँचवाँ और नौवाँ भाव, भाग्य के भाव) है; इसके कारक (वह ग्रह जो, लग्न कोई भी हो, भाव की बातों के स्वाभाविक सूचक होते हैं) गुरु, सूर्य हैं। नौवाँ भाव, और उसमें हर ग्रह

हर लग्न के लिए नौवें भाव में शुक्र

जिस राशि में बैठे, और जिन भावों के स्वामी
लग्नशुक्र की राशिवहाँ स्थितिकिन भावों के स्वामीइस लग्न के लिए
मेषधनुसमदूसरे और सातवें भावअशुभ · मारक
वृषभमकरमित्र राशिपहले और छठे भावअशुभ · मारक— लग्नेश, पर छठे भाव के स्वामी भी: अशुभ और मारक (34.23–24)
मिथुनकुंभमित्र राशिपाँचवें और बारहवें भावशुभ
कर्कमीनउच्चचौथे और ग्यारहवें भावअशुभ
सिंहमेषसमतीसरे और दसवें भावअशुभ
कन्यावृषभस्वराशिदूसरे और नौवें भावशुभ · मारक · योग— बुध के साथ योग देते हैं (34.32)
तुलामिथुनमित्र राशिपहले और आठवें भावतटस्थ— लग्नेश, जिन्हें श्लोक 34.34 तटस्थ कहता है
वृश्चिककर्कशत्रु राशिसातवें और बारहवें भावअशुभ · मारक
धनुसिंहशत्रु राशिछठे और ग्यारहवें भावअशुभ · मारक— छठे और ग्यारहवें भाव के स्वामी, दूसरे या सातवें के नहीं; फिर भी श्लोक 34.37–38 इन्हें मारक कहता है
मकरकन्यानीचपाँचवें और दसवें भावयोगकारक
कुंभतुलास्वराशिचौथे और नौवें भावयोगकारक
मीनवृश्चिकसमतीसरे और आठवें भावअशुभ

हर राशि में शुक्र की स्थिति, और हर लग्न के लिए ये किन भावों के स्वामी हैं, जैसा हमारी मुफ़्त कुंडली पढ़ती है (अध्याय 34); हर भाव पर क्लिक करके पढ़ें कि उसके स्वामी नौवें भाव में बैठें तो पराशर क्या कहते हैं। “वहाँ स्थिति” बताती है कि वह राशि शुक्र के लिए कैसी है: उच्च, अपनी, मित्र, सम, शत्रु या नीच। “इस लग्न के लिए” पराशर का फ़ैसला है, उन भावों के हिसाब से जिनके ये स्वामी हैं। ये दो अलग सवालों के जवाब हैं, इसलिए सम (मित्रता में) और तटस्थ (लग्न के लिए) दो अलग शब्द हैं।

तालिका के नाम, बृहत् पाराशर होरा शास्त्र, अध्याय 34 से:

  • योगकारक: लग्न के सबसे शुभ ग्रह: जिन्हें पराशर योग देने वाले बताते हैं, या जो एक साथ केंद्र (पहले, चौथे, सातवें, दसवें) और त्रिकोण (पहले, पाँचवें, नौवें) भाव के स्वामी हों (34.13)
  • शुभ, अशुभ, तटस्थ: लग्न के पक्ष में; कठिन बातें लाने वाले; दोनों में से कोई नहीं
  • लग्नेश: लग्न के अपने स्वामी, जहाँ श्लोक इन्हें शुभ या अशुभ नहीं कहता
  • मारक: जिन्हें पराशर उस लग्न के लिए आयु और सेहत पर भारी बताते हैं; अकेले, या किसी और नाम के बाद लिखे जाते हैं। ये हमेशा दूसरे या सातवें भाव के स्वामी नहीं होते: जहाँ अलग हों, नीचे की पंक्ति श्लोक बताती है
  • · योग: उन दो ग्रहों में से एक जो इस लग्न के लिए साथ मिलकर योग देते हैं

एक लग्न, पूरा पढ़कर

मकर लग्न लें। यहाँ शुक्र कन्या राशि में (नीच) बैठते हैं और आपके पाँचवें और दसवें भाव के स्वामी हैं, इसलिए मकर लग्न के लिए ये योगकारक हैं (अध्याय 34)। दोनों अलग दिशा में हैं: नाम बताता है कि ये इस लग्न के लिए क्या करते हैं, राशि बताती है कि इनमें कितना बल है, इसलिए ये अपने नाम जितना शुभ फल नहीं दे पाते, जब तक नीच भंग (नीचता का टूटना) इन्हें न उठाए। ऊपर का लाल किताब फल हर लग्न के लिए एक है; यह पंक्ति वह हिस्सा है जो आपके लग्न के साथ बदलता है।

बृहज्जातक 20.11 के अनुसार नौवें भाव में शुक्र अपना शुभ फल कर्क लग्न के लिए पूरा, कन्या और कुंभ लग्न के लिए आधा, वृषभ, मिथुन और तुला लग्न के लिए चौथाई, वृश्चिक और धनु लग्न के लिए थोड़ा और मकर लग्न के लिए कुछ नहीं देते हैं, उस राशि के हिसाब से जिसमें वे बैठें। सम राशि का अंश यह श्लोक नहीं बताता, और मेष, सिंह और मीन लग्न के लिए ये सम राशि में ही बैठते हैं। श्लोक 20.10–11

नौवें भाव में शुक्र: कहाँ सबसे अच्छा, कहाँ सबसे कठिन

ऊपर की तालिका से
अपनी राशि में बलवानकर्क, कन्या और कुंभ लग्न, जहाँ ये उच्च के या अपनी राशि में बैठते हैं
लग्न के लिए शुभमिथुन, कन्या, मकर और कुंभ लग्न, जिनके लिए पराशर इन्हें शुभ या योगकारक मानते हैं
राशि में कमज़ोरमकर लग्न, जहाँ ये नीच के हैं
सबसे कठिन मेलवृश्चिक और धनु लग्न: लग्न के लिए कठिन ग्रह, और शत्रु की या नीच राशि में

जब शुक्र आपकी चंद्र राशि से नौवें भाव में गोचर करें

शुक्र का गोचर, जन्म कुंडली नहीं

यह ऊपर की जन्म-स्थिति नहीं: यहाँ शुक्र आपकी चंद्र राशि से गिनकर नौवें भाव से गुज़र रहे हैं। फलदीपिका नौवें भाव को शुक्र के गोचर के शुभ भावों में गिनती है (बारहों भाव, शुक्र के पेज पर)। हमारी मासिक भविष्यवाणी इसे बहुत शुभ पढ़ती है: अच्छा भाग्य, तीर्थ, भक्ति, शुभ यात्रा।

दूसरे भावों में शुक्र

क्या आपकी कुंडली में शुक्र नौवें भाव में हैं?एस्ट्रो व्यास इसे आपके लग्न, राशि और दशा के साथ पढ़ते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

3 सवाल
क्या नौवें भाव में शुक्र शुभ हैं?

लाल किताब इसे शुभ स्थिति मानती है; शुक्र जिन 10 भावों में अच्छा फल देते हैं, यह उनमें से एक है (बाक़ी पहले, दूसरे, तीसरे, चौथे, पाँचवें, सातवें, दसवें, ग्यारहवें और बारहवें भाव)। कर्क, कन्या और कुंभ लग्न के लिए ये राशि से सबसे बलवान हैं; मकर लग्न के लिए नीच के।

नौवें भाव में शुक्र का लाल किताब उपाय क्या है?

लाल किताब इसके लिए यह उपाय देती है: सफ़ेद चीज़ें दान करें; मंदिर में चावल चढ़ाएँ।

नौवें भाव से शुक्र किन भावों को देखते हैं?

तीसरे (छोटे भाई-बहन) भाव को।

ग्रह का अर्थ सबके लिए एक है, पर आपकी कुंडली सिर्फ़ आपकी है।

आपकी कुंडली में हर ग्रह कहाँ बैठे हैं, आपके लग्न के लिए किन भावों के स्वामी हैं और कौन-सी दशा चल रही है, इसी से तय होता है कि वे आपके लिए क्या करेंगे। सभी नौ ग्रह देखने के लिए अपनी मुफ़्त कुंडली बनाएँ।

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