यहाँ पढ़ें कि तीसरे भाव में राहु लाल किताब और फलदीपिका के अनुसार क्या फल देते हैं, इसका उपाय क्या है, यहाँ से वे किन भावों को देखते हैं और हर लग्न के लिए इसका क्या मतलब है।
तीसरे भाव में राहु लीक से हटकर कामों का साहस, मीडिया में सफलता और विदेश यात्रा देते हैं।
लाल किताब तीसरे भाव में राहु को भाव से पढ़ती है, आपके लग्न से नहीं; आपके अपने लग्न के लिए पराशर का मत आगे है, और फलदीपिका का फल अलग हो सकता है। लाल किताब और पराशर में फ़र्क · लाल किताब: पक्का घर, ऋण और उपाय
घर में चंदन रखें। रोज़ पक्षियों को दाना डालें।
यह तीसरे भाव में राहु के लिए लाल किताब का एक उपाय है, यहाँ के शुभ फल को और पक्का करने के लिए; यह एक सुझाव है, और आपकी पूरी कुंडली कोई और उपाय भी माँग सकती है। राहु के सभी उपाय
फलदीपिका 8.25 के अनुसार तीसरे भाव (भाई-बहन और पराक्रम के भाव) में राहु हों तो जातक अभिमानी, दृढ़ निश्चयी, दीर्घायु और धनवान होता है। ग्रंथ यह भी कहता है कि भाइयों से उसका विरोध रहता है।
इसमें से कितना फलेगा, यह बाक़ी कुंडली पर निर्भर है: राहु किस राशि में हैं, तीसरे भाव के स्वामी कहाँ हैं, और कौन-से ग्रह साथ हैं या इसे देखते हैं। पुराने ग्रंथ पुरुष जातक की बात करते हैं; उनके फल हर किसी पर लागू होते हैं।
बृहज्जातक राहु या केतु का भाव-फल नहीं देता: वराहमिहिर सूर्य से शनि तक सात ग्रह पढ़ते हैं।
इसका फल राहु की अपनी महादशा (18 साल) में और दूसरी महादशाओं के भीतर इनकी अंतर्दशा में सबसे ज़्यादा दिखता है। तीसरे भाव की बातें उस भाव के स्वामी की दशा में भी सामने आती हैं, जो आपके लग्न पर निर्भर है।
तीसरे भाव से इनकी दृष्टि (ग्रह की नज़र: ग्रह जिन भावों को देखते हैं, उन पर उनका असर पड़ता है), उन नियमों से जिनसे हमारी कुंडली भावों को तौलती है:
तीसरा भाव, सहज भाव: छोटे भाई-बहन, साहस, मेहनत और छोटी यात्राएँ; यह उपचय भाव है; इसके कारक (वह ग्रह जो, लग्न कोई भी हो, भाव की बातों के स्वाभाविक सूचक होते हैं) मंगल हैं। तीसरा भाव, और उसमें हर ग्रह
| लग्न | राहु की राशि | उस राशि के स्वामी | जो इस लग्न के लिए |
|---|---|---|---|
| मेष | मिथुन | बुध | अशुभ |
| वृषभ | कर्क | चंद्र | अशुभ · मारक— केवल तीसरे भाव के स्वामी, दूसरे या सातवें के नहीं; फिर भी श्लोक 34.23–24 इन्हें मारक कहता है |
| मिथुन | सिंह | सूर्य | अशुभ |
| कर्क | कन्या | बुध | अशुभ |
| सिंह | तुला | शुक्र | अशुभ |
| कन्या | वृश्चिक | मंगल | अशुभ |
| तुला | धनु | गुरु | अशुभ · मारक— तीसरे और छठे भाव के स्वामी, दूसरे या सातवें के नहीं; फिर भी श्लोक 34.33–34 इन्हें मारक कहता है |
| वृश्चिक | मकर | शनि | अशुभ |
| धनु | कुंभ | शनि | मारक |
| मकर | मीन | गुरु | अशुभ |
| कुंभ | मेष | मंगल | अशुभ · मारक— तीसरे और दसवें भाव के स्वामी, दूसरे या सातवें के नहीं; फिर भी श्लोक 34.41–42 इन्हें मारक कहता है |
| मीन | वृषभ | शुक्र | अशुभ |
राहु को किसी भाव का स्वामी नहीं माना जाता, इसलिए ये जिस राशि में बैठें, उसका और उस राशि के स्वामी का फल देते हैं। जिस लग्न के लिए उस राशि के स्वामी शुभ हों, उस लग्न में इस भाव में बैठे राहु भी शुभ फल की ओर झुकते हैं। पराशर भी यही कहते हैं: राहु मुख्य रूप से उस भाव का फल देते हैं जिसमें बैठे हों, और उस भाव-स्वामी का जिसके साथ हों (बृहत् पाराशर होरा शास्त्र 34.16); और केंद्र (कुंडली के चार कोने, यानी पहला, चौथा, सातवाँ और दसवाँ भाव, जहाँ ग्रह सबसे ज़ोर से फल देते हैं) में बैठकर किसी केंद्र या त्रिकोण (पहला, पाँचवाँ और नौवाँ भाव, भाग्य के भाव) के स्वामी के साथ हों या उनकी दृष्टि पाएँ, तो योगकारक (वह ग्रह जो लग्न को योग, यानी सफलता और प्रतिष्ठा, देते हैं: लग्न के सबसे शुभ ग्रह) बन जाते हैं, यानी कुंडली को ऊपर उठाने वाले ग्रह (34.17)। परंपरा की उक्ति “शनिवत् राहु” भी है: राहु शनि की तरह फल देते हैं; फलदीपिका भी यही कहती है (8.34)। बाक़ी सातों ग्रह राहु और केतु के बीच हों, तो कुंडली में काल सर्प दोष देखा जाता है।
तालिका के नाम, बृहत् पाराशर होरा शास्त्र, अध्याय 34 से:
यह ऊपर की जन्म-स्थिति नहीं: यहाँ राहु आपकी चंद्र राशि से गिनकर तीसरे भाव से गुज़र रहे हैं। फलदीपिका तीसरे भाव को राहु के गोचर के शुभ भावों में गिनती है (बारहों भाव, राहु के पेज पर)। हमारी मासिक भविष्यवाणी इसे शुभ पढ़ती है: भरपूर साहस, अलग रास्तों से लाभ, जीत।
लाल किताब इसे शुभ स्थिति मानती है; राहु जिन 3 भावों में अच्छा फल देते हैं, यह उनमें से एक है (बाक़ी छठे और दसवें भाव)। असल फल राशि और आपके लग्न पर निर्भर करता है।
लाल किताब इसके लिए यह उपाय देती है: घर में चंदन रखें; रोज़ पक्षियों को दाना डालें।
सातवें (शादी), नौवें (भाग्य) और ग्यारहवें (आमदनी) भाव को।
आपकी कुंडली में हर ग्रह कहाँ बैठे हैं, आपके लग्न के लिए किन भावों के स्वामी हैं और कौन-सी दशा चल रही है, इसी से तय होता है कि वे आपके लिए क्या करेंगे। सभी नौ ग्रह देखने के लिए अपनी मुफ़्त कुंडली बनाएँ।
मुफ़्त कुंडली बनाएँ

