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चक्र का 8.3%

चंद्र महादशा
10 वर्ष

चंद्र महादशा 10 वर्ष चलती है, और इससे इन बातों का विचार किया जाता है: मन, माँ और घर। आपके लिए इसका फल इस पर निर्भर करता है कि आपकी कुंडली में चंद्र कहाँ बैठे हैं।

चंद्र महादशा, 120 वर्ष के विंशोत्तरी दशा चक्र में बाक़ी आठ के साथचंद्र महादशा, 120 वर्ष के विंशोत्तरी दशा चक्र में बाक़ी आठ के साथ

चक्र में चंद्र महादशा

120 में से 10 वर्ष। यह सूर्य (6 वर्ष) के बाद और मंगल (7 वर्ष) से पहले आती है। जन्म के समय चंद्रमा रोहिणी, हस्त या श्रवण नक्षत्र में थे, तो आप इसी महादशा में जन्मे; ये तीनों नक्षत्र चंद्र के हैं।

केतु7 वर्ष
शुक्र20 वर्ष
सूर्य6 वर्ष
चंद्र10 वर्ष
मंगल7 वर्ष
राहु18 वर्ष
गुरु16 वर्ष
शनि19 वर्ष
बुध17 वर्ष

नौ अंतर्दशाएँ

हर अंतर्दशा की अवधि = 10 × उस ग्रह के वर्ष ÷ 120। सबसे लंबी चंद्र–शुक्र, सबसे छोटी चंद्र–सूर्य; सब मिलकर 10 वर्ष।

  1. चंद्र–चंद्र10 माह · 304 दिन
  2. चंद्र–मंगल7 माह · 213 दिन
  3. चंद्र–राहु1 वर्ष 6 माह · 548 दिन
  4. चंद्र–गुरु1 वर्ष 4 माह · 487 दिन
  5. चंद्र–शनि1 वर्ष 7 माह · 578 दिन
  6. चंद्र–बुध1 वर्ष 5 माह · 517 दिन
  7. चंद्र–केतु7 माह · 213 दिन
  8. चंद्र–शुक्र1 वर्ष 8 माह · 609 दिन
  9. चंद्र–सूर्य6 माह · 183 दिन

यहाँ दशा का एक वर्ष 365.25 दिन का माना गया है, जो आजकल सबसे प्रचलित है। जो पंचांग 360 दिन का वर्ष लेते हैं, उनमें तारीख़ें थोड़ी अलग आएँगी। हर अवधि को निकटतम दिन तक पूरा किया गया है।

पराशर के अनुसार (बृहत् पाराशर होरा शास्त्र, अध्याय 53)

हर पंक्ति ग्रंथ का फल है: अंतर्दशा के स्वामी अच्छी स्थिति में हों तो क्या, और न हों तो क्या। आप पर कौन-सा लागू होता है, यह आपकी कुंडली तय करती है।

चंद्र की अंतर्दशा

शुभ हो तो: पराशर के अनुसार वाहन और वस्त्र मिलते हैं, देवताओं और गुरु में भक्ति रहती है, भगवान के भजन-कीर्तन होते हैं, अधिकार और ऊँचा पद मिलता है, बहुत सुख और आनंद मिलता है, और नाम व यश बढ़ता है।

कठिन हो तो: पराशर धन और पद की हानि, आलस्य, मानसिक पीड़ा, शासन व बड़े अधिकारियों से विरोध, माता को कष्ट, कारावास के भय और संबंधियों की हानि की चेतावनी देते हैं।

सावधानी: जब चंद्र आपके दूसरे या सातवें भाव के स्वामी हों, या आठवें अथवा बारहवें भाव के स्वामी के साथ हों, तब बृहत् पाराशर होरा शास्त्र इस अंतर्दशा को मारक (जिसे शास्त्र प्राणों के संकट से जोड़ते हैं) काल मानता है।

उपाय: राहत के लिए बृहत् पाराशर होरा शास्त्र कपिला गाय या भैंस का दान बताता है।

श्लोक 53.1–6

मंगल की अंतर्दशा

शुभ हो तो: पराशर के अनुसार भाग्य बढ़ता है, शासन से मान मिलता है, वस्त्र और आभूषण मिलते हैं, हर प्रयास में सफलता मिलती है, खेती की उपज और घर की समृद्धि बढ़ती है, और व्यापार में लाभ होता है।

कठिन हो तो: पराशर शरीर में कष्ट, घर और खेती में हानि, व्यापार में घाटे, कर्मचारियों व शासन से विरोध, संबंधियों से बिछोह और स्वभाव में उग्रता की चेतावनी देते हैं।

इन श्लोकों में इसके लिए अलग से कोई सावधानी या उपाय नहीं दिया गया; मंगल के रोज़ के उपाय उनके पेज पर हैं।

श्लोक 53.7–12

राहु की अंतर्दशा

शुभ हो तो: पराशर के अनुसार सब कामों में सफलता मिलती है, और नैऋत्य (दक्षिण-पश्चिम) दिशा से, बड़े लोगों के हाथों, वाहन, वस्त्र आदि मिलते हैं।

कठिन हो तो: पराशर आरंभ में कुछ शुभ फल बताते हैं, फिर शासन, चोरों और साँपों से ख़तरे, पशुधन को कष्ट, संबंधियों व मित्रों की हानि, मान-सम्मान में कमी और मानसिक पीड़ा की चेतावनी देते हैं।

सावधानी: जब राहु आपके दूसरे या सातवें भाव में बैठे हों (ये मारक भाव हैं, जिन्हें शास्त्र प्राणों के संकट से जोड़ते हैं), तब बृहत् पाराशर होरा शास्त्र शारीरिक कष्ट की चेतावनी देता है और स्वास्थ्य का ध्यान रखने को कहता है।

उपाय: राहत के लिए बृहत् पाराशर होरा शास्त्र राहु के मंत्र का जप और बकरी का दान बताता है।

श्लोक 53.13–21

गुरु की अंतर्दशा

शुभ हो तो: पराशर के अनुसार अधिकार और ऊँचा पद मिलता है, घर में मंगल उत्सव होते हैं, वस्त्र और आभूषण मिलते हैं, बड़े लोगों से मान मिलता है, इष्ट देवता की कृपा होती है, धन, भूमि और वाहन मिलते हैं, और शासन की कृपा से सब कामों में सफलता मिलती है।

कठिन हो तो: पराशर अपने गुरु (शिक्षक), पिता और संतान पर संकट, पद की हानि, मानसिक पीड़ा, झगड़ों, और घर, वाहन व खेती की ज़मीन की हानि की चेतावनी देते हैं।

सावधानी: जब गुरु आपके दूसरे या सातवें भाव के स्वामी हों, तब बृहत् पाराशर होरा शास्त्र इस अंतर्दशा को मारक (जिसे शास्त्र प्राणों के संकट से जोड़ते हैं) काल मानता है।

उपाय: राहत के लिए बृहत् पाराशर होरा शास्त्र शिव सहस्रनाम का पाठ और सोने का दान बताता है।

श्लोक 53.22–31

शनि की अंतर्दशा

शुभ हो तो: पराशर के अनुसार पुत्र का जन्म होता है, मित्रता बढ़ती है, धन और संपत्ति मिलती है, मेहनतकश लोगों की सहायता से व्यापार में लाभ होता है, खेती की उपज बढ़ती है, पुत्र से लाभ होता है, और शासन की कृपा से वैभव और प्रतिष्ठा मिलती है।

कठिन हो तो: पराशर इसे मिला-जुला समय बताते हैं: वे बहुत से लोगों द्वारा खड़ी की गई परेशानियों और शत्रुओं से कष्ट की चेतावनी देते हैं, और इसी स्थिति में तीर्थयात्रा और पवित्र नदियों में स्नान भी बताते हैं।

सावधानी: जब शनि आपके दूसरे या सातवें भाव (ये मारक भाव हैं, जिन्हें शास्त्र प्राणों के संकट से जोड़ते हैं) में, या आठवें भाव में बैठे हों, तब बृहत् पाराशर होरा शास्त्र शारीरिक कष्ट की चेतावनी देता है और स्वास्थ्य का ध्यान रखने को कहता है।

उपाय: राहत के लिए बृहत् पाराशर होरा शास्त्र महामृत्युंजय जप और काली गाय या भैंस का दान बताता है।

श्लोक 53.32–38

बुध की अंतर्दशा

शुभ हो तो: पराशर के अनुसार धन मिलता है, शासन से मान मिलता है, वस्त्र मिलते हैं, शास्त्रों की चर्चा होती है, विद्वानों और संतों की संगति से ज्ञान बढ़ता है, सुख मिलता है, संतान का जन्म होता है, मन संतुष्ट रहता है, व्यापार में लाभ होता है, और वाहन व आभूषण मिलते हैं।

कठिन हो तो: पराशर शरीर में पीड़ा, खेती में हानि, कारावास के भय, और जीवनसाथी व संतान को कष्ट की चेतावनी देते हैं।

सावधानी: जब बुध आपके दूसरे या सातवें भाव के स्वामी हों (ये मारक भाव हैं, जिन्हें शास्त्र प्राणों के संकट से जोड़ते हैं), तब बृहत् पाराशर होरा शास्त्र ज्वर की चेतावनी देता है और स्वास्थ्य का ध्यान रखने को कहता है।

उपाय: राहत के लिए बृहत् पाराशर होरा शास्त्र विष्णु सहस्रनाम का पाठ और बकरी का दान बताता है।

श्लोक 53.39–46

केतु की अंतर्दशा

शुभ हो तो: पराशर के अनुसार धन का लाभ, सुख, जीवनसाथी और संतान को सुख, और धर्म की ओर झुकाव होता है।

कठिन हो तो: पराशर शत्रुओं के दख़ल से कामों में रुकावटों और झगड़ों की चेतावनी देते हैं।

सावधानी: जब केतु आपके दूसरे या सातवें भाव में बैठे हों (ये मारक भाव हैं, जिन्हें शास्त्र प्राणों के संकट से जोड़ते हैं), तब बृहत् पाराशर होरा शास्त्र शरीर में रोग की चेतावनी देता है और स्वास्थ्य का ध्यान रखने को कहता है।

उपाय: इन सब कष्टों से राहत और भगवान शिव की कृपा से धन-संपत्ति के लाभ के लिए बृहत् पाराशर होरा शास्त्र महामृत्युंजय जप बताता है।

श्लोक 53.47–52

शुक्र की अंतर्दशा

शुभ हो तो: पराशर के अनुसार अधिकार और ऊँचा पद मिलता है, वस्त्र, आभूषण, पशुधन और वाहन मिलते हैं, जीवनसाथी और संतान को सुख मिलता है, नया घर बनता है, रोज़ मिष्ठान्न मिलते हैं, सुगंधित वस्तुओं का आनंद मिलता है, प्रेम और रसिकता का सुख मिलता है, और स्वास्थ्य अच्छा रहता है।

कठिन हो तो: पराशर भूमि-संपत्ति, संतान, जीवनसाथी और पशुधन से जुड़ी हानि की, और शासन के विरोध की चेतावनी देते हैं।

सावधानी: जब शुक्र आपके दूसरे या सातवें भाव के स्वामी हों, तब बृहत् पाराशर होरा शास्त्र इस अंतर्दशा को मारक (जिसे शास्त्र प्राणों के संकट से जोड़ते हैं) काल मानता है।

उपाय: राहत के लिए बृहत् पाराशर होरा शास्त्र रुद्र जप, और सफेद गाय व चाँदी का दान बताता है।

श्लोक 53.53–64

सूर्य की अंतर्दशा

शुभ हो तो: पराशर के अनुसार खोया हुआ पद और धन वापस मिलता है, परिवार में सुख रहता है, मित्रों और बड़े लोगों की सहायता से संपत्ति और भूमि मिलती है, पुत्र का जन्म होता है और माँ लक्ष्मी की कृपा होती है।

कठिन हो तो: पराशर शासन, चोरों और साँपों से ख़तरे, ज्वर, और परदेस की यात्रा में कष्ट की चेतावनी देते हैं।

सावधानी: जब सूर्य आपके दूसरे या सातवें भाव के स्वामी हों (ये मारक भाव हैं, जिन्हें शास्त्र प्राणों के संकट से जोड़ते हैं), तब बृहत् पाराशर होरा शास्त्र इस अंतर्दशा में ज्वर की चेतावनी देता है और स्वास्थ्य का ध्यान रखने को कहता है।

उपाय: राहत के लिए बृहत् पाराशर होरा शास्त्र भगवान शिव की उपासना बताता है।

श्लोक 53.65–70

चंद्र महादशा से किन बातों का विचार होता है

शास्त्र क्या कहते हैं, और आपकी कुंडली में इसका फल किससे तय होता है।

किन बातों का विचार

मन, माँ और घर

आपकी कुंडली तय करती है

आपकी कुंडली में चंद्र किन भावों के स्वामी हैं, किस भाव में बैठे हैं और वहाँ कितने बलवान हैं। चंद्र केंद्र (पहले, चौथे, सातवें, दसवें भाव) या त्रिकोण (पहले, पाँचवें, नौवें भाव) में, अपनी राशि में बलवान हों तो दशा अच्छा फल देती है; छठे, आठवें या बारहवें भाव में हों तो सावधानी रखनी पड़ती है। देखें: हर भाव में चंद्र और इनके उपाय।

आपकी कुंडली के हिसाब से

दशा कैलकुलेटर बताता है कि चंद्र महादशा आपके जीवन में कब आएगी, और आपकी कुंडली के हिसाब से इसका और इसकी हर अंतर्दशा का फल बताता है। मेरी दशा देखें।

पराशर इस महादशा के बारे में क्या कहते हैं (श्लोक 47.16–26)

पराशर के बताए फल शर्तों के साथ हैं: आपकी कुंडली में दशा के स्वामी कहाँ बैठे हैं, और किनके साथ हैं। पुराना ग्रंथ पुरुष जातक की बात करता है, पर इसके फल हर किसी पर लागू होते हैं।

जब यह शुभ फल देती है

  • चंद्र उच्च राशि या स्वराशि में हों, केंद्र (पहले, चौथे, सातवें या दसवें भाव) में या ग्यारहवें, नौवें अथवा पाँचवें भाव में हों, शुभ ग्रहों के साथ हों या उन पर शुभ दृष्टि (ग्रह की नज़र: ग्रह जिन भावों को देखते हैं, उन पर उनका असर पड़ता है) हो, पूर्ण बली हों और दसवें, नौवें या चौथे भाव के स्वामी के साथ हों, तो पराशर दशा के आरंभ से अंत तक वैभव और प्रतिष्ठा, सौभाग्य, धन-लाभ, घर में मांगलिक कार्य, भाग्योदय, सरकार में ऊँचा पद, वाहन, वस्त्र, संतान का जन्म और पशुधन की प्राप्ति बताते हैं।श्लोक 47.16–22
  • ऐसे बली चंद्र दूसरे भाव में हों, तो पराशर असाधारण धन-लाभ और सुख-सुविधाएँ बताते हैं।श्लोक 47.16–22

जब यह कठिन होती है

  • चंद्र क्षीण हों या नीच राशि में हों, तो पराशर उनकी दशा में धन-हानि की चेतावनी देते हैं।श्लोक 47.23–26
  • चंद्र तीसरे भाव में हों, तो पराशर के अनुसार सुख केवल बीच-बीच में मिलता है।श्लोक 47.23–26
  • चंद्र पाप ग्रहों के साथ हों, तो पराशर बुद्धि की मंदता, मानसिक तनाव, सेवकों से और माता के विषय में कष्ट, और धन-हानि की चेतावनी देते हैं।श्लोक 47.23–26
  • क्षीण चंद्र छठे, आठवें या बारहवें भाव में हों, अथवा पाप ग्रहों के साथ हों, तो पराशर सरकार से बिगड़े संबंधों, धन-हानि और माता को कष्ट की चेतावनी देते हैं, और सावधानी रखने को कहते हैं।श्लोक 47.23–26
  • बली चंद्र छठे, आठवें या बारहवें भाव में हों, तो पराशर कष्ट और अच्छे दिन बारी-बारी से बताते हैं।श्लोक 47.23–26

चंद्र महादशा में उपाय

चंद्र की दशा में परंपरा के सुझाव; आपको इनकी कितनी ज़रूरत है, यह आपकी कुंडली बताएगी।

क्या करें

  • चाँदी के गिलास में पानी पिएँ
  • जेब में चाँदी की गोली रखें
  • माँ की सेवा और आदर करें
  • मन की शांति के लिए ध्यान करें
  • सोमवार का व्रत रखें और शिव मंदिर जाएँ

किन बातों से बचें

  • नकारात्मक सोच से बचें
  • अपनी भावनाओं को मन में न दबाएँ
  • बासी या ठंडा खाना खाने से बचें

बीज मंत्र और दान

बीज मंत्र चंद्र की मूल ध्वनि है, जिसे गिनकर जपा जाता है।

ॐ श्रां श्रीं श्रौं सः चन्द्राय नमः

सोमवार को चावल और सफ़ेद वस्त्र का दान करें

चंद्र के सभी उपाय

हर लग्न के लिए चंद्र महादशा

पराशर आपके लग्न के लिए चंद्र को शुभ गिनते हैं या कठिन, इसी से इस दशा का स्वर तय होता है।

लग्नचंद्र (किन भावों के स्वामी)
मेषतटस्थ
चौथे भाव
वृषभअशुभ · मारक— केवल तीसरे भाव के स्वामी, दूसरे या सातवें के नहीं; फिर भी श्लोक 34.23–24 इन्हें मारक कहता है
तीसरे भाव
मिथुनमारक
दूसरे भाव
कर्कशुभ
पहले भाव
सिंहमारक— केवल बारहवें भाव के स्वामी, दूसरे या सातवें के नहीं; फिर भी श्लोक 34.29–30 इन्हें मारक कहता है
बारहवें भाव
कन्याअशुभ
ग्यारहवें भाव
तुलातटस्थ · योग— बुध के साथ योग देते हैं (34.34)
दसवें भाव
वृश्चिकयोगकारक— श्लोक 34.35–36 के अनुसार, दशम भाव के स्वामी सूर्य के साथ
नौवें भाव
धनुतटस्थ
आठवें भाव
मकरअशुभ— सातवें भाव के स्वामी, पर श्लोक 34.39–40 इस लग्न के लिए मंगल को मारक कहता है
सातवें भाव
कुंभअशुभ
छठे भाव
मीनशुभ
पाँचवें भाव

तालिका के नाम, बृहत् पाराशर होरा शास्त्र, अध्याय 34 से:

  • योगकारक: लग्न के सबसे शुभ ग्रह: जिन्हें पराशर योग देने वाले बताते हैं, या जो एक साथ केंद्र (पहले, चौथे, सातवें, दसवें) और त्रिकोण (पहले, पाँचवें, नौवें) भाव के स्वामी हों (34.13)
  • शुभ, अशुभ, तटस्थ: लग्न के पक्ष में; कठिन बातें लाने वाले; दोनों में से कोई नहीं
  • लग्नेश: लग्न के अपने स्वामी, जहाँ श्लोक इन्हें शुभ या अशुभ नहीं कहता
  • मारक: जिन्हें पराशर उस लग्न के लिए आयु और सेहत पर भारी बताते हैं; अकेले, या किसी और नाम के बाद लिखे जाते हैं। ये हमेशा दूसरे या सातवें भाव के स्वामी नहीं होते: जहाँ अलग हों, नीचे की पंक्ति श्लोक बताती है
  • · योग: उन दो ग्रहों में से एक जो इस लग्न के लिए साथ मिलकर योग देते हैं
मेरी चल रही दशा का मेरे लिए क्या मतलब है?आचार्य पराशर आपकी पूरी कुंडली देखकर आपकी महादशा और अंतर्दशा का फल बताते हैं।

आम सवाल

चंद्र महादशा कितने समय चलती है?

10 वर्ष, यानी 120 वर्ष के चक्र का 8.3%, और यह नौ अंतर्दशाओं में बँटी होती है।

चंद्र महादशा कब शुरू होती है?

अगर जन्म के समय चंद्रमा रोहिणी, हस्त या श्रवण नक्षत्र में थे, तो जन्म से ही; नहीं तो सूर्य महादशा ख़त्म होने पर। यह आपके जीवन में आएगी या नहीं, यह इस पर निर्भर है कि जन्म के समय कौन-सी महादशा चल रही थी।

चंद्र महादशा अच्छी है या बुरी?

आम तौर पर दोनों में से कोई नहीं। यह इस बात से तय होता है कि आपकी कुंडली में चंद्र किन भावों के स्वामी हैं, कहाँ बैठे हैं और कितने बलवान हैं; कैलकुलेटर इसे आपकी कुंडली के हिसाब से पढ़ता है।

आपकी कौन-सी दशा चल रही है, यह आपकी कुंडली का तथ्य है।

यह जन्म के समय चंद्रमा के नक्षत्र से निकलती है। जन्म विवरण भरें, और पूरी 120 वर्ष की समय-रेखा आ जाएगी, हर दशा का फल आपकी कुंडली के हिसाब से।

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