किन बातों का विचार
मेहनत, ज़मीन-जायदाद और विवाद
चक्र का 5.8%
मंगल महादशा 7 वर्ष चलती है, और इससे इन बातों का विचार किया जाता है: मेहनत, ज़मीन-जायदाद और विवाद। आपके लिए इसका फल इस पर निर्भर करता है कि आपकी कुंडली में मंगल कहाँ बैठे हैं।
120 में से 7 वर्ष। यह चंद्र (10 वर्ष) के बाद और राहु (18 वर्ष) से पहले आती है। जन्म के समय चंद्रमा मृगशिरा, चित्रा या धनिष्ठा नक्षत्र में थे, तो आप इसी महादशा में जन्मे; ये तीनों नक्षत्र मंगल के हैं।
हर अंतर्दशा की अवधि = 7 × उस ग्रह के वर्ष ÷ 120। सबसे लंबी मंगल–शुक्र, सबसे छोटी मंगल–सूर्य; सब मिलकर 7 वर्ष।
यहाँ दशा का एक वर्ष 365.25 दिन का माना गया है, जो आजकल सबसे प्रचलित है। जो पंचांग 360 दिन का वर्ष लेते हैं, उनमें तारीख़ें थोड़ी अलग आएँगी। हर अवधि को निकटतम दिन तक पूरा किया गया है।
हर पंक्ति ग्रंथ का फल है: अंतर्दशा के स्वामी अच्छी स्थिति में हों तो क्या, और न हों तो क्या। आप पर कौन-सा लागू होता है, यह आपकी कुंडली तय करती है।
शुभ हो तो: पराशर के अनुसार बड़े लोगों की कृपा से धन मिलता है, माँ लक्ष्मी की कृपा होती है, खोया हुआ पद और धन वापस मिलता है, और पुत्र का जन्म होता है।
कठिन हो तो: पराशर मूत्र रोग, चोट, और साँपों व शासन से ख़तरे की चेतावनी देते हैं।
सावधानी: जब मंगल आपके दूसरे या सातवें भाव के स्वामी हों (ये मारक भाव हैं, जिन्हें शास्त्र प्राणों के संकट से जोड़ते हैं), तब बृहत् पाराशर होरा शास्त्र मानसिक पीड़ा और शरीर में दर्द की चेतावनी देता है और स्वास्थ्य का ध्यान रखने को कहता है।
उपाय: राहत के लिए बृहत् पाराशर होरा शास्त्र रुद्र जप और लाल रंग के बैल का दान बताता है। ग्रंथ कहता है कि इससे भगवान शिव स्वास्थ्य लौटाते हैं और धन व सुख देते हैं।
श्लोक 54.1–8शुभ हो तो: पराशर के अनुसार शासन से मान मिलता है, घर और भूमि मिलती है, पुत्र से सुख मिलता है, व्यापार में असाधारण लाभ होता है, गंगा जैसी पवित्र नदियों में स्नान होता है और परदेस की यात्राएँ होती हैं।
कठिन हो तो: पराशर साँपों से ख़तरे, चोट, पशुधन की हानि, जानवरों से ख़तरे, पित्त और वात के असंतुलन से रोग, और कारावास के भय की चेतावनी देते हैं।
सावधानी: जब राहु आपके दूसरे भाव में बैठे हों, तब बृहत् पाराशर होरा शास्त्र धन की हानि की चेतावनी देता है।
उपाय: राहत और लंबी आयु के लिए बृहत् पाराशर होरा शास्त्र नाग पूजा, ब्राह्मण भोजन और महामृत्युंजय जप बताता है।
श्लोक 54.9–14शुभ हो तो: पराशर के अनुसार अच्छा नाम और ख्याति मिलती है, शासन से सम्मान मिलता है, धन और अन्न बढ़ता है, घर में सुख रहता है, संपत्ति मिलती है, और जीवनसाथी व संतान से सुख मिलता है।
कठिन हो तो: पराशर चोरों और साँपों से ख़तरे, शासन के क्रोध, पित्त के रोग, प्रेत बाधा, सेवकों का साथ छूटने और भाई-बहनों से जुड़ी हानि की चेतावनी देते हैं।
सावधानी: जब गुरु आपके दूसरे भाव के स्वामी हों (यह मारक भाव है, जिसे शास्त्र प्राणों के संकट से जोड़ते हैं), तब बृहत् पाराशर होरा शास्त्र ज्वर या अकाल मृत्यु की चेतावनी देता है और स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखने को कहता है।
उपाय: राहत के लिए बृहत् पाराशर होरा शास्त्र शिव सहस्रनाम का पाठ बताता है।
श्लोक 54.15–22शुभ हो तो: पराशर के अनुसार बड़े लोगों से मान मिलता है, प्रतिष्ठा बढ़ती है, धन और अन्न मिलता है, संतान और पौत्र-पौत्रियों से सुख मिलता है, और गायों की संख्या बढ़ती है।
कठिन हो तो: पराशर विदेशी अधिकारियों से परेशानी, धन की हानि, कारावास के भय, रोग की आशंका और खेती की उपज में कमी की चेतावनी देते हैं।
सावधानी: जब शनि आपके दूसरे या सातवें भाव के स्वामी हों और पाप ग्रहों के साथ हों, तब बृहत् पाराशर होरा शास्त्र इसे गंभीर मारक (जिसे शास्त्र प्राणों के संकट से जोड़ते हैं) काल मानता है।
उपाय: भगवान शिव की कृपा से राहत के लिए बृहत् पाराशर होरा शास्त्र विधिपूर्वक महामृत्युंजय जप बताता है।
श्लोक 54.23–35शुभ हो तो: पराशर के अनुसार संतों और धर्मात्माओं की संगति मिलती है, अजपा जप (साँस के साथ चलने वाला मौन जप) होता है, दान और धार्मिक व्रत-नियम होते हैं, नाम होता है, कूटनीति में रुचि बढ़ती है, मिष्ठान्न मिलते हैं, वाहन, वस्त्र और पशुधन मिलते हैं, बड़े लोगों के निकट अधिकार वाला पद मिलता है और खेती में सफलता मिलती है।
कठिन हो तो: पराशर हृदय रोग, कारावास के भय, संबंधियों की हानि, जीवनसाथी और संतान को कष्ट, और धन व पशुधन की हानि की चेतावनी देते हैं।
सावधानी: जब बुध आपके दूसरे या सातवें भाव के स्वामी हों (ये मारक भाव हैं, जिन्हें शास्त्र प्राणों के संकट से जोड़ते हैं), तब बृहत् पाराशर होरा शास्त्र गंभीर रोग की आशंका की चेतावनी देता है और स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखने को कहता है।
उपाय: राहत के लिए बृहत् पाराशर होरा शास्त्र विष्णु सहस्रनाम का पाठ और घोड़े का दान बताता है।
श्लोक 54.36–47शुभ हो तो: पराशर के अनुसार बड़े लोगों की कृपा होती है, धन और भूमि मिलती है, पुत्र का जन्म होता है, शासन से अधिकार मिलता है और पशुधन मिलता है।
कठिन हो तो: पराशर झगड़ों, दाँतों के रोग, चोरों और जंगली जानवरों से कष्ट, ज्वर, पेचिश, चर्म रोग (ग्रंथ कुष्ठ का नाम लेता है), और जीवनसाथी व संतान को कष्ट की चेतावनी देते हैं।
सावधानी: जब केतु आपके दूसरे या सातवें भाव में बैठे हों (ये मारक भाव हैं, जिन्हें शास्त्र प्राणों के संकट से जोड़ते हैं), तब बृहत् पाराशर होरा शास्त्र रोग, अपमान, मानसिक पीड़ा और धन की हानि की चेतावनी देता है और सावधानी रखने को कहता है।
इन श्लोकों में इसके लिए अलग से कोई उपाय नहीं दिया गया; केतु के रोज़ के उपाय उनके पेज पर हैं।
श्लोक 54.48–54शुभ हो तो: पराशर के अनुसार अधिकार और ऊँचा पद मिलता है, बहुत सुख और विलास के साधन मिलते हैं, और वाहन व वस्त्र मिलते हैं।
कठिन हो तो: पराशर शोक, शरीर में कष्ट, धन की हानि, चोरों और शासन से ख़तरे, परिवार में फूट, जीवनसाथी व संतान को कष्ट, और पशुधन की हानि की चेतावनी देते हैं।
सावधानी: जब शुक्र आपके दूसरे या सातवें भाव के स्वामी हों (ये मारक भाव हैं, जिन्हें शास्त्र प्राणों के संकट से जोड़ते हैं), तब बृहत् पाराशर होरा शास्त्र इस अंतर्दशा में शरीर में पीड़ा की चेतावनी देता है और स्वास्थ्य का ध्यान रखने को कहता है।
उपाय: फिर से अच्छे स्वास्थ्य के लिए बृहत् पाराशर होरा शास्त्र गाय या भैंस का दान बताता है।
श्लोक 54.55–63शुभ हो तो: पराशर के अनुसार वाहन मिलते हैं, नाम होता है, पुत्र का जन्म होता है, धन बढ़ता है, परिवार में मेल-जोल रहता है, स्वास्थ्य अच्छा रहता है, शरीर में बल रहता है, शासन से मान मिलता है, व्यापार में असाधारण लाभ होता है, और बड़े अधिकारियों से भेंट होती है।
कठिन हो तो: पराशर शरीर में कष्ट, मानसिक पीड़ा, कामों में असफलता, और माथे के रोग, ज्वर व पेचिश की आशंका की चेतावनी देते हैं।
सावधानी: जब सूर्य आपके दूसरे या सातवें भाव के स्वामी हों (ये मारक भाव हैं, जिन्हें शास्त्र प्राणों के संकट से जोड़ते हैं), तब बृहत् पाराशर होरा शास्त्र ज्वर, साँप और विष से भय, और पुत्र को कष्ट की चेतावनी देता है और सावधानी रखने को कहता है।
उपाय: फिर से अच्छे स्वास्थ्य और धन के लिए बृहत् पाराशर होरा शास्त्र विधिपूर्वक सूर्य की उपासना बताता है।
श्लोक 54.64–69शुभ हो तो: पराशर के अनुसार अधिकार बढ़ता है, सुगंधित वस्तुएँ और वस्त्र मिलते हैं, जलाशय और गौशालाएँ बनवाई जाती हैं, विवाह जैसे मंगल कार्य होते हैं, जीवनसाथी और संतान को सुख मिलता है, माता-पिता से संबंध अच्छे रहते हैं, बड़े लोगों की कृपा से संपत्ति मिलती है, और मनचाहे कामों में सफलता मिलती है। चंद्र शुक्ल पक्ष के बढ़ते हुए हों तो ये फल पूरे मिलते हैं; क्षीण चंद्र इन्हें कुछ घटा देते हैं।
कठिन हो तो: पराशर जीवनसाथी व संतान को कष्ट, भूमि, धन और पशुधन की हानि, लड़ाई-झगड़े के ख़तरे और प्राण-संकट की चेतावनी देते हैं।
सावधानी: जब चंद्र आपके दूसरे या सातवें भाव के स्वामी हों, तब बृहत् पाराशर होरा शास्त्र इस अंतर्दशा को मारक (जिसे शास्त्र प्राणों के संकट से जोड़ते हैं) काल मानता है।
उपाय: राहत के लिए बृहत् पाराशर होरा शास्त्र माँ दुर्गा और माँ लक्ष्मी के मंत्रों का पाठ बताता है।
श्लोक 54.70–76शास्त्र क्या कहते हैं, और आपकी कुंडली में इसका फल किससे तय होता है।
मेहनत, ज़मीन-जायदाद और विवाद
आपकी कुंडली में मंगल किन भावों के स्वामी हैं, किस भाव में बैठे हैं और वहाँ कितने बलवान हैं। मंगल केंद्र (पहले, चौथे, सातवें, दसवें भाव) या त्रिकोण (पहले, पाँचवें, नौवें भाव) में, अपनी राशि में बलवान हों तो दशा अच्छा फल देती है; छठे, आठवें या बारहवें भाव में हों तो सावधानी रखनी पड़ती है। देखें: हर भाव में मंगल और इनके उपाय।
दशा कैलकुलेटर बताता है कि मंगल महादशा आपके जीवन में कब आएगी, और आपकी कुंडली के हिसाब से इसका और इसकी हर अंतर्दशा का फल बताता है। मेरी दशा देखें।
पराशर के बताए फल शर्तों के साथ हैं: आपकी कुंडली में दशा के स्वामी कहाँ बैठे हैं, और किनके साथ हैं। पुराना ग्रंथ पुरुष जातक की बात करता है, पर इसके फल हर किसी पर लागू होते हैं।
मंगल की दशा में परंपरा के सुझाव; आपको इनकी कितनी ज़रूरत है, यह आपकी कुंडली बताएगी।
बीज मंत्र मंगल की मूल ध्वनि है, जिसे गिनकर जपा जाता है।
ॐ क्रां क्रीं क्रौं सः भौमाय नमः
मंगलवार को मसूर दाल और गुड़ का दान करें
पराशर आपके लग्न के लिए मंगल को शुभ गिनते हैं या कठिन, इसी से इस दशा का स्वर तय होता है।
| लग्न | मंगल (किन भावों के स्वामी) |
|---|---|
| मेष | शुभ पहले और आठवें भाव |
| वृषभ | मारक सातवें और बारहवें भाव |
| मिथुन | अशुभ छठे और ग्यारहवें भाव |
| कर्क | योगकारक पाँचवें और दसवें भाव |
| सिंह | योगकारक चौथे और नौवें भाव |
| कन्या | अशुभ तीसरे और आठवें भाव |
| तुला | अशुभ · मारक दूसरे और सातवें भाव |
| वृश्चिक | तटस्थ पहले और छठे भाव |
| धनु | शुभ पाँचवें और बारहवें भाव |
| मकर | अशुभ · मारक— चौथे और ग्यारहवें भाव के स्वामी, दूसरे या सातवें के नहीं; फिर भी श्लोक 34.39–40 इन्हें मारक कहता है चौथे और ग्यारहवें भाव |
| कुंभ | अशुभ · मारक— तीसरे और दसवें भाव के स्वामी, दूसरे या सातवें के नहीं; फिर भी श्लोक 34.41–42 इन्हें मारक कहता है तीसरे और दसवें भाव |
| मीन | शुभ · योग— गुरु के साथ योग देते हैं (34.44)— साथ ही मारक भी कहे गए, पर अपने आप मारक नहीं (34.44) दूसरे और नौवें भाव |
तालिका के नाम, बृहत् पाराशर होरा शास्त्र, अध्याय 34 से:
7 वर्ष, यानी 120 वर्ष के चक्र का 5.8%, और यह नौ अंतर्दशाओं में बँटी होती है।
अगर जन्म के समय चंद्रमा मृगशिरा, चित्रा या धनिष्ठा नक्षत्र में थे, तो जन्म से ही; नहीं तो चंद्र महादशा ख़त्म होने पर। यह आपके जीवन में आएगी या नहीं, यह इस पर निर्भर है कि जन्म के समय कौन-सी महादशा चल रही थी।
आम तौर पर दोनों में से कोई नहीं। यह इस बात से तय होता है कि आपकी कुंडली में मंगल किन भावों के स्वामी हैं, कहाँ बैठे हैं और कितने बलवान हैं; कैलकुलेटर इसे आपकी कुंडली के हिसाब से पढ़ता है।
यह जन्म के समय चंद्रमा के नक्षत्र से निकलती है। जन्म विवरण भरें, और पूरी 120 वर्ष की समय-रेखा आ जाएगी, हर दशा का फल आपकी कुंडली के हिसाब से।
मेरी दशा देखें

