किन बातों का विचार
महत्वाकांक्षा, अनजानी चीज़ें और अचानक मोड़
चक्र का 15%
राहु महादशा 18 वर्ष चलती है, और इससे इन बातों का विचार किया जाता है: महत्वाकांक्षा, अनजानी चीज़ें और अचानक मोड़। आपके लिए इसका फल इस पर निर्भर करता है कि आपकी कुंडली में राहु कहाँ बैठे हैं।
120 में से 18 वर्ष। यह मंगल (7 वर्ष) के बाद और गुरु (16 वर्ष) से पहले आती है। जन्म के समय चंद्रमा आर्द्रा, स्वाति या शतभिषा नक्षत्र में थे, तो आप इसी महादशा में जन्मे; ये तीनों नक्षत्र राहु के हैं।
हर अंतर्दशा की अवधि = 18 × उस ग्रह के वर्ष ÷ 120। सबसे लंबी राहु–शुक्र, सबसे छोटी राहु–सूर्य; सब मिलकर 18 वर्ष।
यहाँ दशा का एक वर्ष 365.25 दिन का माना गया है, जो आजकल सबसे प्रचलित है। जो पंचांग 360 दिन का वर्ष लेते हैं, उनमें तारीख़ें थोड़ी अलग आएँगी। हर अवधि को निकटतम दिन तक पूरा किया गया है।
हर पंक्ति ग्रंथ का फल है: अंतर्दशा के स्वामी अच्छी स्थिति में हों तो क्या, और न हों तो क्या। आप पर कौन-सा लागू होता है, यह आपकी कुंडली तय करती है।
शुभ हो तो: पराशर के अनुसार इस अंतर्दशा में अधिकार या ऊँचे पद की प्राप्ति होती है, मन में उत्साह रहता है और शासन व सत्ता में बैठे लोगों से अच्छे संबंध बनते हैं। जीवनसाथी और संतान से सुख मिलता है तथा संपत्ति बढ़ती है।
कठिन हो तो: पराशर चोरों से भय, घाव से कष्ट और सरकारी अधिकारियों से विरोध की चेतावनी देते हैं। साथ ही बंधु-बांधवों की हानि और जीवनसाथी व संतान को कष्ट की भी चेतावनी है।
सावधानी: जब राहु दूसरे या सातवें भाव में बैठे हों या इन भावों के स्वामियों के साथ हों (श्लोक उन्हें इन भावों का स्वामी कहता है; छाया ग्रह किसी भाव के स्वामी नहीं होते), तब बृहत् पाराशर होरा शास्त्र इस अंतर्दशा में कष्ट और रोग की चेतावनी देता है।
उपाय: इन कष्टों से राहत के लिए बृहत् पाराशर होरा शास्त्र राहु के मंत्रों का जाप करके उनकी पूजा करने और राहु से जुड़ी वस्तुओं का दान करने को कहता है।
श्लोक 55.1–7शुभ हो तो: पराशर के अनुसार इस अंतर्दशा में पद की प्राप्ति, धैर्य, शत्रुओं का नाश, सुख-भोग और सत्ता में बैठे लोगों से अच्छे संबंध मिलते हैं। शुक्ल पक्ष के चंद्रमा की तरह धन-संपत्ति लगातार बढ़ती है। वाहन और पशुधन मिलते हैं, पश्चिम या दक्षिण-पूर्व की यात्रा से किसी बड़े अधिकारी से भेंट होती है, मनचाहे कामों में सफलता मिलती है और अपने घर-नगर लौटना होता है। ब्राह्मणों की सेवा, तीर्थयात्रा, भूमि या संपत्ति की प्राप्ति और देवताओं व ब्राह्मणों में भक्ति होती है। जीवनसाथी, संतान और पोते-पोतियों से सुख मिलता है और रोज़ मीठे पकवान मिलते हैं।
कठिन हो तो: पराशर धन-हानि, काम में रुकावट, अपयश, जीवनसाथी व संतान को कष्ट और हृदय रोग की चेतावनी देते हैं। इन्हीं कठिन फलों में वे सरकारी ज़िम्मेदारी सौंपे जाने को भी गिनाते हैं: यहाँ यह पुरस्कार नहीं, एक अनचाहा बोझ है।
सावधानी: जब गुरु दूसरे या सातवें भाव के स्वामी हों, तब बृहत् पाराशर होरा शास्त्र इस अंतर्दशा को मारक (जिसे शास्त्र प्राणों के संकट से जोड़ते हैं) मानता है और अकाल मृत्यु के भय की चेतावनी देता है।
उपाय: राहत और अच्छे स्वास्थ्य के लिए बृहत् पाराशर होरा शास्त्र भगवान शिव की स्वर्ण-प्रतिमा की पूजा बताता है; उनकी कृपा से कष्ट दूर होते हैं।
श्लोक 55.8–20शुभ हो तो: पराशर के अनुसार इस अंतर्दशा में लगन से की गई सेवा पर सत्ता में बैठे लोग प्रसन्न होते हैं, घर में विवाह जैसे शुभ कार्य होते हैं, बगीचा या जलाशय बनता है, और श्रमिक वर्ग के धनी लोगों से धन व पशुधन मिलता है। इसी श्लोक में कुछ मिले-जुले फल भी हैं: पश्चिम की यात्रा में शासन के कारण धन-हानि, अपने आलस्य से आय में कमी, और अपने घर-नगर लौटना।
कठिन हो तो: पराशर सेवकों, शासन और शत्रुओं से भय, जीवनसाथी, संतान और बंधुओं को कष्ट, पैतृक संपत्ति के साझेदारों से झगड़े और लेन-देन में विवाद की चेतावनी देते हैं। फिर भी वे अचानक आभूषण मिलने का योग बताते हैं।
सावधानी: जब शनि दूसरे या सातवें भाव के स्वामी हों, तब बृहत् पाराशर होरा शास्त्र इस अंतर्दशा को मारक (जिसे शास्त्र प्राणों के संकट से जोड़ते हैं) मानता है और अकाल मृत्यु की आशंका की चेतावनी देता है।
उपाय: इन कष्टों से राहत और अच्छे स्वास्थ्य के लिए बृहत् पाराशर होरा शास्त्र काली गाय या भैंस का दान बताता है।
श्लोक 55.21–29शुभ हो तो: पराशर के अनुसार इस अंतर्दशा में राजयोग (उन्नति और अधिकार देने वाला योग) के फल, परिवार में कुशलता, व्यापार में लाभ और धन, और वाहन का सुख मिलता है। विवाह जैसे शुभ कार्य होते हैं, पशुधन बढ़ता है, सुगंधित वस्तुएँ मिलती हैं और शय्या व दांपत्य का सुख मिलता है।
कठिन हो तो: पराशर चेतावनी देते हैं कि जातक देवताओं और ब्राह्मणों की निंदा कर सकता है, और भाग्य की हानि, झूठ बोलने, अविवेकी कामों, साँप, चोर और शासन से भय, झगड़ों और जीवनसाथी व संतान को कष्ट की भी चेतावनी देते हैं।
सावधानी: जब बुध दूसरे या सातवें भाव के स्वामी हों, तब बृहत् पाराशर होरा शास्त्र इस अंतर्दशा को मारक (जिसे शास्त्र प्राणों के संकट से जोड़ते हैं) मानता है और अकाल मृत्यु के भय की चेतावनी देता है।
उपाय: इन कष्टों से राहत के लिए बृहत् पाराशर होरा शास्त्र विष्णु सहस्रनाम के पाठ का विधान बताता है।
श्लोक 55.30–39शुभ हो तो: पराशर के अनुसार इस अंतर्दशा में सुख-भोग, धन-लाभ, सत्ता से सम्मान और स्वर्ण की प्राप्ति होती है।
कठिन हो तो: पराशर विदेश यात्रा, शासन से भय, वात-ज्वर जैसे रोगों और पशुधन की हानि की चेतावनी देते हैं।
सावधानी: जब केतु आपके दूसरे या सातवें भाव में बैठे हों या इन भावों के स्वामियों के साथ हों (श्लोक उन्हें इन भावों का स्वामी कहता है; छाया ग्रह किसी भाव के स्वामी नहीं होते), तब बृहत् पाराशर होरा शास्त्र शारीरिक कष्ट की चेतावनी देता है।
उपाय: इन कष्टों से राहत के लिए बृहत् पाराशर होरा शास्त्र बकरी के दान का विधान बताता है।
श्लोक 55.40–45शुभ हो तो: पराशर के अनुसार इस अंतर्दशा में ब्राह्मणों के द्वारा धन-लाभ, पशुधन में वृद्धि, पुत्र-जन्म का उत्सव, कुशलता और शासन से सम्मान मिलता है। अधिकार या ऊँचा सरकारी पद मिलता है और बहुत सुख-सुविधा रहती है।
कठिन हो तो: पराशर रोग, झगड़े, पुत्र या पिता से बिछोह, बंधुओं को कष्ट और पैतृक संपत्ति के साझेदारों से विवाद की चेतावनी देते हैं। साथ ही अपने या अपने स्वामी के प्राणों पर संकट, जीवनसाथी व संतान के दुःख और पेट दर्द की भी चेतावनी है।
सावधानी: जब शुक्र दूसरे या सातवें भाव के स्वामी हों, तब बृहत् पाराशर होरा शास्त्र इस अंतर्दशा को मारक (जिसे शास्त्र प्राणों के संकट से जोड़ते हैं) मानता है।
उपाय: इन कष्टों से राहत के लिए बृहत् पाराशर होरा शास्त्र माँ दुर्गा और माँ लक्ष्मी की उपासना बताता है।
श्लोक 55.46–59शुभ हो तो: पराशर के अनुसार इस अंतर्दशा में सत्ता से अच्छे संबंध, धन-धान्य में वृद्धि, कुछ लोकप्रियता और सम्मान मिलता है, और गाँव या क्षेत्र का मुखिया बनने की भी कुछ संभावना रहती है।
कठिन हो तो: पराशर ज्वर, अतिसार और दूसरे रोग, झगड़े, शासन से विरोध, यात्राएँ, और शत्रु, चोर व आग से भय की चेतावनी देते हैं।
सावधानी: जब सूर्य दूसरे या सातवें भाव के स्वामी हों, तब बृहत् पाराशर होरा शास्त्र गंभीर रोग की आशंका की चेतावनी देता है।
उपाय: इन कष्टों से राहत के लिए बृहत् पाराशर होरा शास्त्र सूर्य देव की उपासना बताता है।
श्लोक 55.60–67शुभ हो तो: पराशर के अनुसार इस अंतर्दशा में अधिकार की प्राप्ति, सत्ता से सम्मान, धन-लाभ, अच्छा स्वास्थ्य, वस्त्र और आभूषण मिलते हैं। संतान से सुख, वाहन का आराम, और घर व भूमि में वृद्धि होती है।
कठिन हो तो: पराशर घर और खेती में भूत-प्रेत, तेंदुए और दूसरे जंगली जानवरों से उपद्रव, यात्रा में चोरों से भय और पेट के रोग की चेतावनी देते हैं।
सावधानी: जब चंद्र दूसरे भाव के, या जैसा यह श्लोक कहता है बारहवें भाव के स्वामी हों, तब बृहत् पाराशर होरा शास्त्र अकाल मृत्यु की आशंका की चेतावनी देता है।
उपाय: इन कष्टों से राहत के लिए बृहत् पाराशर होरा शास्त्र सफ़ेद गाय या भैंस का दान बताता है।
श्लोक 55.68–75शुभ हो तो: पराशर के अनुसार इस अंतर्दशा में खोया हुआ पद और खोया हुआ धन लौटता है और घर की संपत्ति फिर मिलती है। खेती की उपज बढ़ती है, धन-लाभ होता है, इष्टदेव की कृपा मिलती है, संतान से सुख और अच्छा भोजन मिलता है।
कठिन हो तो: पराशर जीवनसाथी, संतान और भाई-बहनों को कष्ट, पद की हानि, और संतान, जीवनसाथी व दूसरे निकट संबंधियों से विरोध की चेतावनी देते हैं। साथ ही चोरों से भय, घाव और शरीर में पीड़ा की भी चेतावनी है।
सावधानी: जब मंगल दूसरे या सातवें भाव के स्वामी हों, तब बृहत् पाराशर होरा शास्त्र इस अंतर्दशा को मारक (जिसे शास्त्र प्राणों के संकट से जोड़ते हैं) मानता है और आलस्य व प्राणों पर संकट की चेतावनी देता है।
उपाय: इन कष्टों से राहत के लिए बृहत् पाराशर होरा शास्त्र गाय या बैल का दान बताता है।
श्लोक 55.76–83शास्त्र क्या कहते हैं, और आपकी कुंडली में इसका फल किससे तय होता है।
महत्वाकांक्षा, अनजानी चीज़ें और अचानक मोड़
राहु किसी भाव के स्वामी नहीं होते। इनकी दशा का फल इस पर निर्भर करता है कि ये किस भाव में बैठे हैं, वहाँ कौन-सी राशि है, उस राशि के स्वामी कैसे हैं और इनके साथ कौन-से ग्रह हैं; परंपरा कहती है कि राहु शनि की तरह फल देते हैं (“शनिवत् राहु”)। देखें: हर भाव में राहु और इनके उपाय।
दशा कैलकुलेटर बताता है कि राहु महादशा आपके जीवन में कब आएगी, और आपकी कुंडली के हिसाब से इसका और इसकी हर अंतर्दशा का फल बताता है। मेरी दशा देखें।
पराशर के बताए फल शर्तों के साथ हैं: आपकी कुंडली में दशा के स्वामी कहाँ बैठे हैं, और किनके साथ हैं। पुराना ग्रंथ पुरुष जातक की बात करता है, पर इसके फल हर किसी पर लागू होते हैं।
राहु की दशा में परंपरा के सुझाव; आपको इनकी कितनी ज़रूरत है, यह आपकी कुंडली बताएगी।
बीज मंत्र राहु की मूल ध्वनि है, जिसे गिनकर जपा जाता है।
ॐ भ्रां भ्रीं भ्रौं सः राहवे नमः
शनिवार को नारियल और काले वस्त्र का दान करें
राहु के लिए स्वामित्व की जगह उस राशि के स्वामी देखे जाते हैं जिसमें ये बैठे हों।
राहु किसी भाव के स्वामी नहीं, इसलिए कोई लग्न इन्हें अपने आप शुभ या अशुभ नहीं बनाता: ये जिस भाव में बैठें, उसका और उस राशि के स्वामी का फल देते हैं। कैसे, यह हर भाव में राहु वाले पेज पर देखें।
18 वर्ष, यानी 120 वर्ष के चक्र का 15%, और यह नौ अंतर्दशाओं में बँटी होती है।
अगर जन्म के समय चंद्रमा आर्द्रा, स्वाति या शतभिषा नक्षत्र में थे, तो जन्म से ही; नहीं तो मंगल महादशा ख़त्म होने पर। यह आपके जीवन में आएगी या नहीं, यह इस पर निर्भर है कि जन्म के समय कौन-सी महादशा चल रही थी।
आम तौर पर दोनों में से कोई नहीं। राहु किसी भाव के स्वामी नहीं, इसलिए यह इस बात से तय होता है कि ये किस भाव में बैठे हैं, उस राशि के स्वामी कैसे हैं और साथ में कौन-से ग्रह हैं; कैलकुलेटर इसे आपकी कुंडली के हिसाब से पढ़ता है।
यह जन्म के समय चंद्रमा के नक्षत्र से निकलती है। जन्म विवरण भरें, और पूरी 120 वर्ष की समय-रेखा आ जाएगी, हर दशा का फल आपकी कुंडली के हिसाब से।
मेरी दशा देखें

