किन बातों का विचार
व्यापार, पढ़ाई और लिखा-पढ़ी
चक्र का 14.2%
बुध महादशा 17 वर्ष चलती है, और इससे इन बातों का विचार किया जाता है: व्यापार, पढ़ाई और लिखा-पढ़ी। आपके लिए इसका फल इस पर निर्भर करता है कि आपकी कुंडली में बुध कहाँ बैठे हैं।
120 में से 17 वर्ष। यह शनि (19 वर्ष) के बाद और केतु (7 वर्ष) से पहले आती है। जन्म के समय चंद्रमा अश्लेषा, ज्येष्ठा या रेवती नक्षत्र में थे, तो आप इसी महादशा में जन्मे; ये तीनों नक्षत्र बुध के हैं।
हर अंतर्दशा की अवधि = 17 × उस ग्रह के वर्ष ÷ 120। सबसे लंबी बुध–शुक्र, सबसे छोटी बुध–सूर्य; सब मिलकर 17 वर्ष।
यहाँ दशा का एक वर्ष 365.25 दिन का माना गया है, जो आजकल सबसे प्रचलित है। जो पंचांग 360 दिन का वर्ष लेते हैं, उनमें तारीख़ें थोड़ी अलग आएँगी। हर अवधि को निकटतम दिन तक पूरा किया गया है।
हर पंक्ति ग्रंथ का फल है: अंतर्दशा के स्वामी अच्छी स्थिति में हों तो क्या, और न हों तो क्या। आप पर कौन-सा लागू होता है, यह आपकी कुंडली तय करती है।
शुभ हो तो: पराशर के अनुसार इस अंतर्दशा में मोती जैसे रत्न मिलते हैं, विद्या और सुख बढ़ते हैं, पुण्य कर्म होते हैं, पढ़ाई में सफलता और नाम-यश मिलता है, सत्ता में बैठे नए लोगों से भेंट होती है, और जीवनसाथी, संतान तथा माता-पिता से धन व सुख मिलता है।
कठिन हो तो: पराशर धन और पशुधन की हानि, संबंधियों से विरोध और पेट दर्द जैसे रोगों की चेतावनी देते हैं।
सावधानी: जब बुध आपकी कुंडली में दूसरे या सातवें भाव के स्वामी हों, तब बृहत् पाराशर होरा शास्त्र इस अवधि को मारक (जिसे शास्त्र प्राणों के संकट से जोड़ते हैं) मानता है।
उपाय: इन कष्टों से राहत के लिए बृहत् पाराशर होरा शास्त्र विष्णु सहस्रनाम का पाठ बताता है।
श्लोक 58.1–5शुभ हो तो: पराशर के अनुसार इस अंतर्दशा में स्वास्थ्य अच्छा रहता है, थोड़ा धन-लाभ होता है, संबंधियों से स्नेह मिलता है, पशुधन बढ़ता है, उद्योग से आय होती है, पढ़ाई में सफलता, नाम-यश और सम्मान मिलता है, सत्ता में बैठे लोगों से भेंट होती है और उनके साथ भोजन का अवसर मिलता है, और अच्छे वस्त्र जैसे सुख मिलते हैं।
कठिन हो तो: पराशर वाहन से गिरने, पुत्र को कष्ट, सत्ता से संकट, गलत कामों की ओर झुकाव, बिच्छू जैसे विषैले जीवों से भय, अधीनस्थों से झगड़े, शोक, रोग और बुरी संगत की चेतावनी देते हैं।
सावधानी: जब केतु आपके दूसरे या सातवें भाव में बैठे हों या इन भावों के स्वामियों के साथ हों (श्लोक उन्हें इन भावों का स्वामी कहता है; छाया ग्रह किसी भाव के स्वामी नहीं होते), तब बृहत् पाराशर होरा शास्त्र शारीरिक कष्ट की चेतावनी देता है और स्वास्थ्य का ध्यान रखने को कहता है।
उपाय: इन कष्टों से राहत के लिए बृहत् पाराशर होरा शास्त्र बकरी का दान बताता है।
श्लोक 58.6–12शुभ हो तो: पराशर के अनुसार इस अंतर्दशा में धार्मिक अनुष्ठानों की ओर रुचि बढ़ती है, सत्ता में बैठे लोगों और मित्रों की सहायता से सब इच्छाएँ पूरी होती हैं, खेती की ज़मीन मिलती है और सुख रहता है।
कठिन हो तो: पराशर हृदय रोग, बदनामी, ज्वर, पेचिश, संबंधियों से बिछोह, शारीरिक कष्ट और मानसिक पीड़ा की चेतावनी देते हैं।
सावधानी: जब शुक्र आपकी कुंडली में दूसरे या सातवें भाव के स्वामी हों, तब बृहत् पाराशर होरा शास्त्र इस अवधि को मारक (जिसे शास्त्र प्राणों के संकट से जोड़ते हैं) मानता है।
उपाय: इन कष्टों से राहत के लिए बृहत् पाराशर होरा शास्त्र देवी दुर्गा के मंत्रों का जप बताता है।
श्लोक 58.13–19शुभ हो तो: पराशर के अनुसार इस अंतर्दशा में शासन, वरिष्ठों या सत्ता में बैठे लोगों की कृपा से भाग्योदय होता है और मित्रों से सुख मिलता है।
कठिन हो तो: पराशर चोर, आग और हथियार से भय, पित्त के विकार, सिरदर्द, मानसिक पीड़ा और मित्रों से बिछोह की चेतावनी देते हैं।
सावधानी: जब सूर्य आपकी कुंडली में दूसरे या सातवें भाव के स्वामी हों, तब बृहत् पाराशर होरा शास्त्र इस अवधि को मारक (जिसे शास्त्र प्राणों के संकट से जोड़ते हैं) मानता है।
उपाय: इन कष्टों से राहत के लिए बृहत् पाराशर होरा शास्त्र सूर्य की उपासना बताता है।
श्लोक 58.20–25शुभ हो तो: पराशर इस अंतर्दशा को बहुत शुभ बताते हैं, और इसमें विवाह, पुत्र का जन्म, वस्त्र और आभूषणों का लाभ, नए घर का निर्माण, मीठे पकवान, संगीत का आनंद, शास्त्रों का अध्ययन, दक्षिण दिशा की यात्रा, समुद्र पार से वस्त्र या सामान, और मोती जैसे रत्नों की प्राप्ति बताते हैं।
कठिन हो तो: पराशर सत्ता, आग और चोरों से संकट, बदनामी, जीवनसाथी के कारण धन हानि, और खेती की ज़मीन तथा पशुधन की हानि की चेतावनी देते हैं।
सावधानी: जब चंद्र आपकी कुंडली में दूसरे या सातवें भाव के स्वामी हों, तब बृहत् पाराशर होरा शास्त्र इस अवधि को मारक (जिसे शास्त्र प्राणों के संकट से जोड़ते हैं) मानता है।
उपाय: राहत के लिए बृहत् पाराशर होरा शास्त्र देवी दुर्गा के मंत्रों का विधिपूर्वक जप और वस्त्रों का दान बताता है। शास्त्र कहता है कि तब देवी की कृपा से कष्ट दूर होते हैं, आयु बढ़ती है और सुख लौट आते हैं।
श्लोक 58.26–35शुभ हो तो: पराशर के अनुसार इस अंतर्दशा में सत्ता में बैठे लोगों की कृपा से परिवार में सुख और आनंद रहता है, संपत्ति बढ़ती है, खोया हुआ पद या अधिकार वापस मिलता है, पुत्र का जन्म होता है, मन संतुष्ट रहता है, पशुधन, वाहन और खेती की ज़मीन मिलती है, और जीवनसाथी से सुख मिलता है।
कठिन हो तो: पराशर शारीरिक कष्ट, मानसिक पीड़ा, उद्योग-धंधों में बाधा, धन हानि, गठिया, घाव से कष्ट, हथियार से भय और ज्वर की चेतावनी देते हैं।
सावधानी: जब मंगल आपकी कुंडली में दूसरे या सातवें भाव के स्वामी हों, तब बृहत् पाराशर होरा शास्त्र इस अवधि को मारक (जिसे शास्त्र प्राणों के संकट से जोड़ते हैं) मानता है।
उपाय: राहत के लिए बृहत् पाराशर होरा शास्त्र महामृत्युंजय जप (आरोग्य और दीर्घायु के लिए शिव का मंत्र) और गाय का दान बताता है।
श्लोक 58.36–46शुभ हो तो: पराशर के अनुसार इस अंतर्दशा में सत्ता में बैठे लोगों से आदर, अच्छी प्रतिष्ठा, धन-लाभ, मान-सम्मान और वस्त्र मिलते हैं, और तीर्थयात्रा, यज्ञ व हवन होते हैं। आरंभ में कुछ कष्ट रहता है, पर बाद में सब ठीक हो जाता है।
कठिन हो तो: पराशर सरकारी सेवा में काम का भारी दबाव, पद की हानि, भय, कारावास का खतरा, रोग, अपने और संबंधियों के लिए पीड़ा, हृदय रोग, और प्रतिष्ठा तथा धन की हानि की चेतावनी देते हैं।
सावधानी: जब राहु आपकी कुंडली में दूसरे या छठे भाव में बैठे हों (यह श्लोक यहाँ सातवें की जगह छठा भाव कहता है, जबकि बाक़ी जगह दूसरे के साथ सातवाँ आता है), तब बृहत् पाराशर होरा शास्त्र मारक काल (जिसे शास्त्र प्राणों के संकट से जोड़ते हैं) की तरह अकाल मृत्यु के भय की चेतावनी देता है और स्वास्थ्य का ध्यान रखने को कहता है।
उपाय: राहत के लिए बृहत् पाराशर होरा शास्त्र देवी दुर्गा और देवी लक्ष्मी के मंत्रों का विधिपूर्वक जप, और कपिला गाय या भैंस का दान बताता है।
श्लोक 58.47–55शुभ हो तो: पराशर के अनुसार इस अंतर्दशा में स्वास्थ्य अच्छा रहता है, धन-लाभ होता है, सत्ता में बैठे लोगों की कृपा मिलती है, घर में विवाह जैसे मंगल कार्य होते हैं, मीठे पकवान मिलते हैं, पशुधन बढ़ता है, पुराण-कथा सुनने को मिलती है, देवताओं और गुरु में भक्ति रहती है, धर्म व दान में रुचि होती है और शिव की पूजा होती है।
कठिन हो तो: पराशर सत्ता और संबंधियों से कलह, चोरों से भय, अपमान, सरकारी दंड, धन हानि, साँप और विष से भय, ज्वर, फसल की हानि और भूमि की हानि की चेतावनी देते हैं, और माता-पिता के निधन को भी अपनी चेतावनियों में गिनाते हैं।
सावधानी: जब गुरु आपकी कुंडली में दूसरे या सातवें भाव के स्वामी हों, या दूसरे अथवा सातवें भाव में बैठे हों, तब बृहत् पाराशर होरा शास्त्र इसे मारक (जिसे शास्त्र प्राणों के संकट से जोड़ते हैं) की चेतावनी मानता है।
उपाय: राहत के लिए बृहत् पाराशर होरा शास्त्र शिव सहस्रनाम का पाठ और गाय तथा सोने का दान बताता है।
श्लोक 58.56–66शुभ हो तो: पराशर के अनुसार इस अंतर्दशा में परिवार में सुख रहता है, अधिकार या ऊँचा पद मिलता है, उत्साह रहता है, पशुधन बढ़ता है, नया पद मिलता है और तीर्थयात्रा होती है।
कठिन हो तो: पराशर शत्रुओं से भय, जीवनसाथी और संतान को कष्ट, सोचने-समझने की शक्ति में कमी, संबंधियों का बिछोह, कामों में हानि, मानसिक पीड़ा, परदेस की यात्राएँ और बुरे सपनों की चेतावनी देते हैं।
सावधानी: जब शनि आपकी कुंडली में दूसरे या सातवें भाव के स्वामी हों, तब बृहत् पाराशर होरा शास्त्र इस अवधि को मारक (जिसे शास्त्र प्राणों के संकट से जोड़ते हैं) मानता है।
उपाय: राहत और अच्छे स्वास्थ्य के लिए बृहत् पाराशर होरा शास्त्र महामृत्युंजय जप (आरोग्य और दीर्घायु के लिए शिव का मंत्र) और काली गाय तथा भैंस का दान बताता है।
श्लोक 58.67–72शास्त्र क्या कहते हैं, और आपकी कुंडली में इसका फल किससे तय होता है।
व्यापार, पढ़ाई और लिखा-पढ़ी
आपकी कुंडली में बुध किन भावों के स्वामी हैं, किस भाव में बैठे हैं और वहाँ कितने बलवान हैं। बुध केंद्र (पहले, चौथे, सातवें, दसवें भाव) या त्रिकोण (पहले, पाँचवें, नौवें भाव) में, अपनी राशि में बलवान हों तो दशा अच्छा फल देती है; छठे, आठवें या बारहवें भाव में हों तो सावधानी रखनी पड़ती है। देखें: हर भाव में बुध और इनके उपाय।
दशा कैलकुलेटर बताता है कि बुध महादशा आपके जीवन में कब आएगी, और आपकी कुंडली के हिसाब से इसका और इसकी हर अंतर्दशा का फल बताता है। मेरी दशा देखें।
पराशर के बताए फल शर्तों के साथ हैं: आपकी कुंडली में दशा के स्वामी कहाँ बैठे हैं, और किनके साथ हैं। पुराना ग्रंथ पुरुष जातक की बात करता है, पर इसके फल हर किसी पर लागू होते हैं।
बुध की दशा में परंपरा के सुझाव; आपको इनकी कितनी ज़रूरत है, यह आपकी कुंडली बताएगी।
बीज मंत्र बुध की मूल ध्वनि है, जिसे गिनकर जपा जाता है।
ॐ ब्रां ब्रीं ब्रौं सः बुधाय नमः
बुधवार को हरी मूँग और हरे वस्त्र का दान करें
पराशर आपके लग्न के लिए बुध को शुभ गिनते हैं या कठिन, इसी से इस दशा का स्वर तय होता है।
| लग्न | बुध (किन भावों के स्वामी) |
|---|---|
| मेष | अशुभ तीसरे और छठे भाव |
| वृषभ | कुछ अशुभ— दूसरे और पाँचवें भाव के स्वामी, जिन्हें श्लोक 34.23 'कुछ अशुभ' कहता है, और मारकों में नहीं गिनता दूसरे और पाँचवें भाव |
| मिथुन | लग्नेश— लग्नेश, जिन्हें श्लोक शुभ या अशुभ नहीं कहता: 34.25 मिथुन के लिए केवल शुक्र को शुभ बताता है पहले और चौथे भाव |
| कर्क | अशुभ तीसरे और बारहवें भाव |
| सिंह | अशुभ— दूसरे भाव के स्वामी, पर श्लोक 34.29–30 इस लग्न के लिए शनि और चंद्र को मारक कहता है दूसरे और ग्यारहवें भाव |
| कन्या | शुभ · योग— शुक्र के साथ योग देते हैं (34.32) पहले और दसवें भाव |
| तुला | शुभ · योग— चंद्र के साथ योग देते हैं (34.34) नौवें और बारहवें भाव |
| वृश्चिक | अशुभ आठवें और ग्यारहवें भाव |
| धनु | शुभ · योग— सूर्य के साथ योग देते हैं (34.38)— सातवें भाव के स्वामी, पर श्लोक 34.37–38 इस लग्न के लिए शनि और शुक्र को मारक कहता है सातवें और दसवें भाव |
| मकर | शुभ छठे और नौवें भाव |
| कुंभ | तटस्थ— मिला-जुला फल देते हैं (34.42) पाँचवें और आठवें भाव |
| मीन | अशुभ · मारक चौथे और सातवें भाव |
तालिका के नाम, बृहत् पाराशर होरा शास्त्र, अध्याय 34 से:
17 वर्ष, यानी 120 वर्ष के चक्र का 14.2%, और यह नौ अंतर्दशाओं में बँटी होती है।
अगर जन्म के समय चंद्रमा अश्लेषा, ज्येष्ठा या रेवती नक्षत्र में थे, तो जन्म से ही; नहीं तो शनि महादशा ख़त्म होने पर। यह आपके जीवन में आएगी या नहीं, यह इस पर निर्भर है कि जन्म के समय कौन-सी महादशा चल रही थी।
आम तौर पर दोनों में से कोई नहीं। यह इस बात से तय होता है कि आपकी कुंडली में बुध किन भावों के स्वामी हैं, कहाँ बैठे हैं और कितने बलवान हैं; कैलकुलेटर इसे आपकी कुंडली के हिसाब से पढ़ता है।
यह जन्म के समय चंद्रमा के नक्षत्र से निकलती है। जन्म विवरण भरें, और पूरी 120 वर्ष की समय-रेखा आ जाएगी, हर दशा का फल आपकी कुंडली के हिसाब से।
मेरी दशा देखें

