2027 में मीन राशि के लिए सेहत, दौर-दर-दौर: मीन से गिने भावों में गुरु, शनि, राहु और केतु की चाल से पढ़ा गया।
100 में से 69। जाँच और नई दिनचर्या का सबसे अच्छा समय: 14 अप्रैल से 25 जून तक और 26 नवंबर से। सेहत के लिए सबसे मज़बूत महीने: मई, जून और दिसंबर; सबसे कमज़ोर: जनवरी।
सेहत के लिए 2027 में सबसे अच्छा समय 25 जनवरी से 25 जून तक और 26 नवंबर से है; 26 जून से 19 अक्टूबर तक मिला-जुला; 24 जनवरी तक और 20 अक्टूबर से 25 नवंबर तक धीमा। 13 अप्रैल तक गुरु वक्री रहते हैं, इसलिए सेहत के अच्छे दौर का वह हिस्सा धीमा रहता है।
छठे भाव में गुरु का होना सेहत के लिए सबसे ज़्यादा ध्यान माँगने वाली स्थितियों में से एक है: गुरु से जुड़ी तकलीफ़ें — वज़न, शुगर, लिवर, कोलेस्ट्रॉल और पाचन — बढ़ने लगती हैं, और पहले टाली गई कोई परेशानी अब ध्यान माँग सकती है। अच्छी बात यह है कि इलाज असर करता है: सही डॉक्टर मिलते हैं और इलाज पूरा होता है। शुगर, लिवर और कोलेस्ट्रॉल की जाँच कराएँ, दवाएँ डॉक्टर के कहे अनुसार लें, और तला और मीठा कम करें। इस समय गुरु की दृष्टि आपके बारहवें भाव पर भी है, इसलिए नींद सुधरती है और सेहत का ख़र्च सँभल जाता है।
पाँचवें भाव में गुरु सेहत के लिए अच्छे हैं: मन साफ़ रहता है, चिंता घटती है और पाचन ठीक होता है, क्योंकि पाँचवाँ भाव मन के साथ पेट का भी है। नई दिनचर्या शुरू करने का यह सबसे अच्छा समय है — योग, सुबह की सैर, खान-पान की योजना — क्योंकि अभी शुरू की गई आदतें टिकती हैं। यह समय गर्भावस्था और बच्चों की सेहत के लिए भी अनुकूल है; दोनों में डॉक्टर से नियमित जाँच फिर भी ज़रूरी है। इस समय गुरु की दृष्टि आपके पहले भाव पर भी है, इसलिए ताक़त लौटती है और छोटी तकलीफ़ें जल्दी ठीक होती हैं।
सातवें भाव में गुरु सेहत के लिए अच्छे हैं: ताक़त बनी रहती है, छोटी-मोटी बीमारियाँ जल्दी निकल जाती हैं और थकाने वाले हफ़्ते के बाद आप जल्दी सँभल जाते हैं। जीवनसाथी अक्सर आपको अच्छी आदतों की ओर ले जाते हैं — साथ में सैर करें, साथ में खाएँ, समय पर सोएँ। जीवनसाथी की अपनी सेहत भी आम तौर पर अच्छी रहती है; अगर आप दोनों में से किसी ने जाँच टाल रखी है, तो इसी समय साथ जाकर करा लें।
पहले भाव में शनि, साढ़े साती के चरम पर, शरीर पर भार डालते हैं: ऐसी थकान जो नींद से भी पूरी नहीं जाती, जोड़ों में जकड़न, कमर और घुटनों का दर्द, और दाँतों की देखभाल की ज़रूरत। मन भी भारी रह सकता है, और यह भारीपन थकान का ही हिस्सा है। धीमी पर पक्की दिनचर्या रखें — रोज़ सैर, हल्का योग, सोना और खाना तय समय पर — और थकान अनदेखी करके जुटे रहने के बजाय हड्डियों, ख़ून और दाँतों की जाँच करा लें।
दूसरे भाव में शनि, साढ़े साती का आख़िरी चरण, खान-पान और चेहरे पर असर दिखाते हैं: खाना देर से या अनियमित होता है, और दाँत, मसूड़ों, गले और आँखों को देखभाल चाहिए। इन महीनों में चरम चरण का भारीपन कुछ उतरता है, पर 20 अक्टूबर को शनि फिर आपकी राशि में लौट आते हैं। खाने का समय तय करें, बासी, तला और बहुत ठंडा खाना कम करें, और दाँत व आँखों की जाँच करा लें; तय समय पर परिवार के साथ खाना किसी भी डाइट से ज़्यादा मदद करता है। शनि की दृष्टि आपके आठवें भाव पर भी है: पुरानी बीमारियों पर नज़र रखें, और सड़क पर सावधानी ज़्यादा ज़रूरी है।
ग्यारहवें भाव में राहु ऊर्जा ऊँची रखते हैं और बीमारी से जल्दी उबारते हैं; बस पार्टियों और मेल-जोल में ज़्यादती पर लगाम रखें।
14 अप्रैल से 25 जून तक और 26 नवंबर से: पूरी जाँच करा लें, सैर, योग या खान-पान का जो नियम टालते आ रहे थे उसे शुरू करें, और अगर डॉक्टर ने कोई पहले से तय ऑपरेशन बताया है तो उसे इसी समय रखें। 13 अप्रैल तक गुरु वक्री रहते हैं, इसलिए यह समय उसके बाद से रखा गया है।
गुरु वक्री: खान-पान ढीला पड़ता है, और वज़न, शुगर और लिवर पर नज़र चाहिए; अच्छी दिनचर्या को छूटने न दें
मंगल वक्री: जल्दबाज़ी, गर्मी और धारदार चीज़ें — गाड़ी सावधानी से चलाएँ, ग़ुस्से और ब्लड प्रेशर पर क़ाबू रखें, और डॉक्टर कहें कि रुक सकता है तो पहले से तय ऑपरेशन इन हफ़्तों से बाहर रखें
बुध वक्री: स्क्रीन और चिंता का असर नसों, त्वचा और नींद पर पड़ता है; रिपोर्ट और डॉक्टर की पर्ची पर अमल से पहले उन्हें दोबारा देख लें
शनि वक्री: पुराने दर्द, जोड़ों की तकलीफ़ और थकान लौटती है; दिनचर्या बनाए रखें और डॉक्टर को दोबारा दिखाना न छोड़ें
2027 में मीन राशि के लिए सेहत के मामले में सबसे अच्छा महीना जून (82) है और सबसे कमज़ोर जनवरी (58)। हर महीना उसके बीच की स्थिति से पढ़ा गया है, और उसमें पड़ने वाले हर वक्री ग्रह और ग्रहण के लिए अंक थोड़ा घटता है; इसीलिए अच्छे दौर के भीतर भी कोई महीना नीचे आ सकता है।
| महीना | अंक | किस वजह से | पहले से तय ऑपरेशन के दिन |
|---|---|---|---|
| जनवरी | 58 | पुरानी तकलीफ़ों पर ध्यान; गुरु और मंगल वक्री | 5 |
| फ़रवरी | 68 | साफ़ मन, अच्छा पाचन; गुरु, मंगल और बुध वक्री; 6 फ़रवरी को सूर्य ग्रहण, आपके ग्यारहवें भाव में; 21 फ़रवरी को चंद्र ग्रहण, आपके छठे भाव में | 3 |
| मार्च | 73 | साफ़ मन, अच्छा पाचन; गुरु, मंगल और बुध वक्री | 7 |
| अप्रैल | 75 | साफ़ मन, अच्छा पाचन; गुरु और मंगल वक्री | 5 |
| मई | 77 | साफ़ मन, अच्छा पाचन | 5 |
| जून | 82 | साफ़ मन, अच्छा पाचन; बुध वक्री | 3 |
| जुलाई | 64 | पुरानी तकलीफ़ों पर ध्यान; बुध वक्री; 18 जुलाई को चंद्र ग्रहण, आपके ग्यारहवें भाव में | 6 |
| अगस्त | 62 | पुरानी तकलीफ़ों पर ध्यान; शनि वक्री; 2 अगस्त को सूर्य ग्रहण, आपके पाँचवें भाव में; 17 अगस्त को चंद्र ग्रहण, आपके ग्यारहवें भाव में | 5 |
| सितंबर | 67 | पुरानी तकलीफ़ों पर ध्यान; शनि वक्री | 7 |
| अक्टूबर | 65 | पुरानी तकलीफ़ों पर ध्यान; शनि और बुध वक्री | 6 |
| नवंबर | 59 | पुरानी तकलीफ़ों पर ध्यान; शनि वक्री | 6 |
| दिसंबर | 76 | साथ और स्थिर सेहत; शनि वक्री | 8 |
मंगल, जो ऊर्जा, रक्त और चोट के ग्रह हैं, एक राशि में लगभग छह हफ़्ते रहते हैं, वक्री हों तो ज़्यादा। गोचर (चंद्र राशि से ग्रहों की चाल का फल) में वे चंद्र राशि से सिर्फ़ तीसरे, छठे और ग्यारहवें भाव में अच्छे माने जाते हैं; बाक़ी समय जल्दबाज़ी, गर्मी और धारदार चीज़ों से सँभलकर रहें। 2027 में मीन राशि के लिए इनके अच्छे दौर ये हैं: 9 मार्च तक, 26 अप्रैल से 4 जुलाई तक और 27 दिसंबर से।
| कब | राशि | चंद्र राशि से भाव | सेहत के लिए |
|---|---|---|---|
| 9 मार्च तक | सिंह | छठा | अच्छा |
| 10 मार्च से 25 अप्रैल तक | कर्क | पाँचवाँ | भारी |
| 26 अप्रैल से 4 जुलाई तक | सिंह | छठा | अच्छा |
| 5 जुलाई से 23 अगस्त तक | कन्या | सातवाँ | भारी |
| 24 अगस्त से 7 अक्टूबर तक | तुला | आठवाँ | भारी |
| 8 अक्टूबर से 17 नवंबर तक | वृश्चिक | नौवाँ | भारी |
| 18 नवंबर से 26 दिसंबर तक | धनु | दसवाँ | भारी |
| 27 दिसंबर से | मकर | ग्यारहवाँ | अच्छा |
नियम फलदीपिका के गोचर अध्याय (गोचरफल) का है, जो हर गोचर चंद्र राशि से पढ़ता है।
मीन से गिनकर, ऊपर का फल इन्हीं भावों से पढ़ा गया है। हर एक के साथ उसकी राशि, उसके स्वामी, और 2027 में उसमें रहने वाले या उस पर दृष्टि डालने वाले धीमे ग्रह (गुरु, शनि, राहु और केतु, जो एक राशि में साल या उससे ज़्यादा रहते हैं) दिए हैं।
शरीर: ऊर्जा और रोगों से लड़ने की ताक़त। इसके स्वामी गुरु हैं। 2027 में शनि 2 जून तक और 20 अक्टूबर से आपके पहले भाव में रहेंगे; गुरु 25 जनवरी से 25 जून तक और 26 नवंबर से आपके पहले भाव पर दृष्टि डालेंगे।
रोग, संक्रमण और दिनचर्या। इसके स्वामी सूर्य हैं। 2027 में गुरु 24 जनवरी तक और 26 जून से 25 नवंबर तक आपके छठे भाव में रहेंगे।
पुराने रोग, ऑपरेशन और लंबा इलाज। इसके स्वामी शुक्र हैं। 2027 में शनि 3 जून से 19 अक्टूबर तक आपके आठवें भाव पर दृष्टि डालेंगे।
अस्पताल, नींद और आराम। इसके स्वामी शनि हैं। 2027 में गुरु 24 जनवरी तक और 26 जून से 25 नवंबर तक आपके बारहवें भाव पर दृष्टि डालेंगे।
चंद्राष्टम वह समय है जब चंद्रमा आपकी राशि से आठवीं राशि, यहाँ तुला, से गुज़रते हैं: हर महीने लगभग सवा दो दिन, जिनमें परंपरा कोई नई शुरुआत नहीं करती। मुहूर्त की तारीख़ें सबके लिए होती हैं; ये वे दिन हैं जो आपका चंद्राष्टम हटाने के बाद बचते हैं। आपात स्थिति में नहीं: ऑपरेशन कब हो, यह डॉक्टर तय करते हैं।
पहले से तय ऑपरेशन के मुहूर्त
2027 में पहले से तय ऑपरेशन के 78 मुहूर्तों में से 12 आपके चंद्राष्टम पर पड़ते हैं, इसलिए उन्हें छोड़ दिया गया है। बाक़ी में से 16 दिन सेहत के आपके सबसे अच्छे दौर (14 अप्रैल से 25 जून तक और 26 नवंबर से) में और "सावधानी" वाले बुध और मंगल के वक्री हफ़्तों से बाहर पड़ते हैं; मुहूर्त के अंकों से सबसे मज़बूत 10:
गुरु स्वयं मीन राशि के स्वामी हैं। परंपरा किसी भाव को उसके स्वामी के ज़रिए बल देती है, इसलिए इस साल सेहत के लिए गुरु का उपाय सबसे उपयोगी है। हो सके तो गुरुवार को ॐ गुरवे नमः का 108 बार जप करें, और उसी दिन चने की दाल और हल्दी का दान करें। मज़बूत स्वामी धीमे दौर में भी अपने भाव को सँभाले रखता है। गुरु के सभी उपाय →
100 में से 69, अच्छा। इस पैमाने पर 80 और ऊपर बहुत अच्छा है, 65 से 79 अच्छा, 50 से 64 ठीक-ठाक और 50 से नीचे भारी। 24 जनवरी तक और 20 अक्टूबर से 25 नवंबर तक समय धीमा रहता है।
सेहत के लिए सबसे ज़्यादा अंक मई (77), जून (82) और दिसंबर (76) के हैं, और सबसे कम जनवरी के (58)। हर महीने की वजह ऊपर महीने दर महीने वाली तालिका में है।
2027 में जाँच कराने और नई दिनचर्या शुरू करने का समय 14 अप्रैल से 25 जून तक और 26 नवंबर से है; इसके भीतर भी "सावधानी" में लिखे वक्री हफ़्ते छोड़ दें।
गुरु वक्री: 13 अप्रैल तक; मंगल वक्री: 10 जनवरी से 1 अप्रैल तक; बुध वक्री: 9 फ़रवरी से 3 मार्च तक, 10 जून से 5 जुलाई तक और 7 अक्टूबर से 28 अक्टूबर तक; शनि वक्री: 9 अगस्त से 24 दिसंबर तक। हर एक में क्या करें, यह ऊपर "सावधानी" में है।
आपकी अपनी कुंडली सिर्फ़ आपकी है। इसे मुफ़्त बनाएँ, या 24 में से किसी भी ज्योतिषी से उस गोचर के बारे में पूछें जो सच में आप पर चल रहा है। पैसे मिनट के हिसाब से, और सिर्फ़ तब तक जब कोई जवाब दे रहा हो।
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