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प्रयागराज · रविवार

प्रयागराज का पंचांग
27 सितंबर 2026

कृष्ण प्रतिपदा रात 8:59 तक और उत्तरा भाद्रपद नक्षत्र सुबह 11:08 तक, प्रयागराज के लिए।

आश्विन कृष्णसूर्योदय सुबह 5:54राहु काल शाम 4:23 – शाम 5:52
आज के व्रत-त्योहार
पितृ पक्षप्रतिपदा श्राद्ध

जिन पितरों का देहांत प्रतिपदा तिथि को हुआ, उनका श्राद्ध। परंपरा में पितृ पक्ष में रिश्ते, सगाई, गृह प्रवेश और बड़ी ख़रीदारी टाली जाती है।

  • पंचक पूरे दिनचंद्रमा कुंभ या मीन में, धनिष्ठा से रेवती तक के पाँच नक्षत्र। परंपरा में छत डालना, चारपाई बनाना, लकड़ी इकट्ठा करना और दक्षिण की यात्रा टाली जाती है।
  • गंड मूल (रेवती) सुबह 11:08 सेइसमें जन्मे बच्चे के लिए परंपरा में लगभग 27 दिन बाद, चंद्रमा के इसी नक्षत्र में लौटने पर, मूल शांति पूजा होती है।
विक्रम संवत2083 · शक 1948मास (पूर्णिमांत)आश्विनपक्षकृष्णऋतुशरदअयनदक्षिणायनसूर्य राशिकन्याचंद्र राशिमीनसूर्योदयसुबह 5:54सूर्यास्तशाम 5:52चंद्रोदयशाम 6:10चंद्रास्तसुबह 6:14दिशा शूलपश्चिम: इस दिशा में यात्रा टालें; जाना ही हो तो घी या दलिया खाकर निकलें
तिथिचंद्र दिवसकृष्ण प्रतिपदारात 8:59 तक
फिर द्वितीया
नक्षत्रचंद्रमा कहाँ हैउत्तरा भाद्रपददेवता अहिर्बुध्न्यसुबह 11:08 तक
फिर रेवती
योगसूर्य और चंद्र का योगवृद्धिबढ़तसुबह 11:17 तक
फिर ध्रुव
करणआधी तिथिबालवशुभसुबह 9:42 तक
फिर कौलव
वारदिनरविवारस्वामी सूर्यसूर्योदय सुबह 5:54 से अगले सूर्योदय तक

आज के शुभ और अशुभ मुहूर्त

प्रयागराज के लिए, सूर्योदय से
शुभ मुहूर्त: इनका लाभ लें
अभिजीत मुहूर्तसुबह 11:29 – दोपहर 12:17किसी भी शुभ काम के लिए दिन का सबसे अच्छा समयइसमें यमगंड पड़ता है: सुबह 11:29 – सुबह 11:53 का समय लें
ब्रह्म मुहूर्तसुबह 4:17 – सुबह 5:05भोर से पहले, पूजा, जाप और पढ़ाई के लिए
विजय मुहूर्तदोपहर 1:53 – दोपहर 2:41जिस काम में जीत चाहिए उसके लिए: मुक़दमा, परीक्षा, सौदा, यात्रा
निशीथ मुहूर्तरात 11:29 – रात 12:17आधी रात के आसपास, शिव, काली और कृष्ण पूजा और साधना के लिए
अशुभ: इनमें नया काम शुरू न करें
राहु कालशाम 4:23 – शाम 5:52नया काम शुरू न करें: नई नौकरी, सौदा, यात्रा या ख़रीदारी नहीं
यमगंडसुबह 11:53 – दोपहर 1:23यात्रा पर निकलना टालें
गुलिक कालदोपहर 2:53 – शाम 4:23इसमें शुरू किया काम दोहराया जाता है: अच्छी आदत के लिए ठीक, क़र्ज़ लेने के लिए नहीं
दुर्मुहूर्तशाम 4:17 – शाम 5:05ज़रूरी काम इसमें न रखें
आज कुछ शुरू करना है?हमारे मुहूर्त ज्योतिषी एस्ट्रो मुहूर्त से पूछें कौन-सा समय आपकी कुंडली के लिए ठीक है।

दिन में कब क्या बदलता है

सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

तिथि या नक्षत्र आधी रात से आधी रात तक नहीं चलते। नीचे हर पट्टी अपने मिनट पर शुरू और ख़त्म होती है, इसलिए पट्टियाँ बराबर नहीं: यह प्रयागराज में रविवार है, एक सूर्योदय से अगले तक।

सुबह 5:54सूर्योदय शाम 5:52सूर्यास्त
रात समय सुबह 6सुबह 8सुबह 10दोपहर 12दोपहर 2शाम 4शाम 6रात 8रात 10रात 12रात 2सुबह 4 तिथिप्रतिपदारात 8:59द्वितीयानक्षत्रउत्तरा भाद्रपदसुबह 11:08रेवतीयोगवृद्धिसुबह 11:17ध्रुवकरणबालवसुबह 9:42कौलवरात 8:59तैतिल चौघड़ियाउद्वेगचरलाभअमृतकालशुभरोगउद्वेगशुभअमृतचररोगकाललाभउद्वेगशुभ अभी

आज का चौघड़िया

दिन के आठ, रात के आठ

सूर्योदय से सूर्यास्त तक आठ चौघड़िया होते हैं, और रात में आठ और। लाभ, अमृत और शुभ नए काम के लिए अच्छे हैं, चर यात्रा के लिए; उद्वेग, रोग और काल में नया काम नहीं किया जाता। इनका क्रम वार के साथ बदलता है।

दिन का चौघड़िया
नामसेतकफल
उद्वेगसुबह 5:54सुबह 7:23टालें
चरसुबह 7:23सुबह 8:53शुभ
लाभसुबह 8:53सुबह 10:23शुभ
अमृतसुबह 10:23सुबह 11:53शुभ
कालसुबह 11:53दोपहर 1:23टालें
शुभदोपहर 1:23दोपहर 2:53शुभ
रोगदोपहर 2:53शाम 4:23टालें
उद्वेगशाम 4:23शाम 5:52टालें
रात का चौघड़िया
नामसेतकफल
शुभशाम 5:52रात 7:23शुभ
अमृतरात 7:23रात 8:53शुभ
चररात 8:53रात 10:23शुभ
रोगरात 10:23रात 11:53टालें
कालरात 11:53रात 1:23टालें
लाभरात 1:23रात 2:54शुभ
उद्वेगरात 2:54सुबह 4:24टालें
शुभसुबह 4:24सुबह 5:54शुभ

पंचांग के बाक़ी पेज

9 पेज
40 भारतीय शहरों का पंचांग
दिल्लीसूर्योदय सुबह 6:13मुंबईसूर्योदय सुबह 6:29बेंगलुरुसूर्योदय सुबह 6:09हैदराबादसूर्योदय सुबह 6:06चेन्नईसूर्योदय सुबह 5:59कोलकातासूर्योदय सुबह 5:27पुणेसूर्योदय सुबह 6:25अहमदाबादसूर्योदय सुबह 6:30जयपुरसूर्योदय सुबह 6:18लखनऊसूर्योदय सुबह 5:57कानपुरसूर्योदय सुबह 6:00नागपुरसूर्योदय सुबह 6:04इंदौरसूर्योदय सुबह 6:17भोपालसूर्योदय सुबह 6:11पटनासूर्योदय सुबह 5:40सूरतसूर्योदय सुबह 6:29वडोदरासूर्योदय सुबह 6:28लुधियानासूर्योदय सुबह 6:18आगरासूर्योदय सुबह 6:09वाराणसीसूर्योदय सुबह 5:49प्रयागराजसूर्योदय सुबह 5:54नासिकसूर्योदय सुबह 6:25राजकोटसूर्योदय सुबह 6:37रांचीसूर्योदय सुबह 5:39रायपुरसूर्योदय सुबह 5:54कोयंबटूरसूर्योदय सुबह 6:12मदुरैसूर्योदय सुबह 6:07कोच्चिसूर्योदय सुबह 6:14तिरुवनंतपुरमसूर्योदय सुबह 6:11विशाखापत्तनमसूर्योदय सुबह 5:47विजयवाड़ासूर्योदय सुबह 5:57मैसूरसूर्योदय सुबह 6:13गुवाहाटीसूर्योदय सुबह 5:14भुवनेश्वरसूर्योदय सुबह 5:37चंडीगढ़सूर्योदय सुबह 6:14देहरादूनसूर्योदय सुबह 6:09जोधपुरसूर्योदय सुबह 6:29अमृतसरसूर्योदय सुबह 6:22गुरुग्रामसूर्योदय सुबह 6:13नोएडासूर्योदय सुबह 6:12

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

9 सवाल
पंचांग से मुझे क्या पता चलता है?

दिन के पाँच अंग, इसीलिए इसे पंच-अंग कहते हैं: तिथि, नक्षत्र, योग, करण और वार। इन्हीं से दिन के शुभ-अशुभ समय, व्रत-त्योहार और किसी भी काम का मुहूर्त निकलता है।

मेरे शहर का समय अलग क्यों है?

पंचांग का हर समय सूर्योदय से गिना जाता है, और भारत में गुवाहाटी से अहमदाबाद तक सूर्योदय में एक घंटे से ज़्यादा का फ़र्क़ है। राहु काल, चौघड़िया और अभिजीत मुहूर्त भी उसी के साथ बदलते हैं। यह पेज प्रयागराज का है; अपना शहर ऊपर के बॉक्स में चुनें।

राहु काल क्या है, और उसमें क्या नहीं करना चाहिए?

हर दिन लगभग डेढ़ घंटे का समय, हर वार को दिन के अलग हिस्से में, जिसमें परंपरा से नया काम शुरू नहीं किया जाता: नई नौकरी, सौदा, यात्रा या ख़रीदारी। पहले से चल रहा काम हमेशा की तरह चलता रहता है।

दिन का सबसे अच्छा समय कौन-सा है?

दोपहर के आसपास का अभिजीत मुहूर्त, दिन के पंद्रह मुहूर्तों में आठवाँ, लगभग हर काम के लिए अच्छा है, बुधवार को छोड़कर, जब इसे नहीं लिया जाता। भोर से पहले का ब्रह्म मुहूर्त पूजा और पढ़ाई के लिए है। जहाँ राहु काल या कोई और अशुभ समय किसी शुभ समय पर पड़े, वहाँ उसका ख़ाली हिस्सा लें।

यहाँ महीना आश्विन है, और कुछ कैलेंडरों में भादों क्यों?

उत्तर भारत में महीना पूर्णिमा से पूर्णिमा (पूर्णिमांत) गिना जाता है, और दक्षिण और पश्चिम भारत के कई हिस्सों में अमावस्या से अमावस्या (अमांत)। इसलिए कृष्ण पक्ष में उत्तर भारत अगले महीने का नाम ले लेता है। तिथि और त्योहारों की तारीख़ें दोनों में वही रहती हैं।

दिशा शूल क्या होता है?

किसी वार को किस दिशा में यात्रा शुरू करना अशुभ माना जाता है: रविवार और शुक्रवार को पश्चिम, सोमवार और शनिवार को पूर्व, मंगलवार और बुधवार को उत्तर, गुरुवार को दक्षिण। यात्रा टल न सके तो परंपरा में निकलने से पहले कुछ खाकर निकलने की बात है: रविवार को घी या दलिया, सोमवार को दूध, मंगलवार को गुड़, बुधवार को धनिया या तिल, गुरुवार को दही, शुक्रवार को जौ, शनिवार को अदरक या उड़द।

पंचक, भद्रा और गंड मूल क्या हैं?

तीन बातें जिनकी पंचांग चेतावनी देता है। पंचक धनिष्ठा से रेवती तक के पाँच नक्षत्र हैं, जब चंद्रमा कुंभ या मीन में हों: परंपरा में छत डालना, चारपाई बनाना और दक्षिण की यात्रा टाली जाती है। भद्रा विष्टि करण है: इसमें शुभ काम, राखी या होलिका दहन नहीं। गंड मूल छह नक्षत्र हैं (अश्विनी, आश्लेषा, मघा, ज्येष्ठा, मूल, रेवती) जिनमें जन्म होने पर मूल शांति पूजा की जाती है।

क्या आज का दिन मेरे अपने काम के लिए अच्छा है?

पंचांग पूरे शहर के लिए एक ही होता है। दिन आपके लिए कैसा है, यह आपकी कुंडली पर भी निर्भर है: आपकी राशि से चंद्रमा का भाव (चंद्र बल), आपके नक्षत्र का तारा बल और चल रही दशा। शादी, गृह प्रवेश या नए व्यापार का मुहूर्त सिर्फ़ दिन से नहीं, आपकी कुंडली से निकाला जाता है।

यह पंचांग कैसे बनता है?

शहर के सटीक अक्षांश-देशांतर पर, उसी लाहिड़ी अयनांश से जो भारतीय पंचांग इस्तेमाल करते हैं, और तिथि, नक्षत्र, योग और करण का हर बदलाव मिनट तक निकालकर, यह मानकर नहीं कि हर एक पूरा दिन चलता है।

पंचांग पूरे शहर के लिए एक-सा होता है।

आपकी कुंडली नहीं। इसे मुफ़्त बनाएँ, या 24 AI ज्योतिषियों में से किसी से पूछें कि जो काम आप करना चाहते हैं उसके लिए इनमें से कौन-सा समय ठीक है। पैसे मिनट के हिसाब से।

ज्योतिषी से बात करेंवैदिक ज्योतिष में प्रशिक्षित 24 AI ज्योतिषी। किसी भी भारतीय भाषा में चैट करें; कॉल हिंदी और अंग्रेज़ी में।एस्ट्रो व्यासवैदिक ज्योतिष विशेषज्ञएस्ट्रो प्रेमप्रेम और रिश्तों के विशेषज्ञएस्ट्रो कुबेरधन और निवेश विशेषज्ञएस्ट्रो वैद्यसेहत और तंदुरुस्ती विशेषज्ञचैट करें ₹5/मिनटकॉल करें ₹5/मिनट
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