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नई दिल्ली

हिंदू कैलेंडर नवंबर 2026
कार्तिक – अगहन

हर दिन सूर्योदय की तिथि, पूर्णिमांत मास (उत्तर भारत का, जो पूर्णिमा पर ख़त्म होता है), और उसमें आने वाले व्रत-त्योहार, नई दिल्ली के लिए।

विक्रम संवत 2083पूर्णिमांत18 त्योहार
पूर्णिमा24 नवंबरकार्तिक पूर्णिमा व्रत
अमावस्या9 नवंबरसोमवती अमावस्या
एकादशी5 नवंबररमा एकादशी20 नवंबरदेवउठनी एकादशी
संक्रांति16 नवंबरवृश्चिक संक्रांति
नवंबर 2026 कार्तिक · अगहन
रविसोममंगलबुधगुरुशुक्रशनि17अहोई अष्टमी2839410511एकादशी612धनतेरस713शिवरात्रि814दिवाली9●101गोवर्धन पूजा112भाई दूज123134145लाभ पंचमी156छठ पूजा167178गोपाष्टमी189अक्षय नवमी1992010एकादशी2112तुलसी विवाह2213प्रदोष2314वैकुंठ चतुर्दशी24○देव दीपावली251262273संकष्टी285296307
शुक्ल पक्ष कृष्ण पक्ष त्योहार ○ पूर्णिमा   ● अमावस्या

हर ख़ाने में लिखी संख्या उस दिन नई दिल्ली में सूर्योदय के समय की तिथि है, पक्ष के भीतर गिनी हुई, जैसी दीवार वाले कैलेंडर में छपी होती है। जिस तारीख़ पर क्लिक हो सकता है, उसका पूरा पंचांग अलग पेज पर है।

चातुर्मास शनिवार, 25 जुलाई से शुक्रवार, 20 नवंबर तक: विष्णु जी के विश्राम के चार महीने, देवशयनी से देवउठनी एकादशी तक; इसमें शादी, जनेऊ और विद्यारंभ के मुहूर्त नहीं निकलते; ये शनिवार, 21 नवंबर से फिर हो सकते हैं, जो कार्तिक शुक्ल एकादशी लगने के बाद का पहला सूर्योदय है; मुंडन के मुहूर्त इन दिनों सूर्य की राशि के कारण वैसे भी नहीं हैं; गृह प्रवेश के मुहूर्त पंचांग में फिर भी हैं, पर उत्तर भारत में कई परिवार देवउठनी एकादशी तक रुकते हैं।

नवंबर 2026 के व्रत-त्योहार

18 त्योहार, 8 व्रत
नवंबर 20261रविअहोई अष्टमीकार्तिक कृष्ण अष्टमी · सूर्यास्त के बाद (प्रदोष) · अहोई अष्टमी पूजा मुहूर्त शाम 5:36 से 6:54 तक6शुक्रधनतेरसकार्तिक कृष्ण त्रयोदशी · सूर्यास्त के बाद (प्रदोष) · धनतेरस पूजा मुहूर्त शाम 6:03 से 7:58 तक8रविदिवालीकार्तिक कृष्ण अमावस्या · सूर्यास्त के बाद (प्रदोष) · लक्ष्मी पूजा मुहूर्त शाम 5:55 से 7:51 तक8रविनरक चतुर्दशीकार्तिक कृष्ण चतुर्दशी · सूर्योदय पर10मंगलगोवर्धन पूजाकार्तिक शुक्ल प्रतिपदा · सूर्योदय पर · सुबह का पूजा मुहूर्त सुबह 6:39 से 8:50 तक11बुधभाई दूजकार्तिक शुक्ल द्वितीया · सूर्योदय पर · तिलक मुहूर्त (अपराह्न) दोपहर 1:10 से 3:20 तक11बुधचित्रगुप्त पूजाभाई दूज वाले दिन14शनिलाभ पंचमीगुजरात कार्तिक शुक्ल पंचमी · सूर्योदय पर15रविछठ पूजाबिहार, झारखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश छठ का तीसरा दिन, शाम का अर्घ्य · कार्तिक शुक्ल षष्ठी · सूर्यास्त के बाद (प्रदोष) · संध्या अर्घ्य, सूर्यास्त पर शाम 5:2815रविस्कंद षष्ठीतमिलनाडु कार्तिक शुक्ल षष्ठी · दोपहर बाद (अपराह्न)17मंगलगोपाष्टमीकार्तिक शुक्ल अष्टमी · सूर्योदय पर18बुधअक्षय नवमीकार्तिक शुक्ल नवमी · सूर्योदय पर21शनितुलसी विवाहकार्तिक शुक्ल द्वादशी · सूर्योदय पर23सोमवैकुंठ चतुर्दशीकार्तिक शुक्ल चतुर्दशी · सूर्यास्त के बाद (प्रदोष)24मंगलदेव दीपावलीकार्तिक शुक्ल पूर्णिमा · सूर्यास्त के बाद (प्रदोष) · दीपदान मुहूर्त (प्रदोष काल) शाम 5:25 से रात 8:06 तक24मंगलकार्तिक पूर्णिमाकार्तिक शुक्ल पूर्णिमा · सूर्योदय पर24मंगलकार्तिगई दीपमतमिलनाडु कार्तिगई (कृत्तिका) नक्षत्र, सूर्य वृश्चिक में24मंगलगुरु नानक जयंतीसिख कार्तिक पूर्णिमा वाले दिन
नवंबर 20265गुरुरमा एकादशीएकादशी 4 नवंबर, सुबह 11:03 से 5 नवंबर, सुबह 10:36 तक · पारण 6 नवंबर, सुबह 6:37 से 8:47 तक6शुक्रशुक्र प्रदोष व्रतत्रयोदशी 6 नवंबर, सुबह 10:31 से 7 नवंबर, सुबह 10:48 तक · पूजा शाम 5:33 से रात 8:10 तक7शनिमासिक शिवरात्रिचतुर्दशी 7 नवंबर, सुबह 10:48 से 8 नवंबर, सुबह 11:28 तक · निशीथ 7 नवंबर, रात 11:38 से 12:31 तक9सोमसोमवती अमावस्याअमावस्या 8 नवंबर, सुबह 11:28 से 9 नवंबर, दोपहर 12:32 तक17मंगलमासिक दुर्गाष्टमीअष्टमी 17 नवंबर, सुबह 4:20 से 18 नवंबर, सुबह 6:05 तक20शुक्रदेवउठनी एकादशीएकादशी 20 नवंबर, सुबह 7:16 से 21 नवंबर, सुबह 6:31 तक · पारण 21 नवंबर, दोपहर 1:11 से 3:18 तक22रविरवि प्रदोष व्रतत्रयोदशी 22 नवंबर, सुबह 4:57 से 22–23 नवंबर की रात 2:37 तक · पूजा शाम 5:25 से रात 8:06 तक27शुक्रसंकष्टी चतुर्थीचतुर्थी 27 नवंबर, सुबह 9:49 से 28 नवंबर, सुबह 6:40 तक · चंद्रोदय रात 8:18

इस महीने ये दिन भी

13नवंबर · शुक्रनहाय-खाय बिहार, झारखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेशछठ का पहला दिन · छठ का पहला दिन: नदी या तालाब में स्नान, और कद्दू-भात का एक सात्विक भोजन।
14नवंबर · शनिखरना बिहार, झारखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेशछठ का दूसरा दिन · छठ का दूसरा दिन: दिन भर का व्रत, जो रात को गुड़ की खीर और रोटी से खुलता है; इसके बाद 36 घंटे का निर्जला व्रत शुरू होता है।
16नवंबर · सोमउषा अर्घ्य बिहार, झारखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेशछठ का चौथा दिन, शाम के अर्घ्य की अगली सुबह · छठ की आख़िरी सुबह: उगते सूर्य को अर्घ्य, और व्रत का पारण।

नई दिल्ली के लिए, भारतीय समय में। तिथि हर जगह एक ही क्षण शुरू और ख़त्म होती है; व्रत का दिन और उसके समय नई दिल्ली के हैं, और विदेश में एक दिन आगे-पीछे हो सकते हैं।

दिन-ब-दिन

सूर्योदय की तिथि और मास
दिनसूर्योदय की तिथिमासव्रत-त्योहार
1 रविकृष्ण सप्तमीकार्तिकअहोई अष्टमी
2 सोमकृष्ण अष्टमीकार्तिक
3 मंगलकृष्ण नवमीकार्तिक
4 बुधकृष्ण दशमीकार्तिक
5 गुरुकृष्ण एकादशीकार्तिकरमा एकादशी
6 शुक्रकृष्ण द्वादशीकार्तिकधनतेरस · शुक्र प्रदोष व्रत
7 शनिकृष्ण त्रयोदशीकार्तिकमासिक शिवरात्रि
8 रविकृष्ण चतुर्दशीकार्तिकदिवाली · नरक चतुर्दशी
9 सोमअमावस्याकार्तिकसोमवती अमावस्या
10 मंगलशुक्ल प्रतिपदाकार्तिकगोवर्धन पूजा
11 बुधशुक्ल द्वितीयाकार्तिकभाई दूज · चित्रगुप्त पूजा
12 गुरुशुक्ल तृतीयाकार्तिक
13 शुक्रशुक्ल चतुर्थीकार्तिकनहाय-खाय
14 शनिशुक्ल पंचमीकार्तिकलाभ पंचमी (गुजरात) · खरना
15 रविशुक्ल षष्ठीकार्तिकछठ पूजा (बिहार, झारखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश) · स्कंद षष्ठी (तमिलनाडु)
16 सोमशुक्ल सप्तमीकार्तिकवृश्चिक संक्रांति · उषा अर्घ्य
17 मंगलशुक्ल अष्टमीकार्तिकगोपाष्टमी · मासिक दुर्गाष्टमी
18 बुधशुक्ल नवमीकार्तिकअक्षय नवमी
19 गुरुशुक्ल नवमीकार्तिक
20 शुक्रशुक्ल दशमीकार्तिकदेवउठनी एकादशी
21 शनिशुक्ल द्वादशीकार्तिकतुलसी विवाह
22 रविशुक्ल त्रयोदशीकार्तिकरवि प्रदोष व्रत
23 सोमशुक्ल चतुर्दशीकार्तिकवैकुंठ चतुर्दशी
24 मंगलपूर्णिमाकार्तिकदेव दीपावली · कार्तिक पूर्णिमा · कार्तिगई दीपम (तमिलनाडु) · गुरु नानक जयंती (सिख)
25 बुधकृष्ण प्रतिपदाअगहन
26 गुरुकृष्ण द्वितीयाअगहन
27 शुक्रकृष्ण तृतीयाअगहनसंकष्टी चतुर्थी
28 शनिकृष्ण पंचमीअगहन
29 रविकृष्ण षष्ठीअगहन
30 सोमकृष्ण सप्तमीअगहन

तिथि वाले कॉलम में नई दिल्ली में सूर्योदय के समय की तिथि है। हर व्रत और त्योहार अपनी तिथि के अपने समय से तय होता है: प्रदोष शाम को, शिवरात्रि आधी रात (निशीथ) को, संकष्टी चंद्रोदय पर, पूर्णिमा का व्रत दोपहर में, दिवाली सूर्यास्त के बाद। इसलिए कोई व्रत ऐसे दिन भी पड़ सकता है जिसकी सूर्योदय वाली तिथि उससे पिछली हो।

दिवाली रविवार, 8 नवंबर को है और सोमवती अमावस्या सोमवार, 9 नवंबर को: दिवाली में अमावस्या सूर्यास्त के बाद प्रदोष काल में देखी जाती है, और अमावस्या का व्रत उस पहले दिन रखा जाता है जिस दिन सूर्योदय पर अमावस्या हो।

देवउठनी एकादशी शुक्रवार, 20 नवंबर को है, जिस दिन एकादशी शुरू होती है: यह उस दिन के सूर्योदय के बाद शुरू होकर अगले सूर्योदय से पहले ख़त्म हो जाती है, इसलिए किसी सूर्योदय पर नहीं दिखती (क्षय तिथि)।

इस पेज के शब्द

हर शब्द का मतलब
  • पूर्णिमांत: उत्तर भारत का कैलेंडर, जिसमें महीना पूर्णिमा पर ख़त्म होता है। पश्चिम और दक्षिण के अमांत कैलेंडर में महीना अमावस्या पर ख़त्म होता है, इसलिए कृष्ण पक्ष में दोनों महीने का नाम अलग बताते हैं।
  • शुक्ल और कृष्ण पक्ष: महीने का उजाला पखवाड़ा, जब चंद्रमा बढ़कर पूर्णिमा तक जाता है, और अँधेरा पखवाड़ा, जब घटकर अमावस्या तक।
  • संक्रांति: जिस दिन सूर्य नई राशि में प्रवेश करते हैं; इनमें मकर संक्रांति सबसे जानी-मानी है।
  • प्रदोष: सूर्यास्त के ठीक बाद की शाम का समय।
  • निशीथ: आधी रात का समय, जब शिवरात्रि और जन्माष्टमी की पूजा होती है।
  • अपराह्न और मध्याह्न: दोपहर बाद का समय (दिन के पाँच बराबर भागों में चौथा) और दिन का बीच का समय, यानी दोपहर।
  • पारण: व्रत खोलने का समय, जैसे एकादशी का व्रत अगली सुबह खोला जाता है।
  • स्नान-दान: पूर्णिमा या अमावस्या पर पवित्र स्नान और दान।
  • क्षय: वह तिथि जो एक सूर्योदय के बाद शुरू होकर अगले सूर्योदय से पहले ख़त्म हो जाए, इसलिए किसी सूर्योदय पर न दिखे; वह उसी दिन मानी जाती है जिस दिन शुरू होती है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

12 सवाल
नवंबर 2026 में कौन-सा हिंदू महीना है?

उत्तर भारत के पूर्णिमांत कैलेंडर में 1 नवंबर से 24 नवंबर तक कार्तिक; फिर 25 नवंबर से 30 नवंबर तक अगहन। विक्रम संवत 2083।

नवंबर 2026 में पूर्णिमा कब है?

नई दिल्ली में कार्तिक पूर्णिमा व्रत मंगलवार, 24 नवंबर को।

नवंबर 2026 में अमावस्या कब है?

नई दिल्ली में सोमवती अमावस्या सोमवार, 9 नवंबर को।

नवंबर 2026 में एकादशी कब है?

नई दिल्ली में रमा एकादशी गुरुवार, 5 नवंबर को और देवउठनी एकादशी शुक्रवार, 20 नवंबर को।

नवंबर 2026 में कौन-से हिंदू त्योहार हैं?

अहोई अष्टमी रविवार, 1 नवंबर को; धनतेरस शुक्रवार, 6 नवंबर को; दिवाली रविवार, 8 नवंबर को; नरक चतुर्दशी रविवार, 8 नवंबर को; गोवर्धन पूजा मंगलवार, 10 नवंबर को; भाई दूज बुधवार, 11 नवंबर को; चित्रगुप्त पूजा बुधवार, 11 नवंबर को; लाभ पंचमी (गुजरात) शनिवार, 14 नवंबर को; छठ पूजा (बिहार, झारखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश) रविवार, 15 नवंबर को; स्कंद षष्ठी (तमिलनाडु) रविवार, 15 नवंबर को; गोपाष्टमी मंगलवार, 17 नवंबर को; अक्षय नवमी बुधवार, 18 नवंबर को; तुलसी विवाह शनिवार, 21 नवंबर को; वैकुंठ चतुर्दशी सोमवार, 23 नवंबर को; देव दीपावली मंगलवार, 24 नवंबर को; कार्तिक पूर्णिमा मंगलवार, 24 नवंबर को; कार्तिगई दीपम (तमिलनाडु) मंगलवार, 24 नवंबर को; गुरु नानक जयंती (सिख) मंगलवार, 24 नवंबर को। नई दिल्ली के लिए।

अहोई अष्टमी 2026 पर तारे कब दिखेंगे?

नई दिल्ली में शाम 6:00, सूर्यास्त के एक घड़ी (24 मिनट) बाद; माताएँ तभी तारों को अर्घ्य देकर व्रत खोलती हैं। पूजा सूर्यास्त से, शाम 5:36 से 6:54 तक, की जाती है। जो परिवार चाँद का इंतज़ार करते हैं, वे चंद्रोदय पर, रात 11:40, व्रत खोलते हैं; इस रात चाँद देर से निकलता है।

2026 में धनतेरस पूजा का मुहूर्त क्या है?

नई दिल्ली में शाम 6:03 से 7:58 तक: जब प्रदोष काल (शाम 5:33 से रात 8:10 तक) और स्थिर लग्न वृषभ काल साथ हों और त्रयोदशी चल रही हो, वही नियम जो दिवाली की लक्ष्मी पूजा का है।

दिवाली 2026 पर लक्ष्मी पूजा का मुहूर्त क्या है?

नई दिल्ली में शाम 5:55 से शाम 7:51 तक। यह वह समय है जब प्रदोष काल (शाम 5:32 से रात 8:09 तक) और स्थिर लग्न वृषभ काल साथ हों और अमावस्या चल रही हो: स्थिर लग्न में की गई लक्ष्मी पूजा से लक्ष्मी घर में ठहरती हैं, ऐसा माना जाता है।

2026 में गोवर्धन पूजा का मुहूर्त क्या है?

नई दिल्ली में मुहूर्त सुबह 6:39 से 8:50 तक है, यानी दिन का पहला पाँचवाँ भाग, जब तक प्रतिपदा चल रही हो। 2026 में शाम का मुहूर्त नहीं है: प्रतिपदा दोपहर 2:00 पर ख़त्म हो जाती है।

भाई दूज 2026 पर तिलक का मुहूर्त क्या है?

नई दिल्ली में दोपहर 1:10 से 3:20 तक: अपराह्न, यानी दिन का चौथा पाँचवाँ भाग, जब द्वितीया चल रही हो। बहन इसी समय भाई को तिलक लगाती है, और भाई उसके हाथ का बना खाना खाता है।

2026 में छठ पूजा का संध्या अर्घ्य कब है?

नई दिल्ली में सूर्यास्त पर, शाम 5:28: व्रती पानी में खड़ी होकर डूबते सूर्य को अर्घ्य देती हैं। उषा अर्घ्य अगले सूर्योदय पर, 16 नवंबर, सुबह 6:44, होता है, और उसके बाद व्रत खोला जाता है। दोनों समय हर शहर के अपने सूर्यास्त और सूर्योदय के साथ बदलते हैं; इस पेज की तालिका में चालीस शहरों के समय हैं।

2026 में देव दीपावली का मुहूर्त क्या है?

नई दिल्ली में शाम 5:25 से रात 8:06 तक: प्रदोष काल, यानी सूर्यास्त के बाद की शाम, जब कार्तिक पूर्णिमा चल रही हो। घाटों पर और घर में दीये तभी जलाए जाते हैं।

व्रत का दिन सबके लिए एक होता है, पर हर किसी की कुंडली अलग होती है।

अपनी मुफ़्त कुंडली बनाएँ, या 24 ज्योतिषियों में से किसी से पूछें कि कौन-सा व्रत आपके किस ग्रह को बल देगा। पैसे मिनट के हिसाब से।

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आपकी कुंडली से रिपोर्ट

9 विस्तृत रिपोर्ट, जिनमें जन्म कुंडली, कुंडली मिलान और वार्षिक भविष्यवाणी हैं।हिंदी, अंग्रेज़ी और हिंग्लिशरिपोर्ट देखें
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