हर दिन सूर्योदय की तिथि, पूर्णिमांत मास (उत्तर भारत का, जो पूर्णिमा पर ख़त्म होता है), और उसमें आने वाले व्रत-त्योहार, नई दिल्ली के लिए।
हर ख़ाने में लिखी संख्या उस दिन नई दिल्ली में सूर्योदय के समय की तिथि है, पक्ष के भीतर गिनी हुई, जैसी दीवार वाले कैलेंडर में छपी होती है। जिस तारीख़ पर क्लिक हो सकता है, उसका पूरा पंचांग अलग पेज पर है।
चातुर्मास शनिवार, 25 जुलाई से शुक्रवार, 20 नवंबर तक: विष्णु जी के विश्राम के चार महीने, देवशयनी से देवउठनी एकादशी तक; इसमें शादी, जनेऊ और विद्यारंभ के मुहूर्त नहीं निकलते; ये शनिवार, 21 नवंबर से फिर हो सकते हैं, जो कार्तिक शुक्ल एकादशी लगने के बाद का पहला सूर्योदय है; मुंडन के मुहूर्त इन दिनों सूर्य की राशि के कारण वैसे भी नहीं हैं; गृह प्रवेश के मुहूर्त पंचांग में फिर भी हैं, पर उत्तर भारत में कई परिवार देवउठनी एकादशी तक रुकते हैं।
नई दिल्ली के लिए, भारतीय समय में। तिथि हर जगह एक ही क्षण शुरू और ख़त्म होती है; व्रत का दिन और उसके समय नई दिल्ली के हैं, और विदेश में एक दिन आगे-पीछे हो सकते हैं।
| दिन | सूर्योदय की तिथि | मास | व्रत-त्योहार |
|---|---|---|---|
| 1 रवि | कृष्ण सप्तमी | कार्तिक | अहोई अष्टमी |
| 2 सोम | कृष्ण अष्टमी | कार्तिक | |
| 3 मंगल | कृष्ण नवमी | कार्तिक | |
| 4 बुध | कृष्ण दशमी | कार्तिक | |
| 5 गुरु | कृष्ण एकादशी | कार्तिक | रमा एकादशी |
| 6 शुक्र | कृष्ण द्वादशी | कार्तिक | धनतेरस · शुक्र प्रदोष व्रत |
| 7 शनि | कृष्ण त्रयोदशी | कार्तिक | मासिक शिवरात्रि |
| 8 रवि | कृष्ण चतुर्दशी | कार्तिक | दिवाली · नरक चतुर्दशी |
| 9 सोम | अमावस्या | कार्तिक | सोमवती अमावस्या |
| 10 मंगल | शुक्ल प्रतिपदा | कार्तिक | गोवर्धन पूजा |
| 11 बुध | शुक्ल द्वितीया | कार्तिक | भाई दूज · चित्रगुप्त पूजा |
| 12 गुरु | शुक्ल तृतीया | कार्तिक | |
| 13 शुक्र | शुक्ल चतुर्थी | कार्तिक | नहाय-खाय |
| 14 शनि | शुक्ल पंचमी | कार्तिक | लाभ पंचमी (गुजरात) · खरना |
| 15 रवि | शुक्ल षष्ठी | कार्तिक | छठ पूजा (बिहार, झारखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश) · स्कंद षष्ठी (तमिलनाडु) |
| 16 सोम | शुक्ल सप्तमी | कार्तिक | वृश्चिक संक्रांति · उषा अर्घ्य |
| 17 मंगल | शुक्ल अष्टमी | कार्तिक | गोपाष्टमी · मासिक दुर्गाष्टमी |
| 18 बुध | शुक्ल नवमी | कार्तिक | अक्षय नवमी |
| 19 गुरु | शुक्ल नवमी | कार्तिक | |
| 20 शुक्र | शुक्ल दशमी | कार्तिक | देवउठनी एकादशी |
| 21 शनि | शुक्ल द्वादशी | कार्तिक | तुलसी विवाह |
| 22 रवि | शुक्ल त्रयोदशी | कार्तिक | रवि प्रदोष व्रत |
| 23 सोम | शुक्ल चतुर्दशी | कार्तिक | वैकुंठ चतुर्दशी |
| 24 मंगल | पूर्णिमा | कार्तिक | देव दीपावली · कार्तिक पूर्णिमा · कार्तिगई दीपम (तमिलनाडु) · गुरु नानक जयंती (सिख) |
| 25 बुध | कृष्ण प्रतिपदा | अगहन | |
| 26 गुरु | कृष्ण द्वितीया | अगहन | |
| 27 शुक्र | कृष्ण तृतीया | अगहन | संकष्टी चतुर्थी |
| 28 शनि | कृष्ण पंचमी | अगहन | |
| 29 रवि | कृष्ण षष्ठी | अगहन | |
| 30 सोम | कृष्ण सप्तमी | अगहन |
तिथि वाले कॉलम में नई दिल्ली में सूर्योदय के समय की तिथि है। हर व्रत और त्योहार अपनी तिथि के अपने समय से तय होता है: प्रदोष शाम को, शिवरात्रि आधी रात (निशीथ) को, संकष्टी चंद्रोदय पर, पूर्णिमा का व्रत दोपहर में, दिवाली सूर्यास्त के बाद। इसलिए कोई व्रत ऐसे दिन भी पड़ सकता है जिसकी सूर्योदय वाली तिथि उससे पिछली हो।
दिवाली रविवार, 8 नवंबर को है और सोमवती अमावस्या सोमवार, 9 नवंबर को: दिवाली में अमावस्या सूर्यास्त के बाद प्रदोष काल में देखी जाती है, और अमावस्या का व्रत उस पहले दिन रखा जाता है जिस दिन सूर्योदय पर अमावस्या हो।
देवउठनी एकादशी शुक्रवार, 20 नवंबर को है, जिस दिन एकादशी शुरू होती है: यह उस दिन के सूर्योदय के बाद शुरू होकर अगले सूर्योदय से पहले ख़त्म हो जाती है, इसलिए किसी सूर्योदय पर नहीं दिखती (क्षय तिथि)।
जब तारीख़ अदालत दे, तो कोर्ट की सुनवाई वाले पेज पर हर दिन की सूर्य होरा है; क़ानूनी नोटिस के लिए नोटिस का जवाब वाले पेज पर जवाब के दिन हैं।
उत्तर भारत के पूर्णिमांत कैलेंडर में 1 नवंबर से 24 नवंबर तक कार्तिक; फिर 25 नवंबर से 30 नवंबर तक अगहन। विक्रम संवत 2083।
नई दिल्ली में कार्तिक पूर्णिमा व्रत मंगलवार, 24 नवंबर को।
नई दिल्ली में सोमवती अमावस्या सोमवार, 9 नवंबर को।
नई दिल्ली में रमा एकादशी गुरुवार, 5 नवंबर को और देवउठनी एकादशी शुक्रवार, 20 नवंबर को।
अहोई अष्टमी रविवार, 1 नवंबर को; धनतेरस शुक्रवार, 6 नवंबर को; दिवाली रविवार, 8 नवंबर को; नरक चतुर्दशी रविवार, 8 नवंबर को; गोवर्धन पूजा मंगलवार, 10 नवंबर को; भाई दूज बुधवार, 11 नवंबर को; चित्रगुप्त पूजा बुधवार, 11 नवंबर को; लाभ पंचमी (गुजरात) शनिवार, 14 नवंबर को; छठ पूजा (बिहार, झारखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश) रविवार, 15 नवंबर को; स्कंद षष्ठी (तमिलनाडु) रविवार, 15 नवंबर को; गोपाष्टमी मंगलवार, 17 नवंबर को; अक्षय नवमी बुधवार, 18 नवंबर को; तुलसी विवाह शनिवार, 21 नवंबर को; वैकुंठ चतुर्दशी सोमवार, 23 नवंबर को; देव दीपावली मंगलवार, 24 नवंबर को; कार्तिक पूर्णिमा मंगलवार, 24 नवंबर को; कार्तिगई दीपम (तमिलनाडु) मंगलवार, 24 नवंबर को; गुरु नानक जयंती (सिख) मंगलवार, 24 नवंबर को। नई दिल्ली के लिए।
नई दिल्ली में शाम 6:00, सूर्यास्त के एक घड़ी (24 मिनट) बाद; माताएँ तभी तारों को अर्घ्य देकर व्रत खोलती हैं। पूजा सूर्यास्त से, शाम 5:36 से 6:54 तक, की जाती है। जो परिवार चाँद का इंतज़ार करते हैं, वे चंद्रोदय पर, रात 11:40, व्रत खोलते हैं; इस रात चाँद देर से निकलता है।
नई दिल्ली में शाम 6:03 से 7:58 तक: जब प्रदोष काल (शाम 5:33 से रात 8:10 तक) और स्थिर लग्न वृषभ काल साथ हों और त्रयोदशी चल रही हो, वही नियम जो दिवाली की लक्ष्मी पूजा का है।
नई दिल्ली में शाम 5:55 से शाम 7:51 तक। यह वह समय है जब प्रदोष काल (शाम 5:32 से रात 8:09 तक) और स्थिर लग्न वृषभ काल साथ हों और अमावस्या चल रही हो: स्थिर लग्न में की गई लक्ष्मी पूजा से लक्ष्मी घर में ठहरती हैं, ऐसा माना जाता है।
नई दिल्ली में मुहूर्त सुबह 6:39 से 8:50 तक है, यानी दिन का पहला पाँचवाँ भाग, जब तक प्रतिपदा चल रही हो। 2026 में शाम का मुहूर्त नहीं है: प्रतिपदा दोपहर 2:00 पर ख़त्म हो जाती है।
नई दिल्ली में दोपहर 1:10 से 3:20 तक: अपराह्न, यानी दिन का चौथा पाँचवाँ भाग, जब द्वितीया चल रही हो। बहन इसी समय भाई को तिलक लगाती है, और भाई उसके हाथ का बना खाना खाता है।
नई दिल्ली में सूर्यास्त पर, शाम 5:28: व्रती पानी में खड़ी होकर डूबते सूर्य को अर्घ्य देती हैं। उषा अर्घ्य अगले सूर्योदय पर, 16 नवंबर, सुबह 6:44, होता है, और उसके बाद व्रत खोला जाता है। दोनों समय हर शहर के अपने सूर्यास्त और सूर्योदय के साथ बदलते हैं; इस पेज की तालिका में चालीस शहरों के समय हैं।
नई दिल्ली में शाम 5:25 से रात 8:06 तक: प्रदोष काल, यानी सूर्यास्त के बाद की शाम, जब कार्तिक पूर्णिमा चल रही हो। घाटों पर और घर में दीये तभी जलाए जाते हैं।
अपनी मुफ़्त कुंडली बनाएँ, या 24 ज्योतिषियों में से किसी से पूछें कि कौन-सा व्रत आपके किस ग्रह को बल देगा। पैसे मिनट के हिसाब से।


