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नई दिल्ली · सावन कृष्ण एकादशी

कामिका एकादशी 2027
गुरुवार, 29 जुलाई 2027

श्रावण कृष्ण पक्ष की एकादशी, चातुर्मास और सावन की पहली एकादशी।

पारण शुक्रवार, 30 जुलाई, दोपहर 1:49 से शाम 4:31 तकविष्णु2026, 2027, 2028
कामिका एकादशी 2027 · नई दिल्लीगुरुवार, 29 जुलाईकामिका एकादशी · सावन कृष्ण एकादशी
एकादशी शुरू
29 जुलाई, सुबह 7:34
एकादशी समाप्त
30 जुलाई, सुबह 5:13
पारण (व्रत खोलने का समय)
30 जुलाई, दोपहर 1:49 से शाम 4:31 तक
हरि वासर (द्वादशी का पहला चौथाई भाग) समाप्त
30 जुलाई, सुबह 10:30
उसके बाद · नई दिल्लीमंगलवार, 18 जुलाई 2028कामिका एकादशी · सावन कृष्ण एकादशी
एकादशी शुरू
17 जुलाई, शाम 4:46
एकादशी समाप्त
18 जुलाई, शाम 4:26
पारण (व्रत खोलने का समय)
19 जुलाई, सुबह 5:36 से 8:20 तक

नई दिल्ली के लिए, भारतीय समय में। तिथि हर जगह एक ही क्षण शुरू और ख़त्म होती है; व्रत का दिन और उसके समय नई दिल्ली के हैं, और विदेश में एक दिन आगे-पीछे हो सकते हैं।

2026, 2027, 2028 में कामिका एकादशी

तिथि और पारण के साथ
20269 अगस्तरविवारएकादशी 8 अगस्त, दोपहर 1:59 से 9 अगस्त, सुबह 11:05 तकपारण 10 अगस्त, सुबह 5:48 से 8:01 तक
202729 जुलाईगुरुवारएकादशी 29 जुलाई, सुबह 7:34 से 30 जुलाई, सुबह 5:13 तकपारण 30 जुलाई, दोपहर 1:49 से शाम 4:31 तक
202818 जुलाईमंगलवारएकादशी 17 जुलाई, शाम 4:46 से 18 जुलाई, शाम 4:26 तकपारण 19 जुलाई, सुबह 5:36 से 8:20 तक
कामिका एकादशी रख रहे हैं?हमारे मुहूर्त ज्योतिषी एस्ट्रो मुहूर्त से व्रत, उसकी पूजा और अपने शहर के समय के बारे में पूछें।

कामिका एकादशी के बारे में

पुराण इस दिन तुलसी से विष्णु की पूजा और घी या तिल के तेल के दीपक की महिमा बताता है।

यह किस लिए रखी जाती है

पाप से मुक्ति, बड़े पाप से भी, जैसा इसकी कथा में है।

कामिका एकादशी व्रत कथा

पुराण में ब्रह्मा जी नारद को इस दिन की कथा नहीं, इसका पुण्य बताते हैं: कि तुलसी दल से विष्णु की पूजा और रात भर उनके आगे दीपक जलाए रखना तीर्थों और बड़े दानों से भी बढ़कर है।

उत्तर भारत के कई घरों में पढ़ी जाने वाली कथा एक व्यक्ति की है, जिससे झगड़े में एक ब्राह्मण की हत्या हो गई और उसे बाद के संस्कारों से अलग कर दिया गया। एक ऋषि ने उसे कामिका एकादशी रखने को कहा, और इससे वह उस पाप से मुक्त हुआ।

पुण्य की बात पद्म पुराण (उत्तर खंड) के एकादशी माहात्म्य से है; झगड़े वाली कथा उत्तर भारत की व्रत-कथा की किताबों की है, पुराण की नहीं।

व्रत विधि

बाक़ी यह हर एकादशी की तरह रखी जाती है: दशमी को बिना चावल का एक बार सात्विक भोजन, सुबह संकल्प, एक दिन पहले तोड़ी तुलसी से विष्णु पूजा, कथा, और पारण तक कोई अनाज नहीं, उसकी जगह फल, दूध, साबूदाना, कुट्टू और सिंघाड़ा। एकादशी पेज पर हर चरण और क्या खाएँ, किससे बचें, इसकी पूरी सूची है।

व्रत कब खोलें

हरि वासर, यानी द्वादशी का पहला चौथाई भाग, 30 जुलाई, सुबह 10:30 तक चलता है, सुबह के बाद तक, और दोपहर में व्रत नहीं खोला जाता, इसलिए पारण मध्याह्न के बाद होता है: शुक्रवार, 30 जुलाई को दोपहर 1:49 से शाम 4:31 तक, नई दिल्ली में।

2026 में: द्वादशी जल्दी, 10 अगस्त, सुबह 8:01 पर, ख़त्म हो जाती है, और व्रत उसी के भीतर खोलना होता है, इसलिए समय कम है: सोमवार, 10 अगस्त 2026 को सुबह 5:48 से 8:01 तक, नई दिल्ली में।

2028 में: हरि वासर, यानी द्वादशी का पहला चौथाई भाग, 18 जुलाई, रात 10:11 तक, सूर्योदय से पहले ही, ख़त्म हो जाता है, इसलिए व्रत प्रातःकाल यानी दिन के पहले पाँचवें हिस्से में खोला जाता है: बुधवार, 19 जुलाई 2028 को सुबह 5:36 से 8:20 तक, नई दिल्ली में।

सभी एकादशी

और हर एक कब है
5नवंबररमा एकादशीकार्तिक कृष्ण एकादशीगुरुवार, 5 नवंबर 202620नवंबरदेवउठनी एकादशीकार्तिक शुक्ल एकादशीशुक्रवार, 20 नवंबर 20264दिसंबरउत्पन्ना एकादशीअगहन कृष्ण एकादशीशुक्रवार, 4 दिसंबर 202620दिसंबरमोक्षदा एकादशीअगहन शुक्ल एकादशीरविवार, 20 दिसंबर 20263जनवरीसफला एकादशीपौष कृष्ण एकादशीरविवार, 3 जनवरी 202718जनवरीपौष पुत्रदा एकादशीपौष शुक्ल एकादशीसोमवार, 18 जनवरी 20272फ़रवरीषटतिला एकादशीमाघ कृष्ण एकादशीमंगलवार, 2 फ़रवरी 202717फ़रवरीजया एकादशीमाघ शुक्ल एकादशीबुधवार, 17 फ़रवरी 20274मार्चविजया एकादशीफाल्गुन कृष्ण एकादशीगुरुवार, 4 मार्च 202718मार्चआमलकी एकादशीफाल्गुन शुक्ल एकादशीगुरुवार, 18 मार्च 20272अप्रैलपापमोचनी एकादशीचैत्र कृष्ण एकादशीशुक्रवार, 2 अप्रैल 202717अप्रैलकामदा एकादशीचैत्र शुक्ल एकादशीशनिवार, 17 अप्रैल 20272मईवरूथिनी एकादशीवैशाख कृष्ण एकादशीरविवार, 2 मई 202716मईमोहिनी एकादशीवैशाख शुक्ल एकादशीरविवार, 16 मई 20271जूनअपरा एकादशीज्येष्ठ कृष्ण एकादशीमंगलवार, 1 जून 202714जूननिर्जला एकादशीज्येष्ठ शुक्ल एकादशीसोमवार, 14 जून 202730जूनयोगिनी एकादशीआषाढ़ कृष्ण एकादशीबुधवार, 30 जून 202714जुलाईदेवशयनी एकादशीआषाढ़ शुक्ल एकादशीबुधवार, 14 जुलाई 202729जुलाईकामिका एकादशीसावन कृष्ण एकादशीगुरुवार, 29 जुलाई 202712अगस्तश्रावण पुत्रदा एकादशीसावन शुक्ल एकादशीगुरुवार, 12 अगस्त 202728अगस्तअजा एकादशीभादों कृष्ण एकादशीशनिवार, 28 अगस्त 202711सितंबरपरिवर्तिनी एकादशीभादों शुक्ल एकादशीशनिवार, 11 सितंबर 202726सितंबरइंदिरा एकादशीआश्विन कृष्ण एकादशीरविवार, 26 सितंबर 202711अक्टूबरपापांकुशा एकादशीआश्विन शुक्ल एकादशीसोमवार, 11 अक्टूबर 202726मार्चपद्मिनी एकादशीअधिक चैत्र शुक्ल एकादशीसोमवार, 26 मार्च 20299अप्रैलपरमा एकादशीअधिक चैत्र कृष्ण एकादशीसोमवार, 9 अप्रैल 2029

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

8 सवाल
2027 में कामिका एकादशी कब है?

2027 में कामिका एकादशी गुरुवार, 29 जुलाई 2027 को है, नई दिल्ली में। एकादशी 29 जुलाई, सुबह 7:34 से 30 जुलाई, सुबह 5:13 तक रहेगी।

2027 में कामिका एकादशी का पारण कब है?

शुक्रवार, 30 जुलाई को, दोपहर 1:49 से शाम 4:31 तक, नई दिल्ली में। सूर्योदय के बाद, हरि वासर ख़त्म होने पर और द्वादशी ख़त्म होने से पहले व्रत खोलें।

अगस्त 2026 में कामिका एकादशी की तारीख़?

नई दिल्ली में रविवार, 9 अगस्त 2026; पारण 10 अगस्त को, सुबह 5:48 से 8:01 तक।

जुलाई 2028 में कामिका एकादशी की तारीख़?

नई दिल्ली में मंगलवार, 18 जुलाई 2028; पारण 19 जुलाई को, सुबह 5:36 से 8:20 तक।

कामिका एकादशी किस महीने में आती है?

सावन कृष्ण एकादशी, उत्तर भारत के पूर्णिमांत कैलेंडर में। दक्षिण और पश्चिम के अमांत कैलेंडर में यह पिछले महीने में गिनी जाती है, क्योंकि वहाँ कृष्ण पक्ष पिछले महीने के नाम से चलता है; तारीख़ वही रहती है।

क्या एकादशी पर पानी पी सकते हैं?

हाँ, अगर आपने निर्जला का संकल्प नहीं लिया है। ज़्यादातर परिवार एकादशी जल और फलाहार के साथ रखते हैं; परंपरा में सिर्फ़ ज्येष्ठ की निर्जला एकादशी बिना पानी के रखी जाती है। कौन-सा व्रत रख रहे हैं, यह संकल्प के समय तय करें।

एकादशी पर चावल क्यों नहीं खाते?

परंपरा एकादशी के व्रत से हर अनाज को, और सबसे पहले चावल को, दूर रखती है; पुराण कहते हैं कि इस दिन पाप अन्न में आश्रय लेता है। जो व्रत नहीं रखते, वे भी आमतौर पर उस दिन चावल नहीं खाते।

पारण क्या है, और समय छूट जाए तो?

पारण का मतलब है द्वादशी को, हर तारीख़ के साथ दिए समय में, व्रत खोलना। समय निकल जाए तो द्वादशी रहते जितनी जल्दी हो सके, जल और थोड़े प्रसाद से व्रत खोलें। परंपरा में दोष द्वादशी ख़त्म होने के बाद व्रत खोलना माना जाता है।

व्रत का दिन सबके लिए एक होता है, पर हर किसी की कुंडली अलग होती है।

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आपकी कुंडली से रिपोर्ट

9 विस्तृत रिपोर्ट, जिनमें जन्म कुंडली, कुंडली मिलान और वार्षिक भविष्यवाणी हैं।हिंदी, अंग्रेज़ी और हिंग्लिशरिपोर्ट देखें
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