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नई दिल्ली · ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी

निर्जला एकादशी 2027
सोमवार, 14 जून 2027

ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की एकादशी, जो निर्जला, यानी पानी तक के बिना, एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक रखी जाती है।

पारण मंगलवार, 15 जून, दोपहर 1:46 से शाम 4:32 तकविष्णु2026, 2027, 2028
निर्जला एकादशी 2027 · नई दिल्लीसोमवार, 14 जूननिर्जला एकादशी · ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी
एकादशी शुरू
13–14 जून की रात 2:12
एकादशी समाप्त
14–15 जून की रात 2:08
पारण (व्रत खोलने का समय)
15 जून, दोपहर 1:46 से शाम 4:32 तक
हरि वासर (द्वादशी का पहला चौथाई भाग) समाप्त
15 जून, सुबह 8:15
उसके बाद · नई दिल्लीशनिवार, 3 जून 2028निर्जला एकादशी · ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी
एकादशी शुरू
2 जून, शाम 7:32
एकादशी समाप्त
3 जून, शाम 5:26
पारण (व्रत खोलने का समय)
4 जून, सुबह 5:23 से 8:09 तक

नई दिल्ली के लिए, भारतीय समय में। तिथि हर जगह एक ही क्षण शुरू और ख़त्म होती है; व्रत का दिन और उसके समय नई दिल्ली के हैं, और विदेश में एक दिन आगे-पीछे हो सकते हैं।

2026, 2027, 2028 में निर्जला एकादशी

तिथि और पारण के साथ
202625 जूनगुरुवारएकादशी 24 जून, शाम 6:12 से 25 जून, रात 8:09 तकपारण 26 जून, सुबह 5:25 से 8:12 तक
202714 जूनसोमवारएकादशी 13–14 जून की रात 2:12 से 14–15 जून की रात 2:08 तकपारण 15 जून, दोपहर 1:46 से शाम 4:32 तक
20283 जूनशनिवारएकादशी 2 जून, शाम 7:32 से 3 जून, शाम 5:26 तकपारण 4 जून, सुबह 5:23 से 8:09 तक
निर्जला एकादशी रख रहे हैं?हमारे मुहूर्त ज्योतिषी एस्ट्रो मुहूर्त से व्रत, उसकी पूजा और अपने शहर के समय के बारे में पूछें।

निर्जला एकादशी के बारे में

यह साल के सबसे गर्म दिनों में पड़ती है, और माना जाता है कि इससे चौबीसों एकादशियों का पुण्य मिलता है।

दूसरे नाम: भीमसेनी, पांडव एकादशी।

यह किस लिए रखी जाती है

साल भर की सभी एकादशियों का पुण्य एक साथ, बिना अन्न और जल के रखकर।

निर्जला एकादशी व्रत कथा

पांडवों में सबसे बलवान भीम भूखे नहीं रह पाते थे: उनके पेट में वृक नाम की अग्नि जलती थी। उनके भाई और द्रौपदी हर एकादशी रखते थे, और भीम ने व्यास जी से पूछा कि साल में चौबीस बार उपवास किए बिना वे इसका पुण्य कैसे पाएँ।

व्यास जी ने उन्हें ज्येष्ठ शुक्ल की यह एक एकादशी बिना अन्न और बिना जल के रखने को कहा, जिससे उन्हें सबका पुण्य मिल जाएगा। भीम ने यह व्रत रखा, और तब से यह भीमसेनी एकादशी कहलाती है।

पद्म पुराण के उत्तर खंड के एकादशी माहात्म्य से, जहाँ श्री कृष्ण युधिष्ठिर को हर एकादशी की कथा और उसका पुण्य सुनाते हैं।

व्रत विधि

इस दिन का दान जल है: परिवार प्याऊ लगाते हैं, जल से भरा मिट्टी का घड़ा, पंखा, शरबत या फल दान करते हैं। अगर सेहत बिना पानी के व्रत की इजाज़त न दे, तो परंपरा में आचमन और फल या जल का व्रत मान्य है; पहले डॉक्टर की सलाह।

बाक़ी यह हर एकादशी की तरह रखी जाती है: दशमी को बिना चावल का एक बार सात्विक भोजन, सुबह संकल्प, एक दिन पहले तोड़ी तुलसी से विष्णु पूजा, कथा, और पारण तक कोई अनाज नहीं, उसकी जगह फल, दूध, साबूदाना, कुट्टू और सिंघाड़ा। एकादशी पेज पर हर चरण और क्या खाएँ, किससे बचें, इसकी पूरी सूची है।

व्रत कब खोलें

हरि वासर, यानी द्वादशी का पहला चौथाई भाग, 15 जून, सुबह 8:15 तक चलता है, सुबह के बाद तक, और दोपहर में व्रत नहीं खोला जाता, इसलिए पारण मध्याह्न के बाद होता है: मंगलवार, 15 जून को दोपहर 1:46 से शाम 4:32 तक, नई दिल्ली में।

2026 में: हरि वासर, यानी द्वादशी का पहला चौथाई भाग, 25–26 जून की रात 2:44 तक, सूर्योदय से पहले ही, ख़त्म हो जाता है, इसलिए व्रत प्रातःकाल यानी दिन के पहले पाँचवें हिस्से में खोला जाता है: शुक्रवार, 26 जून 2026 को सुबह 5:25 से 8:12 तक, नई दिल्ली में।

2028 में: हरि वासर, यानी द्वादशी का पहला चौथाई भाग, 3 जून, रात 10:58 तक, सूर्योदय से पहले ही, ख़त्म हो जाता है, इसलिए व्रत प्रातःकाल यानी दिन के पहले पाँचवें हिस्से में खोला जाता है: रविवार, 4 जून 2028 को सुबह 5:23 से 8:09 तक, नई दिल्ली में।

सभी एकादशी

और हर एक कब है
5नवंबररमा एकादशीकार्तिक कृष्ण एकादशीगुरुवार, 5 नवंबर 202620नवंबरदेवउठनी एकादशीकार्तिक शुक्ल एकादशीशुक्रवार, 20 नवंबर 20264दिसंबरउत्पन्ना एकादशीअगहन कृष्ण एकादशीशुक्रवार, 4 दिसंबर 202620दिसंबरमोक्षदा एकादशीअगहन शुक्ल एकादशीरविवार, 20 दिसंबर 20263जनवरीसफला एकादशीपौष कृष्ण एकादशीरविवार, 3 जनवरी 202718जनवरीपौष पुत्रदा एकादशीपौष शुक्ल एकादशीसोमवार, 18 जनवरी 20272फ़रवरीषटतिला एकादशीमाघ कृष्ण एकादशीमंगलवार, 2 फ़रवरी 202717फ़रवरीजया एकादशीमाघ शुक्ल एकादशीबुधवार, 17 फ़रवरी 20274मार्चविजया एकादशीफाल्गुन कृष्ण एकादशीगुरुवार, 4 मार्च 202718मार्चआमलकी एकादशीफाल्गुन शुक्ल एकादशीगुरुवार, 18 मार्च 20272अप्रैलपापमोचनी एकादशीचैत्र कृष्ण एकादशीशुक्रवार, 2 अप्रैल 202717अप्रैलकामदा एकादशीचैत्र शुक्ल एकादशीशनिवार, 17 अप्रैल 20272मईवरूथिनी एकादशीवैशाख कृष्ण एकादशीरविवार, 2 मई 202716मईमोहिनी एकादशीवैशाख शुक्ल एकादशीरविवार, 16 मई 20271जूनअपरा एकादशीज्येष्ठ कृष्ण एकादशीमंगलवार, 1 जून 202714जूननिर्जला एकादशीज्येष्ठ शुक्ल एकादशीसोमवार, 14 जून 202730जूनयोगिनी एकादशीआषाढ़ कृष्ण एकादशीबुधवार, 30 जून 202714जुलाईदेवशयनी एकादशीआषाढ़ शुक्ल एकादशीबुधवार, 14 जुलाई 202729जुलाईकामिका एकादशीसावन कृष्ण एकादशीगुरुवार, 29 जुलाई 202712अगस्तश्रावण पुत्रदा एकादशीसावन शुक्ल एकादशीगुरुवार, 12 अगस्त 202728अगस्तअजा एकादशीभादों कृष्ण एकादशीशनिवार, 28 अगस्त 202711सितंबरपरिवर्तिनी एकादशीभादों शुक्ल एकादशीशनिवार, 11 सितंबर 202726सितंबरइंदिरा एकादशीआश्विन कृष्ण एकादशीरविवार, 26 सितंबर 202711अक्टूबरपापांकुशा एकादशीआश्विन शुक्ल एकादशीसोमवार, 11 अक्टूबर 202726मार्चपद्मिनी एकादशीअधिक चैत्र शुक्ल एकादशीसोमवार, 26 मार्च 20299अप्रैलपरमा एकादशीअधिक चैत्र कृष्ण एकादशीसोमवार, 9 अप्रैल 2029

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

8 सवाल
2027 में निर्जला एकादशी कब है?

2027 में निर्जला एकादशी सोमवार, 14 जून 2027 को है, नई दिल्ली में। एकादशी 13–14 जून की रात 2:12 से 14–15 जून की रात 2:08 तक रहेगी।

2027 में निर्जला एकादशी का पारण कब है?

मंगलवार, 15 जून को, दोपहर 1:46 से शाम 4:32 तक, नई दिल्ली में। सूर्योदय के बाद, हरि वासर ख़त्म होने पर और द्वादशी ख़त्म होने से पहले व्रत खोलें।

जून 2026 में निर्जला एकादशी की तारीख़?

नई दिल्ली में गुरुवार, 25 जून 2026; पारण 26 जून को, सुबह 5:25 से 8:12 तक।

जून 2028 में निर्जला एकादशी की तारीख़?

नई दिल्ली में शनिवार, 3 जून 2028; पारण 4 जून को, सुबह 5:23 से 8:09 तक।

निर्जला एकादशी किस महीने में आती है?

ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी, उत्तर भारत के पूर्णिमांत कैलेंडर में।

क्या एकादशी पर पानी पी सकते हैं?

हाँ, अगर आपने निर्जला का संकल्प नहीं लिया है। ज़्यादातर परिवार एकादशी जल और फलाहार के साथ रखते हैं; परंपरा में सिर्फ़ ज्येष्ठ की निर्जला एकादशी बिना पानी के रखी जाती है। कौन-सा व्रत रख रहे हैं, यह संकल्प के समय तय करें।

एकादशी पर चावल क्यों नहीं खाते?

परंपरा एकादशी के व्रत से हर अनाज को, और सबसे पहले चावल को, दूर रखती है; पुराण कहते हैं कि इस दिन पाप अन्न में आश्रय लेता है। जो व्रत नहीं रखते, वे भी आमतौर पर उस दिन चावल नहीं खाते।

पारण क्या है, और समय छूट जाए तो?

पारण का मतलब है द्वादशी को, हर तारीख़ के साथ दिए समय में, व्रत खोलना। समय निकल जाए तो द्वादशी रहते जितनी जल्दी हो सके, जल और थोड़े प्रसाद से व्रत खोलें। परंपरा में दोष द्वादशी ख़त्म होने के बाद व्रत खोलना माना जाता है।

व्रत का दिन सबके लिए एक होता है, पर हर किसी की कुंडली अलग होती है।

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आपकी कुंडली से रिपोर्ट

9 विस्तृत रिपोर्ट, जिनमें जन्म कुंडली, कुंडली मिलान और वार्षिक भविष्यवाणी हैं।हिंदी, अंग्रेज़ी और हिंग्लिशरिपोर्ट देखें
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