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नई दिल्ली · अगहन शुक्ल एकादशी

मोक्षदा एकादशी 2026
रविवार, 20 दिसंबर 2026

मार्गशीर्ष (अगहन) शुक्ल पक्ष की एकादशी।

पारण सोमवार, 21 दिसंबर, सुबह 7:10 से 9:13 तकविष्णु2026, 2027, 2028
मोक्षदा एकादशी 2026 · नई दिल्लीरविवार, 20 दिसंबरमोक्षदा एकादशी · अगहन शुक्ल एकादशी
एकादशी शुरू
19 दिसंबर, रात 10:09
एकादशी समाप्त
20 दिसंबर, रात 8:15
पारण (व्रत खोलने का समय)
21 दिसंबर, सुबह 7:10 से 9:13 तक
उसके बाद · नई दिल्लीगुरुवार, 9 दिसंबर 2027मोक्षदा एकादशी · अगहन शुक्ल एकादशी
एकादशी शुरू
8–9 दिसंबर की रात 2:59
एकादशी समाप्त
9–10 दिसंबर की रात 3:20
पारण (व्रत खोलने का समय)
10 दिसंबर, दोपहर 1:16 से 3:20 तक
हरि वासर (द्वादशी का पहला चौथाई भाग) समाप्त
10 दिसंबर, सुबह 9:14

नई दिल्ली के लिए, भारतीय समय में। तिथि हर जगह एक ही क्षण शुरू और ख़त्म होती है; व्रत का दिन और उसके समय नई दिल्ली के हैं, और विदेश में एक दिन आगे-पीछे हो सकते हैं।

2026, 2027, 2028 में मोक्षदा एकादशी

तिथि और पारण के साथ
202620 दिसंबररविवारएकादशी 19 दिसंबर, रात 10:09 से 20 दिसंबर, रात 8:15 तकपारण 21 दिसंबर, सुबह 7:10 से 9:13 तक
20279 दिसंबरगुरुवारएकादशी 8–9 दिसंबर की रात 2:59 से 9–10 दिसंबर की रात 3:20 तकपारण 10 दिसंबर, दोपहर 1:16 से 3:20 तक
202827 नवंबरसोमवारएकादशी 26 नवंबर, रात 11:59 से 27–28 नवंबर की रात 2:18 तकपारण 28 नवंबर, सुबह 8:48 से 9:00 तक
मोक्षदा एकादशी रख रहे हैं?हमारे मुहूर्त ज्योतिषी एस्ट्रो मुहूर्त से व्रत, उसकी पूजा और अपने शहर के समय के बारे में पूछें।

मोक्षदा एकादशी के बारे में

यही गीता जयंती है, वह दिन जब श्री कृष्ण ने कुरुक्षेत्र में अर्जुन को भगवद् गीता का उपदेश दिया, और घरों व मंदिरों में गीता का पाठ होता है।

यह किस लिए रखी जाती है

पितरों का मोक्ष, जैसे राजा ने अपने पिता के लिए पाया; गीता जयंती भी इसी दिन होती है।

मोक्षदा एकादशी व्रत कथा

चंपक नगर के राजा वैखानस ने सपने में अपने पिता को नरक में कष्ट भोगते देखा। चिंतित होकर उन्होंने दरबार के विद्वानों से पूछा, जिन्होंने उन्हें पर्वत मुनि के पास भेजा। ध्यान में मुनि ने पिता का जीवन में किया हुआ दोष देख लिया।

उन्होंने राजा से मार्गशीर्ष की मोक्षदा एकादशी रखकर उसका पुण्य पिता को देने को कहा। राजा ने ऐसा किया, और उनके पिता मुक्त होकर स्वर्ग गए।

पद्म पुराण के उत्तर खंड के एकादशी माहात्म्य से, जहाँ श्री कृष्ण युधिष्ठिर को हर एकादशी की कथा और उसका पुण्य सुनाते हैं।

व्रत विधि

बाक़ी यह हर एकादशी की तरह रखी जाती है: दशमी को बिना चावल का एक बार सात्विक भोजन, सुबह संकल्प, एक दिन पहले तोड़ी तुलसी से विष्णु पूजा, कथा, और पारण तक कोई अनाज नहीं, उसकी जगह फल, दूध, साबूदाना, कुट्टू और सिंघाड़ा। एकादशी पेज पर हर चरण और क्या खाएँ, किससे बचें, इसकी पूरी सूची है।

व्रत कब खोलें

हरि वासर, यानी द्वादशी का पहला चौथाई भाग, 20–21 दिसंबर की रात 1:36 तक, सूर्योदय से पहले ही, ख़त्म हो जाता है, इसलिए व्रत प्रातःकाल यानी दिन के पहले पाँचवें हिस्से में खोला जाता है: सोमवार, 21 दिसंबर को सुबह 7:10 से 9:13 तक, नई दिल्ली में।

2027 में: हरि वासर, यानी द्वादशी का पहला चौथाई भाग, 10 दिसंबर, सुबह 9:14 तक चलता है, सुबह के बाद तक, और दोपहर में व्रत नहीं खोला जाता, इसलिए पारण मध्याह्न के बाद होता है: शुक्रवार, 10 दिसंबर 2027 को दोपहर 1:16 से 3:20 तक, नई दिल्ली में।

सभी एकादशी

और हर एक कब है
5नवंबररमा एकादशीकार्तिक कृष्ण एकादशीगुरुवार, 5 नवंबर 202620नवंबरदेवउठनी एकादशीकार्तिक शुक्ल एकादशीशुक्रवार, 20 नवंबर 20264दिसंबरउत्पन्ना एकादशीअगहन कृष्ण एकादशीशुक्रवार, 4 दिसंबर 202620दिसंबरमोक्षदा एकादशीअगहन शुक्ल एकादशीरविवार, 20 दिसंबर 20263जनवरीसफला एकादशीपौष कृष्ण एकादशीरविवार, 3 जनवरी 202718जनवरीपौष पुत्रदा एकादशीपौष शुक्ल एकादशीसोमवार, 18 जनवरी 20272फ़रवरीषटतिला एकादशीमाघ कृष्ण एकादशीमंगलवार, 2 फ़रवरी 202717फ़रवरीजया एकादशीमाघ शुक्ल एकादशीबुधवार, 17 फ़रवरी 20274मार्चविजया एकादशीफाल्गुन कृष्ण एकादशीगुरुवार, 4 मार्च 202718मार्चआमलकी एकादशीफाल्गुन शुक्ल एकादशीगुरुवार, 18 मार्च 20272अप्रैलपापमोचनी एकादशीचैत्र कृष्ण एकादशीशुक्रवार, 2 अप्रैल 202717अप्रैलकामदा एकादशीचैत्र शुक्ल एकादशीशनिवार, 17 अप्रैल 20272मईवरूथिनी एकादशीवैशाख कृष्ण एकादशीरविवार, 2 मई 202716मईमोहिनी एकादशीवैशाख शुक्ल एकादशीरविवार, 16 मई 20271जूनअपरा एकादशीज्येष्ठ कृष्ण एकादशीमंगलवार, 1 जून 202714जूननिर्जला एकादशीज्येष्ठ शुक्ल एकादशीसोमवार, 14 जून 202730जूनयोगिनी एकादशीआषाढ़ कृष्ण एकादशीबुधवार, 30 जून 202714जुलाईदेवशयनी एकादशीआषाढ़ शुक्ल एकादशीबुधवार, 14 जुलाई 202729जुलाईकामिका एकादशीसावन कृष्ण एकादशीगुरुवार, 29 जुलाई 202712अगस्तश्रावण पुत्रदा एकादशीसावन शुक्ल एकादशीगुरुवार, 12 अगस्त 202728अगस्तअजा एकादशीभादों कृष्ण एकादशीशनिवार, 28 अगस्त 202711सितंबरपरिवर्तिनी एकादशीभादों शुक्ल एकादशीशनिवार, 11 सितंबर 202726सितंबरइंदिरा एकादशीआश्विन कृष्ण एकादशीरविवार, 26 सितंबर 202711अक्टूबरपापांकुशा एकादशीआश्विन शुक्ल एकादशीसोमवार, 11 अक्टूबर 202726मार्चपद्मिनी एकादशीअधिक चैत्र शुक्ल एकादशीसोमवार, 26 मार्च 20299अप्रैलपरमा एकादशीअधिक चैत्र कृष्ण एकादशीसोमवार, 9 अप्रैल 2029

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

8 सवाल
2026 में मोक्षदा एकादशी कब है?

2026 में मोक्षदा एकादशी रविवार, 20 दिसंबर 2026 को है, नई दिल्ली में। एकादशी 19 दिसंबर, रात 10:09 से 20 दिसंबर, रात 8:15 तक रहेगी।

2026 में मोक्षदा एकादशी का पारण कब है?

सोमवार, 21 दिसंबर को, सुबह 7:10 से 9:13 तक, नई दिल्ली में। सूर्योदय के बाद, हरि वासर ख़त्म होने पर और द्वादशी ख़त्म होने से पहले व्रत खोलें।

दिसंबर 2027 में मोक्षदा एकादशी की तारीख़?

नई दिल्ली में गुरुवार, 9 दिसंबर 2027; पारण 10 दिसंबर को, दोपहर 1:16 से 3:20 तक।

नवंबर 2028 में मोक्षदा एकादशी की तारीख़?

नई दिल्ली में सोमवार, 27 नवंबर 2028; पारण 28 नवंबर को, सुबह 8:48 से 9:00 तक।

मोक्षदा एकादशी किस महीने में आती है?

अगहन शुक्ल एकादशी, उत्तर भारत के पूर्णिमांत कैलेंडर में।

क्या एकादशी पर पानी पी सकते हैं?

हाँ, अगर आपने निर्जला का संकल्प नहीं लिया है। ज़्यादातर परिवार एकादशी जल और फलाहार के साथ रखते हैं; परंपरा में सिर्फ़ ज्येष्ठ की निर्जला एकादशी बिना पानी के रखी जाती है। कौन-सा व्रत रख रहे हैं, यह संकल्प के समय तय करें।

एकादशी पर चावल क्यों नहीं खाते?

परंपरा एकादशी के व्रत से हर अनाज को, और सबसे पहले चावल को, दूर रखती है; पुराण कहते हैं कि इस दिन पाप अन्न में आश्रय लेता है। जो व्रत नहीं रखते, वे भी आमतौर पर उस दिन चावल नहीं खाते।

पारण क्या है, और समय छूट जाए तो?

पारण का मतलब है द्वादशी को, हर तारीख़ के साथ दिए समय में, व्रत खोलना। समय निकल जाए तो द्वादशी रहते जितनी जल्दी हो सके, जल और थोड़े प्रसाद से व्रत खोलें। परंपरा में दोष द्वादशी ख़त्म होने के बाद व्रत खोलना माना जाता है।

व्रत का दिन सबके लिए एक होता है, पर हर किसी की कुंडली अलग होती है।

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आपकी कुंडली से रिपोर्ट

9 विस्तृत रिपोर्ट, जिनमें जन्म कुंडली, कुंडली मिलान और वार्षिक भविष्यवाणी हैं।हिंदी, अंग्रेज़ी और हिंग्लिशरिपोर्ट देखें
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