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नई दिल्ली · कार्तिक शुक्ल एकादशी

देवउठनी एकादशी 2026
शुक्रवार, 20 नवंबर 2026

कार्तिक शुक्ल पक्ष की एकादशी, जब विष्णु देवशयनी से शुरू हुई चार महीने की योगनिद्रा से जागते हैं।

पारण शनिवार, 21 नवंबर, दोपहर 1:11 से 3:18 तकविष्णु2026, 2027, 2028
देवउठनी एकादशी 2026 · नई दिल्लीशुक्रवार, 20 नवंबरदेवउठनी एकादशी · कार्तिक शुक्ल एकादशी
एकादशी शुरू
20 नवंबर, सुबह 7:16
एकादशी समाप्त
21 नवंबर, सुबह 6:31
पारण (व्रत खोलने का समय)
21 नवंबर, दोपहर 1:11 से 3:18 तक
हरि वासर (द्वादशी का पहला चौथाई भाग) समाप्त
21 नवंबर, दोपहर 12:09
उसके बाद · नई दिल्लीबुधवार, 10 नवंबर 2027देवउठनी एकादशी · कार्तिक शुक्ल एकादशी
एकादशी शुरू
9 नवंबर, सुबह 7:35
एकादशी समाप्त
10 नवंबर, सुबह 9:11
पारण (व्रत खोलने का समय)
11 नवंबर, सुबह 6:41 से 8:49 तक

नई दिल्ली के लिए, भारतीय समय में। तिथि हर जगह एक ही क्षण शुरू और ख़त्म होती है; व्रत का दिन और उसके समय नई दिल्ली के हैं, और विदेश में एक दिन आगे-पीछे हो सकते हैं।

2026, 2027, 2028 में देवउठनी एकादशी

तिथि और पारण के साथ
202620 नवंबरशुक्रवारएकादशी 20 नवंबर, सुबह 7:16 से 21 नवंबर, सुबह 6:31 तकपारण 21 नवंबर, दोपहर 1:11 से 3:18 तक
202710 नवंबरबुधवारएकादशी 9 नवंबर, सुबह 7:35 से 10 नवंबर, सुबह 9:11 तकपारण 11 नवंबर, सुबह 6:41 से 8:49 तक
202828 अक्टूबरशनिवारएकादशी 27–28 अक्टूबर की रात 3:47 से 29 अक्टूबर, सुबह 6:21 तकपारण 29 अक्टूबर, दोपहर 1:12 से 3:24 तक
देवउठनी एकादशी रख रहे हैं?हमारे मुहूर्त ज्योतिषी एस्ट्रो मुहूर्त से व्रत, उसकी पूजा और अपने शहर के समय के बारे में पूछें।

देवउठनी एकादशी के बारे में

चातुर्मास समाप्त होता है, तुलसी विवाह होता है, और शादियों का मौसम फिर शुरू होता है।

दूसरे नाम: प्रबोधिनी, देवोत्थान, देव प्रबोधिनी एकादशी।

यह किस लिए रखी जाती है

चातुर्मास के अंत में भगवान विष्णु का जागना; इसके बाद शादी और दूसरे संस्कार फिर शुरू होते हैं।

देवउठनी एकादशी व्रत कथा

पुराण में ब्रह्मा जी नारद को बताते हैं कि यह वह रात है जब हरि जागते हैं, और इस दिन व्रत रखकर रात भर उनकी पूजा में जागना, भजन, दीपक और उनके नामों के पाठ के साथ, हज़ार अश्वमेध यज्ञों से बढ़कर है।

उत्तर भारत के घरों में शाम को भगवान को जगाया जाता है: आँगन में गेरू और चावल के घोल से उनके पैर बनाए जाते हैं, गन्ना, सिंघाड़ा और मौसम की नई फ़सल टोकरी या छलनी के नीचे रखी जाती है, और टोकरी उठाते हुए परिवार गाता है “उठो देव, बैठो देव”।

पद्म पुराण के उत्तर खंड के एकादशी माहात्म्य से, जहाँ श्री कृष्ण युधिष्ठिर को हर एकादशी की कथा और उसका पुण्य सुनाते हैं।

व्रत विधि

तुलसी विवाह, यानी तुलसी का शालिग्राम से विवाह, इसी एकादशी को या अगली द्वादशी को होता है, जैसा परिवार का रिवाज हो।

बाक़ी यह हर एकादशी की तरह रखी जाती है: दशमी को बिना चावल का एक बार सात्विक भोजन, सुबह संकल्प, एक दिन पहले तोड़ी तुलसी से विष्णु पूजा, कथा, और पारण तक कोई अनाज नहीं, उसकी जगह फल, दूध, साबूदाना, कुट्टू और सिंघाड़ा। एकादशी पेज पर हर चरण और क्या खाएँ, किससे बचें, इसकी पूरी सूची है।

व्रत कब खोलें

हरि वासर, यानी द्वादशी का पहला चौथाई भाग, 21 नवंबर, दोपहर 12:09 तक चलता है, सुबह के बाद तक, और दोपहर में व्रत नहीं खोला जाता, इसलिए पारण मध्याह्न के बाद होता है: शनिवार, 21 नवंबर को दोपहर 1:11 से 3:18 तक, नई दिल्ली में।

2027 में: हरि वासर, यानी द्वादशी का पहला चौथाई भाग, 10 नवंबर, दोपहर 3:26 तक, सूर्योदय से पहले ही, ख़त्म हो जाता है, इसलिए व्रत प्रातःकाल यानी दिन के पहले पाँचवें हिस्से में खोला जाता है: गुरुवार, 11 नवंबर 2027 को सुबह 6:41 से 8:49 तक, नई दिल्ली में।

सभी एकादशी

और हर एक कब है
5नवंबररमा एकादशीकार्तिक कृष्ण एकादशीगुरुवार, 5 नवंबर 202620नवंबरदेवउठनी एकादशीकार्तिक शुक्ल एकादशीशुक्रवार, 20 नवंबर 20264दिसंबरउत्पन्ना एकादशीअगहन कृष्ण एकादशीशुक्रवार, 4 दिसंबर 202620दिसंबरमोक्षदा एकादशीअगहन शुक्ल एकादशीरविवार, 20 दिसंबर 20263जनवरीसफला एकादशीपौष कृष्ण एकादशीरविवार, 3 जनवरी 202718जनवरीपौष पुत्रदा एकादशीपौष शुक्ल एकादशीसोमवार, 18 जनवरी 20272फ़रवरीषटतिला एकादशीमाघ कृष्ण एकादशीमंगलवार, 2 फ़रवरी 202717फ़रवरीजया एकादशीमाघ शुक्ल एकादशीबुधवार, 17 फ़रवरी 20274मार्चविजया एकादशीफाल्गुन कृष्ण एकादशीगुरुवार, 4 मार्च 202718मार्चआमलकी एकादशीफाल्गुन शुक्ल एकादशीगुरुवार, 18 मार्च 20272अप्रैलपापमोचनी एकादशीचैत्र कृष्ण एकादशीशुक्रवार, 2 अप्रैल 202717अप्रैलकामदा एकादशीचैत्र शुक्ल एकादशीशनिवार, 17 अप्रैल 20272मईवरूथिनी एकादशीवैशाख कृष्ण एकादशीरविवार, 2 मई 202716मईमोहिनी एकादशीवैशाख शुक्ल एकादशीरविवार, 16 मई 20271जूनअपरा एकादशीज्येष्ठ कृष्ण एकादशीमंगलवार, 1 जून 202714जूननिर्जला एकादशीज्येष्ठ शुक्ल एकादशीसोमवार, 14 जून 202730जूनयोगिनी एकादशीआषाढ़ कृष्ण एकादशीबुधवार, 30 जून 202714जुलाईदेवशयनी एकादशीआषाढ़ शुक्ल एकादशीबुधवार, 14 जुलाई 202729जुलाईकामिका एकादशीसावन कृष्ण एकादशीगुरुवार, 29 जुलाई 202712अगस्तश्रावण पुत्रदा एकादशीसावन शुक्ल एकादशीगुरुवार, 12 अगस्त 202728अगस्तअजा एकादशीभादों कृष्ण एकादशीशनिवार, 28 अगस्त 202711सितंबरपरिवर्तिनी एकादशीभादों शुक्ल एकादशीशनिवार, 11 सितंबर 202726सितंबरइंदिरा एकादशीआश्विन कृष्ण एकादशीरविवार, 26 सितंबर 202711अक्टूबरपापांकुशा एकादशीआश्विन शुक्ल एकादशीसोमवार, 11 अक्टूबर 202726मार्चपद्मिनी एकादशीअधिक चैत्र शुक्ल एकादशीसोमवार, 26 मार्च 20299अप्रैलपरमा एकादशीअधिक चैत्र कृष्ण एकादशीसोमवार, 9 अप्रैल 2029

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

8 सवाल
2026 में देवउठनी एकादशी कब है?

2026 में देवउठनी एकादशी शुक्रवार, 20 नवंबर 2026 को है, नई दिल्ली में। एकादशी 20 नवंबर, सुबह 7:16 से 21 नवंबर, सुबह 6:31 तक रहेगी।

2026 में देवउठनी एकादशी का पारण कब है?

शनिवार, 21 नवंबर को, दोपहर 1:11 से 3:18 तक, नई दिल्ली में। सूर्योदय के बाद, हरि वासर ख़त्म होने पर और द्वादशी ख़त्म होने से पहले व्रत खोलें।

नवंबर 2027 में देवउठनी एकादशी की तारीख़?

नई दिल्ली में बुधवार, 10 नवंबर 2027; पारण 11 नवंबर को, सुबह 6:41 से 8:49 तक।

अक्टूबर 2028 में देवउठनी एकादशी की तारीख़?

नई दिल्ली में शनिवार, 28 अक्टूबर 2028; पारण 29 अक्टूबर को, दोपहर 1:12 से 3:24 तक।

देवउठनी एकादशी किस महीने में आती है?

कार्तिक शुक्ल एकादशी, उत्तर भारत के पूर्णिमांत कैलेंडर में।

क्या एकादशी पर पानी पी सकते हैं?

हाँ, अगर आपने निर्जला का संकल्प नहीं लिया है। ज़्यादातर परिवार एकादशी जल और फलाहार के साथ रखते हैं; परंपरा में सिर्फ़ ज्येष्ठ की निर्जला एकादशी बिना पानी के रखी जाती है। कौन-सा व्रत रख रहे हैं, यह संकल्प के समय तय करें।

एकादशी पर चावल क्यों नहीं खाते?

परंपरा एकादशी के व्रत से हर अनाज को, और सबसे पहले चावल को, दूर रखती है; पुराण कहते हैं कि इस दिन पाप अन्न में आश्रय लेता है। जो व्रत नहीं रखते, वे भी आमतौर पर उस दिन चावल नहीं खाते।

पारण क्या है, और समय छूट जाए तो?

पारण का मतलब है द्वादशी को, हर तारीख़ के साथ दिए समय में, व्रत खोलना। समय निकल जाए तो द्वादशी रहते जितनी जल्दी हो सके, जल और थोड़े प्रसाद से व्रत खोलें। परंपरा में दोष द्वादशी ख़त्म होने के बाद व्रत खोलना माना जाता है।

व्रत का दिन सबके लिए एक होता है, पर हर किसी की कुंडली अलग होती है।

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9 विस्तृत रिपोर्ट, जिनमें जन्म कुंडली, कुंडली मिलान और वार्षिक भविष्यवाणी हैं।हिंदी, अंग्रेज़ी और हिंग्लिशरिपोर्ट देखें
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