आषाढ़ कृष्ण पक्ष की एकादशी, देवशयनी और चातुर्मास से पहले की आख़िरी एकादशी।
नई दिल्ली के लिए, भारतीय समय में। तिथि हर जगह एक ही क्षण शुरू और ख़त्म होती है; व्रत का दिन और उसके समय नई दिल्ली के हैं, और विदेश में एक दिन आगे-पीछे हो सकते हैं।
आरोग्य: इसी से माली हेममाली का रोग दूर हुआ।
हेममाली नाम का यक्ष अलकापुरी में कुबेर का माली था और रोज़ राजा की शिव पूजा के लिए फूल लाता था। एक सुबह वह अपनी पत्नी विशालाक्षी के पास रुक गया और फूल नहीं पहुँचे। कुबेर ने उसे कोढ़ का श्राप देकर नगर से निकाल दिया।
बहुत भटकने के बाद वह मार्कंडेय ऋषि के आश्रम पहुँचा, जिन्होंने उसे आषाढ़ की योगिनी एकादशी रखने को कहा। उसने व्रत रखा, और वह स्वस्थ हो गया।
पद्म पुराण के उत्तर खंड के एकादशी माहात्म्य से, जहाँ श्री कृष्ण युधिष्ठिर को हर एकादशी की कथा और उसका पुण्य सुनाते हैं।
बाक़ी यह हर एकादशी की तरह रखी जाती है: दशमी को बिना चावल का एक बार सात्विक भोजन, सुबह संकल्प, एक दिन पहले तोड़ी तुलसी से विष्णु पूजा, कथा, और पारण तक कोई अनाज नहीं, उसकी जगह फल, दूध, साबूदाना, कुट्टू और सिंघाड़ा। एकादशी पेज पर हर चरण और क्या खाएँ, किससे बचें, इसकी पूरी सूची है।
हरि वासर, यानी द्वादशी का पहला चौथाई भाग, 30 जून–1 जुलाई की रात 1:58 तक, सूर्योदय से पहले ही, ख़त्म हो जाता है, इसलिए व्रत प्रातःकाल यानी दिन के पहले पाँचवें हिस्से में खोला जाता है: गुरुवार, 1 जुलाई को सुबह 5:27 से 8:13 तक, नई दिल्ली में।
2026 में: हरि वासर, यानी द्वादशी का पहला चौथाई भाग, 11 जुलाई, सुबह 10:34 तक चलता है, सुबह के बाद तक, और दोपहर में व्रत नहीं खोला जाता, इसलिए पारण मध्याह्न के बाद होता है: शनिवार, 11 जुलाई 2026 को दोपहर 1:50 से शाम 4:35 तक, नई दिल्ली में।
2028 में: हरि वासर, यानी द्वादशी का पहला चौथाई भाग, 19 जून, सुबह 9:18 तक चलता है, सुबह के बाद तक, और दोपहर में व्रत नहीं खोला जाता, इसलिए पारण मध्याह्न के बाद होता है: सोमवार, 19 जून 2028 को दोपहर 1:47 से शाम 4:34 तक, नई दिल्ली में।
2027 में योगिनी एकादशी बुधवार, 30 जून 2027 को है, नई दिल्ली में। एकादशी 29 जून, रात 10:04 से 30 जून, रात 8:31 तक रहेगी।
गुरुवार, 1 जुलाई को, सुबह 5:27 से 8:13 तक, नई दिल्ली में। सूर्योदय के बाद, हरि वासर ख़त्म होने पर और द्वादशी ख़त्म होने से पहले व्रत खोलें।
नई दिल्ली में शुक्रवार, 10 जुलाई 2026; पारण 11 जुलाई को, दोपहर 1:50 से शाम 4:35 तक।
नई दिल्ली में रविवार, 18 जून 2028; पारण 19 जून को, दोपहर 1:47 से शाम 4:34 तक।
आषाढ़ कृष्ण एकादशी, उत्तर भारत के पूर्णिमांत कैलेंडर में। दक्षिण और पश्चिम के अमांत कैलेंडर में यह पिछले महीने में गिनी जाती है, क्योंकि वहाँ कृष्ण पक्ष पिछले महीने के नाम से चलता है; तारीख़ वही रहती है।
हाँ, अगर आपने निर्जला का संकल्प नहीं लिया है। ज़्यादातर परिवार एकादशी जल और फलाहार के साथ रखते हैं; परंपरा में सिर्फ़ ज्येष्ठ की निर्जला एकादशी बिना पानी के रखी जाती है। कौन-सा व्रत रख रहे हैं, यह संकल्प के समय तय करें।
परंपरा एकादशी के व्रत से हर अनाज को, और सबसे पहले चावल को, दूर रखती है; पुराण कहते हैं कि इस दिन पाप अन्न में आश्रय लेता है। जो व्रत नहीं रखते, वे भी आमतौर पर उस दिन चावल नहीं खाते।
पारण का मतलब है द्वादशी को, हर तारीख़ के साथ दिए समय में, व्रत खोलना। समय निकल जाए तो द्वादशी रहते जितनी जल्दी हो सके, जल और थोड़े प्रसाद से व्रत खोलें। परंपरा में दोष द्वादशी ख़त्म होने के बाद व्रत खोलना माना जाता है।
अपनी मुफ़्त कुंडली बनाएँ, या 24 ज्योतिषियों में से किसी से पूछें कि कौन-सा व्रत आपके किस ग्रह को बल देगा। पैसे मिनट के हिसाब से।


