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लग्न · तुला

तुला लग्न
लग्नेश शुक्र

तुला लग्न हो तो स्वभाव आकर्षक, मेल-मिलाप वाला और सामंजस्य पसंद होता है। शुक्र लग्नेश हैं, इसलिए रुचि परिष्कृत और सुंदरता की समझ गहरी होती है। आप स्वाभाविक रूप से सुलह कराने वाले हैं, जो न्याय और संतुलन को महत्व देते हैं। इसके स्वामी शुक्र हैं, योगकारक शनि।

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तुला लग्न: पहले भाव में तुला

तुला लग्न का स्वभाव

लग्नेश शुक्र

आप शालीन, मिलनसार और न्याय की बहुत परवाह करने वाले हैं, बीच का रास्ता निकालना आपको सहज आता है। शुक्र सुंदरता और सामंजस्य का प्रेम देते हैं, हालाँकि हर विकल्प तौलते-तौलते फ़ैसले में देर हो जाती है। साझेदारी में आप खिलते हैं और हर चीज़ में संतुलन चाहते हैं।

दिल्ली में तुला लग्न रोज़ लगभग 2 घंटे 20 मिनट उदित रहता है, सबसे लंबे समय वाले लग्नों में से। चार उत्तर भारतीय शहरों की 1960 से 1999 की 8,349 असली जन्म कुंडलियों में से 9.5% का यह लग्न था; बारह में एक से ज़्यादा: धीरे उगने वाली राशि को ज़्यादा जन्म मिलते हैं।

लग्न वह राशि है जो जन्म के समय पूर्व में उदित हो रही थी; यह लगभग हर दो घंटे में बदलता है, इसीलिए जन्म समय ज़रूरी है। राशि चंद्रमा की राशि है, जो अलग बात है: तुला राशि मन के लिए पढ़ी जाती है, तुला लग्न शरीर और जीवन की दिशा के लिए।

तुला लग्न के लिए हर ग्रह

वह किन भावों का स्वामी है, और बृहत् पाराशर होरा शास्त्र अध्याय 34 इस लग्न के लिए उसे क्या कहता है

तुला लग्न के लिए BPHS 34 शनि और बुध को शुभ मानता है, और शनि योगकारक हैं (लग्न का सबसे बड़ा सहायक ग्रह), जो एक साथ केंद्र और त्रिकोण के स्वामी हैं, और सूर्य, मंगल और गुरु को अशुभ।

ग्रहकिन भावों का स्वामीइस लग्न के लिए (BPHS 34)
सूर्यग्यारहवेंअशुभ
चंद्रदसवेंतटस्थ · योग— बुध के साथ योग देते हैं (34.34)
मंगलदूसरे, सातवेंअशुभ · मारक
बुधनौवें, बारहवेंशुभ · योग— चंद्र के साथ योग देते हैं (34.34)
गुरुतीसरे, छठेअशुभ · मारक— तीसरे और छठे भाव के स्वामी, दूसरे या सातवें के नहीं; फिर भी श्लोक 34.33–34 इन्हें मारक कहता है
शुक्रपहले, आठवेंतटस्थ— लग्नेश, जिन्हें श्लोक 34.34 तटस्थ कहता है
शनिचौथे, पाँचवेंयोगकारक
राहुकोई नहीं (छाया ग्रह)जिस भाव में बैठें, वैसा फल
केतुकोई नहीं (छाया ग्रह)जिस भाव में बैठें, वैसा फल

तालिका के नाम, बृहत् पाराशर होरा शास्त्र, अध्याय 34 से:

  • योगकारक: लग्न के सबसे शुभ ग्रह: जिन्हें पराशर योग देने वाले बताते हैं, या जो एक साथ केंद्र (पहले, चौथे, सातवें, दसवें) और त्रिकोण (पहले, पाँचवें, नौवें) भाव के स्वामी हों (34.13)
  • शुभ, अशुभ, तटस्थ: लग्न के पक्ष में; कठिन बातें लाने वाले; दोनों में से कोई नहीं
  • लग्नेश: लग्न के अपने स्वामी, जहाँ श्लोक इन्हें शुभ या अशुभ नहीं कहता
  • मारक: जिन्हें पराशर उस लग्न के लिए आयु और सेहत पर भारी बताते हैं; अकेले, या किसी और नाम के बाद लिखे जाते हैं। ये हमेशा दूसरे या सातवें भाव के स्वामी नहीं होते: जहाँ अलग हों, नीचे की पंक्ति श्लोक बताती है
  • · योग: उन दो ग्रहों में से एक जो इस लग्न के लिए साथ मिलकर योग देते हैं

तुला लग्न के बारह भाव

हर भाव में राशि और उसका स्वामी: इस कुंडली की हर पढ़ाई यहीं से शुरू होती है

भावराशिस्वामीकिसका भाव
पहलेतुलाशुक्रशरीर, स्वभाव और सेहत
दूसरेवृश्चिकमंगलपरिवार, बचत और वाणी
तीसरेधनुगुरुहिम्मत, भाई-बहन और मेहनत
चौथेमकरशनिमाँ, घर और ज़मीन
पाँचवेंकुंभशनिसंतान, पढ़ाई और बुद्धि
छठेमीनगुरुरोग, कर्ज़ और शत्रु
सातवेंमेषमंगलशादी और साझेदारी
आठवेंवृषभशुक्रआयु, अचानक घटनाएँ और विरासत
नौवेंमिथुनबुधपिता, भाग्य और धर्म
दसवेंकर्कचंद्रकार्य और प्रतिष्ठा
ग्यारहवेंसिंहसूर्यलाभ, आमदनी और बड़े भाई-बहन
बारहवेंकन्याबुधखर्च, विदेश और मोक्ष

लग्नेश शुक्र कहाँ बलवान हैं

इस कुंडली के हर भाव में लग्नेश, और वहाँ की राशि में उनकी स्थिति

इस लग्न के लिए शुक्र सबसे बलवान छठे भाव में हैं (उच्च) और पहले और आठवें भाव में अपनी राशि में; सबसे कमज़ोर बारहवें भाव में (नीच)।

शुक्र किस भाव मेंवहाँ राशिस्थिति
पहलेतुलास्वराशि
दूसरेवृश्चिक—
तीसरेधनु—
चौथेमकर—
पाँचवेंकुंभ—
छठेमीनउच्च
सातवेंमेष—
आठवेंवृषभस्वराशि
नौवेंमिथुन—
दसवेंकर्क—
ग्यारहवेंसिंह—
बारहवेंकन्यानीच

BPHS अध्याय 24 बारहों भावों में लग्नेश का फल पढ़ता है; वे पहले भाव के पेज पर हैं।

एक असली कुंडली में तुला लग्न

11 फ़रवरी 1985, 23:00, लखनऊ

710148911122356सूबुगुचंकेमंशुशरा

लग्नेश शुक्र मीन में, छठे भाव में हैं, उच्च। वह भाव रोग, कर्ज़ और शत्रु का है, इसलिए इस कुंडली का जीवन उसी ओर झुकता है।

तुला लग्न के लिए रत्न

साइट के रत्न इंजन ने तुला लग्न की 793 असली कुंडलियों में क्या चुना

नीलमशनि · 80% कुंडलियों में
पन्नाबुध · 13% कुंडलियों में
गोमेदराहु · 5% कुंडलियों में

इस लग्न के लिए जिन रत्नों से बचने को कहा गया

  • मूंगा: इस लग्न के लिए मंगल अशुभ और मारक हैं (BPHS 34), इसलिए उनका रत्न उन्हीं बातों को बल देगा।
  • माणिक्य: इस लग्न के लिए सूर्य अशुभ हैं (BPHS 34), इसलिए उनका रत्न उन्हीं बातों को बल देगा।
  • पुखराज: इस लग्न के लिए गुरु अशुभ और मारक हैं (BPHS 34), इसलिए उनका रत्न उन्हीं बातों को बल देगा।

रत्न इस पर निर्भर है कि आपकी अपनी कुंडली में हर ग्रह कितना बलवान है, इसीलिए एक ही लग्न को अलग-अलग रत्न मिलते हैं। अपनी कुंडली से अपना रत्न देखें।

तुला लग्न के उपाय

शुक्र मंत्र · शुक्रवार को 108 बार

ॐ शुक्राय नमः

लग्नेश पूरी कुंडली का भार उठाते हैं: बलवान रहें तो शरीर और मन स्थिर रहते हैं। उनका दान, शुक्रवार को: सफ़ेद वस्त्र और चावल। यह एक सुझाव है: अपनी श्रद्धा के अनुसार करें।

शुक्र के और उपाय

मेरा लग्न मेरे बारे में क्या कहता है?आचार्य पराशर आपका लग्न पूरी कुंडली और चल रही दशा के साथ पढ़ते हैं।

आम सवाल

तुला लग्न क्या है?

जन्म के समय पूर्व में तुला का उदित होना। इसके स्वामी शुक्र हैं।

तुला लग्न के लिए कौन-से ग्रह शुभ हैं?

शुभ: शनि और बुध; योगकारक: शनि; अशुभ: सूर्य, मंगल और गुरु (बृहत् पाराशर होरा शास्त्र, अध्याय 34)।

तुला लग्न के लिए कौन-सा रत्न ठीक है?

रत्न इंजन ने सबसे ज़्यादा नीलम चुना (तुला लग्न की 80% कुंडलियों में), पर यह आपकी अपनी कुंडली के बल पर निर्भर है। अशुभ ग्रहों के रत्नों से बचें।

कैसे जानें कि मेरा लग्न तुला है?

जन्म तिथि, सही समय और जगह चाहिए: लग्न लगभग हर दो घंटे में बदलता है (दिल्ली में तुला लगभग 2 घंटे 20 मिनट रहता है)। लग्न कैलकुलेटर इसे निकाल देता है।

क्या आपका लग्न तुला है?

आपका जन्म समय इसे तय करता है। लग्न कैलकुलेटर आपका लग्न, उसका अंश और नक्षत्र बताता है।

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