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लग्न · धनु

धनु लग्न
लग्नेश गुरु

धनु लग्न हो तो स्वभाव आशावादी, घूमने-फिरने का शौक़ीन और दार्शनिक होता है। गुरु लग्नेश हैं, इसलिए सोच का दायरा बड़ा और आज़ादी से प्रेम होता है। आप सच, ज्ञान और नए अनुभवों की खोज में रहते हैं। इसके स्वामी गुरु हैं।

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धनु लग्न: पहले भाव में धनु

धनु लग्न का स्वभाव

लग्नेश गुरु

आप उत्साही, ईमानदार और आज़ादी पसंद हैं, ज़िंदगी को लेकर स्वाभाविक रूप से आशावादी। दार्शनिक स्वभाव आपको हर जगह अर्थ और ज्ञान खोजने को प्रेरित करता है। मुँहफट हैं पर दिल में कोई मैल नहीं, और नए रास्ते तलाशने का शौक़ हमेशा बना रहता है।

दिल्ली में धनु लग्न रोज़ लगभग 2 घंटे 4 मिनट उदित रहता है। चार उत्तर भारतीय शहरों की 1960 से 1999 की 8,349 असली जन्म कुंडलियों में से 8.7% का यह लग्न था।

लग्न वह राशि है जो जन्म के समय पूर्व में उदित हो रही थी; यह लगभग हर दो घंटे में बदलता है, इसीलिए जन्म समय ज़रूरी है। राशि चंद्रमा की राशि है, जो अलग बात है: धनु राशि मन के लिए पढ़ी जाती है, धनु लग्न शरीर और जीवन की दिशा के लिए।

धनु लग्न के लिए हर ग्रह

वह किन भावों का स्वामी है, और बृहत् पाराशर होरा शास्त्र अध्याय 34 इस लग्न के लिए उसे क्या कहता है

धनु लग्न के लिए BPHS 34 सूर्य, मंगल और बुध को शुभ मानता है, और शुक्र को अशुभ।

ग्रहकिन भावों का स्वामीइस लग्न के लिए (BPHS 34)
सूर्यनौवेंशुभ · योग— बुध के साथ योग देते हैं (34.38)
चंद्रआठवेंतटस्थ
मंगलपाँचवें, बारहवेंशुभ
बुधसातवें, दसवेंशुभ · योग— सूर्य के साथ योग देते हैं (34.38)— सातवें भाव के स्वामी, पर श्लोक 34.37–38 इस लग्न के लिए शनि और शुक्र को मारक कहता है
गुरुपहले, चौथेतटस्थ— लग्नेश, जिन्हें श्लोक 34.38 तटस्थ कहता है
शुक्रछठे, ग्यारहवेंअशुभ · मारक— छठे और ग्यारहवें भाव के स्वामी, दूसरे या सातवें के नहीं; फिर भी श्लोक 34.37–38 इन्हें मारक कहता है
शनिदूसरे, तीसरेमारक
राहुकोई नहीं (छाया ग्रह)जिस भाव में बैठें, वैसा फल
केतुकोई नहीं (छाया ग्रह)जिस भाव में बैठें, वैसा फल

तालिका के नाम, बृहत् पाराशर होरा शास्त्र, अध्याय 34 से:

  • योगकारक: लग्न के सबसे शुभ ग्रह: जिन्हें पराशर योग देने वाले बताते हैं, या जो एक साथ केंद्र (पहले, चौथे, सातवें, दसवें) और त्रिकोण (पहले, पाँचवें, नौवें) भाव के स्वामी हों (34.13)
  • शुभ, अशुभ, तटस्थ: लग्न के पक्ष में; कठिन बातें लाने वाले; दोनों में से कोई नहीं
  • लग्नेश: लग्न के अपने स्वामी, जहाँ श्लोक इन्हें शुभ या अशुभ नहीं कहता
  • मारक: जिन्हें पराशर उस लग्न के लिए आयु और सेहत पर भारी बताते हैं; अकेले, या किसी और नाम के बाद लिखे जाते हैं। ये हमेशा दूसरे या सातवें भाव के स्वामी नहीं होते: जहाँ अलग हों, नीचे की पंक्ति श्लोक बताती है
  • · योग: उन दो ग्रहों में से एक जो इस लग्न के लिए साथ मिलकर योग देते हैं

धनु लग्न के बारह भाव

हर भाव में राशि और उसका स्वामी: इस कुंडली की हर पढ़ाई यहीं से शुरू होती है

भावराशिस्वामीकिसका भाव
पहलेधनुगुरुशरीर, स्वभाव और सेहत
दूसरेमकरशनिपरिवार, बचत और वाणी
तीसरेकुंभशनिहिम्मत, भाई-बहन और मेहनत
चौथेमीनगुरुमाँ, घर और ज़मीन
पाँचवेंमेषमंगलसंतान, पढ़ाई और बुद्धि
छठेवृषभशुक्ररोग, कर्ज़ और शत्रु
सातवेंमिथुनबुधशादी और साझेदारी
आठवेंकर्कचंद्रआयु, अचानक घटनाएँ और विरासत
नौवेंसिंहसूर्यपिता, भाग्य और धर्म
दसवेंकन्याबुधकार्य और प्रतिष्ठा
ग्यारहवेंतुलाशुक्रलाभ, आमदनी और बड़े भाई-बहन
बारहवेंवृश्चिकमंगलखर्च, विदेश और मोक्ष

लग्नेश गुरु कहाँ बलवान हैं

इस कुंडली के हर भाव में लग्नेश, और वहाँ की राशि में उनकी स्थिति

इस लग्न के लिए गुरु सबसे बलवान आठवें भाव में हैं (उच्च) और पहले और चौथे भाव में अपनी राशि में; सबसे कमज़ोर दूसरे भाव में (नीच)।

गुरु किस भाव मेंवहाँ राशिस्थिति
पहलेधनुस्वराशि
दूसरेमकरनीच
तीसरेकुंभ—
चौथेमीनस्वराशि
पाँचवेंमेष—
छठेवृषभ—
सातवेंमिथुन—
आठवेंकर्कउच्च
नौवेंसिंह—
दसवेंकन्या—
ग्यारहवेंतुला—
बारहवेंवृश्चिक—

BPHS अध्याय 24 बारहों भावों में लग्नेश का फल पढ़ता है; वे पहले भाव के पेज पर हैं।

एक असली कुंडली में धनु लग्न

25 जनवरी 1985, 05:00, नई दिल्ली

912361011124578सूगुचंमंशुबुशकेरा

लग्नेश गुरु मकर में, दूसरे भाव में हैं, नीच। वह भाव परिवार, बचत और वाणी का है, इसलिए इस कुंडली का जीवन उसी ओर झुकता है।

धनु लग्न के लिए रत्न

साइट के रत्न इंजन ने धनु लग्न की 725 असली कुंडलियों में क्या चुना

पन्नाबुध · 52% कुंडलियों में
मूंगामंगल · 28% कुंडलियों में
माणिक्यसूर्य · 11% कुंडलियों में

इस लग्न के लिए जिन रत्नों से बचने को कहा गया

  • नीलम: इस लग्न के लिए शनि मारक हैं (BPHS 34), इसलिए उनका रत्न उन्हीं बातों को बल देगा।
  • हीरा: इस लग्न के लिए शुक्र अशुभ और मारक हैं (BPHS 34), इसलिए उनका रत्न उन्हीं बातों को बल देगा।

रत्न इस पर निर्भर है कि आपकी अपनी कुंडली में हर ग्रह कितना बलवान है, इसीलिए एक ही लग्न को अलग-अलग रत्न मिलते हैं। अपनी कुंडली से अपना रत्न देखें।

धनु लग्न के उपाय

गुरु मंत्र · गुरुवार को 108 बार

ॐ गुरवे नमः

लग्नेश पूरी कुंडली का भार उठाते हैं: बलवान रहें तो शरीर और मन स्थिर रहते हैं। उनका दान, गुरुवार को: चने की दाल और हल्दी। यह एक सुझाव है: अपनी श्रद्धा के अनुसार करें।

गुरु के और उपाय

मेरा लग्न मेरे बारे में क्या कहता है?आचार्य पराशर आपका लग्न पूरी कुंडली और चल रही दशा के साथ पढ़ते हैं।

आम सवाल

धनु लग्न क्या है?

जन्म के समय पूर्व में धनु का उदित होना। इसके स्वामी गुरु हैं।

धनु लग्न के लिए कौन-से ग्रह शुभ हैं?

शुभ: सूर्य, मंगल और बुध; अशुभ: शुक्र (बृहत् पाराशर होरा शास्त्र, अध्याय 34)।

धनु लग्न के लिए कौन-सा रत्न ठीक है?

रत्न इंजन ने सबसे ज़्यादा पन्ना चुना (धनु लग्न की 52% कुंडलियों में), पर यह आपकी अपनी कुंडली के बल पर निर्भर है। अशुभ ग्रहों के रत्नों से बचें।

कैसे जानें कि मेरा लग्न धनु है?

जन्म तिथि, सही समय और जगह चाहिए: लग्न लगभग हर दो घंटे में बदलता है (दिल्ली में धनु लगभग 2 घंटे 4 मिनट रहता है)। लग्न कैलकुलेटर इसे निकाल देता है।

क्या आपका लग्न धनु है?

आपका जन्म समय इसे तय करता है। लग्न कैलकुलेटर आपका लग्न, उसका अंश और नक्षत्र बताता है।

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