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बारह राशियों में सातवीं · निरयन (स्थिर तारों वाले) राशिचक्र के 180°–210°

तुला राशि
चंद्र राशि · स्वामी शुक्र

जन्म के समय चंद्रमा तुला में हों तो आपकी राशि तुला है: इसी से आपका राशिफल, साढ़े साती और नाम अक्षर देखे जाते हैं। जिनके चंद्रमा तुला में हों, वे मिलनसार, न्यायप्रिय और व्यवहार-कुशल होते हैं। इसके स्वामी शुक्र हैं, नक्षत्र चित्रा (चरण 3–4), स्वाति और विशाखा (चरण 1–3) हैं, और परंपरा में तुला राशि के बच्चे का नाम रा, री, रू, रे, रो, ता, ती, तू या ते अक्षर से रखा जाता है।

राशि चक्र में तुला राशि, बारह में सातवीं, शनि मीन में चिह्नितराशि चक्र में तुला राशि, बारह में सातवीं, शनि मीन में चिह्नित

तुला राशि एक नज़र में

राशि की अपनी बातें, जो हर तुला राशि वाले के लिए एक-सी हैं।

स्वामीशुक्र
आकृतितराज़ू लिए पुरुष
तत्त्ववायु
स्वभावचर (गतिशील)
विषम या समविषम (मेष से पहली, तीसरी, पाँचवीं… राशि): शास्त्र विषम राशियों को पुरुष और क्रूर कहते हैं; यह नाम भर है, स्वभाव पर फ़ैसला नहीं
कालपुरुष में (पूरा राशिचक्र एक शरीर के रूप में)पेड़ू (पेट का निचला भाग) (बृहत् जातक 1.4)
वश्य (मिलान में आपसी आकर्षण का वर्ग)मानव (मनुष्य)
शुभ अंक, रंग, दिन6, सफ़ेद, शुक्रवार
देवीलक्ष्मी जी
यहाँ बली या निर्बल ग्रहशनि: उच्च (सबसे बली)
सूर्य: नीच (सबसे निर्बल)
शुक्र: मूलत्रिकोण में (राशि का वह हिस्सा जहाँ ग्रह बहुत सहज रहते हैं; बल में इसका दर्जा उच्च के ठीक बाद आता है)

तुला राशि वालों का स्वभाव

चंद्रमा मन के कारक हैं, इसलिए उनकी राशि बताती है कि व्यक्ति कैसा महसूस करता है और किसी बात पर कैसे पेश आता है। लग्न और बाक़ी कुंडली इसे आगे गढ़ते हैं।

ऐसे लोग संतुलन और मेल-जोल चाहते हैं, झगड़े से बचते हैं और सुंदरता की समझ रखते हैं; साझेदारी इनके लिए बहुत मायने रखती है। ये फ़ैसला लेने में देर लगाते हैं और कभी सिर्फ़ शांति बनाए रखने के लिए हाँ कह देते हैं। तुला शुक्र की राशि है, इसलिए ये व्यापार, क़ानून, डिज़ाइन और लोगों को जोड़ने वाले कामों में अच्छा करते हैं।

वराहमिहिर क्या कहते हैं

बृहत् जातक के अनुसार चंद्र तुला राशि में हों तो जातक देवताओं, ब्राह्मणों और संतों का आदर करने वाला, धार्मिक जीवन जीने वाला और बुद्धिमान होता है। वह व्यापार और यात्रा की ओर झुका रहता है, धनवान होता है, परिवार की सहायता करता है और किसी देवता के नाम पर उसका दूसरा नाम हो सकता है। श्लोक उसका शरीर लंबा और अंग पतले बताता है, बार-बार अस्वस्थ रहने की बात कहता है और अपने ही बंधुओं से अपमान की चेतावनी देता है। वराहमिहिर स्वयं कहते हैं (17.13) कि यह फल पूरा तभी मिलता है जब जन्म के समय चंद्रमा, तुला राशि और उसके स्वामी शुक्र तीनों बली हों।

बृहत् जातक 17.7

ख़ूबियाँ

तुला का अर्थ ही तराज़ू है, और तुला वाले दो पक्षों के बीच बैठकर, चाहे ख़रीदार और बेचने वाला हों या लड़की वाले और लड़के वाले, ऐसी बात निकाल लेते हैं जो दोनों को मंज़ूर हो। शुक्र इन्हें सलीका देते हैं, इसलिए तुला वालों का किया आयोजन हर मेहमान को अपनापन महसूस कराता है। चर और वायु तत्त्व की राशि होने से ये संपर्क भी आसानी से बनाए रखते हैं, और इनकी दोस्ती बरसों तक गर्मजोशी से निभती है।

किन बातों का ध्यान रखें

सौदा या रिश्ता न बने तो कभी-कभी दोनों पक्ष बीच वाले को ही दोष देते हैं, इसलिए तुला वाले पहले ही साफ़ कह दें कि उनकी भूमिका कहाँ तक है। साझेदारी के कारोबार में मीठा व्यवहार कई बार कड़ी शर्तों को अनकहा छोड़ देता है। मुनाफ़े का बँटवारा और ज़िम्मेदारियाँ शुरू में ही सीधे शब्दों में तय कर लेना उन दोस्तियों को बचाता है जो तुला वालों को प्रिय हैं।

तुला राशि: काम-काज, विवाह और सेहत

ज्योतिष चंद्र राशि को लग्न मानकर (चंद्र लग्न) भी पढ़ता है: काम के लिए चंद्र से दसवाँ भाव, विवाह के लिए सातवाँ, और सेहत के लिए राशि का अपना अंग और तत्त्व। सातवीं राशि जीवनसाथी के स्वभाव का संकेत है, इसका मतलब यह नहीं कि जीवनसाथी की राशि यही होगी। यह परंपरा है, भविष्यवाणी नहीं; पूरा फल आपकी कुंडली तय करती है।

काम-काज

तुला के लिए चंद्र से दसवीं राशि कर्क है, जिसके स्वामी चंद्र हैं, इसलिए परंपरा सेवा, भोजन और जनता से व्यवहार वाले कामों की ओर देखती है: अस्पताल, होटल, भोजन का कारोबार और लोगों से सीधे जुड़ने वाला हर काम। राशि के स्वामी शुक्र कला, सौंदर्य और आतिथ्य जोड़ते हैं। साझेदारी का व्यापार, लेन-देन का कारोबार या ग्राहकों से सीधे मिलने वाला काम तुला की संतुलन की समझ के अनुकूल है।

विवाह

चंद्र से सातवीं राशि मेष है, जिसके स्वामी मंगल हैं, इसलिए परंपरा ऐसे जीवनसाथी की बात करती है जो सीधा, फुर्तीला और तुरंत काम करने वाला हो। तुला वाले हर पक्ष तौलते हैं और ऐसा साथी झट से फ़ैसला करता है, इसलिए दोनों एक-दूसरे की रफ़्तार को थोड़ी जगह दें तो यह जोड़ी एक-दूसरे को संतुलित करती है। राशि के स्वामी शुक्र विवाह के कारक भी हैं, इसलिए परंपरा सातवें भाव के साथ पूरी कुंडली में शुक्र का बल भी देखती है।

सेहत

परंपरा कालपुरुष के शरीर में तुला को पेट के निचले भाग से जोड़ती है (बृहत् जातक 1.4), और वायु तत्त्व की राशि होने से हल्की देह से। ऊपर का श्लोक बार-बार अस्वस्थ रहने की चेतावनी देता है, इसलिए परंपरा समय पर भोजन, नियमित नींद और छोटी तकलीफ़ को लंबा न खिंचने देने की सलाह देती है।

तुला राशि के नक्षत्र और नाम अक्षर

हर राशि में नौ चरण होते हैं, हर एक किसी नक्षत्र का एक चौथाई। जन्म के समय चंद्रमा जिस चरण में हों, परंपरा में नाम उसी के अक्षर से रखा जाता है।

नक्षत्रस्वामीतुला में अंशतुला में चरणनाम अक्षर
चित्रामंगल0°–6°40′3–4रा, री
स्वातिराहु6°40′–20°चारोंरू, रे, रो, ता
विशाखागुरु20°–30°1–3ती, तू, ते

नक्षत्र और चरण से बच्चों के नाम →

तुला राशि के लिए अभी शनि, गुरु और राहु

ये भाव चंद्र राशि से गिने गए हैं, जैसे राशिफल में। चंद्र से बारहवें, पहले या दूसरे भाव में शनि हों तो साढ़े साती होती है, लगभग साढ़े सात साल; चौथे (कंटक) या आठवें (अष्टम) में हों तो ढैय्या, लगभग ढाई साल। यह हर तुला राशि वाले के लिए एक जैसा है; असर कैसा होगा, यह आपकी कुंडली तय करती है।

  • शनिअभी मीन में, चंद्र राशि से छठे भाव में हैं, इसलिए न साढ़े साती है, न ढैय्या; छठा भाव उन तीन भावों में है जहाँ चंद्र से शनि शुभ फल देते हैं (फलदीपिका 26.2)। आगे: अष्टम शनि (ढैय्या, शनि आठवें भाव में) 8 अगस्त 2029 से 5 अक्टूबर 2029 तक, फिर 17 अप्रैल 2030 से 31 मई 2032 तक और साढ़े साती 22 अक्टूबर 2038 से 5 अप्रैल 2039 तक, फिर 13 जुलाई 2039 से 8 दिसंबर 2046 तक। साढ़े साती · ढैय्या की तारीख़ें।
  • गुरुअभी चंद्र राशि से दसवें भाव (काम-काज, पद और बड़ों से व्यवहार) में हैं। इसके बाद 31 अक्टूबर 2026 से ग्यारहवें भाव (आमदनी, लाभ और बड़े भाई-बहन) में, 25 जनवरी 2027 से फिर दसवें भाव में, 26 जून 2027 से फिर ग्यारहवें भाव में और 26 नवंबर 2027 से बारहवें भाव (ख़र्च, नींद, विदेश यात्रा और त्याग) में रहेंगे।
  • राहुअभी चंद्र राशि से पाँचवें भाव (संतान, पढ़ाई और समझ-बूझ) में हैं। इसके बाद 5 दिसंबर 2026 से चौथे भाव (घर, माँ, वाहन, ज़मीन-जायदाद और मन की शांति) में रहेंगे।

तुला राशिफल 2027: महीने दर महीने →

तुला राशि का उपाय: स्वामी शुक्र

राशि को उसके स्वामी के ज़रिए बल मिलता है। ये उपाय मुफ़्त हैं, और हर एक के साथ उसकी वजह है।

  • शुक्र का मंत्र, शुक्रवार को 108 बारॐ शुक्राय नमःतुला राशि के स्वामी का सबसे सरल मंत्र, विवाह, सुख-सुविधा और घर में मेल के लिए।
  • बीज मंत्र, नियमित जप के लिएॐ द्रां द्रीं द्रौं सः शुक्राय नमःशुक्र के पूरे जप के लिए, रोज़ 108 बार, जब तुला राशि के स्वामी को बल चाहिए: उनकी दशा (ग्रह की अवधि) में, या जब वे आपकी कुंडली में निर्बल हों।
  • देवी लक्ष्मी की पूजातुला राशि से परंपरा में जुड़ी देवी, जिनकी पूजा धन-समृद्धि और घर में बरकत के लिए की जाती है; मंदिर में दर्शन या घर में दीया सबसे सरल रूप है।

रत्न राशि से नहीं बताया जाता। जो रत्न एक कुंडली को फ़ायदा देता है, वही दूसरी को नुकसान कर सकता है, इसलिए रत्न पूरी कुंडली देखकर चुना जाता है।

कुंडली मिलान में तुला राशि

गुण मिलान के आठ कूटों (मिलान के हिस्सों) में से चार सिर्फ़ राशि से देखे जाते हैं, जो 36 में से 15 अंक के हैं: वर्ण (1, राशि का वर्ग), वश्य (2, आपसी आकर्षण), ग्रह मैत्री (5, स्वामियों की मित्रता) और भकूट (7, प्रेम और परिवार की भलाई)।

  • सिर्फ़ राशि से सबसे अच्छा और सबसे कठिन मेलतुला को लड़के की राशि मानें, तो बाक़ी ग्यारह राशियों में तुला का सबसे ज़्यादा मेल मकर से (13/15) और सबसे कम मीन से (1.5/15) है। एक ही राशि के दो लोगों को इन चारों पर पूरे 15 अंक मिलते हैं। वर्ण और वश्य में लड़के और लड़की की राशि अदल-बदल करने से अंक बदल सकते हैं, इसलिए जोड़ी वाले पेज पर दोनों तरह से गिनती दी गई है। बाक़ी चार कूट, 21 अंक, दोनों के नक्षत्र से निकलते हैं।
  • भकूटभकूट, 7 अंकों का कूट, तब 0 देता है जब दोनों राशियाँ एक-दूसरे से दूसरे-बारहवें, पाँचवें-नौवें या छठे-आठवें स्थान पर हों। वृश्चिक और मीन के साथ भकूट दोष बनता है और बना रहता है। कन्या, कुंभ, मिथुन और वृषभ के साथ दोष बनता है पर रद्द हो जाता है, क्योंकि दोनों राशियों के स्वामी एक ही ग्रह हैं या आपस में मित्र: भकूट के 7 में से 0 अंक ही रहते हैं, पर ज्योतिषी इसे मिलान में रुकावट नहीं मानते।
  • वश्य (2 अंक)तुला मानव (मनुष्य) राशि है। वश्य कूट (आपसी आकर्षण) में तुला को पूरे 2 अंक तब मिलते हैं जब साथी की राशि तुला, मिथुन, कन्या, धनु (पहला आधा) या कुंभ हो। धनु और मकर का वर्ग 15° पर बदल जाता है, और ऊपर की गिनती उनके पहले आधे की है: धनु के दूसरे आधे में चंद्रमा हों तो तुला को 1 अंक मिलता है।

हर राशि से तुला का मेल, कूट दर कूट → · पूरा कुंडली मिलान

पराशर के शब्दों में तुला राशि

राशि का अपना स्वरूप, उसमें बैठे ग्रहों से अलग।

  • रंग: श्याम (काला)
  • मध्यम शरीर
  • द्विपद (दो पैरों वाली)
  • दिन में बली
  • दिशा: पश्चिम
  • भूमि पर वास
  • रजोगुणी
  • शीर्षोदय (सिर से उदय होने वाली)
  • स्वामी: शुक्र
  • चर, पुरुष और क्रूर राशि
  • सम प्रकृति (वात, पित्त, कफ तीनों संतुलित)

सत्त्व, रज और तम तीन गुण हैं (शांत समझ, सक्रियता और जड़ता)। वात, पित्त और कफ आयुर्वेद के तीन दोष हैं (शरीर में वायु, अग्नि और जल)। राशि का उदय सिर की ओर से (शीर्षोदय) या पीठ की ओर से (पृष्ठोदय) होता है, जैसे उसकी आकृति पूर्व में उगती है; शास्त्र इसे, दिन या रात के बल के साथ, फल का समय देखने में लेते हैं। पराशर राशि की अपनी प्रकृति बताते हैं, और ऊपर वराहमिहिर उस व्यक्ति की जिसके चंद्रमा इसमें हों, इसलिए दोनों में अंतर हो सकता है।

बृहत् पाराशर होरा शास्त्र 4.5, 4.15

आम सवाल

तुला राशि क्या है?

तुला बारह राशियों में सातवीं है, निरयन राशिचक्र के 180°–210°, और इसके स्वामी शुक्र हैं। जन्म के समय चंद्रमा इसमें हों तो यह आपकी राशि है।

तुला राशि के नाम अक्षर क्या हैं?

रा, री, रू, रे, रो, ता, ती, तू, ते: नौ चरणों के लिए एक-एक, क्रम से। जन्म के समय चंद्रमा जिस चरण में हों, उसी का अक्षर लिया जाता है।

तुला राशि का सबसे अच्छा मेल किन राशियों से है?

राशि से तय होने वाले चार कूटों पर बाक़ी ग्यारह राशियों में तुला का सबसे अच्छा मेल मकर से है (13/15, तुला को वर की राशि मानकर); एक ही राशि के दो लोगों को पूरे 15 अंक मिलते हैं। असली मिलान के लिए दोनों कुंडलियाँ चाहिए: 36 में से 21 अंक नक्षत्र के कूटों से आते हैं।

तुला राशि का मंत्र क्या है?

इसके स्वामी शुक्र का मंत्र ॐ शुक्राय नमः, शुक्रवार को 108 बार। बीज मंत्र और देवता ऊपर उपाय वाले हिस्से में हैं।

क्या तुला राशि पर अभी साढ़े साती या ढैय्या है?

अभी दोनों में से कोई नहीं। शनि मीन में हैं, तुला से छठे भाव में। आगे पहले अष्टम शनि (ढैय्या, शनि आठवें भाव में) 8 अगस्त 2029 से 5 अक्टूबर 2029 तक, फिर 17 अप्रैल 2030 से 31 मई 2032 तक; फिर साढ़े साती 22 अक्टूबर 2038 से 5 अप्रैल 2039 तक, फिर 13 जुलाई 2039 से 8 दिसंबर 2046 तक।

तुला राशि के लिए 2027 कैसा है?

2027 में सबसे अच्छे महीने जनवरी और नवंबर हैं और सबसे कमज़ोर जून, अगस्त और दिसंबर। 2027 के राशिफल में हर महीने का हाल है, ऊपर बताए शनि, गुरु और राहु के बदलावों के साथ।

आपकी राशि आपकी कुंडली का बस एक हिस्सा है

आपका लग्न, नक्षत्र का चरण और दशा बाक़ी बताते हैं। आचार्य पराशर (AI ज्योतिषी) आपकी पूरी कुंडली देखकर जवाब देते हैं।

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AI वैदिक ज्योतिषी। किसी भी भारतीय भाषा में चैट करें; कॉल हिंदी और अंग्रेज़ी में।ऐसे पूछें“मेरी कुंडली का पूरा और विस्तार से विश्लेषण कीजिए”“मेरी जन्म कुंडली में कौन-से दुर्लभ योग हैं?”“इस महीने की मेरी सूक्ष्म दशा का विश्लेषण कीजिए”चैट कॉल शुल्क हर मिनट के हिसाब से लगता है, और सिर्फ़ तब तक जब तक चैट या कॉल चालू रहे। जब चाहें बंद करें।

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9 विस्तृत रिपोर्ट, जिनमें जन्म कुंडली, कुंडली मिलान और वार्षिक भविष्यवाणी हैं।हिंदी, अंग्रेज़ी और हिंग्लिशरिपोर्ट देखें
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