बारह राशियों में सातवीं · निरयन (स्थिर तारों वाले) राशिचक्र के 180°–210°
जन्म के समय चंद्रमा तुला में हों तो आपकी राशि तुला है: इसी से आपका राशिफल, साढ़े साती और नाम अक्षर देखे जाते हैं। जिनके चंद्रमा तुला में हों, वे मिलनसार, न्यायप्रिय और व्यवहार-कुशल होते हैं। इसके स्वामी शुक्र हैं, नक्षत्र चित्रा (चरण 3–4), स्वाति और विशाखा (चरण 1–3) हैं, और परंपरा में तुला राशि के बच्चे का नाम रा, री, रू, रे, रो, ता, ती, तू या ते अक्षर से रखा जाता है।
राशि की अपनी बातें, जो हर तुला राशि वाले के लिए एक-सी हैं।
चंद्रमा मन के कारक हैं, इसलिए उनकी राशि बताती है कि व्यक्ति कैसा महसूस करता है और किसी बात पर कैसे पेश आता है। लग्न और बाक़ी कुंडली इसे आगे गढ़ते हैं।
ऐसे लोग संतुलन और मेल-जोल चाहते हैं, झगड़े से बचते हैं और सुंदरता की समझ रखते हैं; साझेदारी इनके लिए बहुत मायने रखती है। ये फ़ैसला लेने में देर लगाते हैं और कभी सिर्फ़ शांति बनाए रखने के लिए हाँ कह देते हैं। तुला शुक्र की राशि है, इसलिए ये व्यापार, क़ानून, डिज़ाइन और लोगों को जोड़ने वाले कामों में अच्छा करते हैं।
बृहत् जातक के अनुसार चंद्र तुला राशि में हों तो जातक देवताओं, ब्राह्मणों और संतों का आदर करने वाला, धार्मिक जीवन जीने वाला और बुद्धिमान होता है। वह व्यापार और यात्रा की ओर झुका रहता है, धनवान होता है, परिवार की सहायता करता है और किसी देवता के नाम पर उसका दूसरा नाम हो सकता है। श्लोक उसका शरीर लंबा और अंग पतले बताता है, बार-बार अस्वस्थ रहने की बात कहता है और अपने ही बंधुओं से अपमान की चेतावनी देता है। वराहमिहिर स्वयं कहते हैं (17.13) कि यह फल पूरा तभी मिलता है जब जन्म के समय चंद्रमा, तुला राशि और उसके स्वामी शुक्र तीनों बली हों।
बृहत् जातक 17.7
तुला का अर्थ ही तराज़ू है, और तुला वाले दो पक्षों के बीच बैठकर, चाहे ख़रीदार और बेचने वाला हों या लड़की वाले और लड़के वाले, ऐसी बात निकाल लेते हैं जो दोनों को मंज़ूर हो। शुक्र इन्हें सलीका देते हैं, इसलिए तुला वालों का किया आयोजन हर मेहमान को अपनापन महसूस कराता है। चर और वायु तत्त्व की राशि होने से ये संपर्क भी आसानी से बनाए रखते हैं, और इनकी दोस्ती बरसों तक गर्मजोशी से निभती है।
सौदा या रिश्ता न बने तो कभी-कभी दोनों पक्ष बीच वाले को ही दोष देते हैं, इसलिए तुला वाले पहले ही साफ़ कह दें कि उनकी भूमिका कहाँ तक है। साझेदारी के कारोबार में मीठा व्यवहार कई बार कड़ी शर्तों को अनकहा छोड़ देता है। मुनाफ़े का बँटवारा और ज़िम्मेदारियाँ शुरू में ही सीधे शब्दों में तय कर लेना उन दोस्तियों को बचाता है जो तुला वालों को प्रिय हैं।
ज्योतिष चंद्र राशि को लग्न मानकर (चंद्र लग्न) भी पढ़ता है: काम के लिए चंद्र से दसवाँ भाव, विवाह के लिए सातवाँ, और सेहत के लिए राशि का अपना अंग और तत्त्व। सातवीं राशि जीवनसाथी के स्वभाव का संकेत है, इसका मतलब यह नहीं कि जीवनसाथी की राशि यही होगी। यह परंपरा है, भविष्यवाणी नहीं; पूरा फल आपकी कुंडली तय करती है।
तुला के लिए चंद्र से दसवीं राशि कर्क है, जिसके स्वामी चंद्र हैं, इसलिए परंपरा सेवा, भोजन और जनता से व्यवहार वाले कामों की ओर देखती है: अस्पताल, होटल, भोजन का कारोबार और लोगों से सीधे जुड़ने वाला हर काम। राशि के स्वामी शुक्र कला, सौंदर्य और आतिथ्य जोड़ते हैं। साझेदारी का व्यापार, लेन-देन का कारोबार या ग्राहकों से सीधे मिलने वाला काम तुला की संतुलन की समझ के अनुकूल है।
चंद्र से सातवीं राशि मेष है, जिसके स्वामी मंगल हैं, इसलिए परंपरा ऐसे जीवनसाथी की बात करती है जो सीधा, फुर्तीला और तुरंत काम करने वाला हो। तुला वाले हर पक्ष तौलते हैं और ऐसा साथी झट से फ़ैसला करता है, इसलिए दोनों एक-दूसरे की रफ़्तार को थोड़ी जगह दें तो यह जोड़ी एक-दूसरे को संतुलित करती है। राशि के स्वामी शुक्र विवाह के कारक भी हैं, इसलिए परंपरा सातवें भाव के साथ पूरी कुंडली में शुक्र का बल भी देखती है।
परंपरा कालपुरुष के शरीर में तुला को पेट के निचले भाग से जोड़ती है (बृहत् जातक 1.4), और वायु तत्त्व की राशि होने से हल्की देह से। ऊपर का श्लोक बार-बार अस्वस्थ रहने की चेतावनी देता है, इसलिए परंपरा समय पर भोजन, नियमित नींद और छोटी तकलीफ़ को लंबा न खिंचने देने की सलाह देती है।
हर राशि में नौ चरण होते हैं, हर एक किसी नक्षत्र का एक चौथाई। जन्म के समय चंद्रमा जिस चरण में हों, परंपरा में नाम उसी के अक्षर से रखा जाता है।
| नक्षत्र | स्वामी | तुला में अंश | तुला में चरण | नाम अक्षर |
|---|---|---|---|---|
| चित्रा | मंगल | 0°–6°40′ | 3–4 | रा, री |
| स्वाति | राहु | 6°40′–20° | चारों | रू, रे, रो, ता |
| विशाखा | गुरु | 20°–30° | 1–3 | ती, तू, ते |
ये भाव चंद्र राशि से गिने गए हैं, जैसे राशिफल में। चंद्र से बारहवें, पहले या दूसरे भाव में शनि हों तो साढ़े साती होती है, लगभग साढ़े सात साल; चौथे (कंटक) या आठवें (अष्टम) में हों तो ढैय्या, लगभग ढाई साल। यह हर तुला राशि वाले के लिए एक जैसा है; असर कैसा होगा, यह आपकी कुंडली तय करती है।
राशि को उसके स्वामी के ज़रिए बल मिलता है। ये उपाय मुफ़्त हैं, और हर एक के साथ उसकी वजह है।
रत्न राशि से नहीं बताया जाता। जो रत्न एक कुंडली को फ़ायदा देता है, वही दूसरी को नुकसान कर सकता है, इसलिए रत्न पूरी कुंडली देखकर चुना जाता है।
गुण मिलान के आठ कूटों (मिलान के हिस्सों) में से चार सिर्फ़ राशि से देखे जाते हैं, जो 36 में से 15 अंक के हैं: वर्ण (1, राशि का वर्ग), वश्य (2, आपसी आकर्षण), ग्रह मैत्री (5, स्वामियों की मित्रता) और भकूट (7, प्रेम और परिवार की भलाई)।
राशि का अपना स्वरूप, उसमें बैठे ग्रहों से अलग।
सत्त्व, रज और तम तीन गुण हैं (शांत समझ, सक्रियता और जड़ता)। वात, पित्त और कफ आयुर्वेद के तीन दोष हैं (शरीर में वायु, अग्नि और जल)। राशि का उदय सिर की ओर से (शीर्षोदय) या पीठ की ओर से (पृष्ठोदय) होता है, जैसे उसकी आकृति पूर्व में उगती है; शास्त्र इसे, दिन या रात के बल के साथ, फल का समय देखने में लेते हैं। पराशर राशि की अपनी प्रकृति बताते हैं, और ऊपर वराहमिहिर उस व्यक्ति की जिसके चंद्रमा इसमें हों, इसलिए दोनों में अंतर हो सकता है।
बृहत् पाराशर होरा शास्त्र 4.5, 4.15
तुला बारह राशियों में सातवीं है, निरयन राशिचक्र के 180°–210°, और इसके स्वामी शुक्र हैं। जन्म के समय चंद्रमा इसमें हों तो यह आपकी राशि है।
रा, री, रू, रे, रो, ता, ती, तू, ते: नौ चरणों के लिए एक-एक, क्रम से। जन्म के समय चंद्रमा जिस चरण में हों, उसी का अक्षर लिया जाता है।
राशि से तय होने वाले चार कूटों पर बाक़ी ग्यारह राशियों में तुला का सबसे अच्छा मेल मकर से है (13/15, तुला को वर की राशि मानकर); एक ही राशि के दो लोगों को पूरे 15 अंक मिलते हैं। असली मिलान के लिए दोनों कुंडलियाँ चाहिए: 36 में से 21 अंक नक्षत्र के कूटों से आते हैं।
इसके स्वामी शुक्र का मंत्र ॐ शुक्राय नमः, शुक्रवार को 108 बार। बीज मंत्र और देवता ऊपर उपाय वाले हिस्से में हैं।
अभी दोनों में से कोई नहीं। शनि मीन में हैं, तुला से छठे भाव में। आगे पहले अष्टम शनि (ढैय्या, शनि आठवें भाव में) 8 अगस्त 2029 से 5 अक्टूबर 2029 तक, फिर 17 अप्रैल 2030 से 31 मई 2032 तक; फिर साढ़े साती 22 अक्टूबर 2038 से 5 अप्रैल 2039 तक, फिर 13 जुलाई 2039 से 8 दिसंबर 2046 तक।
2027 में सबसे अच्छे महीने जनवरी और नवंबर हैं और सबसे कमज़ोर जून, अगस्त और दिसंबर। 2027 के राशिफल में हर महीने का हाल है, ऊपर बताए शनि, गुरु और राहु के बदलावों के साथ।
आपका लग्न, नक्षत्र का चरण और दशा बाक़ी बताते हैं। आचार्य पराशर (AI ज्योतिषी) आपकी पूरी कुंडली देखकर जवाब देते हैं।
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