लग्न · मिथुन
मिथुन लग्न हो तो बुद्धि जिज्ञासु होती है और बात करने का हुनर कमाल का। बुध लग्नेश हैं, इसलिए आप हाज़िरजवाब, हालात के साथ ढलने वाले और उम्र भर जवान ऊर्जा वाले रहते हैं। इसके स्वामी बुध हैं।
मिथुन लग्न: पहले भाव में मिथुन
लग्नेश बुध
आप बहुमुखी, जिज्ञासु और दिमाग़ से फुर्तीले हैं, ज्ञान की प्यास कभी नहीं बुझती। किसी बात को कई नज़रियों से देखना और किसी से भी बात शुरू कर लेना आपको सहज आता है। रुचियाँ बदलती रहती हैं, जिससे ज़िंदगी कभी नीरस नहीं होती।
दिल्ली में मिथुन लग्न रोज़ लगभग 2 घंटे 14 मिनट उदित रहता है, सबसे लंबे समय वाले लग्नों में से। चार उत्तर भारतीय शहरों की 1960 से 1999 की 8,349 असली जन्म कुंडलियों में से 9.4% का यह लग्न था; बारह में एक से ज़्यादा: धीरे उगने वाली राशि को ज़्यादा जन्म मिलते हैं।
लग्न वह राशि है जो जन्म के समय पूर्व में उदित हो रही थी; यह लगभग हर दो घंटे में बदलता है, इसीलिए जन्म समय ज़रूरी है। राशि चंद्रमा की राशि है, जो अलग बात है: मिथुन राशि मन के लिए पढ़ी जाती है, मिथुन लग्न शरीर और जीवन की दिशा के लिए।
वह किन भावों का स्वामी है, और बृहत् पाराशर होरा शास्त्र अध्याय 34 इस लग्न के लिए उसे क्या कहता है
मिथुन लग्न के लिए BPHS 34 शुक्र को शुभ मानता है, और सूर्य, मंगल और गुरु को अशुभ।
| ग्रह | किन भावों का स्वामी | इस लग्न के लिए (BPHS 34) |
|---|---|---|
| सूर्य | तीसरे | अशुभ |
| चंद्र | दूसरे | मारक |
| मंगल | छठे, ग्यारहवें | अशुभ |
| बुध | पहले, चौथे | लग्नेश— लग्नेश, जिन्हें श्लोक शुभ या अशुभ नहीं कहता: 34.25 मिथुन के लिए केवल शुक्र को शुभ बताता है |
| गुरु | सातवें, दसवें | अशुभ— सातवें भाव के स्वामी, पर श्लोक 34.25–26 इस लग्न के लिए चंद्र को मारक कहता है |
| शुक्र | पाँचवें, बारहवें | शुभ |
| शनि | आठवें, नौवें | तटस्थ |
| राहु | कोई नहीं (छाया ग्रह) | जिस भाव में बैठें, वैसा फल |
| केतु | कोई नहीं (छाया ग्रह) | जिस भाव में बैठें, वैसा फल |
तालिका के नाम, बृहत् पाराशर होरा शास्त्र, अध्याय 34 से:
हर भाव में राशि और उसका स्वामी: इस कुंडली की हर पढ़ाई यहीं से शुरू होती है
| भाव | राशि | स्वामी | किसका भाव |
|---|---|---|---|
| पहले | मिथुन | बुध | शरीर, स्वभाव और सेहत |
| दूसरे | कर्क | चंद्र | परिवार, बचत और वाणी |
| तीसरे | सिंह | सूर्य | हिम्मत, भाई-बहन और मेहनत |
| चौथे | कन्या | बुध | माँ, घर और ज़मीन |
| पाँचवें | तुला | शुक्र | संतान, पढ़ाई और बुद्धि |
| छठे | वृश्चिक | मंगल | रोग, कर्ज़ और शत्रु |
| सातवें | धनु | गुरु | शादी और साझेदारी |
| आठवें | मकर | शनि | आयु, अचानक घटनाएँ और विरासत |
| नौवें | कुंभ | शनि | पिता, भाग्य और धर्म |
| दसवें | मीन | गुरु | कार्य और प्रतिष्ठा |
| ग्यारहवें | मेष | मंगल | लाभ, आमदनी और बड़े भाई-बहन |
| बारहवें | वृषभ | शुक्र | खर्च, विदेश और मोक्ष |
इस कुंडली के हर भाव में लग्नेश, और वहाँ की राशि में उनकी स्थिति
इस लग्न के लिए बुध सबसे बलवान चौथे भाव में हैं (उच्च) और पहले भाव में अपनी राशि में; सबसे कमज़ोर दसवें भाव में (नीच)।
| बुध किस भाव में | वहाँ राशि | स्थिति |
|---|---|---|
| पहले | मिथुन | स्वराशि |
| दूसरे | कर्क | — |
| तीसरे | सिंह | — |
| चौथे | कन्या | उच्च |
| पाँचवें | तुला | — |
| छठे | वृश्चिक | — |
| सातवें | धनु | — |
| आठवें | मकर | — |
| नौवें | कुंभ | — |
| दसवें | मीन | नीच |
| ग्यारहवें | मेष | — |
| बारहवें | वृषभ | — |
BPHS अध्याय 24 बारहों भावों में लग्नेश का फल पढ़ता है; वे पहले भाव के पेज पर हैं।
6 जनवरी 1985, 17:00, मुंबई
लग्नेश बुध वृश्चिक में, छठे भाव में हैं। वह भाव रोग, कर्ज़ और शत्रु का है, इसलिए इस कुंडली का जीवन उसी ओर झुकता है।
साइट के रत्न इंजन ने मिथुन लग्न की 784 असली कुंडलियों में क्या चुना
रत्न इस पर निर्भर है कि आपकी अपनी कुंडली में हर ग्रह कितना बलवान है, इसीलिए एक ही लग्न को अलग-अलग रत्न मिलते हैं। अपनी कुंडली से अपना रत्न देखें।
बुध मंत्र · बुधवार को 108 बार
ॐ बुधाय नमः
लग्नेश पूरी कुंडली का भार उठाते हैं: बलवान रहें तो शरीर और मन स्थिर रहते हैं। उनका दान, बुधवार को: हरी मूँग और हरे वस्त्र। यह एक सुझाव है: अपनी श्रद्धा के अनुसार करें।
जन्म के समय पूर्व में मिथुन का उदित होना। इसके स्वामी बुध हैं।
शुभ: शुक्र; अशुभ: सूर्य, मंगल और गुरु (बृहत् पाराशर होरा शास्त्र, अध्याय 34)।
रत्न इंजन ने सबसे ज़्यादा हीरा चुना (मिथुन लग्न की 96% कुंडलियों में), पर यह आपकी अपनी कुंडली के बल पर निर्भर है। अशुभ ग्रहों के रत्नों से बचें।
जन्म तिथि, सही समय और जगह चाहिए: लग्न लगभग हर दो घंटे में बदलता है (दिल्ली में मिथुन लगभग 2 घंटे 14 मिनट रहता है)। लग्न कैलकुलेटर इसे निकाल देता है।
आपका जन्म समय इसे तय करता है। लग्न कैलकुलेटर आपका लग्न, उसका अंश और नक्षत्र बताता है।
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