लग्न · मीन
मीन लग्न हो तो स्वभाव दयालु, अंतर्ज्ञानी और अध्यात्म की ओर झुका होता है। गुरु लग्नेश हैं, इसलिए मन बहुत संवेदनशील और कला-प्रेमी होता है। आप सपने देखने वाले हैं, जिनका अदृश्य से गहरा जुड़ाव है। इसके स्वामी गुरु हैं।
मीन लग्न: पहले भाव में मीन
लग्नेश गुरु
आप संवेदनशील, अंतर्ज्ञानी और दूसरों का दर्द गहराई से महसूस करने वाले हैं, भावनाओं को स्पंज की तरह सोख लेते हैं। भीतर की दुनिया कल्पना और रचनात्मकता से भरी है। आध्यात्मिक स्वभाव आपको उम्र से कहीं आगे की समझ देता है।
दिल्ली में मीन लग्न रोज़ लगभग 1 घंटे 26 मिनट उदित रहता है, सबसे कम समय वाले लग्नों में से। चार उत्तर भारतीय शहरों की 1960 से 1999 की 8,349 असली जन्म कुंडलियों में से 6.1% का यह लग्न था; बराबर बँटवारे के बारह में एक से कम: जल्दी उगने वाली राशि को कम जन्म मिलते हैं।
लग्न वह राशि है जो जन्म के समय पूर्व में उदित हो रही थी; यह लगभग हर दो घंटे में बदलता है, इसीलिए जन्म समय ज़रूरी है। राशि चंद्रमा की राशि है, जो अलग बात है: मीन राशि मन के लिए पढ़ी जाती है, मीन लग्न शरीर और जीवन की दिशा के लिए।
वह किन भावों का स्वामी है, और बृहत् पाराशर होरा शास्त्र अध्याय 34 इस लग्न के लिए उसे क्या कहता है
मीन लग्न के लिए BPHS 34 चंद्र, मंगल और गुरु को शुभ मानता है, और सूर्य, बुध, शुक्र और शनि को अशुभ।
| ग्रह | किन भावों का स्वामी | इस लग्न के लिए (BPHS 34) |
|---|---|---|
| सूर्य | छठे | अशुभ |
| चंद्र | पाँचवें | शुभ |
| मंगल | दूसरे, नौवें | शुभ · योग— गुरु के साथ योग देते हैं (34.44)— साथ ही मारक भी कहे गए, पर अपने आप मारक नहीं (34.44) |
| बुध | चौथे, सातवें | अशुभ · मारक |
| गुरु | पहले, दसवें | शुभ · योग— मंगल के साथ योग देते हैं (34.44) |
| शुक्र | तीसरे, आठवें | अशुभ |
| शनि | ग्यारहवें, बारहवें | अशुभ · मारक— ग्यारहवें और बारहवें भाव के स्वामी, दूसरे या सातवें के नहीं; फिर भी श्लोक 34.43–44 इन्हें मारक कहता है |
| राहु | कोई नहीं (छाया ग्रह) | जिस भाव में बैठें, वैसा फल |
| केतु | कोई नहीं (छाया ग्रह) | जिस भाव में बैठें, वैसा फल |
तालिका के नाम, बृहत् पाराशर होरा शास्त्र, अध्याय 34 से:
हर भाव में राशि और उसका स्वामी: इस कुंडली की हर पढ़ाई यहीं से शुरू होती है
| भाव | राशि | स्वामी | किसका भाव |
|---|---|---|---|
| पहले | मीन | गुरु | शरीर, स्वभाव और सेहत |
| दूसरे | मेष | मंगल | परिवार, बचत और वाणी |
| तीसरे | वृषभ | शुक्र | हिम्मत, भाई-बहन और मेहनत |
| चौथे | मिथुन | बुध | माँ, घर और ज़मीन |
| पाँचवें | कर्क | चंद्र | संतान, पढ़ाई और बुद्धि |
| छठे | सिंह | सूर्य | रोग, कर्ज़ और शत्रु |
| सातवें | कन्या | बुध | शादी और साझेदारी |
| आठवें | तुला | शुक्र | आयु, अचानक घटनाएँ और विरासत |
| नौवें | वृश्चिक | मंगल | पिता, भाग्य और धर्म |
| दसवें | धनु | गुरु | कार्य और प्रतिष्ठा |
| ग्यारहवें | मकर | शनि | लाभ, आमदनी और बड़े भाई-बहन |
| बारहवें | कुंभ | शनि | खर्च, विदेश और मोक्ष |
इस कुंडली के हर भाव में लग्नेश, और वहाँ की राशि में उनकी स्थिति
इस लग्न के लिए गुरु सबसे बलवान पाँचवें भाव में हैं (उच्च) और पहले और दसवें भाव में अपनी राशि में; सबसे कमज़ोर ग्यारहवें भाव में (नीच)।
| गुरु किस भाव में | वहाँ राशि | स्थिति |
|---|---|---|
| पहले | मीन | स्वराशि |
| दूसरे | मेष | — |
| तीसरे | वृषभ | — |
| चौथे | मिथुन | — |
| पाँचवें | कर्क | उच्च |
| छठे | सिंह | — |
| सातवें | कन्या | — |
| आठवें | तुला | — |
| नौवें | वृश्चिक | — |
| दसवें | धनु | स्वराशि |
| ग्यारहवें | मकर | नीच |
| बारहवें | कुंभ | — |
BPHS अध्याय 24 बारहों भावों में लग्नेश का फल पढ़ता है; वे पहले भाव के पेज पर हैं।
12 जनवरी 1985, 11:00, लखनऊ
लग्नेश गुरु मकर में, ग्यारहवें भाव में हैं, नीच। वह भाव लाभ, आमदनी और बड़े भाई-बहन का है, इसलिए इस कुंडली का जीवन उसी ओर झुकता है।
साइट के रत्न इंजन ने मीन लग्न की 511 असली कुंडलियों में क्या चुना
रत्न इस पर निर्भर है कि आपकी अपनी कुंडली में हर ग्रह कितना बलवान है, इसीलिए एक ही लग्न को अलग-अलग रत्न मिलते हैं। अपनी कुंडली से अपना रत्न देखें।
गुरु मंत्र · गुरुवार को 108 बार
ॐ गुरवे नमः
लग्नेश पूरी कुंडली का भार उठाते हैं: बलवान रहें तो शरीर और मन स्थिर रहते हैं। उनका दान, गुरुवार को: चने की दाल और हल्दी। यह एक सुझाव है: अपनी श्रद्धा के अनुसार करें।
जन्म के समय पूर्व में मीन का उदित होना। इसके स्वामी गुरु हैं।
शुभ: चंद्र, मंगल और गुरु; अशुभ: सूर्य, बुध, शुक्र और शनि (बृहत् पाराशर होरा शास्त्र, अध्याय 34)।
रत्न इंजन ने सबसे ज़्यादा पुखराज चुना (मीन लग्न की 38% कुंडलियों में), पर यह आपकी अपनी कुंडली के बल पर निर्भर है। अशुभ ग्रहों के रत्नों से बचें।
जन्म तिथि, सही समय और जगह चाहिए: लग्न लगभग हर दो घंटे में बदलता है (दिल्ली में मीन लगभग 1 घंटे 26 मिनट रहता है)। लग्न कैलकुलेटर इसे निकाल देता है।
आपका जन्म समय इसे तय करता है। लग्न कैलकुलेटर आपका लग्न, उसका अंश और नक्षत्र बताता है।
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