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लग्न · मकर

मकर लग्न
लग्नेश शनि

मकर लग्न हो तो स्वभाव महत्वाकांक्षी, अनुशासित और ज़िम्मेदार होता है। शनि लग्नेश हैं, इसलिए सोच परिपक्व और मेहनत पर पूरा भरोसा होता है। आप व्यावहारिक, धैर्यवान और लंबे समय की सफलता बनाने पर ध्यान देने वाले हैं। इसके स्वामी शनि हैं, योगकारक शुक्र।

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मकर लग्न: पहले भाव में मकर

मकर लग्न का स्वभाव

लग्नेश शनि

आप गंभीर, महत्वाकांक्षी और बहुत ज़िम्मेदार हैं, बचपन से ही समझदारी झलकती है। शनि धैर्य और समय की क़ीमत की गहरी समझ देते हैं। ऊपर से संकोची पर भीतर से बहुत परवाह करने वाले, आपकी लगन आपको धीरे-धीरे लक्ष्य तक पहुँचाती है।

दिल्ली में मकर लग्न रोज़ लगभग 1 घंटे 42 मिनट उदित रहता है, सबसे कम समय वाले लग्नों में से। चार उत्तर भारतीय शहरों की 1960 से 1999 की 8,349 असली जन्म कुंडलियों में से 7.3% का यह लग्न था; बराबर बँटवारे के बारह में एक से कम: जल्दी उगने वाली राशि को कम जन्म मिलते हैं।

लग्न वह राशि है जो जन्म के समय पूर्व में उदित हो रही थी; यह लगभग हर दो घंटे में बदलता है, इसीलिए जन्म समय ज़रूरी है। राशि चंद्रमा की राशि है, जो अलग बात है: मकर राशि मन के लिए पढ़ी जाती है, मकर लग्न शरीर और जीवन की दिशा के लिए।

मकर लग्न के लिए हर ग्रह

वह किन भावों का स्वामी है, और बृहत् पाराशर होरा शास्त्र अध्याय 34 इस लग्न के लिए उसे क्या कहता है

मकर लग्न के लिए BPHS 34 शुक्र और बुध को शुभ मानता है, और शुक्र योगकारक हैं (लग्न का सबसे बड़ा सहायक ग्रह), जो एक साथ केंद्र और त्रिकोण के स्वामी हैं, और चंद्र, मंगल और गुरु को अशुभ।

ग्रहकिन भावों का स्वामीइस लग्न के लिए (BPHS 34)
सूर्यआठवेंतटस्थ
चंद्रसातवेंअशुभ— सातवें भाव के स्वामी, पर श्लोक 34.39–40 इस लग्न के लिए मंगल को मारक कहता है
मंगलचौथे, ग्यारहवेंअशुभ · मारक— चौथे और ग्यारहवें भाव के स्वामी, दूसरे या सातवें के नहीं; फिर भी श्लोक 34.39–40 इन्हें मारक कहता है
बुधछठे, नौवेंशुभ
गुरुतीसरे, बारहवेंअशुभ
शुक्रपाँचवें, दसवेंयोगकारक
शनिपहले, दूसरेतटस्थ— लग्नेश; श्लोक 34.39 के अनुसार अपने आप मारक नहीं
राहुकोई नहीं (छाया ग्रह)जिस भाव में बैठें, वैसा फल
केतुकोई नहीं (छाया ग्रह)जिस भाव में बैठें, वैसा फल

तालिका के नाम, बृहत् पाराशर होरा शास्त्र, अध्याय 34 से:

  • योगकारक: लग्न के सबसे शुभ ग्रह: जिन्हें पराशर योग देने वाले बताते हैं, या जो एक साथ केंद्र (पहले, चौथे, सातवें, दसवें) और त्रिकोण (पहले, पाँचवें, नौवें) भाव के स्वामी हों (34.13)
  • शुभ, अशुभ, तटस्थ: लग्न के पक्ष में; कठिन बातें लाने वाले; दोनों में से कोई नहीं
  • लग्नेश: लग्न के अपने स्वामी, जहाँ श्लोक इन्हें शुभ या अशुभ नहीं कहता
  • मारक: जिन्हें पराशर उस लग्न के लिए आयु और सेहत पर भारी बताते हैं; अकेले, या किसी और नाम के बाद लिखे जाते हैं। ये हमेशा दूसरे या सातवें भाव के स्वामी नहीं होते: जहाँ अलग हों, नीचे की पंक्ति श्लोक बताती है
  • · योग: उन दो ग्रहों में से एक जो इस लग्न के लिए साथ मिलकर योग देते हैं

मकर लग्न के बारह भाव

हर भाव में राशि और उसका स्वामी: इस कुंडली की हर पढ़ाई यहीं से शुरू होती है

भावराशिस्वामीकिसका भाव
पहलेमकरशनिशरीर, स्वभाव और सेहत
दूसरेकुंभशनिपरिवार, बचत और वाणी
तीसरेमीनगुरुहिम्मत, भाई-बहन और मेहनत
चौथेमेषमंगलमाँ, घर और ज़मीन
पाँचवेंवृषभशुक्रसंतान, पढ़ाई और बुद्धि
छठेमिथुनबुधरोग, कर्ज़ और शत्रु
सातवेंकर्कचंद्रशादी और साझेदारी
आठवेंसिंहसूर्यआयु, अचानक घटनाएँ और विरासत
नौवेंकन्याबुधपिता, भाग्य और धर्म
दसवेंतुलाशुक्रकार्य और प्रतिष्ठा
ग्यारहवेंवृश्चिकमंगललाभ, आमदनी और बड़े भाई-बहन
बारहवेंधनुगुरुखर्च, विदेश और मोक्ष

लग्नेश शनि कहाँ बलवान हैं

इस कुंडली के हर भाव में लग्नेश, और वहाँ की राशि में उनकी स्थिति

इस लग्न के लिए शनि सबसे बलवान दसवें भाव में हैं (उच्च) और पहले और दूसरे भाव में अपनी राशि में; सबसे कमज़ोर चौथे भाव में (नीच)।

शनि किस भाव मेंवहाँ राशिस्थिति
पहलेमकरस्वराशि
दूसरेकुंभस्वराशि
तीसरेमीन—
चौथेमेषनीच
पाँचवेंवृषभ—
छठेमिथुन—
सातवेंकर्क—
आठवेंसिंह—
नौवेंकन्या—
दसवेंतुलाउच्च
ग्यारहवेंवृश्चिक—
बारहवेंधनु—

BPHS अध्याय 24 बारहों भावों में लग्नेश का फल पढ़ता है; वे पहले भाव के पेज पर हैं।

एक असली कुंडली में मकर लग्न

22 फ़रवरी 1985, 05:00, नई दिल्ली

101471112235689सूबुचंमंशुगुशराके

लग्नेश शनि वृश्चिक में, ग्यारहवें भाव में हैं। वह भाव लाभ, आमदनी और बड़े भाई-बहन का है, इसलिए इस कुंडली का जीवन उसी ओर झुकता है।

मकर लग्न के लिए रत्न

साइट के रत्न इंजन ने मकर लग्न की 613 असली कुंडलियों में क्या चुना

हीराशुक्र · 81% कुंडलियों में
पन्नाबुध · 13% कुंडलियों में
गोमेदराहु · 4% कुंडलियों में

इस लग्न के लिए जिन रत्नों से बचने को कहा गया

  • मूंगा: इस लग्न के लिए मंगल अशुभ और मारक हैं (BPHS 34), इसलिए उनका रत्न उन्हीं बातों को बल देगा।
  • पुखराज: इस लग्न के लिए गुरु अशुभ हैं (BPHS 34), इसलिए उनका रत्न उन्हीं बातों को बल देगा।
  • मोती: इस लग्न के लिए चंद्र अशुभ हैं (BPHS 34), इसलिए उनका रत्न उन्हीं बातों को बल देगा।

रत्न इस पर निर्भर है कि आपकी अपनी कुंडली में हर ग्रह कितना बलवान है, इसीलिए एक ही लग्न को अलग-अलग रत्न मिलते हैं। अपनी कुंडली से अपना रत्न देखें।

मकर लग्न के उपाय

शनि मंत्र · शनिवार को 108 बार

ॐ शं शनैश्चराय नमः

लग्नेश पूरी कुंडली का भार उठाते हैं: बलवान रहें तो शरीर और मन स्थिर रहते हैं। उनका दान, शनिवार को: काले तिल और लोहे। यह एक सुझाव है: अपनी श्रद्धा के अनुसार करें।

शनि के और उपाय

मेरा लग्न मेरे बारे में क्या कहता है?आचार्य पराशर आपका लग्न पूरी कुंडली और चल रही दशा के साथ पढ़ते हैं।

आम सवाल

मकर लग्न क्या है?

जन्म के समय पूर्व में मकर का उदित होना। इसके स्वामी शनि हैं।

मकर लग्न के लिए कौन-से ग्रह शुभ हैं?

शुभ: शुक्र और बुध; योगकारक: शुक्र; अशुभ: चंद्र, मंगल और गुरु (बृहत् पाराशर होरा शास्त्र, अध्याय 34)।

मकर लग्न के लिए कौन-सा रत्न ठीक है?

रत्न इंजन ने सबसे ज़्यादा हीरा चुना (मकर लग्न की 81% कुंडलियों में), पर यह आपकी अपनी कुंडली के बल पर निर्भर है। अशुभ ग्रहों के रत्नों से बचें।

कैसे जानें कि मेरा लग्न मकर है?

जन्म तिथि, सही समय और जगह चाहिए: लग्न लगभग हर दो घंटे में बदलता है (दिल्ली में मकर लगभग 1 घंटे 42 मिनट रहता है)। लग्न कैलकुलेटर इसे निकाल देता है।

क्या आपका लग्न मकर है?

आपका जन्म समय इसे तय करता है। लग्न कैलकुलेटर आपका लग्न, उसका अंश और नक्षत्र बताता है।

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