पंचांग · तिथि
अमावस्या कृष्ण पक्ष को पूरा करती है, पूर्णा तिथि, देवता पितर। अगली: रविवार 8 नवंबर, सुबह 11:28 से सोमवार 9 नवंबर, दोपहर 12:32 तक (नई दिल्ली)।
शुरू और समाप्ति, मिनट तक, नई दिल्ली
| तिथि | मास | शुरू | समाप्त | अवधि |
|---|---|---|---|---|
| अमावस्या | कार्तिक | रविवार 8 नवंबर, सुबह 11:28 | सोमवार 9 नवंबर, दोपहर 12:32 | 25 घंटे |
| अमावस्या | अगहन | मंगलवार 8 दिसंबर, सुबह 4:13 | बुधवार 9 दिसंबर, सुबह 6:21 | 26 घंटे |
| अमावस्या | पौष | बुधवार 6 जनवरी 2027, रात 11:14 | शुक्रवार 8 जनवरी 2027, रात 1:54 | 27 घंटे |
| अमावस्या | माघ | शुक्रवार 5 फ़रवरी 2027, शाम 7:05 | शनिवार 6 फ़रवरी 2027, रात 9:26 | 26 घंटे |
तिथि उसी दिन मानी जाती है जिस दिन वह सूर्योदय के समय चल रही हो, इसलिए सूर्योदय के बाद शुरू होने वाली तिथि आम तौर पर अगले दिन मानी जाती है। दूसरे शहरों में सूर्योदय के हिसाब से मिनट बदलते हैं; पंचांग में आपके शहर का समय है।
इनमें अमावस्या 25 से 27 घंटे तक चली: तिथि सूर्य से चंद्रमा की 12° की दूरी है, और चंद्रमा पृथ्वी के पास तेज़ चलता है, इसलिए कोई दो तिथियाँ बराबर लंबी नहीं होतीं।
पूर्णा तिथि, मुहूर्त चिंतामणि के पाँच वर्गों में
अमावस्या: पितृ तर्पण, दान और शांत पूजा के लिए, नई शुरुआत के लिए नहीं।
वर्ग हर पाँच तिथियों में दोहराते हैं: नंदा (1, 6, 11) आनंद के लिए, भद्रा (2, 7, 12) टिकाऊ काम के लिए, जया (3, 8, 13) विजय के लिए, रिक्ता (4, 9, 14) निपटाने के लिए, और पूर्णा (5, 10, 15) हर शुभ शुरुआत के लिए। मुहूर्त में वार, नक्षत्र और लग्न भी देखे जाते हैं। मुहूर्त
शुक्ल पक्ष में चंद्रमा अमावस्या से पूर्णिमा तक बढ़ता है; कृष्ण पक्ष में फिर घटता है। एक ही नाम की तिथि महीने में दो बार आती है, और उसके साथ पक्ष बोला जाता है।
अगली अमावस्या रविवार 8 नवंबर, सुबह 11:28 पर शुरू होकर सोमवार 9 नवंबर, दोपहर 12:32 पर ख़त्म होगी, नई दिल्ली के समय से।
पितृ तर्पण, दान और शांत पूजा; परंपरा अमावस्या पर नई शुरुआत नहीं करती।
अमावस्या: पितर।
पंचांग आपके शहर में सूर्योदय की तिथि और उसकी समाप्ति बताता है।
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