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बारह राशियों में दसवीं · निरयन (स्थिर तारों वाले) राशिचक्र के 270°–300°

मकर राशि
चंद्र राशि · स्वामी शनि

जन्म के समय चंद्रमा मकर में हों तो आपकी राशि मकर है: इसी से आपका राशिफल, साढ़े साती और नाम अक्षर देखे जाते हैं। जिनके चंद्रमा मकर में हों, वे अनुशासित, व्यावहारिक और महत्वाकांक्षी होते हैं। इसके स्वामी शनि हैं, नक्षत्र उत्तराषाढ़ा (चरण 2–4), श्रवण और धनिष्ठा (चरण 1–2) हैं, और परंपरा में मकर राशि के बच्चे का नाम भो, जा, जी, खी, खू, खे, खो, गा या गी अक्षर से रखा जाता है।

राशि चक्र में मकर राशि, बारह में दसवीं, शनि मीन में चिह्नितराशि चक्र में मकर राशि, बारह में दसवीं, शनि मीन में चिह्नित

मकर राशि एक नज़र में

राशि की अपनी बातें, जो हर मकर राशि वाले के लिए एक-सी हैं।

स्वामीशनि
आकृतिमकर (मगरमच्छ जैसा जलजीव)
तत्त्वपृथ्वी
स्वभावचर (गतिशील)
विषम या समसम (मेष से दूसरी, चौथी, छठी… राशि): शास्त्र सम राशियों को स्त्री और सौम्य कहते हैं; यह नाम भर है, स्वभाव पर फ़ैसला नहीं
कालपुरुष में (पूरा राशिचक्र एक शरीर के रूप में)घुटने (बृहत् जातक 1.4)
वश्य (मिलान में आपसी आकर्षण का वर्ग)पहले आधे में चतुष्पद (चौपाया), दूसरे आधे में जलचर (जल में रहने वाला)
शुभ अंक, रंग, दिन8, काला, शनिवार
देवताशनि देव
यहाँ बली या निर्बल ग्रहमंगल: उच्च (सबसे बली)
गुरु: नीच (सबसे निर्बल)

मकर राशि वालों का स्वभाव

चंद्रमा मन के कारक हैं, इसलिए उनकी राशि बताती है कि व्यक्ति कैसा महसूस करता है और किसी बात पर कैसे पेश आता है। लग्न और बाक़ी कुंडली इसे आगे गढ़ते हैं।

ऐसे लोग मेहनत करते हैं, लंबी योजना बनाते हैं और कम उम्र में ज़िम्मेदारी उठा लेते हैं; प्यार बातों से कम, कर्तव्य से ज़्यादा जताते हैं। ये कभी रूखे लग सकते हैं और भविष्य की सुरक्षा को लेकर चिंतित रहते हैं। मकर शनि की राशि है, इसलिए इनकी सफलता धीरे आती है, पर टिकती है।

वराहमिहिर क्या कहते हैं

बृहत् जातक के अनुसार चंद्र मकर राशि में हों तो जातक जीवनसाथी और संतान से गहरा लगाव रखता है, धर्म के काम करते दिखना पसंद करता है, सलाह मानता है और व्यवहार में मधुर होता है। वह बलवान, लेखन करने वाला और घूमने का शौकीन होता है, काम धीरे-धीरे करता है और ठंड सहन नहीं कर पाता। श्लोक उसे कंजूस भी कहता है, और उसकी आँखें सुंदर, कमर पतली और टाँगें दुबली बताता है। वराहमिहिर स्वयं कहते हैं (17.13) कि यह फल पूरा तभी मिलता है जब जन्म के समय चंद्रमा, मकर राशि और उसके स्वामी शनि तीनों बली हों।

बृहत् जातक 17.10

ख़ूबियाँ

मकर के स्वामी शनि धैर्य से की गई मेहनत के कारक हैं, इसलिए ये ऐसे काम से नहीं घबराते जिसका फल बरसों बाद दिखे, जैसे मंज़िल-दर-मंज़िल घर बनाना या क़र्ज़ समय से पहले चुका देना। चर पृथ्वी राशि होने से ये व्यावहारिक मुश्किलों पर इंतज़ार किए बिना काम शुरू कर देते हैं: टपकती छत ठीक हो जाती है, पेंशन के काग़ज़ जमा हो जाते हैं।

किन बातों का ध्यान रखें

मकर वालों को अक्सर लगता है कि आराम कमाकर ही मिलना चाहिए, और बरसों काम में जुटे रहने के बाद ही समझ आता है कि इस मेहनत की क़ीमत सेहत और परिवार के समय से चुकाई गई। शनि एक गंभीर नज़रिया भी देते हैं, जो किसी योजना के शुरू होने से पहले ही उसमें बुरा होने की आशंका देख सकता है। हफ़्ते में आधा दिन परिवार, सैर या मंदिर के लिए रखना, दफ़्तर के किसी काम के बिना, इस लंबी चढ़ाई को बोझ नहीं बनने देता।

मकर राशि: काम-काज, विवाह और सेहत

ज्योतिष चंद्र राशि को लग्न मानकर (चंद्र लग्न) भी पढ़ता है: काम के लिए चंद्र से दसवाँ भाव, विवाह के लिए सातवाँ, और सेहत के लिए राशि का अपना अंग और तत्त्व। सातवीं राशि जीवनसाथी के स्वभाव का संकेत है, इसका मतलब यह नहीं कि जीवनसाथी की राशि यही होगी। यह परंपरा है, भविष्यवाणी नहीं; पूरा फल आपकी कुंडली तय करती है।

काम-काज

मकर के लिए चंद्र से दसवीं राशि तुला है, जिसके स्वामी शुक्र हैं, इसलिए परंपरा कला, सज्जा, आतिथ्य, वाहन और साझेदारी के व्यापार की ओर देखती है। राशि के स्वामी शनि परिश्रम, इंजीनियरिंग, भूमि और अनुशासन जोड़ते हैं, इसलिए निर्माण, ज़मीन-जायदाद, परिवहन का कारोबार या स्थायी सरकारी नौकरी इस राशि के लिए ठीक बैठते हैं। जिस पद में बरसों की सेवा का फल मिले और आगे बढ़ने की सीढ़ी साफ़ हो, वह हर साल बदलने वाले काम से मकर वालों के लिए बेहतर है।

विवाह

चंद्र से सातवीं राशि कर्क है, जिसके स्वामी चंद्र हैं, इसलिए परंपरा ऐसे जीवनसाथी की बात करती है जो ख़याल रखने वाला, भावुक और घर-परिवार से जुड़ा हो। मकर वाले घर में व्यवस्था लाते हैं, और ऐसा साथी अपनापन। दिन ढलने पर कहे गए दो मीठे बोल ऐसे साथी के लिए बहुत मायने रखते हैं।

सेहत

परंपरा कालपुरुष के शरीर में मकर को घुटनों से जोड़ती है (बृहत् जातक 1.4), और पृथ्वी तत्त्व की राशि होने से सहनशील शरीर से। ऊपर का श्लोक कमर पतली और टाँगें दुबली बताता है, और यह भी कि मकर वालों को ठंड नहीं सुहाती, इसलिए सर्दी में गरम कपड़े पहनें और घुटनों व टाँगों की देखभाल करें।

मकर राशि के नक्षत्र और नाम अक्षर

हर राशि में नौ चरण होते हैं, हर एक किसी नक्षत्र का एक चौथाई। जन्म के समय चंद्रमा जिस चरण में हों, परंपरा में नाम उसी के अक्षर से रखा जाता है।

नक्षत्रस्वामीमकर में अंशमकर में चरणनाम अक्षर
उत्तराषाढ़ासूर्य0°–10°2–4भो, जा, जी
श्रवणचंद्र10°–23°20′चारोंखी, खू, खे, खो
धनिष्ठामंगल23°20′–30°1–2गा, गी

नक्षत्र और चरण से बच्चों के नाम →

मकर राशि के लिए अभी शनि, गुरु और राहु

ये भाव चंद्र राशि से गिने गए हैं, जैसे राशिफल में। चंद्र से बारहवें, पहले या दूसरे भाव में शनि हों तो साढ़े साती होती है, लगभग साढ़े सात साल; चौथे (कंटक) या आठवें (अष्टम) में हों तो ढैय्या, लगभग ढाई साल। यह हर मकर राशि वाले के लिए एक जैसा है; असर कैसा होगा, यह आपकी कुंडली तय करती है।

  • शनिअभी मीन में, चंद्र राशि से तीसरे भाव में हैं, इसलिए न साढ़े साती है, न ढैय्या; तीसरा भाव उन तीन भावों में है जहाँ चंद्र से शनि शुभ फल देते हैं (फलदीपिका 26.2)। आगे: कंटक शनि (ढैय्या, शनि चौथे भाव में) 3 जून 2027 से 20 अक्टूबर 2027 तक, फिर 23 फ़रवरी 2028 से 8 अगस्त 2029 तक, फिर 5 अक्टूबर 2029 से 17 अप्रैल 2030 तक और अष्टम शनि (ढैय्या, शनि आठवें भाव में) 27 अगस्त 2036 से 22 अक्टूबर 2038 तक, फिर 5 अप्रैल 2039 से 13 जुलाई 2039 तक। साढ़े साती · ढैय्या की तारीख़ें।
  • गुरुअभी चंद्र राशि से सातवें भाव (विवाह, साझेदार और कारोबारी लेन-देन) में हैं। इसके बाद 31 अक्टूबर 2026 से आठवें भाव (सेहत, अचानक की घटनाएँ, छिपी बातें और ससुराल) में, 25 जनवरी 2027 से फिर सातवें भाव में, 26 जून 2027 से फिर आठवें भाव में और 26 नवंबर 2027 से नौवें भाव (पिता, भाग्य, धर्म और लंबी यात्राएँ) में रहेंगे।
  • राहुअभी चंद्र राशि से दूसरे भाव (परिवार, जमा-पूँजी और बोलचाल) में हैं। इसके बाद 5 दिसंबर 2026 से पहले भाव (अपनी सेहत, आत्मविश्वास और दूसरों की नज़र में आपकी छवि) में रहेंगे।

मकर राशिफल 2027: महीने दर महीने →

मकर राशि का उपाय: स्वामी शनि

राशि को उसके स्वामी के ज़रिए बल मिलता है। ये उपाय मुफ़्त हैं, और हर एक के साथ उसकी वजह है।

  • शनि का मंत्र, शनिवार को 108 बारॐ शं शनैश्चराय नमःमकर राशि के स्वामी का सबसे सरल मंत्र, टिकाऊ काम, धैर्य और अनुशासन के लिए।
  • बीज मंत्र, नियमित जप के लिएॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमःशनि के पूरे जप के लिए, रोज़ 108 बार, जब मकर राशि के स्वामी को बल चाहिए: उनकी दशा (ग्रह की अवधि) में, या जब वे आपकी कुंडली में निर्बल हों।
  • शनि देव की पूजामकर राशि से परंपरा में जुड़े देवता, जिनकी पूजा धैर्य और लगन के लिए की जाती है; मंदिर में दर्शन या घर में दीया सबसे सरल रूप है।

रत्न राशि से नहीं बताया जाता। जो रत्न एक कुंडली को फ़ायदा देता है, वही दूसरी को नुकसान कर सकता है, इसलिए रत्न पूरी कुंडली देखकर चुना जाता है।

कुंडली मिलान में मकर राशि

गुण मिलान के आठ कूटों (मिलान के हिस्सों) में से चार सिर्फ़ राशि से देखे जाते हैं, जो 36 में से 15 अंक के हैं: वर्ण (1, राशि का वर्ग), वश्य (2, आपसी आकर्षण), ग्रह मैत्री (5, स्वामियों की मित्रता) और भकूट (7, प्रेम और परिवार की भलाई)।

  • सिर्फ़ राशि से सबसे अच्छा और सबसे कठिन मेलमकर को लड़के की राशि मानें, तो बाक़ी ग्यारह राशियों में मकर का सबसे ज़्यादा मेल तुला से (14/15) और सबसे कम सिंह से (1/15) है। एक ही राशि के दो लोगों को इन चारों पर पूरे 15 अंक मिलते हैं (जब दोनों के चंद्रमा राशि के एक ही आधे में हों)। वर्ण और वश्य में लड़के और लड़की की राशि अदल-बदल करने से अंक बदल सकते हैं, इसलिए जोड़ी वाले पेज पर दोनों तरह से गिनती दी गई है। बाक़ी चार कूट, 21 अंक, दोनों के नक्षत्र से निकलते हैं।
  • भकूटभकूट, 7 अंकों का कूट, तब 0 देता है जब दोनों राशियाँ एक-दूसरे से दूसरे-बारहवें, पाँचवें-नौवें या छठे-आठवें स्थान पर हों। धनु, कन्या, मिथुन और सिंह के साथ भकूट दोष बनता है और बना रहता है। कुंभ और वृषभ के साथ दोष बनता है पर रद्द हो जाता है, क्योंकि दोनों राशियों के स्वामी एक ही ग्रह हैं या आपस में मित्र: भकूट के 7 में से 0 अंक ही रहते हैं, पर ज्योतिषी इसे मिलान में रुकावट नहीं मानते।
  • वश्य (2 अंक)मकर पहले आधे में चतुष्पद (चौपाया), दूसरे आधे में जलचर (जल में रहने वाला) राशि है। वश्य कूट (आपसी आकर्षण) में मकर को पूरे 2 अंक तब मिलते हैं जब साथी की राशि मकर, मेष या वृषभ हो। ये अंक मकर के पहले आधे (0°–15°) के हैं। चंद्रमा मकर में 15° के बाद हों तो राशि जलचर (जल में रहने वाला) गिनी जाती है और अंक बदल जाते हैं; हमारा कुंडली मिलान चंद्रमा के ठीक अंश से गिनती करता है।

हर राशि से मकर का मेल, कूट दर कूट → · पूरा कुंडली मिलान

पराशर के शब्दों में मकर राशि

राशि का अपना स्वरूप, उसमें बैठे ग्रहों से अलग।

  • रंग: चित्र-विचित्र (कई रंगों वाला)
  • बड़ा शरीर
  • पूर्वार्ध चतुष्पद (चार पैरों वाला), उत्तरार्ध बिना पैरों का जलचर
  • रात्रि में बली
  • दिशा: दक्षिण
  • वन और भूमि दोनों में वास
  • तमोगुणी
  • पृथ्वी तत्त्व
  • पृष्ठोदय (पीठ से उदय होने वाली)
  • स्वामी: शनि
  • चर, स्त्री और सौम्य राशि
  • वात प्रकृति

सत्त्व, रज और तम तीन गुण हैं (शांत समझ, सक्रियता और जड़ता)। वात, पित्त और कफ आयुर्वेद के तीन दोष हैं (शरीर में वायु, अग्नि और जल)। राशि का उदय सिर की ओर से (शीर्षोदय) या पीठ की ओर से (पृष्ठोदय) होता है, जैसे उसकी आकृति पूर्व में उगती है; शास्त्र इसे, दिन या रात के बल के साथ, फल का समय देखने में लेते हैं। पराशर राशि की अपनी प्रकृति बताते हैं, और ऊपर वराहमिहिर उस व्यक्ति की जिसके चंद्रमा इसमें हों, इसलिए दोनों में अंतर हो सकता है।

बृहत् पाराशर होरा शास्त्र 4.5, 4.19–20

आम सवाल

मकर राशि क्या है?

मकर बारह राशियों में दसवीं है, निरयन राशिचक्र के 270°–300°, और इसके स्वामी शनि हैं। जन्म के समय चंद्रमा इसमें हों तो यह आपकी राशि है।

मकर राशि के नाम अक्षर क्या हैं?

भो, जा, जी, खी, खू, खे, खो, गा, गी: नौ चरणों के लिए एक-एक, क्रम से। जन्म के समय चंद्रमा जिस चरण में हों, उसी का अक्षर लिया जाता है।

मकर राशि का सबसे अच्छा मेल किन राशियों से है?

राशि से तय होने वाले चार कूटों पर बाक़ी ग्यारह राशियों में मकर का सबसे अच्छा मेल तुला से है (14/15, मकर को वर की राशि मानकर); एक ही राशि के दो लोगों को पूरे 15 अंक मिलते हैं। असली मिलान के लिए दोनों कुंडलियाँ चाहिए: 36 में से 21 अंक नक्षत्र के कूटों से आते हैं।

मकर राशि का मंत्र क्या है?

इसके स्वामी शनि का मंत्र ॐ शं शनैश्चराय नमः, शनिवार को 108 बार। बीज मंत्र और देवता ऊपर उपाय वाले हिस्से में हैं।

क्या मकर राशि पर अभी साढ़े साती या ढैय्या है?

अभी दोनों में से कोई नहीं। शनि मीन में हैं, मकर से तीसरे भाव में। आगे पहले कंटक शनि (ढैय्या, शनि चौथे भाव में) 3 जून 2027 से 20 अक्टूबर 2027 तक, फिर 23 फ़रवरी 2028 से 8 अगस्त 2029 तक, फिर 5 अक्टूबर 2029 से 17 अप्रैल 2030 तक; फिर अष्टम शनि (ढैय्या, शनि आठवें भाव में) 27 अगस्त 2036 से 22 अक्टूबर 2038 तक, फिर 5 अप्रैल 2039 से 13 जुलाई 2039 तक।

मकर राशि के लिए 2027 कैसा है?

2027 में सबसे अच्छे महीने अप्रैल, मई और दिसंबर हैं और सबसे कमज़ोर जुलाई, अगस्त और अक्टूबर। 2027 के राशिफल में हर महीने का हाल है, ऊपर बताए शनि, गुरु और राहु के बदलावों के साथ।

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आपका लग्न, नक्षत्र का चरण और दशा बाक़ी बताते हैं। आचार्य पराशर (AI ज्योतिषी) आपकी पूरी कुंडली देखकर जवाब देते हैं।

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AI वैदिक ज्योतिषी। किसी भी भारतीय भाषा में चैट करें; कॉल हिंदी और अंग्रेज़ी में।ऐसे पूछें“मेरी कुंडली का पूरा और विस्तार से विश्लेषण कीजिए”“मेरी जन्म कुंडली में कौन-से दुर्लभ योग हैं?”“इस महीने की मेरी सूक्ष्म दशा का विश्लेषण कीजिए”चैट कॉल शुल्क हर मिनट के हिसाब से लगता है, और सिर्फ़ तब तक जब तक चैट या कॉल चालू रहे। जब चाहें बंद करें।

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9 विस्तृत रिपोर्ट, जिनमें जन्म कुंडली, कुंडली मिलान और वार्षिक भविष्यवाणी हैं।हिंदी, अंग्रेज़ी और हिंग्लिशरिपोर्ट देखें
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