बारह राशियों में दसवीं · निरयन (स्थिर तारों वाले) राशिचक्र के 270°–300°
जन्म के समय चंद्रमा मकर में हों तो आपकी राशि मकर है: इसी से आपका राशिफल, साढ़े साती और नाम अक्षर देखे जाते हैं। जिनके चंद्रमा मकर में हों, वे अनुशासित, व्यावहारिक और महत्वाकांक्षी होते हैं। इसके स्वामी शनि हैं, नक्षत्र उत्तराषाढ़ा (चरण 2–4), श्रवण और धनिष्ठा (चरण 1–2) हैं, और परंपरा में मकर राशि के बच्चे का नाम भो, जा, जी, खी, खू, खे, खो, गा या गी अक्षर से रखा जाता है।
राशि की अपनी बातें, जो हर मकर राशि वाले के लिए एक-सी हैं।
चंद्रमा मन के कारक हैं, इसलिए उनकी राशि बताती है कि व्यक्ति कैसा महसूस करता है और किसी बात पर कैसे पेश आता है। लग्न और बाक़ी कुंडली इसे आगे गढ़ते हैं।
ऐसे लोग मेहनत करते हैं, लंबी योजना बनाते हैं और कम उम्र में ज़िम्मेदारी उठा लेते हैं; प्यार बातों से कम, कर्तव्य से ज़्यादा जताते हैं। ये कभी रूखे लग सकते हैं और भविष्य की सुरक्षा को लेकर चिंतित रहते हैं। मकर शनि की राशि है, इसलिए इनकी सफलता धीरे आती है, पर टिकती है।
बृहत् जातक के अनुसार चंद्र मकर राशि में हों तो जातक जीवनसाथी और संतान से गहरा लगाव रखता है, धर्म के काम करते दिखना पसंद करता है, सलाह मानता है और व्यवहार में मधुर होता है। वह बलवान, लेखन करने वाला और घूमने का शौकीन होता है, काम धीरे-धीरे करता है और ठंड सहन नहीं कर पाता। श्लोक उसे कंजूस भी कहता है, और उसकी आँखें सुंदर, कमर पतली और टाँगें दुबली बताता है। वराहमिहिर स्वयं कहते हैं (17.13) कि यह फल पूरा तभी मिलता है जब जन्म के समय चंद्रमा, मकर राशि और उसके स्वामी शनि तीनों बली हों।
बृहत् जातक 17.10
मकर के स्वामी शनि धैर्य से की गई मेहनत के कारक हैं, इसलिए ये ऐसे काम से नहीं घबराते जिसका फल बरसों बाद दिखे, जैसे मंज़िल-दर-मंज़िल घर बनाना या क़र्ज़ समय से पहले चुका देना। चर पृथ्वी राशि होने से ये व्यावहारिक मुश्किलों पर इंतज़ार किए बिना काम शुरू कर देते हैं: टपकती छत ठीक हो जाती है, पेंशन के काग़ज़ जमा हो जाते हैं।
मकर वालों को अक्सर लगता है कि आराम कमाकर ही मिलना चाहिए, और बरसों काम में जुटे रहने के बाद ही समझ आता है कि इस मेहनत की क़ीमत सेहत और परिवार के समय से चुकाई गई। शनि एक गंभीर नज़रिया भी देते हैं, जो किसी योजना के शुरू होने से पहले ही उसमें बुरा होने की आशंका देख सकता है। हफ़्ते में आधा दिन परिवार, सैर या मंदिर के लिए रखना, दफ़्तर के किसी काम के बिना, इस लंबी चढ़ाई को बोझ नहीं बनने देता।
ज्योतिष चंद्र राशि को लग्न मानकर (चंद्र लग्न) भी पढ़ता है: काम के लिए चंद्र से दसवाँ भाव, विवाह के लिए सातवाँ, और सेहत के लिए राशि का अपना अंग और तत्त्व। सातवीं राशि जीवनसाथी के स्वभाव का संकेत है, इसका मतलब यह नहीं कि जीवनसाथी की राशि यही होगी। यह परंपरा है, भविष्यवाणी नहीं; पूरा फल आपकी कुंडली तय करती है।
मकर के लिए चंद्र से दसवीं राशि तुला है, जिसके स्वामी शुक्र हैं, इसलिए परंपरा कला, सज्जा, आतिथ्य, वाहन और साझेदारी के व्यापार की ओर देखती है। राशि के स्वामी शनि परिश्रम, इंजीनियरिंग, भूमि और अनुशासन जोड़ते हैं, इसलिए निर्माण, ज़मीन-जायदाद, परिवहन का कारोबार या स्थायी सरकारी नौकरी इस राशि के लिए ठीक बैठते हैं। जिस पद में बरसों की सेवा का फल मिले और आगे बढ़ने की सीढ़ी साफ़ हो, वह हर साल बदलने वाले काम से मकर वालों के लिए बेहतर है।
चंद्र से सातवीं राशि कर्क है, जिसके स्वामी चंद्र हैं, इसलिए परंपरा ऐसे जीवनसाथी की बात करती है जो ख़याल रखने वाला, भावुक और घर-परिवार से जुड़ा हो। मकर वाले घर में व्यवस्था लाते हैं, और ऐसा साथी अपनापन। दिन ढलने पर कहे गए दो मीठे बोल ऐसे साथी के लिए बहुत मायने रखते हैं।
परंपरा कालपुरुष के शरीर में मकर को घुटनों से जोड़ती है (बृहत् जातक 1.4), और पृथ्वी तत्त्व की राशि होने से सहनशील शरीर से। ऊपर का श्लोक कमर पतली और टाँगें दुबली बताता है, और यह भी कि मकर वालों को ठंड नहीं सुहाती, इसलिए सर्दी में गरम कपड़े पहनें और घुटनों व टाँगों की देखभाल करें।
हर राशि में नौ चरण होते हैं, हर एक किसी नक्षत्र का एक चौथाई। जन्म के समय चंद्रमा जिस चरण में हों, परंपरा में नाम उसी के अक्षर से रखा जाता है।
| नक्षत्र | स्वामी | मकर में अंश | मकर में चरण | नाम अक्षर |
|---|---|---|---|---|
| उत्तराषाढ़ा | सूर्य | 0°–10° | 2–4 | भो, जा, जी |
| श्रवण | चंद्र | 10°–23°20′ | चारों | खी, खू, खे, खो |
| धनिष्ठा | मंगल | 23°20′–30° | 1–2 | गा, गी |
ये भाव चंद्र राशि से गिने गए हैं, जैसे राशिफल में। चंद्र से बारहवें, पहले या दूसरे भाव में शनि हों तो साढ़े साती होती है, लगभग साढ़े सात साल; चौथे (कंटक) या आठवें (अष्टम) में हों तो ढैय्या, लगभग ढाई साल। यह हर मकर राशि वाले के लिए एक जैसा है; असर कैसा होगा, यह आपकी कुंडली तय करती है।
राशि को उसके स्वामी के ज़रिए बल मिलता है। ये उपाय मुफ़्त हैं, और हर एक के साथ उसकी वजह है।
रत्न राशि से नहीं बताया जाता। जो रत्न एक कुंडली को फ़ायदा देता है, वही दूसरी को नुकसान कर सकता है, इसलिए रत्न पूरी कुंडली देखकर चुना जाता है।
गुण मिलान के आठ कूटों (मिलान के हिस्सों) में से चार सिर्फ़ राशि से देखे जाते हैं, जो 36 में से 15 अंक के हैं: वर्ण (1, राशि का वर्ग), वश्य (2, आपसी आकर्षण), ग्रह मैत्री (5, स्वामियों की मित्रता) और भकूट (7, प्रेम और परिवार की भलाई)।
राशि का अपना स्वरूप, उसमें बैठे ग्रहों से अलग।
सत्त्व, रज और तम तीन गुण हैं (शांत समझ, सक्रियता और जड़ता)। वात, पित्त और कफ आयुर्वेद के तीन दोष हैं (शरीर में वायु, अग्नि और जल)। राशि का उदय सिर की ओर से (शीर्षोदय) या पीठ की ओर से (पृष्ठोदय) होता है, जैसे उसकी आकृति पूर्व में उगती है; शास्त्र इसे, दिन या रात के बल के साथ, फल का समय देखने में लेते हैं। पराशर राशि की अपनी प्रकृति बताते हैं, और ऊपर वराहमिहिर उस व्यक्ति की जिसके चंद्रमा इसमें हों, इसलिए दोनों में अंतर हो सकता है।
बृहत् पाराशर होरा शास्त्र 4.5, 4.19–20
मकर बारह राशियों में दसवीं है, निरयन राशिचक्र के 270°–300°, और इसके स्वामी शनि हैं। जन्म के समय चंद्रमा इसमें हों तो यह आपकी राशि है।
भो, जा, जी, खी, खू, खे, खो, गा, गी: नौ चरणों के लिए एक-एक, क्रम से। जन्म के समय चंद्रमा जिस चरण में हों, उसी का अक्षर लिया जाता है।
राशि से तय होने वाले चार कूटों पर बाक़ी ग्यारह राशियों में मकर का सबसे अच्छा मेल तुला से है (14/15, मकर को वर की राशि मानकर); एक ही राशि के दो लोगों को पूरे 15 अंक मिलते हैं। असली मिलान के लिए दोनों कुंडलियाँ चाहिए: 36 में से 21 अंक नक्षत्र के कूटों से आते हैं।
इसके स्वामी शनि का मंत्र ॐ शं शनैश्चराय नमः, शनिवार को 108 बार। बीज मंत्र और देवता ऊपर उपाय वाले हिस्से में हैं।
अभी दोनों में से कोई नहीं। शनि मीन में हैं, मकर से तीसरे भाव में। आगे पहले कंटक शनि (ढैय्या, शनि चौथे भाव में) 3 जून 2027 से 20 अक्टूबर 2027 तक, फिर 23 फ़रवरी 2028 से 8 अगस्त 2029 तक, फिर 5 अक्टूबर 2029 से 17 अप्रैल 2030 तक; फिर अष्टम शनि (ढैय्या, शनि आठवें भाव में) 27 अगस्त 2036 से 22 अक्टूबर 2038 तक, फिर 5 अप्रैल 2039 से 13 जुलाई 2039 तक।
2027 में सबसे अच्छे महीने अप्रैल, मई और दिसंबर हैं और सबसे कमज़ोर जुलाई, अगस्त और अक्टूबर। 2027 के राशिफल में हर महीने का हाल है, ऊपर बताए शनि, गुरु और राहु के बदलावों के साथ।
आपका लग्न, नक्षत्र का चरण और दशा बाक़ी बताते हैं। आचार्य पराशर (AI ज्योतिषी) आपकी पूरी कुंडली देखकर जवाब देते हैं।
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