बारह राशियों में तीसरी · निरयन (स्थिर तारों वाले) राशिचक्र के 60°–90°
जन्म के समय चंद्रमा मिथुन में हों तो आपकी राशि मिथुन है: इसी से आपका राशिफल, साढ़े साती और नाम अक्षर देखे जाते हैं। जिनके चंद्रमा मिथुन में हों, वे जिज्ञासु, बातूनी और हाज़िरजवाब होते हैं। इसके स्वामी बुध हैं, नक्षत्र मृगशिरा (चरण 3–4), आर्द्रा और पुनर्वसु (चरण 1–3) हैं, और परंपरा में मिथुन राशि के बच्चे का नाम का, की, कू, घ, ङ, छ, के, को या हा अक्षर से रखा जाता है।
राशि की अपनी बातें, जो हर मिथुन राशि वाले के लिए एक-सी हैं।
चंद्रमा मन के कारक हैं, इसलिए उनकी राशि बताती है कि व्यक्ति कैसा महसूस करता है और किसी बात पर कैसे पेश आता है। लग्न और बाक़ी कुंडली इसे आगे गढ़ते हैं।
ऐसे लोग जल्दी सीखते हैं, दूसरों का साथ पसंद करते हैं और एक साथ कई काम संभाल लेते हैं; ऊब इनकी सबसे बड़ी दुश्मन है, और मन भटकता या राय बदलता रहता है। मिथुन बुध की राशि है, इसलिए बातचीत, व्यापार, लेखन और तेज़ दिमाग़ वाले कामों में ये आगे रहते हैं।
बृहत् जातक के अनुसार चंद्र मिथुन राशि में हों तो जातक तीक्ष्ण बुद्धि वाला, शास्त्रों का जानकार और लोगों के बीच संदेश पहुँचाने में निपुण होता है। वह हँसमुख, दूसरों के मन की बात भाँप लेने वाला, पासे के खेल (द्यूत) में कुशल, मीठा बोलने वाला और संगीत तथा नृत्य का प्रेमी होता है। श्लोक उसे सुंदर रूप, घुँघराले बाल, ऊँची नाक और अच्छी भूख भी देता है। वराहमिहिर स्वयं कहते हैं (17.13) कि यह फल पूरा तभी मिलता है जब जन्म के समय चंद्रमा, मिथुन राशि और उसके स्वामी बुध तीनों बली हों।
बृहत् जातक 17.3
बुध की द्विस्वभाव राशि होने से मिथुन वाले लोगों से जल्दी घुल-मिल जाते हैं और एक ही बात तीन तरह से समझा सकते हैं, जब तक सामने वाला समझ न ले; इसीलिए माता-पिता को बैंक का नया तरीक़ा समझाना हो या नगर निगम को अर्ज़ी लिखनी हो, घर में यह ज़िम्मेदारी अक्सर इन्हीं की होती है। बुध गणना के भी कारक हैं, इसलिए घर का हिसाब-किताब अक्सर इन्हीं के हाथ में सबसे सुरक्षित रहता है।
बातों में तेज़ होने से मिथुन वालों की हल्के में कही बात कभी-कभी उम्मीद से ज़्यादा दूर तक पहुँच जाती है, ख़ासकर रिश्तेदारों के बीच। शास्त्र का नियम है कि पाप ग्रह (शनि, मंगल, राहु जैसे कष्ट देने वाले ग्रह) के साथ बैठकर बुध भी पापी हो जाते हैं, और मिथुन वाले भी अपनी संगत का रंग जल्दी पकड़ते हैं। हर शाम थोड़ी देर बिना किसी ख़बर या संदेश के टहल लेना इस व्यस्त मन को ठहरने का मौक़ा देता है।
ज्योतिष चंद्र राशि को लग्न मानकर (चंद्र लग्न) भी पढ़ता है: काम के लिए चंद्र से दसवाँ भाव, विवाह के लिए सातवाँ, और सेहत के लिए राशि का अपना अंग और तत्त्व। सातवीं राशि जीवनसाथी के स्वभाव का संकेत है, इसका मतलब यह नहीं कि जीवनसाथी की राशि यही होगी। यह परंपरा है, भविष्यवाणी नहीं; पूरा फल आपकी कुंडली तय करती है।
मिथुन के लिए चंद्र से दसवीं राशि मीन है, जिसके स्वामी गुरु हैं, इसलिए परंपरा अध्यापन, सलाह, क़ानून और वित्त की ओर देखती है। राशि के स्वामी बुध व्यापार, लेखन, हिसाब-किताब और आईटी जोड़ते हैं, इसलिए वाणिज्य का अध्यापक, लेखाकार, वकील या संपादक होना इस राशि के लिए स्वाभाविक है। पराशर बुध को वाणी देने वाले ग्रह कहते हैं, और बोलचाल की यह कुशलता मध्यस्थता, बिक्री और मोल-भाव वाले हर काम में मदद करती है।
चंद्र से सातवीं राशि धनु है, जिसके स्वामी भी गुरु हैं, इसलिए परंपरा ऐसे जीवनसाथी की बात करती है जो सिद्धांतों वाला, खुले दिल का और विद्या या धर्म में रुचि रखने वाला हो। धनु भी, मिथुन की तरह, द्विस्वभाव राशि है, इसलिए आपस में तालमेल जल्दी बैठता है, और लंबी बातचीत और साझा रुचियाँ दांपत्य को जीवंत रखती हैं। मिथुन वालों की बदलती राय और ऐसे साथी की खरी बात कभी-कभी टकरा सकती हैं, इसलिए एक-दूसरे की बातों को हल्के मन से लेना अच्छा रहता है।
परंपरा कालपुरुष के शरीर में मिथुन को वक्ष, यानी छाती, से जोड़ती है (बृहत् जातक 1.4), और वायु तत्त्व की राशि होने से श्वास और हमेशा सक्रिय रहने वाले मन से। इसलिए समझदारी इसी में है कि भोजन समय पर हो, खुली हवा मिले और मन को सचमुच आराम मिले।
हर राशि में नौ चरण होते हैं, हर एक किसी नक्षत्र का एक चौथाई। जन्म के समय चंद्रमा जिस चरण में हों, परंपरा में नाम उसी के अक्षर से रखा जाता है।
| नक्षत्र | स्वामी | मिथुन में अंश | मिथुन में चरण | नाम अक्षर |
|---|---|---|---|---|
| मृगशिरा | मंगल | 0°–6°40′ | 3–4 | का, की |
| आर्द्रा | राहु | 6°40′–20° | चारों | कू, घ, ङ, छ |
| पुनर्वसु | गुरु | 20°–30° | 1–3 | के, को, हा |
ये भाव चंद्र राशि से गिने गए हैं, जैसे राशिफल में। चंद्र से बारहवें, पहले या दूसरे भाव में शनि हों तो साढ़े साती होती है, लगभग साढ़े सात साल; चौथे (कंटक) या आठवें (अष्टम) में हों तो ढैय्या, लगभग ढाई साल। यह हर मिथुन राशि वाले के लिए एक जैसा है; असर कैसा होगा, यह आपकी कुंडली तय करती है।
राशि को उसके स्वामी के ज़रिए बल मिलता है। ये उपाय मुफ़्त हैं, और हर एक के साथ उसकी वजह है।
रत्न राशि से नहीं बताया जाता। जो रत्न एक कुंडली को फ़ायदा देता है, वही दूसरी को नुकसान कर सकता है, इसलिए रत्न पूरी कुंडली देखकर चुना जाता है।
गुण मिलान के आठ कूटों (मिलान के हिस्सों) में से चार सिर्फ़ राशि से देखे जाते हैं, जो 36 में से 15 अंक के हैं: वर्ण (1, राशि का वर्ग), वश्य (2, आपसी आकर्षण), ग्रह मैत्री (5, स्वामियों की मित्रता) और भकूट (7, प्रेम और परिवार की भलाई)।
राशि का अपना स्वरूप, उसमें बैठे ग्रहों से अलग।
वात, पित्त और कफ आयुर्वेद के तीन दोष हैं (शरीर में वायु, अग्नि और जल)। राशि का उदय सिर की ओर से (शीर्षोदय) या पीठ की ओर से (पृष्ठोदय) होता है, जैसे उसकी आकृति पूर्व में उगती है; शास्त्र इसे, दिन या रात के बल के साथ, फल का समय देखने में लेते हैं। पराशर राशि की अपनी प्रकृति बताते हैं, और ऊपर वराहमिहिर उस व्यक्ति की जिसके चंद्रमा इसमें हों, इसलिए दोनों में अंतर हो सकता है।
बृहत् पाराशर होरा शास्त्र 4.5, 4.9
मिथुन बारह राशियों में तीसरी है, निरयन राशिचक्र के 60°–90°, और इसके स्वामी बुध हैं। जन्म के समय चंद्रमा इसमें हों तो यह आपकी राशि है।
का, की, कू, घ, ङ, छ, के, को, हा: नौ चरणों के लिए एक-एक, क्रम से। जन्म के समय चंद्रमा जिस चरण में हों, उसी का अक्षर लिया जाता है।
राशि से तय होने वाले चार कूटों पर बाक़ी ग्यारह राशियों में मिथुन का सबसे अच्छा मेल कन्या से है (14/15, मिथुन को वर की राशि मानकर); एक ही राशि के दो लोगों को पूरे 15 अंक मिलते हैं। असली मिलान के लिए दोनों कुंडलियाँ चाहिए: 36 में से 21 अंक नक्षत्र के कूटों से आते हैं।
इसके स्वामी बुध का मंत्र ॐ बुधाय नमः, बुधवार को 108 बार। बीज मंत्र और देवता ऊपर उपाय वाले हिस्से में हैं।
अभी दोनों में से कोई नहीं। शनि मीन में हैं, मिथुन से दसवें भाव में। आगे पहले साढ़े साती 8 अगस्त 2029 से 5 अक्टूबर 2029 तक, फिर 17 अप्रैल 2030 से 27 अगस्त 2036 तक; फिर कंटक शनि (ढैय्या, शनि चौथे भाव में) 22 अक्टूबर 2038 से 5 अप्रैल 2039 तक, फिर 13 जुलाई 2039 से 28 जनवरी 2041 तक, फिर 6 फ़रवरी 2041 से 26 सितंबर 2041 तक।
2027 में सबसे अच्छे महीने मई और जून हैं और सबसे कमज़ोर जनवरी और नवंबर। 2027 के राशिफल में हर महीने का हाल है, ऊपर बताए शनि, गुरु और राहु के बदलावों के साथ।
आपका लग्न, नक्षत्र का चरण और दशा बाक़ी बताते हैं। आचार्य पराशर (AI ज्योतिषी) आपकी पूरी कुंडली देखकर जवाब देते हैं।
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