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बारह राशियों में तीसरी · निरयन (स्थिर तारों वाले) राशिचक्र के 60°–90°

मिथुन राशि
चंद्र राशि · स्वामी बुध

जन्म के समय चंद्रमा मिथुन में हों तो आपकी राशि मिथुन है: इसी से आपका राशिफल, साढ़े साती और नाम अक्षर देखे जाते हैं। जिनके चंद्रमा मिथुन में हों, वे जिज्ञासु, बातूनी और हाज़िरजवाब होते हैं। इसके स्वामी बुध हैं, नक्षत्र मृगशिरा (चरण 3–4), आर्द्रा और पुनर्वसु (चरण 1–3) हैं, और परंपरा में मिथुन राशि के बच्चे का नाम का, की, कू, घ, ङ, छ, के, को या हा अक्षर से रखा जाता है।

राशि चक्र में मिथुन राशि, बारह में तीसरी, शनि मीन में चिह्नितराशि चक्र में मिथुन राशि, बारह में तीसरी, शनि मीन में चिह्नित

मिथुन राशि एक नज़र में

राशि की अपनी बातें, जो हर मिथुन राशि वाले के लिए एक-सी हैं।

स्वामीबुध
आकृतिस्त्री-पुरुष का जोड़ा
तत्त्ववायु
स्वभावद्विस्वभाव (चर और स्थिर के बीच, दोनों गुणों वाली)
विषम या समविषम (मेष से पहली, तीसरी, पाँचवीं… राशि): शास्त्र विषम राशियों को पुरुष और क्रूर कहते हैं; यह नाम भर है, स्वभाव पर फ़ैसला नहीं
कालपुरुष में (पूरा राशिचक्र एक शरीर के रूप में)छाती (बृहत् जातक 1.4)
वश्य (मिलान में आपसी आकर्षण का वर्ग)मानव (मनुष्य)
शुभ अंक, रंग, दिन5, हरा, बुधवार
देवताभगवान विष्णु
यहाँ बली या निर्बल ग्रहमिथुन में कोई ग्रह उच्च, नीच या मूलत्रिकोण का नहीं होता।

मिथुन राशि वालों का स्वभाव

चंद्रमा मन के कारक हैं, इसलिए उनकी राशि बताती है कि व्यक्ति कैसा महसूस करता है और किसी बात पर कैसे पेश आता है। लग्न और बाक़ी कुंडली इसे आगे गढ़ते हैं।

ऐसे लोग जल्दी सीखते हैं, दूसरों का साथ पसंद करते हैं और एक साथ कई काम संभाल लेते हैं; ऊब इनकी सबसे बड़ी दुश्मन है, और मन भटकता या राय बदलता रहता है। मिथुन बुध की राशि है, इसलिए बातचीत, व्यापार, लेखन और तेज़ दिमाग़ वाले कामों में ये आगे रहते हैं।

वराहमिहिर क्या कहते हैं

बृहत् जातक के अनुसार चंद्र मिथुन राशि में हों तो जातक तीक्ष्ण बुद्धि वाला, शास्त्रों का जानकार और लोगों के बीच संदेश पहुँचाने में निपुण होता है। वह हँसमुख, दूसरों के मन की बात भाँप लेने वाला, पासे के खेल (द्यूत) में कुशल, मीठा बोलने वाला और संगीत तथा नृत्य का प्रेमी होता है। श्लोक उसे सुंदर रूप, घुँघराले बाल, ऊँची नाक और अच्छी भूख भी देता है। वराहमिहिर स्वयं कहते हैं (17.13) कि यह फल पूरा तभी मिलता है जब जन्म के समय चंद्रमा, मिथुन राशि और उसके स्वामी बुध तीनों बली हों।

बृहत् जातक 17.3

ख़ूबियाँ

बुध की द्विस्वभाव राशि होने से मिथुन वाले लोगों से जल्दी घुल-मिल जाते हैं और एक ही बात तीन तरह से समझा सकते हैं, जब तक सामने वाला समझ न ले; इसीलिए माता-पिता को बैंक का नया तरीक़ा समझाना हो या नगर निगम को अर्ज़ी लिखनी हो, घर में यह ज़िम्मेदारी अक्सर इन्हीं की होती है। बुध गणना के भी कारक हैं, इसलिए घर का हिसाब-किताब अक्सर इन्हीं के हाथ में सबसे सुरक्षित रहता है।

किन बातों का ध्यान रखें

बातों में तेज़ होने से मिथुन वालों की हल्के में कही बात कभी-कभी उम्मीद से ज़्यादा दूर तक पहुँच जाती है, ख़ासकर रिश्तेदारों के बीच। शास्त्र का नियम है कि पाप ग्रह (शनि, मंगल, राहु जैसे कष्ट देने वाले ग्रह) के साथ बैठकर बुध भी पापी हो जाते हैं, और मिथुन वाले भी अपनी संगत का रंग जल्दी पकड़ते हैं। हर शाम थोड़ी देर बिना किसी ख़बर या संदेश के टहल लेना इस व्यस्त मन को ठहरने का मौक़ा देता है।

मिथुन राशि: काम-काज, विवाह और सेहत

ज्योतिष चंद्र राशि को लग्न मानकर (चंद्र लग्न) भी पढ़ता है: काम के लिए चंद्र से दसवाँ भाव, विवाह के लिए सातवाँ, और सेहत के लिए राशि का अपना अंग और तत्त्व। सातवीं राशि जीवनसाथी के स्वभाव का संकेत है, इसका मतलब यह नहीं कि जीवनसाथी की राशि यही होगी। यह परंपरा है, भविष्यवाणी नहीं; पूरा फल आपकी कुंडली तय करती है।

काम-काज

मिथुन के लिए चंद्र से दसवीं राशि मीन है, जिसके स्वामी गुरु हैं, इसलिए परंपरा अध्यापन, सलाह, क़ानून और वित्त की ओर देखती है। राशि के स्वामी बुध व्यापार, लेखन, हिसाब-किताब और आईटी जोड़ते हैं, इसलिए वाणिज्य का अध्यापक, लेखाकार, वकील या संपादक होना इस राशि के लिए स्वाभाविक है। पराशर बुध को वाणी देने वाले ग्रह कहते हैं, और बोलचाल की यह कुशलता मध्यस्थता, बिक्री और मोल-भाव वाले हर काम में मदद करती है।

विवाह

चंद्र से सातवीं राशि धनु है, जिसके स्वामी भी गुरु हैं, इसलिए परंपरा ऐसे जीवनसाथी की बात करती है जो सिद्धांतों वाला, खुले दिल का और विद्या या धर्म में रुचि रखने वाला हो। धनु भी, मिथुन की तरह, द्विस्वभाव राशि है, इसलिए आपस में तालमेल जल्दी बैठता है, और लंबी बातचीत और साझा रुचियाँ दांपत्य को जीवंत रखती हैं। मिथुन वालों की बदलती राय और ऐसे साथी की खरी बात कभी-कभी टकरा सकती हैं, इसलिए एक-दूसरे की बातों को हल्के मन से लेना अच्छा रहता है।

सेहत

परंपरा कालपुरुष के शरीर में मिथुन को वक्ष, यानी छाती, से जोड़ती है (बृहत् जातक 1.4), और वायु तत्त्व की राशि होने से श्वास और हमेशा सक्रिय रहने वाले मन से। इसलिए समझदारी इसी में है कि भोजन समय पर हो, खुली हवा मिले और मन को सचमुच आराम मिले।

मिथुन राशि के नक्षत्र और नाम अक्षर

हर राशि में नौ चरण होते हैं, हर एक किसी नक्षत्र का एक चौथाई। जन्म के समय चंद्रमा जिस चरण में हों, परंपरा में नाम उसी के अक्षर से रखा जाता है।

नक्षत्रस्वामीमिथुन में अंशमिथुन में चरणनाम अक्षर
मृगशिरामंगल0°–6°40′3–4का, की
आर्द्राराहु6°40′–20°चारोंकू, घ, ङ, छ
पुनर्वसुगुरु20°–30°1–3के, को, हा

नक्षत्र और चरण से बच्चों के नाम →

मिथुन राशि के लिए अभी शनि, गुरु और राहु

ये भाव चंद्र राशि से गिने गए हैं, जैसे राशिफल में। चंद्र से बारहवें, पहले या दूसरे भाव में शनि हों तो साढ़े साती होती है, लगभग साढ़े सात साल; चौथे (कंटक) या आठवें (अष्टम) में हों तो ढैय्या, लगभग ढाई साल। यह हर मिथुन राशि वाले के लिए एक जैसा है; असर कैसा होगा, यह आपकी कुंडली तय करती है।

  • शनिअभी मीन में, चंद्र राशि से दसवें भाव में हैं, इसलिए न साढ़े साती है, न ढैय्या। आगे: साढ़े साती 8 अगस्त 2029 से 5 अक्टूबर 2029 तक, फिर 17 अप्रैल 2030 से 27 अगस्त 2036 तक और कंटक शनि (ढैय्या, शनि चौथे भाव में) 22 अक्टूबर 2038 से 5 अप्रैल 2039 तक, फिर 13 जुलाई 2039 से 28 जनवरी 2041 तक, फिर 6 फ़रवरी 2041 से 26 सितंबर 2041 तक। साढ़े साती · ढैय्या की तारीख़ें।
  • गुरुअभी चंद्र राशि से दूसरे भाव (परिवार, जमा-पूँजी और बोलचाल) में हैं। इसके बाद 31 अक्टूबर 2026 से तीसरे भाव (साहस, छोटे भाई-बहन और छोटी यात्राएँ) में, 25 जनवरी 2027 से फिर दूसरे भाव में, 26 जून 2027 से फिर तीसरे भाव में और 26 नवंबर 2027 से चौथे भाव (घर, माँ, वाहन, ज़मीन-जायदाद और मन की शांति) में रहेंगे।
  • राहुअभी चंद्र राशि से नौवें भाव (पिता, भाग्य, धर्म और लंबी यात्राएँ) में हैं। इसके बाद 5 दिसंबर 2026 से आठवें भाव (सेहत, अचानक की घटनाएँ, छिपी बातें और ससुराल) में रहेंगे।

मिथुन राशिफल 2027: महीने दर महीने →

मिथुन राशि का उपाय: स्वामी बुध

राशि को उसके स्वामी के ज़रिए बल मिलता है। ये उपाय मुफ़्त हैं, और हर एक के साथ उसकी वजह है।

  • बुध का मंत्र, बुधवार को 108 बारॐ बुधाय नमःमिथुन राशि के स्वामी का सबसे सरल मंत्र, साफ़ बोलचाल, पढ़ाई और व्यापार के लिए।
  • बीज मंत्र, नियमित जप के लिएॐ ब्रां ब्रीं ब्रौं सः बुधाय नमःबुध के पूरे जप के लिए, रोज़ 108 बार, जब मिथुन राशि के स्वामी को बल चाहिए: उनकी दशा (ग्रह की अवधि) में, या जब वे आपकी कुंडली में निर्बल हों।
  • भगवान विष्णु की पूजामिथुन राशि से परंपरा में जुड़े देवता, जिनकी पूजा रक्षा और संतुलित जीवन के लिए की जाती है; मंदिर में दर्शन या घर में दीया सबसे सरल रूप है।

रत्न राशि से नहीं बताया जाता। जो रत्न एक कुंडली को फ़ायदा देता है, वही दूसरी को नुकसान कर सकता है, इसलिए रत्न पूरी कुंडली देखकर चुना जाता है।

कुंडली मिलान में मिथुन राशि

गुण मिलान के आठ कूटों (मिलान के हिस्सों) में से चार सिर्फ़ राशि से देखे जाते हैं, जो 36 में से 15 अंक के हैं: वर्ण (1, राशि का वर्ग), वश्य (2, आपसी आकर्षण), ग्रह मैत्री (5, स्वामियों की मित्रता) और भकूट (7, प्रेम और परिवार की भलाई)।

  • सिर्फ़ राशि से सबसे अच्छा और सबसे कठिन मेलमिथुन को लड़के की राशि मानें, तो बाक़ी ग्यारह राशियों में मिथुन का सबसे ज़्यादा मेल कन्या से (14/15) और सबसे कम वृश्चिक से (1/15) है। एक ही राशि के दो लोगों को इन चारों पर पूरे 15 अंक मिलते हैं। वर्ण और वश्य में लड़के और लड़की की राशि अदल-बदल करने से अंक बदल सकते हैं, इसलिए जोड़ी वाले पेज पर दोनों तरह से गिनती दी गई है। बाक़ी चार कूट, 21 अंक, दोनों के नक्षत्र से निकलते हैं।
  • भकूटभकूट, 7 अंकों का कूट, तब 0 देता है जब दोनों राशियाँ एक-दूसरे से दूसरे-बारहवें, पाँचवें-नौवें या छठे-आठवें स्थान पर हों। कर्क, कुंभ, वृश्चिक और मकर के साथ भकूट दोष बनता है और बना रहता है। वृषभ और तुला के साथ दोष बनता है पर रद्द हो जाता है, क्योंकि दोनों राशियों के स्वामी एक ही ग्रह हैं या आपस में मित्र: भकूट के 7 में से 0 अंक ही रहते हैं, पर ज्योतिषी इसे मिलान में रुकावट नहीं मानते।
  • वश्य (2 अंक)मिथुन मानव (मनुष्य) राशि है। वश्य कूट (आपसी आकर्षण) में मिथुन को पूरे 2 अंक तब मिलते हैं जब साथी की राशि मिथुन, कन्या, तुला, धनु (पहला आधा) या कुंभ हो। धनु और मकर का वर्ग 15° पर बदल जाता है, और ऊपर की गिनती उनके पहले आधे की है: धनु के दूसरे आधे में चंद्रमा हों तो मिथुन को 1 अंक मिलता है।

हर राशि से मिथुन का मेल, कूट दर कूट → · पूरा कुंडली मिलान

पराशर के शब्दों में मिथुन राशि

राशि का अपना स्वरूप, उसमें बैठे ग्रहों से अलग।

  • रंग: दूब जैसा हरा
  • सुडौल शरीर
  • स्वरूप: गदा और वीणा लिए स्त्री-पुरुष का जोड़ा
  • द्विपद (दो पैरों वाली)
  • रात्रि में बली
  • दिशा: पश्चिम
  • गाँव में वास
  • वायु तत्त्व
  • शीर्षोदय (सिर से उदय होने वाली)
  • स्वामी: बुध
  • द्विस्वभाव, पुरुष और क्रूर राशि
  • सम प्रकृति (वात, पित्त, कफ तीनों संतुलित)

वात, पित्त और कफ आयुर्वेद के तीन दोष हैं (शरीर में वायु, अग्नि और जल)। राशि का उदय सिर की ओर से (शीर्षोदय) या पीठ की ओर से (पृष्ठोदय) होता है, जैसे उसकी आकृति पूर्व में उगती है; शास्त्र इसे, दिन या रात के बल के साथ, फल का समय देखने में लेते हैं। पराशर राशि की अपनी प्रकृति बताते हैं, और ऊपर वराहमिहिर उस व्यक्ति की जिसके चंद्रमा इसमें हों, इसलिए दोनों में अंतर हो सकता है।

बृहत् पाराशर होरा शास्त्र 4.5, 4.9

आम सवाल

मिथुन राशि क्या है?

मिथुन बारह राशियों में तीसरी है, निरयन राशिचक्र के 60°–90°, और इसके स्वामी बुध हैं। जन्म के समय चंद्रमा इसमें हों तो यह आपकी राशि है।

मिथुन राशि के नाम अक्षर क्या हैं?

का, की, कू, घ, ङ, छ, के, को, हा: नौ चरणों के लिए एक-एक, क्रम से। जन्म के समय चंद्रमा जिस चरण में हों, उसी का अक्षर लिया जाता है।

मिथुन राशि का सबसे अच्छा मेल किन राशियों से है?

राशि से तय होने वाले चार कूटों पर बाक़ी ग्यारह राशियों में मिथुन का सबसे अच्छा मेल कन्या से है (14/15, मिथुन को वर की राशि मानकर); एक ही राशि के दो लोगों को पूरे 15 अंक मिलते हैं। असली मिलान के लिए दोनों कुंडलियाँ चाहिए: 36 में से 21 अंक नक्षत्र के कूटों से आते हैं।

मिथुन राशि का मंत्र क्या है?

इसके स्वामी बुध का मंत्र ॐ बुधाय नमः, बुधवार को 108 बार। बीज मंत्र और देवता ऊपर उपाय वाले हिस्से में हैं।

क्या मिथुन राशि पर अभी साढ़े साती या ढैय्या है?

अभी दोनों में से कोई नहीं। शनि मीन में हैं, मिथुन से दसवें भाव में। आगे पहले साढ़े साती 8 अगस्त 2029 से 5 अक्टूबर 2029 तक, फिर 17 अप्रैल 2030 से 27 अगस्त 2036 तक; फिर कंटक शनि (ढैय्या, शनि चौथे भाव में) 22 अक्टूबर 2038 से 5 अप्रैल 2039 तक, फिर 13 जुलाई 2039 से 28 जनवरी 2041 तक, फिर 6 फ़रवरी 2041 से 26 सितंबर 2041 तक।

मिथुन राशि के लिए 2027 कैसा है?

2027 में सबसे अच्छे महीने मई और जून हैं और सबसे कमज़ोर जनवरी और नवंबर। 2027 के राशिफल में हर महीने का हाल है, ऊपर बताए शनि, गुरु और राहु के बदलावों के साथ।

आपकी राशि आपकी कुंडली का बस एक हिस्सा है

आपका लग्न, नक्षत्र का चरण और दशा बाक़ी बताते हैं। आचार्य पराशर (AI ज्योतिषी) आपकी पूरी कुंडली देखकर जवाब देते हैं।

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AI वैदिक ज्योतिषी। किसी भी भारतीय भाषा में चैट करें; कॉल हिंदी और अंग्रेज़ी में।ऐसे पूछें“मेरी कुंडली का पूरा और विस्तार से विश्लेषण कीजिए”“मेरी जन्म कुंडली में कौन-से दुर्लभ योग हैं?”“इस महीने की मेरी सूक्ष्म दशा का विश्लेषण कीजिए”चैट कॉल शुल्क हर मिनट के हिसाब से लगता है, और सिर्फ़ तब तक जब तक चैट या कॉल चालू रहे। जब चाहें बंद करें।

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9 विस्तृत रिपोर्ट, जिनमें जन्म कुंडली, कुंडली मिलान और वार्षिक भविष्यवाणी हैं।हिंदी, अंग्रेज़ी और हिंग्लिशरिपोर्ट देखें
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