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बारह राशियों में बारहवीं · निरयन (स्थिर तारों वाले) राशिचक्र के 330°–360°

मीन राशि
चंद्र राशि · स्वामी गुरु

जन्म के समय चंद्रमा मीन में हों तो आपकी राशि मीन है: इसी से आपका राशिफल, साढ़े साती और नाम अक्षर देखे जाते हैं। जिनके चंद्रमा मीन में हों, वे दयालु, कल्पनाशील और आध्यात्मिक होते हैं। इसके स्वामी गुरु हैं, नक्षत्र पूर्वा भाद्रपद (चरण 4), उत्तरा भाद्रपद और रेवती हैं, और परंपरा में मीन राशि के बच्चे का नाम दी, दू, थ, झ, ञ, दे, दो, चा या ची अक्षर से रखा जाता है।

राशि चक्र में मीन राशि, बारह में बारहवीं, शनि मीन में चिह्नितराशि चक्र में मीन राशि, बारह में बारहवीं, शनि मीन में चिह्नित

मीन राशि एक नज़र में

राशि की अपनी बातें, जो हर मीन राशि वाले के लिए एक-सी हैं।

स्वामीगुरु
आकृतिदो मछलियाँ
तत्त्वजल
स्वभावद्विस्वभाव (चर और स्थिर के बीच, दोनों गुणों वाली)
विषम या समसम (मेष से दूसरी, चौथी, छठी… राशि): शास्त्र सम राशियों को स्त्री और सौम्य कहते हैं; यह नाम भर है, स्वभाव पर फ़ैसला नहीं
कालपुरुष में (पूरा राशिचक्र एक शरीर के रूप में)पैर (बृहत् जातक 1.4)
वश्य (मिलान में आपसी आकर्षण का वर्ग)जलचर (जल में रहने वाला)
शुभ अंक, रंग, दिन3, पीला, गुरुवार
देवताभगवान विष्णु
यहाँ बली या निर्बल ग्रहशुक्र: उच्च (सबसे बली)
बुध: नीच (सबसे निर्बल)

मीन राशि वालों का स्वभाव

चंद्रमा मन के कारक हैं, इसलिए उनकी राशि बताती है कि व्यक्ति कैसा महसूस करता है और किसी बात पर कैसे पेश आता है। लग्न और बाक़ी कुंडली इसे आगे गढ़ते हैं।

ऐसे लोग दूसरों का दर्द समझते हैं, आसानी से माफ़ कर देते हैं और धर्म, संगीत और कला की ओर खिंचते हैं। ये कभी ज़रूरत से ज़्यादा भरोसा कर लेते हैं, सपनों में रहते हैं या कड़वे सच से बचते हैं। मीन गुरु की राशि है, इसलिए ये उपचार, पढ़ाने, कला और सेवा के कामों में अच्छा करते हैं।

वराहमिहिर क्या कहते हैं

बृहत् जातक के अनुसार चंद्र मीन राशि में हों तो जातक व्यापार में, विशेषकर समुद्र से मिलने वाली वस्तुओं के व्यापार में, सफल होता है और धनवान, सुखी तथा विद्वान होता है। उसे जीवनसाथी और अच्छे वस्त्र प्रिय होते हैं, वह विरोधियों को परास्त करता है और घर की स्त्रियों की बात बहुत मानता है। श्लोक उसके सुडौल अंग, तेजस्वी, उजला रूप और सुंदर आँखें बताता है। वराहमिहिर स्वयं कहते हैं (17.13) कि यह फल पूरा तभी मिलता है जब जन्म के समय चंद्रमा, मीन राशि और उसके स्वामी गुरु तीनों बली हों।

बृहत् जातक 17.12

ख़ूबियाँ

मीन बारहवीं और अंतिम राशि है, जो त्याग का स्थान है, और मीन वाले बिना हिसाब रखे देते हैं, चाहे गुरुद्वारे के लंगर में घंटे भर की सेवा हो या पड़ोसी की चुपचाप मदद। गुरु की राशि होने से बुरे समय में भी इनकी आस्था नहीं डगमगाती, और अस्पताल के गलियारे में या लंबे इंतज़ार में मीन वाले साथ हों तो माहौल शांत लगता है।

किन बातों का ध्यान रखें

व्यय बारहवें भाव का विषय है, और मीन बारहवीं राशि है, इसीलिए मीन वालों का पैसा अक्सर दूसरों की ज़रूरतों में निकल जाता है: कभी किसी रिश्तेदार की आपात ज़रूरत, कभी कोई दान। मुसीबत में पड़े दोस्त को मना करना इन्हें लगभग असंभव लगता है। देने के लिए हर महीने एक तय रक़म अलग रख लें और बाक़ी को न छुएँ, तो मीन वाले अपने परिवार को तंगी में डाले बिना दूसरों की मदद कर पाते हैं।

मीन राशि: काम-काज, विवाह और सेहत

ज्योतिष चंद्र राशि को लग्न मानकर (चंद्र लग्न) भी पढ़ता है: काम के लिए चंद्र से दसवाँ भाव, विवाह के लिए सातवाँ, और सेहत के लिए राशि का अपना अंग और तत्त्व। सातवीं राशि जीवनसाथी के स्वभाव का संकेत है, इसका मतलब यह नहीं कि जीवनसाथी की राशि यही होगी। यह परंपरा है, भविष्यवाणी नहीं; पूरा फल आपकी कुंडली तय करती है।

काम-काज

मीन के लिए चंद्र से दसवीं राशि धनु है, और दोनों राशियों के स्वामी गुरु हैं, इसलिए गुरु के कामों को दोहरा बल मिलता है: अध्यापन, क़ानून, वित्त और सलाह। अध्यापक, वकील, वित्त संस्था का अधिकारी, परामर्शदाता या शास्त्रों का विद्वान, सब इस राशि के लिए ठीक रहते हैं। ऊपर का श्लोक समुद्र से मिलने वाली वस्तुओं के व्यापार का नाम लेता है, और निर्यात या जहाज़रानी का काम भी उससे मेल खाता है।

विवाह

चंद्र से सातवीं राशि कन्या है, जिसके स्वामी बुध हैं, इसलिए परंपरा ऐसे जीवनसाथी की बात करती है जो सावधान और व्यावहारिक हो, और बारीकी व हिसाब में पक्का हो। कल्पनाशील, भरोसा करने वाले मीन वाले और ऐसा सटीक साथी एक-दूसरे की कमी पूरी करते हैं। ध्यान बस इतना रखना है कि साथी कोई कड़वा सच बताए तो मीन वाले उसे सुनें।

सेहत

परंपरा कालपुरुष के शरीर में अंतिम राशि मीन को अंतिम अंग, यानी पैरों, से जोड़ती है (बृहत् जातक 1.4), और जल तत्त्व की राशि होने से शरीर के तरल पदार्थों और कोमल मन से। इसलिए अच्छे जूते-चप्पल पहनें, पैरों की देखभाल करें, और जो मन दूसरों का दर्द अपने ऊपर ले लेता है, उसे भरपूर आराम दें।

मीन राशि के नक्षत्र और नाम अक्षर

हर राशि में नौ चरण होते हैं, हर एक किसी नक्षत्र का एक चौथाई। जन्म के समय चंद्रमा जिस चरण में हों, परंपरा में नाम उसी के अक्षर से रखा जाता है।

नक्षत्रस्वामीमीन में अंशमीन में चरणनाम अक्षर
पूर्वा भाद्रपदगुरु0°–3°20′4दी
उत्तरा भाद्रपदशनि3°20′–16°40′चारोंदू, थ, झ, ञ
रेवतीबुध16°40′–30°चारोंदे, दो, चा, ची

नक्षत्र और चरण से बच्चों के नाम →

मीन राशि के लिए अभी शनि, गुरु और राहु

ये भाव चंद्र राशि से गिने गए हैं, जैसे राशिफल में। चंद्र से बारहवें, पहले या दूसरे भाव में शनि हों तो साढ़े साती होती है, लगभग साढ़े सात साल; चौथे (कंटक) या आठवें (अष्टम) में हों तो ढैय्या, लगभग ढाई साल। यह हर मीन राशि वाले के लिए एक जैसा है; असर कैसा होगा, यह आपकी कुंडली तय करती है।

  • शनिमीन राशि पर साढ़े साती 17 अप्रैल 2030 तक चलेगी। इस समय बीच का दौर है, शनि चंद्र राशि से पहले भाव में, 3 जून 2027 तक। शनि हर साल लगभग साढ़े चार महीने वक्री (उल्टी चाल में) रहते हैं, इसलिए राशि की सीमा के पास वे आगे-पीछे आते-जाते हैं, और दौर ऐसे चलेंगे:
    · 3 जून 2027 से 20 अक्टूबर 2027 तक आख़िरी दौर
    · 20 अक्टूबर 2027 से 23 फ़रवरी 2028 तक फिर बीच का दौर
    · 23 फ़रवरी 2028 से 8 अगस्त 2029 तक फिर आख़िरी दौर
    · 8 अगस्त 2029 से 5 अक्टूबर 2029 तक विराम, जब शनि वृषभ में होंगे
    · 5 अक्टूबर 2029 से 17 अप्रैल 2030 तक फिर आख़िरी दौर
    उसके बाद कंटक शनि (ढैय्या, शनि चौथे भाव में) 31 मई 2032 से 13 जुलाई 2034 तक। साढ़े साती · ढैय्या की तारीख़ें।
  • गुरुअभी चंद्र राशि से पाँचवें भाव (संतान, पढ़ाई और समझ-बूझ) में हैं। इसके बाद 31 अक्टूबर 2026 से छठे भाव (दबाव वाला काम, विरोधी, क़र्ज़ और बीमारी) में, 25 जनवरी 2027 से फिर पाँचवें भाव में, 26 जून 2027 से फिर छठे भाव में और 26 नवंबर 2027 से सातवें भाव (विवाह, साझेदार और कारोबारी लेन-देन) में रहेंगे।
  • राहुअभी चंद्र राशि से बारहवें भाव (ख़र्च, नींद, विदेश यात्रा और त्याग) में हैं। इसके बाद 5 दिसंबर 2026 से ग्यारहवें भाव (आमदनी, लाभ और बड़े भाई-बहन) में रहेंगे।

मीन राशिफल 2027: महीने दर महीने →

मीन राशि का उपाय: स्वामी गुरु

राशि को उसके स्वामी के ज़रिए बल मिलता है। ये उपाय मुफ़्त हैं, और हर एक के साथ उसकी वजह है।

  • गुरु का मंत्र, गुरुवार को 108 बारॐ गुरवे नमःमीन राशि के स्वामी का सबसे सरल मंत्र, समझ, संतान और सही मार्गदर्शन के लिए।
  • बीज मंत्र, नियमित जप के लिएॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं सः गुरवे नमःगुरु के पूरे जप के लिए, रोज़ 108 बार, जब मीन राशि के स्वामी को बल चाहिए: उनकी दशा (ग्रह की अवधि) में, या जब वे आपकी कुंडली में निर्बल हों।
  • भगवान विष्णु की पूजामीन राशि से परंपरा में जुड़े देवता, जिनकी पूजा रक्षा और संतुलित जीवन के लिए की जाती है; मंदिर में दर्शन या घर में दीया सबसे सरल रूप है।

रत्न राशि से नहीं बताया जाता। जो रत्न एक कुंडली को फ़ायदा देता है, वही दूसरी को नुकसान कर सकता है, इसलिए रत्न पूरी कुंडली देखकर चुना जाता है।

कुंडली मिलान में मीन राशि

गुण मिलान के आठ कूटों (मिलान के हिस्सों) में से चार सिर्फ़ राशि से देखे जाते हैं, जो 36 में से 15 अंक के हैं: वर्ण (1, राशि का वर्ग), वश्य (2, आपसी आकर्षण), ग्रह मैत्री (5, स्वामियों की मित्रता) और भकूट (7, प्रेम और परिवार की भलाई)।

  • सिर्फ़ राशि से सबसे अच्छा और सबसे कठिन मेलमीन को लड़के की राशि मानें, तो बाक़ी ग्यारह राशियों में मीन का सबसे ज़्यादा मेल धनु से (14/15) और सबसे कम तुला से (2.5/15) है। एक ही राशि के दो लोगों को इन चारों पर पूरे 15 अंक मिलते हैं। वर्ण और वश्य में लड़के और लड़की की राशि अदल-बदल करने से अंक बदल सकते हैं, इसलिए जोड़ी वाले पेज पर दोनों तरह से गिनती दी गई है। बाक़ी चार कूट, 21 अंक, दोनों के नक्षत्र से निकलते हैं।
  • भकूटभकूट, 7 अंकों का कूट, तब 0 देता है जब दोनों राशियाँ एक-दूसरे से दूसरे-बारहवें, पाँचवें-नौवें या छठे-आठवें स्थान पर हों। कुंभ, कर्क और तुला के साथ भकूट दोष बनता है और बना रहता है। मेष, वृश्चिक और सिंह के साथ दोष बनता है पर रद्द हो जाता है, क्योंकि दोनों राशियों के स्वामी एक ही ग्रह हैं या आपस में मित्र: भकूट के 7 में से 0 अंक ही रहते हैं, पर ज्योतिषी इसे मिलान में रुकावट नहीं मानते।
  • वश्य (2 अंक)मीन जलचर (जल में रहने वाला) राशि है। वश्य कूट (आपसी आकर्षण) में मीन को पूरे 2 अंक तब मिलते हैं जब साथी की राशि मीन या कर्क हो। धनु और मकर का वर्ग 15° पर बदल जाता है, और ऊपर की गिनती उनके पहले आधे की है: मकर के दूसरे आधे में चंद्रमा हों तो मीन को 2 अंक मिलते हैं।

हर राशि से मीन का मेल, कूट दर कूट → · पूरा कुंडली मिलान

पराशर के शब्दों में मीन राशि

राशि का अपना स्वरूप, उसमें बैठे ग्रहों से अलग।

  • स्वरूप: दो मछलियों का जोड़ा, एक की पूँछ के पास दूसरी का सिर
  • मध्यम शरीर
  • पादहीन (बिना पैरों वाली)
  • दिन में बली
  • दिशा: उत्तर
  • जल में वास
  • सत्त्वगुणी
  • जल तत्त्व
  • उभयोदय (सिर और पीठ दोनों से उदय होने वाली)
  • दृढ़ता की सूचक
  • स्वामी: गुरु
  • द्विस्वभाव, स्त्री और सौम्य राशि
  • कफ प्रकृति

सत्त्व, रज और तम तीन गुण हैं (शांत समझ, सक्रियता और जड़ता)। वात, पित्त और कफ आयुर्वेद के तीन दोष हैं (शरीर में वायु, अग्नि और जल)। राशि का उदय सिर की ओर से (शीर्षोदय) या पीठ की ओर से (पृष्ठोदय) होता है, जैसे उसकी आकृति पूर्व में उगती है; शास्त्र इसे, दिन या रात के बल के साथ, फल का समय देखने में लेते हैं। पराशर राशि की अपनी प्रकृति बताते हैं, और ऊपर वराहमिहिर उस व्यक्ति की जिसके चंद्रमा इसमें हों, इसलिए दोनों में अंतर हो सकता है।

बृहत् पाराशर होरा शास्त्र 4.5, 4.22–24

आम सवाल

मीन राशि क्या है?

मीन बारह राशियों में बारहवीं है, निरयन राशिचक्र के 330°–360°, और इसके स्वामी गुरु हैं। जन्म के समय चंद्रमा इसमें हों तो यह आपकी राशि है।

मीन राशि के नाम अक्षर क्या हैं?

दी, दू, थ, झ, ञ, दे, दो, चा, ची: नौ चरणों के लिए एक-एक, क्रम से। जन्म के समय चंद्रमा जिस चरण में हों, उसी का अक्षर लिया जाता है।

मीन राशि का सबसे अच्छा मेल किन राशियों से है?

राशि से तय होने वाले चार कूटों पर बाक़ी ग्यारह राशियों में मीन का सबसे अच्छा मेल धनु से है (14/15, मीन को वर की राशि मानकर); एक ही राशि के दो लोगों को पूरे 15 अंक मिलते हैं। असली मिलान के लिए दोनों कुंडलियाँ चाहिए: 36 में से 21 अंक नक्षत्र के कूटों से आते हैं।

मीन राशि का मंत्र क्या है?

इसके स्वामी गुरु का मंत्र ॐ गुरवे नमः, गुरुवार को 108 बार। बीज मंत्र और देवता ऊपर उपाय वाले हिस्से में हैं।

क्या मीन राशि पर अभी साढ़े साती या ढैय्या है?

हाँ: साढ़े साती 17 अप्रैल 2030 तक चलेगी। अभी बीच का दौर है, शनि चंद्र राशि से पहले भाव में, 3 जून 2027 तक। इसके बाद: कंटक शनि (ढैय्या, शनि चौथे भाव में) 31 मई 2032 से 13 जुलाई 2034 तक। शनि मीन में ही हैं, यानी आपकी चंद्र राशि में।

मीन राशि के लिए 2027 कैसा है?

2027 में सबसे अच्छे महीने मई और जून हैं और सबसे कमज़ोर जनवरी, जुलाई और अगस्त। 2027 के राशिफल में हर महीने का हाल है, ऊपर बताए शनि, गुरु और राहु के बदलावों के साथ।

आपकी राशि आपकी कुंडली का बस एक हिस्सा है

आपका लग्न, नक्षत्र का चरण और दशा बाक़ी बताते हैं। आचार्य पराशर (AI ज्योतिषी) आपकी पूरी कुंडली देखकर जवाब देते हैं।

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AI वैदिक ज्योतिषी। किसी भी भारतीय भाषा में चैट करें; कॉल हिंदी और अंग्रेज़ी में।ऐसे पूछें“मेरी कुंडली का पूरा और विस्तार से विश्लेषण कीजिए”“मेरी जन्म कुंडली में कौन-से दुर्लभ योग हैं?”“इस महीने की मेरी सूक्ष्म दशा का विश्लेषण कीजिए”चैट कॉल शुल्क हर मिनट के हिसाब से लगता है, और सिर्फ़ तब तक जब तक चैट या कॉल चालू रहे। जब चाहें बंद करें।

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9 विस्तृत रिपोर्ट, जिनमें जन्म कुंडली, कुंडली मिलान और वार्षिक भविष्यवाणी हैं।हिंदी, अंग्रेज़ी और हिंग्लिशरिपोर्ट देखें
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